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Nartiang · Meghalaya

श्री नर्तियांग दुर्गा

श्री नर्तियांग दुर्गा (माँ जयन्तेश्वरी) मंदिर — नर्तियांग, पश्चिम जयन्तिया हिल्स, मेघालय

जयन्ती / जयन्तेश्वरी / जैन्तेश्वरी — सती के वाम-जङ्घा (बाएँ जाँघ) पीठ; 51 शक्ति-पीठों में स्थान 37; जैन्तिया-राजवंश की कुलदेवी

अन्य नाम: जयन्ती देवी · जयन्तेश्वरी · जैन्तेश्वरी · माँ जयन्ती · नर्तियांग दुर्गा · इयुङ्ग ब्लाई का बेइ दुर्गा (पनार: 'माता दुर्गा का घर')

  • 51 महा-शाक्त-पीठ परंपरा
  • उत्तर-पूर्व भारत का शाक्त-त्रिक
  • जैन्तिया-राजवंश
श्री नर्तियांग दुर्गा
दर्शन समय
06:00 – 20:00
स्वरूप
गर्भगृह में अष्ट-धातु 10-भुजा सिंह-वाहिन…
स्थान
Nartiang · Meghalaya
उत्तम ऋतु
अक्टूबर-मार्च सर्वोत्तम
काल
मूल पीठ अति-प्राचीन

इस मन्दिर की विशेषता

  • 51 महा-शाक्त-पीठ परंपरा — स्थान 37; सती का वाम-जङ्घा (बायाँ जाँघ) यहाँ गिरा; भैरव: कामदीश्वर (Kamadishwar / Kramadishwar); स्रोत: देवी भागवत + तांत्रिक-परंपरा
  • उत्तर-पूर्व भारत का शाक्त-त्रिक — कामाख्या (गुवाहाटी, असम — योनि) + नर्तियांग (मेघालय — वाम-जङ्घा) + त्रिपुर सुन्दरी (उदयपुर, त्रिपुरा — दक्षिण-पाद)
  • जैन्तिया-राजवंश (सुत्न्गा / स्येम सुत्न्गा; 1500-1835 ईस्वी) की कुलदेवी; नर्तियांग जैन्तिया-राज्य की ग्रीष्म-राजधानी, जैन्तियापुर (अब बांग्लादेश) शीत-राजधानी
01
मूल विग्रह

मुख्य देव एवं स्वरूप

श्री दुर्गा माँ — गर्भगृह में अष्ट-धातु (8-धातु-मिश्र) निर्मित 10-भुजा महिषासुर-मर्दिनी प्रतिमा (सिंह-वाहन, त्रिशूल-धारी); दुर्गा-पूजा-काल में उत्सव-मूर्ति केला/कदली-वृक्ष (banana trunk) को साड़ी एवं गेंदा-पुष्पों से अलंकृत — खासी/पनार-परंपरा के अनुसार मानव-आकार-मूर्ति-निषेध-अनुपालन

गर्भगृह में अष्ट-धातु 10-भुजा सिंह-वाहिनी महिषासुर-मर्दिनी; उत्सव-मूर्ति केला-वृक्ष (समस्त शक्ति-पीठों में अद्वितीय खासी-परंपरा-अनुरूप); केला-ट्रंक का दुर्गा-पूजा-पश्चात् मिन्तदु नदी में सशस्त्र-तोप-सलामी सहित विसर्जन

सम्प्रदाय: शाक्त — खासी-पनार जनजातीय 'का नियाम-त्रे' (Niam-Tre) + हिन्दू तांत्रिक-शाक्त-सिञ्जन; मातृ-वंशीय (matrilineal) समाज-संदर्भ

02
स्थल-पुराण

कथा, इतिहास एवं महत्व

देवी भागवत पुराण

51 शक्ति-पीठ-सूची — सती के वाम-जङ्घा-पतन का स्थल; जयन्ती-शक्ति, कामदीश्वर-भैरव

तांत्रिक 51-पीठ परंपरा (तंत्र-चूड़ामणि सम-वर्गी ग्रन्थ)

