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Dwarka (Devbhumi Dwarka District) · Gujarat

श्री नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर, द्वारका

नागेश्वर / नागेश — नागों के स्वामी; दारुक-वन का शिव

अन्य नाम: नागेश्वर · नागनाथ · दारुकेश्वर · नागेश-दारुकावने

  • 12 ज्योतिर्लिंग
  • द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र का षष्…
  • गुजरात के 2 ज्योतिर्लिंगों में सम्…
श्री नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर, द्वारका
दर्शन समय
06:00 – 21:30
स्वरूप
स्वयंभू शिवलिंग
स्थान
Dwarka (Devbhumi Dwarka District) · Gujarat
उत्तम ऋतु
नवम्बर-फरवरी सर्वोत्तम
काल
मूल पीठ: अति-प्राचीन

इस मन्दिर की विशेषता

  • 12 ज्योतिर्लिंग (अष्टम — 'नागेशं दारुकावने'; स्थान-विवादित — दारुक-वन की स्थिति पर बहस)
  • द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र का षष्ठ-श्लोक द्वितीय-पद
  • गुजरात के 2 ज्योतिर्लिंगों में सम्मिलित (सोमनाथ + नागेश्वर)
01
मूल विग्रह

मुख्य देव एवं स्वरूप

श्री नागेश्वर (शिव — अष्टम ज्योतिर्लिंग; नागों के स्वामी; दारुक-असुर वध-कथा से सम्बद्ध)

स्वयंभू शिवलिंग — दक्षिणाभिमुख (विशेष विशेषता; अधिकांश शिवलिंग पूर्वाभिमुख); द्वारका-शिला पाषाण से निर्मित; तीन-मुखी रुद्राक्ष-स्वरूप; लघु-चक्रों से सज्जित

सम्प्रदाय: शैव

02
स्थल-पुराण

कथा, इतिहास एवं महत्व

शिव पुराण

कोटिरुद्र संहिता — नागेश्वर माहात्म्य; दारुक-असुर वध एवं भक्त सुप्रिय की रक्षा कथा

स्कन्द पुराण

दारुक-वन एवं पश्चिम-समुद्र-तट का माहात्म्य

द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र

आदि शंकराचार्य — 'सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने' — षष्ठ-श्लोक द्वितीय-पद

संत एवं परम्परा

  • दारुक-असुर एवं उसकी पत्नी दारुका — दारुक-वन के अधिपति; अप्रतिम शिव-भक्त किन्तु अधर्मी; पार्वती से वरदान प्राप्त कर अहंकारी हुए; दारुक ने शिव-भक्त वैश्य 'सुप्रिय' को शिव-पूजा सिखाने से रोका एवं उसे यातना दी
  • सुप्रिय (वैश्य) — परम शिव-भक्त; 'ॐ नमः शिवाय' जप-अटूट; उसकी रक्षा हेतु शिव प्रकट होकर दारुक-असुर का वध; तदोपरांत 'नागेश्वर' रूप में दारुक-वन में स्थायी निवास स्वीकार

ऐतिहासिक घटनाक्रम

  1. 1000मध्ययुगीन-काल — स्थानीय परंपरा अनुसार मंदिर-निर्माणWikipedia Nageshwar Jyotirlinga + Incredible India
  2. 2000आधुनिक-काल (2000 के बाद) — 80-फीट ऊँची भगवान शिव की बैठी-मुद्रा वाली प्रतिमा का निर्माण; मंदिर-परिसर का प्रमुख आकर्षणIncredible India + Dwarka Tourism
03
नित्य उपासना

दर्शन समय एवं आरती

06:00 से 21:30 तक · मध्याह्न विश्राम 12:30-17:00 (मध्याह्न विश्राम — मंदिर पूर्णतः बन्द)

मंगला आरती05:00-05:30
दैनिक

दिन की प्रथम आरती; अद्वितीय उच्च-ऊर्जा अनुष्ठान — सामान्य दर्शन-पूर्व

सामान्य प्रातः दर्शन06:00-12:00
दैनिक
महा-भोग / मध्याह्न आरती12:00-12:30
दैनिक
संध्या आरती19:00-19:30
दैनिक

सायं-काल का प्रमुख अनुष्ठान

शयन आरती20:30-21:00
दैनिक

दिन की अन्तिम आरती; मंदिर 21:30 बजे बन्द

04
दर्शन

दर्शन के प्रकार

सामान्य निःशुल्क दर्शननिःशुल्क
समय
06:00-12:30 एवं 17:00-21:30
उपयुक्त
सभी भक्त

मुख्य नागेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन निःशुल्क; 80-फीट शिव-प्रतिमा परिसर में।

अभिषेकम् / रुद्राभिषेक
उपयुक्त
श्रद्धालु एवं संकल्प हेतु

विशेष पूजा एवं रुद्राभिषेक की व्यवस्था; मूल्य आधिकारिक काउंटर पर सत्यापित करें।

05
उत्सव

प्रमुख पर्व एवं उत्सव

महाशिवरात्रिफाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी

वर्ष का सर्वोच्च पर्व — 4-प्रहर पूजा; विस्तारित दर्शन-समय। 2026 — 15 फरवरी रविवार।

नाग पंचमीश्रावण शुक्ल पंचमी

नागेश्वर ('नागों के स्वामी') का विशेष पर्व; नाग-दोष-निवारण अनुष्ठान

श्रावण मास सोमवारश्रावण

सम्पूर्ण मास शिव-उपासना; प्रति-सोमवार रुद्राभिषेक

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी

द्वारका-यात्रा के साथ नागेश्वर-दर्शन; 2026 — 4 सितंबर शुक्रवार (वैष्णव)

