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Rameshwaram · Tamil Nadu

श्री रामनाथस्वामी मंदिर, रामेश्वरम्

रामनाथस्वामी / रामेश्वर ज्योतिर्लिङ्ग / रामलिङ्गेश्वर

अन्य नाम: रामेश्वर ज्योतिर्लिङ्ग · रामनाथस्वामी · रामलिङ्गेश्वर · रामेश्वरम् धाम

  • Char Dham
  • 12 Jyotirlinga
  • 276 Paadal Petra Sthalams
श्री रामनाथस्वामी मंदिर, रामेश्वरम्
दर्शन समय
04:00 – 20:00
स्वरूप
लिङ्ग-स्वरूप शिव
स्थान
Rameshwaram · Tamil Nadu
उत्तम ऋतु
अक्टूबर-मार्च सर्वोत्तम
काल
पौराणिक काल

इस मन्दिर की विशेषता

  • Char Dham (4 मूल — आदि शंकराचार्य निर्धारित दक्षिण-धाम)
  • 12 Jyotirlinga (दक्षिणतम)
  • 276 Paadal Petra Sthalams (तेवारम-पाडल पेथ्रा शैव क्षेत्र)
01
मूल विग्रह

मुख्य देव एवं स्वरूप

श्री रामनाथस्वामी (शिव) — गर्भगृह में दो ज्योतिर्लिङ्ग: (1) रामलिङ्गम् — मान्यता: सीताजी द्वारा बालू (रेत) से निर्मित, श्री राम द्वारा प्रतिष्ठित; (2) विश्वलिङ्गम् — हनुमानजी द्वारा कैलाश से लाया गया। प्रथम पूजा परंपरानुसार विश्वलिङ्ग की होती है।

लिङ्ग-स्वरूप शिव

सम्प्रदाय: शैव (शैव-वैष्णव-स्मार्त — तीनों परंपराओं द्वारा पूज्य)

02
स्थल-पुराण

कथा, इतिहास एवं महत्व

वाल्मीकि रामायण

लंका-विजय के पश्चात् श्री राम द्वारा शिव-पूजन एवं ब्रह्म-हत्या (रावण-वध) निवारण हेतु शिवलिङ्ग की प्रतिष्ठा का प्रसंग

स्कन्द पुराण

सेतु माहात्म्य / रामेश्वर माहात्म्य — रामेश्वरम् क्षेत्र, 22 तीर्थों, गन्धमादन पर्वत का विस्तृत वर्णन

शिव पुराण

द्वादश ज्योतिर्लिंगों में रामेश्वर का माहात्म्य

द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र (आदि शंकराचार्य)

रामेश्वर सम्मिलित

संत एवं परम्परा

  • श्री राम — पौराणिक प्रतिष्ठाता; लंका-विजय के पश्चात् रावण-वध से लगी ब्रह्म-हत्या के निवारण हेतु शिव-लिङ्ग की पूजा का संकल्प; हनुमान को कैलाश से लिङ्ग लाने भेजा परन्तु मुहूर्त समीप आने पर सीताजी ने बालू से रामलिङ्ग रचा एवं स्थापित किया
  • हनुमान — कैलाश से 'विश्वलिङ्गम्' लाये; आदेशानुसार आज भी प्रथम पूजा विश्वलिङ्ग की होती है
  • आदि शंकराचार्य (8वीं-9वीं शताब्दी) — रामेश्वरम् को चार धामों के दक्षिण-धाम के रूप में स्थापित किया; द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र में सम्मिलित; गर्भगृह में 5 स्फटिक लिंगों में से एक को प्रतिष्ठित करने की परंपरा
  • तेवारम् सम्प्रदाय के सन्त — अप्पर, सम्बन्धर, सुन्दरर — 7वीं-8वीं शताब्दी के 63 नायन्मारों (तमिल शैव सन्तों) ने 'पाडल पेथ्रा स्थलम्' के रूप में रामेश्वर का गायन किया