नर्तियांग = स्थान 37; जयन्तेश्वरी पीठ

संत एवं परम्परा

  • जैन्तिया-राजवंश (सुत्न्गा / स्येम सुत्न्गा; 1500-1835) — राज-कुलदेवी के रूप में नर्तियांग दुर्गा का दीर्घ-पोषण
  • जैन्तिया-नरेश धन मणिक (शासन 1596-1612 ईस्वी) — स्वप्न-दर्शन के पश्चात् नर्तियांग को ग्रीष्म-राजधानी एवं देवी-उपासना-प्रारम्भ
  • जैन्तिया-नरेश जसो मणिक (शासन 1606-1641) एवं उनकी कोच रानी लक्ष्मी नारायण — वर्तमान संरचना से सम्बद्ध; कोच-राजपरिवार से शाक्त-परंपरा राज-कुल में लायी
  • जैन्तिया-राजकन्या जयन्ती देवी (अन्तिम ब्राह्मण जैन्तिया-नरेश जयन्त राय की पुत्री; स्थल-परंपरा) — स्वर्ग-गमन-कथा; पुत्र बारा गोसाईं राय द्वारा स्वप्न-दर्शन-पश्चात् अष्ट-धातु मूर्ति की खुदाई
  • देशमुख ब्राह्मण (चन्द्रसेनीय कायस्थ प्रभु / CKP; उज्जैन-महाराष्ट्र-मूल; ~30 पीढ़ी पूर्व आमंत्रित) — असम-ब्राह्मणों के पशु-बलि-निरस्त-निर्णय के पश्चात् देशमुख-वंश को नियुक्त किया गया; आज भी हेरीडीटरी डोलोई (मुख्य पुजारी) यही वंश
  • ब्रिटिश राज (15 मार्च 1835) — जैन्तिया-राज्य का अधिग्रहण कर नर-बलि-परंपरा का अन्त
  • चेरापूँजी रामकृष्ण मिशन (1987) — मन्दिर का पुनर्निर्माण-सहयोग; मूल 'दिएङ्ग ब्लाई' स्तम्भ का संरक्षण
  • केन्द्रीय मंत्री किरण रिजिजू (30 सितंबर 2017) — राष्ट्रीय धरोहर-स्थल घोषणा-प्रस्ताव

ऐतिहासिक घटनाक्रम

  1. 15961596-1612 — जैन्तिया-नरेश धन मणिक द्वारा स्वप्न-दर्शन-पश्चात् नर्तियांग को ग्रीष्म-राजधानी बनाकर देवी-उपासना-प्रारम्भWikipedia + Swarajya + Verandah Club बहु-स्रोत
  2. 16061606-1641 — जैन्तिया-नरेश जसो मणिक (Jasa Manik Syiem Sutnga) के शासन-काल में वर्तमान संरचना; कोच रानी लक्ष्मी नारायण के माध्यम से शाक्त-परंपरा राज-कुल मेंWikipedia + Swarajya
  3. 18211821 — ब्रिटिश-दूतों द्वारा नर-बलि की खोजSwarajya
  4. 18321832 — अन्तिम नर-बलि-वर्षSwarajya
  5. 183515 मार्च 1835 — ब्रिटिश-कब्जा के पश्चात् जैन्तिया-राज्य का अधिग्रहण; नर-बलि बन्द; केवल प्रतीकात्मक छाग-बलि शेषSwarajya + Wikipedia Jaintia Kingdom
  6. 19871987 — चेरापूँजी रामकृष्ण मिशन द्वारा मन्दिर का पुनर्निर्माण; 'दिएङ्ग ब्लाई' स्तम्भ-संरक्षण; संगमरमर-फर्शNeelstoria + Chardham + Wikipedia बहु-स्रोत
  7. 201730 सितंबर 2017 — केन्द्रीय मंत्री किरण रिजिजू द्वारा राष्ट्रीय धरोहर-स्थल घोषणा-प्रस्ताव (अब-तक लम्बित; ASI ने केवल निकटवर्ती नर्तियांग शिलाखण्डों को राष्ट्रीय-संरक्षण घोषित किया है)Business Standard 2017 + DNA India
03
नित्य उपासना

दर्शन समय एवं आरती

06:00 से 20:00 तक

प्रातः दर्शन06:00-12:00
दैनिक

स्थानीय देशमुख-पुजारी द्वारा पूजन (उत्तर-भारतीय आरती-तालिका-अनुसार नहीं)

अपराह्न दर्शन14:00-20:00
दैनिक

फोटोग्राफी: बहु-स्रोत-सत्यापन-योग्य औपचारिक-प्रतिबन्ध-निर्देश अनुपलब्ध — स्थानीय पुजारी से अनुमति लें

04
दर्शन

दर्शन के प्रकार

सामान्य निःशुल्क दर्शननिःशुल्क
समय
06:00-20:00
उपयुक्त
सभी श्रद्धालु

कोई VIP-पंक्ति नहीं; सभी श्रद्धालु समान-दर्शन।

छाग-बलि (प्रतीकात्मक)
उपयुक्त
दुर्गा पूजा महा-अष्टमी-रात्रि के संकल्प हेतु

आधुनिक प्रतीकात्मक 'उ ब्लाङ्ग सिन्याव' छाग — धोती, पगड़ी एवं मानव-मुख-मास्क + पुरुष-कर्ण-कुण्डल (की क्यन्दियाम) सहित सजाया; स्येम (जैन्तिया-नरेश-वंशज) द्वारा सीधी-तलवार से बलि (अन्य-स्थलों के घुमावदार खड्ग नहीं); मस्तक गर्भगृह-तल के कुण्ड एवं भू-गर्भ-सुरंग के माध्यम से मिन्तदु/मिन्ताङ्ग नदी तक प्रवाहित। बहुसंवेदनशील-विषय।