06
आस्था

मनोकामना एवं फल

नाग-दोष, सर्प-भय एवं विष-निवारण

नागेश्वर = 'नागों के स्वामी'; शिव पुराण अनुसार यहाँ प्रार्थना से सर्प-दंश, विष, एवं सांसारिक प्रलोभनों से सुरक्षा; कुंडली में काल-सर्प दोष-निवारण हेतु विशेष

स्रोत: शिव पुराण कोटिरुद्र संहिता

अधर्म-निवारण एवं भक्त-रक्षा

दारुक-असुर वध एवं भक्त सुप्रिय की रक्षा-कथा से सम्बद्ध; अधर्मियों के विरुद्ध शिव-संरक्षण

स्रोत: शिव पुराण कोटिरुद्र संहिता

12 ज्योतिर्लिंग यात्रा का अष्टम तीर्थ

आदि शंकराचार्य द्वादश-ज्योतिर्लिंग स्तोत्र अनुसार अष्टम ज्योतिर्लिंग

स्रोत: द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र

द्वारकाधीश यात्रा की पूर्णता

द्वारकाधीश (पश्चिम धाम) यात्रा के साथ नागेश्वर-दर्शन अनिवार्य माना जाता है

स्रोत: द्वारका-तीर्थ परंपरा

07
जप

मन्त्र एवं स्तोत्र

  • द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र — 'नागेशं दारुकावने'स्तोत्रआदि शंकराचार्य — द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र का षष्ठ-श्लोक द्वितीय-पदइस मन्दिर हेतु
  • नागेश्वर अष्टकम्स्तोत्रस्थल-परंपराइस मन्दिर हेतुनाग-दोष, सर्प-भय एवं विष-निवारण हेतु विशेष
  • ॐ नमः शिवाय — पञ्चाक्षर मंत्रमंत्रयजुर्वेद रुद्राध्यायइस मन्दिर हेतुभक्त सुप्रिय की रक्षा-कथा का मूल मंत्र; यहाँ जप का विशेष माहात्म्य
  • महामृत्युञ्जय मंत्रमंत्रऋग्वेद 7.59.12
08
तीर्थाटन

समीप के तीर्थ एवं परिपथ

श्री द्वारकाधीश मंदिर (जगत मंदिर)18 किमी

मूल चार धाम का पश्चिम-धाम; श्रीकृष्ण-धाम; द्वारका-नागेश्वर संयुक्त यात्रा अनिवार्य

बेट द्वारका (श्री कृष्ण निवास-स्थल)12 किमी

श्रीकृष्ण का द्वीप-निवास-स्थल; 25 फरवरी 2024 से सुदर्शन सेतु (2.32 किमी केबल-स्टेड) द्वारा 24×7 सड़क-संपर्क

80-फीट शिव प्रतिमा100 मी

बैठी-मुद्रा वाली 80-फीट ऊँची भगवान शिव की प्रतिमा; मंदिर का प्रमुख आधुनिक आकर्षण

गोपी तालाब5 किमी

श्रीकृष्ण-गोपियों की लीला का स्थल; गोपी-चन्दन (पवित्र मिट्टी) का स्रोत

रुक्मिणी देवी मंदिर12 किमी

श्रीकृष्ण की पट्टरानी रुक्मिणी का प्राचीन मंदिर

द्वादश ज्योतिर्लिंग यात्रा

अष्टम ज्योतिर्लिंग — 'नागेशं दारुकावने' (आदि शंकराचार्य द्वादश-ज्योतिर्लिंग स्तोत्र षष्ठ-श्लोक द्वितीय-पद; स्थान-विवादित — जागेश्वर अल्मोड़ा एवं औंढा नागनाथ महाराष्ट्र भी दावेदार; द्वारका सर्वाधिक मान्य)

12 मंदिर

गुजरात ज्योतिर्लिंग यात्रा (सोमनाथ + नागेश्वर)

गुजरात के 2 ज्योतिर्लिंगों में युगल-यात्रा का अनिवार्य अंग

2 मंदिर

द्वारका तीर्थ-समूह (द्वारकाधीश + बेट द्वारका + नागेश्वर + रुक्मिणी + शारदा पीठ)

5-तीर्थ-समूह का प्रमुख ज्योतिर्लिंग-स्थल

09
मार्गदर्शन

यात्रा एवं संपर्क

पता
श्री नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर, द्वारका-बेट द्वारका मार्ग, द्वारका — 361335, देवभूमि द्वारका जिला, गुजरात
हवाई अड्डा
जामनगर हवाई अड्डा (JGA) — ~135 किमी; राजकोट (RAJ) — ~225 किमी
रेलवे
द्वारका रेलवे स्टेशन (DWK) — ~17 किमी
उत्तम ऋतु
नवम्बर-फरवरी सर्वोत्तम; तापमान 18-30°C। मानसून (जुलाई-सितंबर) में अरब-सागर के दृश्य अद्भुत। महाशिवरात्रि, नाग-पंचमी एवं श्रावण पर पीक भीड़।
18 किमीDwarka
17 किमीDwarka Railway Station
12 किमीBet Dwarka
15 किमीOkha
135 किमीJamnagar Airport
225 किमीRajkot
225 किमीSomnath
425 किमीAhmedabad
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