ऐतिहासिक घटनाक्रम

  1. -1पौराणिक काल (त्रेतायुग) — श्री राम द्वारा लंका-विजय एवं रावण-वध; अयोध्या लौटते समय रामेश्वरम् द्वीप पर शिव-पूजन एवं रामलिंग-विश्वलिंग की प्रतिष्ठा; ब्रह्म-हत्या-दोष का निवारणवाल्मीकि रामायण + स्कन्द पुराण
  2. 8008वीं-9वीं शताब्दी — आदि शंकराचार्य द्वारा रामेश्वरम् को चार धामों के दक्षिण-धाम के रूप में प्रतिष्ठित; द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र की रचनाविकिपीडिया + आदि शंकर परंपरा
  3. 165017वीं शताब्दी — पाण्ड्य वंश एवं सेतुपति राजाओं द्वारा वर्तमान मंदिर के मुख्य संरचना का निर्माण; राजा किलवन सेतुपति (Kizhavan Sethupathi / Raghunatha Kilavan) द्वारा निर्माण-स्वीकृति। 1212-पिल्लर वाला विश्व का सबसे लंबा मंदिर-कॉरिडोर 18वीं शताब्दी में पूर्ण।विकिपीडिया + Ancient Origins
  4. 196422-23 दिसम्बर 1964 — रामेश्वरम् द्वीप पर रामेश्वरम् चक्रवात (280 किमी/घंटा हवा); निकटवर्ती धनुष्कोडि शहर पूर्णतः ध्वस्त; 1,800+ मृत्यु। धनुष्कोडि रेलवे स्टेशन की एक ट्रेन समुद्र-तरंगों में बह गयी — सभी 115 यात्री मृत। तत्कालीन मद्रास सरकार ने धनुष्कोडि को 'भूत-नगर' घोषित किया। रामनाथस्वामी मुख्य मंदिर सुरक्षित — समुद्र-तरंगें मंदिर के समीप रुक गयीं।विकिपीडिया Dhanushkodi
  5. 202124-25 फरवरी 2021 — शृंगेरी शारदा पीठ (Sringeri Math) से एक नया स्फटिक (Sphatika) शिव-लिंगम् रामनाथस्वामी मंदिर को अर्पित; 25 फरवरी 2021 से गर्भगृह में दैनिक अभिषेक एवं पूजा प्रारम्भSringeri.net आधिकारिक
  6. 20256 अप्रैल 2025 (रविवार) — प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा नये पम्बन सेतु (New Pamban Bridge) का यातायात हेतु उद्घाटन — भारत का प्रथम 'वर्टिकल लिफ्ट' समुद्र-रेलवे पुल। कुल लम्बाई ~2.08 किमी; बीच में लगभग 72 मीटर का उठने वाला खण्ड जो बड़े जहाज़ों के निकलने के लिये ऊपर उठ सकता है; स्वामी: भारतीय रेलवे। PM मोदी ने रिमोट से वर्टिकल लिफ्ट का संचालन किया, रामेश्वरम्-तांबरम् एक्सप्रेस एवं भारतीय तटरक्षक जहाज़ को झंडी दिखाई। पुराने 1914 के ब्रिटिश-कालीन पम्बन पुल का स्थान लिया।India TV + विकिपीडिया New Pamban Bridge
03
नित्य उपासना

दर्शन समय एवं आरती

04:00 से 20:00 तक · मध्याह्न विश्राम 13:00-15:00 (दोपहर विश्राम)

स्फटिक लिङ्ग दर्शन एवं पूजा (Sphatika Lingam)05:00-06:00
दैनिकबुकिंग आवश्यक

गर्भगृह में आदि शंकराचार्य-परम्परा का स्फटिक (क्रिस्टल) लिंगम् दर्शन — दिन में केवल यह 1 घंटा। मंदिर काउंटर पर टिकट; मूल्य HRCE काउंटर पर पुष्टि करें।

सामान्य दर्शन प्रारम्भ05:00
दैनिक

भक्तों के लिए दर्शन प्रारम्भ

मध्याह्न-विश्राम13:00-15:00 / 15:15
दैनिक

मंदिर बन्द

सायं-काल दर्शन15:00-20:00
दैनिक
रात्रि-आरती एवं समापन20:00 के आसपास
दैनिक

वस्त्र-संहिता: पुरुष: धोती + शर्ट / पायजामा-कुर्ता; गर्भगृह में प्रवेश के पूर्व शर्ट उतारनी होती है; लुंगी, बरमुडा, जींस, तंग पैन्ट निषिद्ध। महिला: साड़ी या सलवार-कमीज़; पारंपरिक मर्यादित वस्त्र।

