शिव पुराण
कोटिरुद्र संहिता — नागेश्वर माहात्म्य; दारुक-असुर वध एवं भक्त सुप्रिय की रक्षा कथा
Dwarka (Devbhumi Dwarka District) · Gujarat
नागेश्वर / नागेश — नागों के स्वामी; दारुक-वन का शिव
अन्य नाम: नागेश्वर · नागनाथ · दारुकेश्वर · नागेश-दारुकावने

इस मन्दिर की विशेषता
श्री नागेश्वर (शिव — अष्टम ज्योतिर्लिंग; नागों के स्वामी; दारुक-असुर वध-कथा से सम्बद्ध)
स्वयंभू शिवलिंग — दक्षिणाभिमुख (विशेष विशेषता; अधिकांश शिवलिंग पूर्वाभिमुख); द्वारका-शिला पाषाण से निर्मित; तीन-मुखी रुद्राक्ष-स्वरूप; लघु-चक्रों से सज्जित
सम्प्रदाय: शैव
कोटिरुद्र संहिता — नागेश्वर माहात्म्य; दारुक-असुर वध एवं भक्त सुप्रिय की रक्षा कथा
दारुक-वन एवं पश्चिम-समुद्र-तट का माहात्म्य
आदि शंकराचार्य — 'सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने' — षष्ठ-श्लोक द्वितीय-पद
06:00 से 21:30 तक · मध्याह्न विश्राम 12:30-17:00 (मध्याह्न विश्राम — मंदिर पूर्णतः बन्द)
दिन की प्रथम आरती; अद्वितीय उच्च-ऊर्जा अनुष्ठान — सामान्य दर्शन-पूर्व
सायं-काल का प्रमुख अनुष्ठान
दिन की अन्तिम आरती; मंदिर 21:30 बजे बन्द
मुख्य नागेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन निःशुल्क; 80-फीट शिव-प्रतिमा परिसर में।
विशेष पूजा एवं रुद्राभिषेक की व्यवस्था; मूल्य आधिकारिक काउंटर पर सत्यापित करें।
वर्ष का सर्वोच्च पर्व — 4-प्रहर पूजा; विस्तारित दर्शन-समय। 2026 — 15 फरवरी रविवार।
नागेश्वर ('नागों के स्वामी') का विशेष पर्व; नाग-दोष-निवारण अनुष्ठान
सम्पूर्ण मास शिव-उपासना; प्रति-सोमवार रुद्राभिषेक
द्वारका-यात्रा के साथ नागेश्वर-दर्शन; 2026 — 4 सितंबर शुक्रवार (वैष्णव)
नागेश्वर = 'नागों के स्वामी'; शिव पुराण अनुसार यहाँ प्रार्थना से सर्प-दंश, विष, एवं सांसारिक प्रलोभनों से सुरक्षा; कुंडली में काल-सर्प दोष-निवारण हेतु विशेष
स्रोत: शिव पुराण कोटिरुद्र संहिता
दारुक-असुर वध एवं भक्त सुप्रिय की रक्षा-कथा से सम्बद्ध; अधर्मियों के विरुद्ध शिव-संरक्षण
स्रोत: शिव पुराण कोटिरुद्र संहिता
आदि शंकराचार्य द्वादश-ज्योतिर्लिंग स्तोत्र अनुसार अष्टम ज्योतिर्लिंग
स्रोत: द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र
द्वारकाधीश (पश्चिम धाम) यात्रा के साथ नागेश्वर-दर्शन अनिवार्य माना जाता है
स्रोत: द्वारका-तीर्थ परंपरा
मूल चार धाम का पश्चिम-धाम; श्रीकृष्ण-धाम; द्वारका-नागेश्वर संयुक्त यात्रा अनिवार्य
श्रीकृष्ण का द्वीप-निवास-स्थल; 25 फरवरी 2024 से सुदर्शन सेतु (2.32 किमी केबल-स्टेड) द्वारा 24×7 सड़क-संपर्क
बैठी-मुद्रा वाली 80-फीट ऊँची भगवान शिव की प्रतिमा; मंदिर का प्रमुख आधुनिक आकर्षण
श्रीकृष्ण-गोपियों की लीला का स्थल; गोपी-चन्दन (पवित्र मिट्टी) का स्रोत
श्रीकृष्ण की पट्टरानी रुक्मिणी का प्राचीन मंदिर
अष्टम ज्योतिर्लिंग — 'नागेशं दारुकावने' (आदि शंकराचार्य द्वादश-ज्योतिर्लिंग स्तोत्र षष्ठ-श्लोक द्वितीय-पद; स्थान-विवादित — जागेश्वर अल्मोड़ा एवं औंढा नागनाथ महाराष्ट्र भी दावेदार; द्वारका सर्वाधिक मान्य)
12 मंदिर
गुजरात के 2 ज्योतिर्लिंगों में युगल-यात्रा का अनिवार्य अंग
2 मंदिर
5-तीर्थ-समूह का प्रमुख ज्योतिर्लिंग-स्थल