देवी भागवत पुराण
51 शक्ति-पीठ-सूची — सती के वाम-जङ्घा-पतन का स्थल; जयन्ती-शक्ति, कामदीश्वर-भैरव
Nartiang · Meghalaya
श्री नर्तियांग दुर्गा (माँ जयन्तेश्वरी) मंदिर — नर्तियांग, पश्चिम जयन्तिया हिल्स, मेघालय
जयन्ती / जयन्तेश्वरी / जैन्तेश्वरी — सती के वाम-जङ्घा (बाएँ जाँघ) पीठ; 51 शक्ति-पीठों में स्थान 37; जैन्तिया-राजवंश की कुलदेवी
अन्य नाम: जयन्ती देवी · जयन्तेश्वरी · जैन्तेश्वरी · माँ जयन्ती · नर्तियांग दुर्गा · इयुङ्ग ब्लाई का बेइ दुर्गा (पनार: 'माता दुर्गा का घर')

इस मन्दिर की विशेषता
श्री दुर्गा माँ — गर्भगृह में अष्ट-धातु (8-धातु-मिश्र) निर्मित 10-भुजा महिषासुर-मर्दिनी प्रतिमा (सिंह-वाहन, त्रिशूल-धारी); दुर्गा-पूजा-काल में उत्सव-मूर्ति केला/कदली-वृक्ष (banana trunk) को साड़ी एवं गेंदा-पुष्पों से अलंकृत — खासी/पनार-परंपरा के अनुसार मानव-आकार-मूर्ति-निषेध-अनुपालन
गर्भगृह में अष्ट-धातु 10-भुजा सिंह-वाहिनी महिषासुर-मर्दिनी; उत्सव-मूर्ति केला-वृक्ष (समस्त शक्ति-पीठों में अद्वितीय खासी-परंपरा-अनुरूप); केला-ट्रंक का दुर्गा-पूजा-पश्चात् मिन्तदु नदी में सशस्त्र-तोप-सलामी सहित विसर्जन
सम्प्रदाय: शाक्त — खासी-पनार जनजातीय 'का नियाम-त्रे' (Niam-Tre) + हिन्दू तांत्रिक-शाक्त-सिञ्जन; मातृ-वंशीय (matrilineal) समाज-संदर्भ
51 शक्ति-पीठ-सूची — सती के वाम-जङ्घा-पतन का स्थल; जयन्ती-शक्ति, कामदीश्वर-भैरव
नर्तियांग = स्थान 37; जयन्तेश्वरी पीठ
06:00 से 20:00 तक
स्थानीय देशमुख-पुजारी द्वारा पूजन (उत्तर-भारतीय आरती-तालिका-अनुसार नहीं)
फोटोग्राफी: बहु-स्रोत-सत्यापन-योग्य औपचारिक-प्रतिबन्ध-निर्देश अनुपलब्ध — स्थानीय पुजारी से अनुमति लें
कोई VIP-पंक्ति नहीं; सभी श्रद्धालु समान-दर्शन।
आधुनिक प्रतीकात्मक 'उ ब्लाङ्ग सिन्याव' छाग — धोती, पगड़ी एवं मानव-मुख-मास्क + पुरुष-कर्ण-कुण्डल (की क्यन्दियाम) सहित सजाया; स्येम (जैन्तिया-नरेश-वंशज) द्वारा सीधी-तलवार से बलि (अन्य-स्थलों के घुमावदार खड्ग नहीं); मस्तक गर्भगृह-तल के कुण्ड एवं भू-गर्भ-सुरंग के माध्यम से मिन्तदु/मिन्ताङ्ग नदी तक प्रवाहित। बहुसंवेदनशील-विषय।
षष्ठी (शनि 17 अक्टूबर) → सप्तमी (रवि 18 अक्टूबर) → अष्टमी (सोम 19 अक्टूबर — महा-अष्टमी प्रतीकात्मक छाग-बलि + अन्य) → नवमी (मंगल 20 अक्टूबर) → विजयदशमी (20-21 अक्टूबर) → केला-ट्रंक उत्सव-मूर्ति का मिन्तदु नदी में सशस्त्र तोप-सलामी-सहित विसर्जन; का पस्तिएह कैक्सू पारंपरिक पनार-नृत्य।