04
दर्शन

दर्शन के प्रकार

सामान्य (निःशुल्क) दर्शननिःशुल्क
समय
05:00-13:00 एवं 15:00-20:00
उपयुक्त
सभी भक्त

मंदिर के बाहरी कॉरिडोर से रामलिंग एवं विश्वलिंग के दर्शन। पूर्णतः निःशुल्क।

22 तीर्थम् स्नान (22 Wells Bath)
समय
05:30-12:30 एवं 15:00-19:00
उपयुक्त
जो भक्त मंदिर के अन्दर के 22 पवित्र कुण्डों में स्नान करना चाहते हैं

मंदिर के अन्दर 22 तीर्थम् (पवित्र कूप) — श्री राम के 22 बाणों का प्रतीक। उत्तर-द्वार स्थित HRCE टिकट काउंटर से टिकट प्राप्त कर एक-एक कुण्ड पर सेवायतों द्वारा पवित्र जल का अभिषेक।

स्फटिक लिङ्ग दर्शन
समय
05:00-06:00
उपयुक्त
क्रिस्टल लिंगम् दर्शन के विशेष भक्त

आदि शंकराचार्य-परंपरा का स्फटिक लिंगम् — दिन में मात्र 1 घंटा गर्भगृह में दर्शन। मूल्य HRCE काउंटर पर पुष्टि करें।

VIP विशेष दर्शन
उपयुक्त
समय-सीमित भक्त

सीमित संख्या; उपलब्धता अनुसार। मूल्य HRCE काउंटर पर पुष्टि करें।

05
अनुष्ठान

विशेष पूजा एवं सेवा

  • क्षेत्र-ब्राह्मण-व्यवस्था से पूजा-अनुष्ठान (Setu Snan + 22 Theertham + Linga Abhishek)
  • रुद्राभिषेक
  • श्री राम-तर्पण (पितृ-तर्पण)

    वंशजों के लिये रामेश्वर में पितृ-तर्पण की विशेष परंपरा

06
उत्सव

प्रमुख पर्व एवं उत्सव

महाशिवरात्रिफाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी (फरवरी-मार्च)

मंदिर का प्रमुख वार्षिक पर्व — 10-दिवसीय उत्सव; मंदिर 24 घंटे खुला रहता है। लाखों शिव-भक्त उपस्थित।

तिरुकल्याणम् (Thirukalyanam)ज्येष्ठ-आषाढ़ (Jyestha-Ashadha)

श्री रामनाथस्वामी एवं पार्वती-वर्धिनी (Parvathavardhini) के दिव्य विवाह का स्मरणोत्सव

थाई अमावस्या एवं आदि अमावस्या

तमिल मास थाई (जनवरी-फरवरी) एवं आदि (जुलाई-अगस्त) की अमावस्याओं पर अग्नि-तीर्थम् स्नान एवं पितृ-तर्पण; पीक दिनों में 2+ लाख भक्त

महालय अमावस्या (पितृ-पक्ष)आश्विन कृष्ण अमावस्या (सितंबर-अक्टूबर)

पितृ-तर्पण का चरम काल; अग्नि-तीर्थम् में स्नान एवं रामेश्वर में पिण्डदान की विशेष परंपरा

नवरात्रि

9 दिवसीय शक्ति-उत्सव; पार्वती-वर्धिनी की विशेष पूजा

07
आस्था

मनोकामना एवं फल

रावण-वध जैसे महापापों का निवारण (श्री राम परंपरा)

मान्यता: स्वयं श्री राम ने यहाँ शिव-पूजन से ब्रह्म-हत्या-दोष का निवारण किया — सम्पूर्ण मानवता हेतु आदर्श स्थापित किया। रामनाथस्वामी दर्शन से सभी पापों का क्षय।