05
उत्सव

प्रमुख पर्व एवं उत्सव

शारदीय दुर्गा पूजा 2026 — मन्दिर का सर्वोच्च वार्षिक उत्सवआश्विन शुक्ल षष्ठी-दशमी

षष्ठी (शनि 17 अक्टूबर) → सप्तमी (रवि 18 अक्टूबर) → अष्टमी (सोम 19 अक्टूबर — महा-अष्टमी प्रतीकात्मक छाग-बलि + अन्य) → नवमी (मंगल 20 अक्टूबर) → विजयदशमी (20-21 अक्टूबर) → केला-ट्रंक उत्सव-मूर्ति का मिन्तदु नदी में सशस्त्र तोप-सलामी-सहित विसर्जन; का पस्तिएह कैक्सू पारंपरिक पनार-नृत्य।

शारदीय नवरात्रि 2026आश्विन शुक्ल प्रतिपदा-नवमी

11 अक्टूबर (रवि) - 19 अक्टूबर (सोम) 2026; मन्दिर-काल में नवदुर्गा-पूजन।

चैत्र नवरात्रि 2026चैत्र शुक्ल प्रतिपदा-नवमी

19-27 मार्च 2026; मन्दिर में पूजित किन्तु शारदीय दुर्गा-पूजा प्रमुख-उत्सव।

महाशिवरात्रिफाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी

निकटवर्ती कामदीश्वर भैरव शिव-मन्दिर पर विशेष-अभिषेक। 2026 — रविवार 15 फरवरी।

महालयआश्विन कृष्ण अमावस्या

उषाकालीन देवी-स्तुति पारायण।

06
आस्था

मनोकामना एवं फल

51 शक्ति-पीठ यात्रा-संकल्प (स्थान 37)

देवी भागवत पुराण-सूचीबद्ध 51 शाक्त-पीठों का स्थान 37; सती की वाम-जङ्घा-पीठ; भैरव कामदीश्वर

स्रोत: देवी भागवत पुराण + तांत्रिक 51-पीठ परंपरा

उत्तर-पूर्व शाक्त-त्रिक यात्रा (कामाख्या + नर्तियांग + त्रिपुर सुन्दरी)

उत्तर-पूर्व भारत के 3-शक्ति-पीठ संयुक्त-यात्रा; योनि (कामाख्या) + वाम-जङ्घा (नर्तियांग) + दक्षिण-पाद (त्रिपुर सुन्दरी)

स्रोत: उत्तर-पूर्व शाक्त-परंपरा

जैन्तिया-राजवंश राज-कुलदेवी दर्शन

जैन्तिया-राजवंश (1500-1835) की कुलदेवी; जैन्तिया-राज-इतिहास का आध्यात्मिक केन्द्र

स्रोत: जैन्तिया-राज इतिहास

खासी-पनार-हिन्दू समन्वय-दर्शन

खासी-पनार जनजातीय 'का नियाम-त्रे' एवं हिन्दू तांत्रिक-शाक्त-सिञ्जन; मातृ-वंशीय समाज में देवी-उपासना का अद्वितीय-संदर्भ

स्रोत: खासी-पनार-हिन्दू सिञ्जन परंपरा

07
जप

मन्त्र एवं स्तोत्र

  • ॐ जयन्ती मङ्गला काली मन्त्र (दुर्गा-स्तुति)मन्त्रदेवी माहात्म्यम् सम्बद्ध परंपराइस मन्दिर हेतु'ॐ जयन्ती मङ्गला काली, भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री, स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते॥' — 'जयन्ती' पद यहाँ 'विजय-दायिनी' विशेषण के रूप में, परन्तु जयन्तेश्वरी पीठ हेतु liturgically उपयुक्त
  • दुर्गा सूक्तम्वैदिक सूक्तमहानारायण उपनिषद्इस मन्दिर हेतुअग्नि-दुर्गा का वैदिक सूक्त; नर्तियांग-शक्ति-स्वरूप के अनुरूप
  • दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्यम्)ग्रन्थमार्कण्डेय पुराण अध्याय 81-93नवरात्रि-काल में पारायण
  • इयुङ्ग ब्लाई का बेइ दुर्गा (पनार-शिलालेख)स्थानीय पनार-आह्वानमन्दिर के द्वार पर उत्कीर्णइस मन्दिर हेतुपनार-भाषा में 'माता दुर्गा का घर' — हाइपर-लोकल देवी-आह्वान
08
तीर्थाटन

