शिव पुराण
कोटिरुद्र संहिता — ओंकारेश्वर-माहात्म्य; विन्ध्य पर्वत-देवता द्वारा शिव-आराधना एवं ज्योतिर्लिंग-प्राकट्य कथा
Omkareshwar (Mandhata) · Madhya Pradesh
ओंकार-ईश्वर / अमलेश्वर — ॐ-स्वरूप शिव
अन्य नाम: ओंकार ज्योतिर्लिंग · माण्धाता का ओंकारेश्वर · ॐकार-शिव · ॐ-द्वीप का स्वामी

इस मन्दिर की विशेषता
श्री ओंकारेश्वर (शिव — ॐ-स्वरूप ज्योतिर्लिंग); सहयोगी ज्योतिर्लिंग श्री ममलेश्वर / अमरेश्वर (नर्मदा के दक्षिणी तट पर)
ओंकारेश्वर शिवलिंग — माण्धाता द्वीप पर; ममलेश्वर शिवलिंग — दक्षिणी तट पर। 'द्विरूप ज्योतिर्लिंग' — एक ही ज्योतिर्लिंग के दो रूप।
सम्प्रदाय: शैव
कोटिरुद्र संहिता — ओंकारेश्वर-माहात्म्य; विन्ध्य पर्वत-देवता द्वारा शिव-आराधना एवं ज्योतिर्लिंग-प्राकट्य कथा
रेवा खण्ड — नर्मदा-तीर्थ एवं ओंकार-क्षेत्र का माहात्म्य
आदि शंकराचार्य — 'उज्जयिन्यां महाकालम् ओंकाराममलेश्वरम्' — चतुर्थ श्लोक का प्रथम-पद
ओंकार-स्वरूप शिव का वर्णन; ॐकार-नाद से शिव-तत्व
05:00 से 21:30 तक · मध्याह्न विश्राम 12:20-13:15 (मध्याह्न भोग — गर्भगृह बन्द); 16:00-16:15 (सायं-कालीन शृंगार)
दिन की प्रथम आरती; अद्वितीय आध्यात्मिक अनुभव
गर्भगृह बन्द
सायं-काल का प्रमुख अनुष्ठान
दिन की अन्तिम आरती; 21:30 बजे मंदिर बन्द
मुख्य ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन निःशुल्क।
₹300 प्रति-व्यक्ति VIP विशेष दर्शन (विशेषतः महाशिवरात्रि-काल में लागू); भीड़-प्रबंधन हेतु।
जलाभिषेक, दूधाभिषेक, रुद्राभिषेक, बेलपत्र-अर्चना आदि की बुकिंग। नर्मदा-जल से अभिषेक का विशेष माहात्म्य।
वर्ष का सर्वोच्च पर्व — मंदिर 24 घण्टे लगातार खुला रहता है। 4-प्रहर पूजा; मध्य-रात्रि (12:00-12:45 AM) विशेष अभिषेक; नर्मदा-जल, बेलपत्र, दूध से अभिषेक; VIP दर्शन ₹300। 2026 — 15-16 फरवरी।
नर्मदा-तट पर विशेष दीप-दान; ओंकारेश्वर का प्रमुख आध्यात्मिक उत्सव। 2026 — 24 नवम्बर मंगलवार।
देवी नर्मदा का जन्म-दिन उत्सव; नर्मदा-तट पर विशेष पूजा एवं दीप-दान
सम्पूर्ण मास शिव-उपासना; प्रति-सोमवार विशेष रुद्राभिषेक; नर्मदा-जल से अभिषेक का विशेष माहात्म्य
शिव-विष्णु-मिलन का अद्वितीय उत्सव; ओंकारेश्वर एवं ममलेश्वर दोनों में पूजा
आदि शंकराचार्य द्वादश-ज्योतिर्लिंग स्तोत्र अनुसार 'ओंकाराममलेश्वरम्' — चतुर्थ ज्योतिर्लिंग; 12 ज्योतिर्लिंग दर्शन से सात जन्मों के पाप-नाश एवं मोक्ष