स्रोत: वाल्मीकि रामायण + स्कन्द पुराण सेतु माहात्म्य

12 ज्योतिर्लिंग दर्शन का फल

द्वादश ज्योतिर्लिंगों में दक्षिणतम; आदि शंकराचार्य के द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र अनुसार एक दर्शन से बारहों का फल

स्रोत: द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र

पितृ-मोक्ष एवं वंश-कल्याण

अग्नि-तीर्थम् + 22 तीर्थम् + रामेश्वर में पितृ-तर्पण से सम्पूर्ण वंश-पीढ़ी का कल्याण एवं मोक्ष — गया, हरिद्वार, प्रयाग के साथ सर्वोच्च पितृ-तीर्थों में

स्रोत: स्कन्द पुराण सेतु माहात्म्य

सन्तान-प्राप्ति

अग्नि-तीर्थम् में स्नान कर शिव-पूजन से निःसन्तान दम्पतियों को सन्तान-प्राप्ति

स्रोत: स्थल-परंपरा

08
जप

मन्त्र एवं स्तोत्र

  • द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र — रामेश्वर श्लोकस्तोत्र-अंशआदि शंकराचार्य प्रणीतइस मन्दिर हेतु12 ज्योतिर्लिंगों के नित्य स्मरण-मंत्र में रामेश्वर
  • रुद्राष्टाध्यायी / रुद्राभिषेक मंत्रवेद-मंत्रयजुर्वेद, कृष्ण-यजुर्वेदीय रुद्र-सूक्तलिङ्ग-अभिषेक का प्रमुख वैदिक पाठ
  • रामेश्वर अष्टकम्स्तोत्रस्थल-परंपराइस मन्दिर हेतु
  • तेवारम् पडलें (तमिल शैव)तमिल शैव पडलेंअप्पर, सम्बन्धर, सुन्दरर — 7वीं-8वीं शताब्दी के नायन्मार-गायनइस मन्दिर हेतुरामेश्वरम् 276 'पाडल पेथ्रा स्थलम्' में सम्मिलित
09
तीर्थाटन

समीप के तीर्थ एवं परिपथ

अग्नि-तीर्थम् (समुद्र-तट)100 मी

मंदिर के पूर्वी द्वार से समुद्र-तट; मान्यता: श्री राम-सीता लंका से वापसी पर यहाँ रुके; 64 तीर्थों में सर्वोच्च। मंदिर-दर्शन से पूर्व समुद्र-स्नान की पारंपरिक अनिवार्यता। निःसन्तान दम्पतियों को सन्तान-प्राप्ति की मान्यता।

श्री पार्वतवर्धिनी अम्मन् मंदिर (Parvathavardhini Amman shrine)50 मी

श्री रामनाथस्वामी की पत्नी देवी पार्वती का स्वरूप; पार्वत-वर्धिनी अर्थात् 'पार्वत-कन्या वर्धन करने वाली'। अर्ध-मण्डपम् में श्री-चक्र स्थापित। मंदिर-यात्रा में रामनाथस्वामी एवं पार्वतवर्धिनी दोनों के दर्शन अनिवार्य।

गन्धमादन पर्वतम् (Gandhamadhana Parvatham)2 किमी

द्वीप का सर्वोच्च बिन्दु; श्री राम के पाद-चिह्न; मान्यता: हनुमान ने यहीं से लंका की ओर छलांग लगायी थी

धनुष्कोडि (Dhanushkodi)20 किमी

श्री राम ने धनुष की नोक से सेतु-निर्माण-स्थल का संकेत किया — 'धनुष-कोडि' (धनुष का सिरा)। 22-23 दिसम्बर 1964 के चक्रवात में नगर पूर्णतः ध्वस्त — 'भूत-नगर'। कोथन्डरामस्वामी मंदिर सुरक्षित बचा। राम सेतु (Adam's Bridge) यहीं से प्रारम्भ हो श्रीलंका के तलैमन्नार तक।

सेतु करै (Sethu Karai)22 किमी

मान्यता: श्री राम ने यहाँ से सेतु-निर्माण (वानर-सेना द्वारा) प्रारम्भ किया

कोथन्डरामस्वामी मंदिर, धनुष्कोडि18 किमी

विभीषण के राज्याभिषेक का स्थान-मान्यता; 1964 के विनाशकारी चक्रवात में सुरक्षित बचा एकमात्र भवन