11 अक्टूबर (रवि) - 19 अक्टूबर (सोम) 2026; मन्दिर-काल में नवदुर्गा-पूजन।
19-27 मार्च 2026; मन्दिर में पूजित किन्तु शारदीय दुर्गा-पूजा प्रमुख-उत्सव।
निकटवर्ती कामदीश्वर भैरव शिव-मन्दिर पर विशेष-अभिषेक। 2026 — रविवार 15 फरवरी।
उषाकालीन देवी-स्तुति पारायण।
देवी भागवत पुराण-सूचीबद्ध 51 शाक्त-पीठों का स्थान 37; सती की वाम-जङ्घा-पीठ; भैरव कामदीश्वर
स्रोत: देवी भागवत पुराण + तांत्रिक 51-पीठ परंपरा
उत्तर-पूर्व भारत के 3-शक्ति-पीठ संयुक्त-यात्रा; योनि (कामाख्या) + वाम-जङ्घा (नर्तियांग) + दक्षिण-पाद (त्रिपुर सुन्दरी)
स्रोत: उत्तर-पूर्व शाक्त-परंपरा
जैन्तिया-राजवंश (1500-1835) की कुलदेवी; जैन्तिया-राज-इतिहास का आध्यात्मिक केन्द्र
स्रोत: जैन्तिया-राज इतिहास
खासी-पनार जनजातीय 'का नियाम-त्रे' एवं हिन्दू तांत्रिक-शाक्त-सिञ्जन; मातृ-वंशीय समाज में देवी-उपासना का अद्वितीय-संदर्भ
स्रोत: खासी-पनार-हिन्दू सिञ्जन परंपरा
मेघालय का सर्वाधिक-घना मेन्हीर/डॉल्मन-स्थल; पुरुष-पूर्वजों हेतु मू श्यन्राङ्ग एवं स्त्री-पूर्वजों हेतु मू क्यन्थाई; 1500-1835 ईस्वी जैन्तिया-काल; उ मार फल्यङ्की + उ लुह ल्यङ्ग्स्कोर लामारे द्वारा स्थापित; सर्वाधिक-ऊँचा 'मू लोङ्ग स्येम' ~26 फुट
जयन्तेश्वरी पीठ का संगत भैरव; पुरानी जैन्तिया-राज्य की तोपें प्रदर्शित
जैन्तिया-राज्य (1500-1835) के ग्रीष्म-राजधानी-अवशेष
पनार-भाषा शिलालेख 'इयुङ्ग ब्लाई का बेइ दुर्गा' (माता दुर्गा का घर)
जोवाई बाज़ार (टेरा-कोटा); सिन्तू क्सियार रिवरफ्रन्ट
एलिफन्ट फॉल्स से 3x ऊँचा झरना
मेघालय का सुप्रसिद्ध फ़ोटोजेनिक झरना
स्थानीय-पर्यटन-स्थल
उत्तर-पूर्व शाक्त-त्रिक का प्रथम-तीर्थ; योनि-पीठ
वाम-जङ्घा-पीठ; भैरव कामदीश्वर; देवी भागवत-वर्णित 51-पीठ-सूची
51 मंदिर
केन्द्रीय शक्ति-पीठ — कामाख्या (गुवाहाटी, असम — योनि) + नर्तियांग (मेघालय — वाम-जङ्घा) + त्रिपुर सुन्दरी (उदयपुर, त्रिपुरा — दक्षिण-पाद); 3-रात्रि-4-दिवसीय संयुक्त-यात्रा
3 मंदिर · 4 दिन
कोलकाता (दक्षिणेश्वर + कालीघाट) → गुवाहाटी (कामाख्या) → शिलॉङ/नर्तियांग → अगरतला (त्रिपुर सुन्दरी)
5 मंदिर · 7 दिन
नर्तियांग दुर्गा + नर्तियांग शिलाखण्ड + जैन्तियापुर-खण्डहर (बांग्लादेश, वीज़ा-आवश्यक)
3 मंदिर