स्रोत: द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र (आदि शंकराचार्य)
ओंकारेश्वर + ममलेश्वर/अमरेश्वर — एक ही ज्योतिर्लिंग के दो रूप; द्वीप-तट एवं नर्मदा के दक्षिणी तट दोनों मंदिरों के संयुक्त-दर्शन से सम्पूर्ण ज्योतिर्लिंग-दर्शन
स्रोत: शिव पुराण कोटिरुद्र संहिता
नर्मदा-स्नान को गंगा-स्नान के समान पुण्यदायी माना जाता है; पितृ-तर्पण एवं पिण्ड-दान हेतु विशेष माहात्म्य
स्रोत: स्कन्द पुराण रेवा खण्ड
आदि शंकराचार्य की दीक्षा-स्थली; अद्वैत-वेदान्त परंपरा का मूल-बिन्दु; ज्ञान-मुमुक्षुओं हेतु तीर्थ-राज
स्रोत: अद्वैत-वेदान्त परंपरा एवं स्थल-इतिहास
ओंकार-स्वरूप शिव — सम्पूर्ण सृष्टि के मूल नाद 'ॐ' का अधिष्ठाता; ध्यान एवं चित्त-शान्ति हेतु सर्वश्रेष्ठ स्थल; ॐ-शाकार द्वीप का प्राकृतिक प्रतीक
स्रोत: लिङ्ग पुराण + माण्डूक्य उपनिषद्
ओंकारेश्वर के साथ युगल-ज्योतिर्लिंग — एक ही ज्योतिर्लिंग के दो स्वरूप; मान्यता अनुसार दोनों के दर्शन से सम्पूर्ण ज्योतिर्लिंग-दर्शन। नर्मदा-तट पर मध्ययुगीन शिव-मंदिर।
21 सितंबर 2023 को अनावरित — आदि शंकराचार्य की 108 फीट ऊँची बहु-धातु प्रतिमा; 54 फीट का आधार-पीठ; एकात्म धाम परियोजना। अद्वैत-दर्शन का प्रसार-स्थल; संग्रहालय एवं सांस्कृतिक केन्द्र।
8वीं शताब्दी की गुफा जहाँ गुरु गोविन्द-भगवद्पाद ने आदि शंकराचार्य को संन्यास-दीक्षा प्रदान की; अद्वैत-वेदान्त परंपरा का प्रत्यक्ष ऐतिहासिक स्थल
दो नदियों का संगम-स्थल; पवित्र स्नान एवं तर्पण-स्थल; ओंकारेश्वर-दर्शन से पूर्व पारंपरिक स्नान
रानी अहिल्याबाई होलकर की राजधानी; नर्मदा-तट पर ऐतिहासिक घाट एवं मंदिर; होलकर-काल का सांस्कृतिक केन्द्र। ओंकारेश्वर-यात्रा के साथ अनिवार्य।
12 ज्योतिर्लिंगों में तृतीय — 'उज्जयिन्यां महाकालम्' (ओंकारेश्वर से पहले स्तोत्र-क्रम में); मध्य प्रदेश के दो ज्योतिर्लिंगों का संयुक्त यात्रा-पथ
चतुर्थ ज्योतिर्लिंग — 'ओंकाराममलेश्वरम्' (आदि शंकराचार्य द्वादश-ज्योतिर्लिंग स्तोत्र चतुर्थ श्लोक प्रथम-पद)
12 मंदिर
मध्य प्रदेश के 2 ज्योतिर्लिंगों का अनिवार्य युगल-यात्रा
2 मंदिर
केन्द्रीय; पूर्ण द्वीप-परिक्रमा 1 दिन में पैदल
नर्मदा के सम्पूर्ण तट की परिक्रमा का प्रमुख विश्राम-तीर्थ; उत्तर्वाहिनी पञ्चकोशी मार्ग 15-18 किमी (19 मार्च - 17 अप्रैल 2026)
मध्य प्रदेश के मालवा-क्षेत्र के 4 प्रमुख तीर्थों में अग्रणी