रामनाथपुरम् बीच (Pamban Beach)1.5 किमी

मन्नार खाड़ी पर शांत समुद्र-तट; नये पम्बन सेतु से दृष्टि-योग्य

नये पम्बन सेतु (New Pamban Bridge — 6 अप्रैल 2025)5 किमी

PM श्री मोदी द्वारा 6 अप्रैल 2025 को उद्घाटित — भारत का प्रथम वर्टिकल-लिफ्ट समुद्र-रेलवे पुल; ~2.08 किमी लम्बा; बीच का खण्ड बड़े जहाज़ों के निकलने के लिए ऊपर उठ सकता है; भारतीय रेलवे स्वामी।

अब्दुल कलाम स्मारक (Abdul Kalam Memorial), पेइ कारुम्बु4.5 किमी

रामेश्वरम् मूल-निवासी पूर्व राष्ट्रपति डॉ॰ ए॰पी॰जे॰ अब्दुल कलाम का राष्ट्रीय स्मारक

मूल चार धाम (आदि शंकराचार्य निर्धारित)

दक्षिण-धाम — रामेश्वरम्। अन्य 3: द्वारका (पश्चिम), पुरी जगन्नाथ (पूर्व), बद्रीनाथ (उत्तर)। आदि शंकराचार्य द्वारा सम्पूर्ण भारत-राष्ट्र की भू-सांस्कृतिक एकता हेतु प्रतिष्ठित।

4 मंदिर

द्वादश ज्योतिर्लिंग यात्रा

12 ज्योतिर्लिंगों में दक्षिणतम; आदि शंकराचार्य के द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र अनुसार

12 मंदिर

काशी-रामेश्वर यात्रा (सेतु-समुद्र की रेत-वापसी)

विशिष्ट परंपरा: काशी (वाराणसी) के विश्वनाथ का जल लाकर रामेश्वर के ज्योतिर्लिंग पर अभिषेक; तत्पश्चात् रामेश्वर की रेत वापस काशी में अर्पण। दोनों ज्योतिर्लिंगों के बीच यह 'आत्म-संयोग' यात्रा।

276 पाडल पेथ्रा स्थलम् (Paadal Petra Sthalams)

तेवारम् के 63 नायन्मार-सन्तों द्वारा गाये गये 276 शैव-क्षेत्रों में रामेश्वर सम्मिलित

276 मंदिर

श्री राम कथा यात्रा — सेतु-बंधन (राम जन्म से लंका-यात्रा)

रामेश्वरम् = सेतु-बंधन एवं लंका-वापसी का स्थल। पूर्ण यात्रा: अयोध्या (जन्म) → चित्रकूट → पंचवटी → हम्पी (किष्किन्धा) → रामेश्वरम् (सेतु) → लंका

10
मार्गदर्शन

यात्रा एवं संपर्क

पता
अरुलमिगु रामनाथस्वामी मंदिर, रामेश्वरम् — 623526, रामनाथपुरम् जिला, तमिलनाडु
हवाई अड्डा
मदुरै हवाई अड्डा (IXM) — रामेश्वरम् से ~175 किमी सड़क मार्ग; चेन्नई हवाई अड्डा (MAA) — ~600 किमी
रेलवे
रामेश्वरम् रेलवे स्टेशन (RMM) — मंदिर से ~1.5 किमी; 6 अप्रैल 2025 से नये पम्बन सेतु (~2.08 किमी, वर्टिकल लिफ्ट) के माध्यम से मण्डपम मुख्य भूमि से जुड़ा
उत्तम ऋतु
अक्टूबर-मार्च सर्वोत्तम; तापमान 22-32°C। अप्रैल-जून अत्यन्त गर्म एवं आर्द्र; जुलाई-सितम्बर मानसून।
12 किमीMandapam
20 किमीDhanushkodi
22 किमीSethu Karai
175 किमीMadurai
240 किमीTiruchirappalli
600 किमीChennai
575 किमीBangalore
305 किमीKanyakumari
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