मार्कण्डेय-तपस्या-कथा (मूल-स्थल-पुराण)
मृकण्डु-ऋषि-पुत्र मार्कण्डेय ने 16-वर्ष-अमर-वर प्राप्त-कर 1,000-वर्ष-तपस्या की — लक्ष्मी-कन्या-स्वरूप एवं विष्णु-दामाद-इच्छा। तमिल पङ्गुनि-मास के श्रावण-नक्षत्र पर तुलसी-पौधे के नीचे लक्ष्मी ने शिशु-स्वरूप-प्रकटन किया। विवाह-योग्य आयु पर विष्णु वृद्ध-ब्राह्मण-वेश-धारी आये एवं हाथ-माँगा; मार्कण्डेय ने आपत्ति की कि कन्या अल्प-वयस्क — 'उचित-नमक-प्रयोग-पाक नहीं जानती'। विष्णु ने कहा — 'यदि तुम्हारी पुत्री बिना-नमक पकाएगी, तो भी मैं उसे श्रेष्ठ-भोजन मानूँगा' — एवं तत्क्षण विवाह किया। इसीलिए इस-मन्दिर का सम्पूर्ण-नैवेद्य लवण-रहित बनाया जाता है — विश्व में एकमात्र साल्ट-फ्री दिव्य-देशम।