समीप के तीर्थ एवं परिपथ

नर्तियांग शिलाखण्ड (Monoliths) — ASI-संरक्षित200 मी

मेघालय का सर्वाधिक-घना मेन्हीर/डॉल्मन-स्थल; पुरुष-पूर्वजों हेतु मू श्यन्राङ्ग एवं स्त्री-पूर्वजों हेतु मू क्यन्थाई; 1500-1835 ईस्वी जैन्तिया-काल; उ मार फल्यङ्की + उ लुह ल्यङ्ग्स्कोर लामारे द्वारा स्थापित; सर्वाधिक-ऊँचा 'मू लोङ्ग स्येम' ~26 फुट

श्री कामदीश्वर शिव-भैरव मन्दिर (Kamadishwar / Kramadishwar)300 मी

जयन्तेश्वरी पीठ का संगत भैरव; पुरानी जैन्तिया-राज्य की तोपें प्रदर्शित

जैन्तिया-राज महल खण्डहर (नर्तियांग — ग्रीष्म-राजधानी)500 मी

जैन्तिया-राज्य (1500-1835) के ग्रीष्म-राजधानी-अवशेष

इयुङ्ग ब्लाई पवित्र-द्वार0 मी

पनार-भाषा शिलालेख 'इयुङ्ग ब्लाई का बेइ दुर्गा' (माता दुर्गा का घर)

जोवाई एवं पनार जनजातीय-ग्राम25 किमी

जोवाई बाज़ार (टेरा-कोटा); सिन्तू क्सियार रिवरफ्रन्ट

त्यर्शी झरना (जोवाई)25 किमी

एलिफन्ट फॉल्स से 3x ऊँचा झरना

क्राङ्ग सूरी झरना55 किमी

मेघालय का सुप्रसिद्ध फ़ोटोजेनिक झरना

थाडलास्केइन झील एवं इयालोङ्ग पार्क30 किमी

स्थानीय-पर्यटन-स्थल

कामाख्या मन्दिर, गुवाहाटी195 किमी

उत्तर-पूर्व शाक्त-त्रिक का प्रथम-तीर्थ; योनि-पीठ

51 महा-शाक्त-पीठ यात्रा-संकल्प (स्थान 37)

वाम-जङ्घा-पीठ; भैरव कामदीश्वर; देवी भागवत-वर्णित 51-पीठ-सूची

51 मंदिर

उत्तर-पूर्व भारत शाक्त-त्रिक (3 शक्ति-पीठ)

केन्द्रीय शक्ति-पीठ — कामाख्या (गुवाहाटी, असम — योनि) + नर्तियांग (मेघालय — वाम-जङ्घा) + त्रिपुर सुन्दरी (उदयपुर, त्रिपुरा — दक्षिण-पाद); 3-रात्रि-4-दिवसीय संयुक्त-यात्रा

3 मंदिर · 4 दिन

पूर्व + उत्तर-पूर्व शाक्त संयुक्त सर्किट

कोलकाता (दक्षिणेश्वर + कालीघाट) → गुवाहाटी (कामाख्या) → शिलॉङ/नर्तियांग → अगरतला (त्रिपुर सुन्दरी)

5 मंदिर · 7 दिन

जैन्तिया-राज विरासत सर्किट

नर्तियांग दुर्गा + नर्तियांग शिलाखण्ड + जैन्तियापुर-खण्डहर (बांग्लादेश, वीज़ा-आवश्यक)

3 मंदिर

09
मार्गदर्शन

यात्रा एवं संपर्क

पता
श्री नर्तियांग दुर्गा मन्दिर, नर्तियांग, पश्चिम जयन्तिया हिल्स — 793150, मेघालय
हवाई अड्डा
लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (GAU, गुवाहाटी) — ~180 किमी (4-5 घंटे; उमियाम झील → शिलॉङ → जोवाई → नर्तियांग मार्ग)
रेलवे
गुवाहाटी रेलवे स्टेशन — ~180 किमी (निकटतम रेल-हेड)
बस-स्टैण्ड
शिलॉङ बारा बाज़ार (इयूदुह) से जोवाई-नर्तियांग साझा सुमो (पूर्ण होने पर प्रस्थान); जोवाई से नर्तियांग 24-25 किमी
उत्तम ऋतु
अक्टूबर-मार्च सर्वोत्तम (शीत-शुष्क मौसम); शारदीय दुर्गा पूजा (17-21 अक्टूबर 2026) सर्वोच्च; जून-सितंबर मानसून (अत्यधिक-वर्षा); शीत-काल में रात्रि-तापमान 5°C तक
25 किमीJowai
65 किमीShillong
180 किमीGAU Guwahati Airport
100 किमीUmiam Lake
130 किमीCherrapunji
195 किमीKamakhya Temple Guwahati
380 किमीTripura Sundari Udaipur