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Sagar · Uttarakhand

श्री रुद्रनाथ महादेव मंदिर

श्री रुद्रनाथ महादेव मंदिर — सागर ट्रेक, ज़िला चमोली, उत्तराखण्ड

रुद्रनाथ — तृतीय केदार (पञ्च केदार क्रम में चौथा); शिव के मुख-अर्विन्द (मुख) का प्रकटन-स्थल; नीलकण्ठ महादेव

अन्य नाम: रुद्रनाथ · नीलकण्ठ महादेव · मुख-केदार

  • पञ्च केदार
  • ऊँचाई: 3,559 मीटर
  • पञ्च केदार के 5 ट्रेकों में सर्वाध…
  • गोपीनाथ मंदिर गोपेश्वर
श्री रुद्रनाथ महादेव मंदिर
दर्शन समय
06:00 (खुले-सत्र मई-अक्टूबर; प्रातः आरती 06:00-08:00) – 19:30 (खुले-सत्र; सायं आरती 18:30-19:30)
स्वरूप
स्वयंभू प्राकृतिक शिला-मुख
स्थान
Sagar · Uttarakhand
उत्तम ऋतु
मई-जून
काल
अति-प्राचीन

इस मन्दिर की विशेषता

  • पञ्च केदार — मुख (मुख-अर्विन्द) प्रकटन-स्थल; अन्य 4: केदारनाथ (कूबड़), तुङ्गनाथ (बाहु), मध्यमहेश्वर (नाभि), कल्पेश्वर (केश)
  • ऊँचाई: 3,559 मीटर (11,677 फुट) — पञ्च केदार-तालिका; कतिपय स्रोत 3,600 मीटर अंकित करते हैं
  • पञ्च केदार के 5 ट्रेकों में सर्वाधिक-कठिन; स्थानीय कहावत — 'रुद्रनाथ की चढ़ाई, जर्मन की लड़ाई'
  • गोपीनाथ मंदिर गोपेश्वर — शीतकालीन गद्दी (~24 किमी)
01
मूल विग्रह

मुख्य देव एवं स्वरूप

श्री रुद्रनाथ महादेव — पाण्डव-पञ्च केदार कथा अनुसार शिव का मुख (मुख-अर्विन्द) यहाँ प्रकट; स्वयंभू ~3-फुट प्राकृतिक शिला-प्रक्षेपण मुख-आकार; नेत्र एवं मूँछों पर स्वर्ण-आभूषण; नीलकण्ठ महादेव-स्वरूप पूज्य; शीतकाल में उत्सव-मूर्ति का गोपीनाथ मंदिर (गोपेश्वर) में स्थानान्तरण

स्वयंभू प्राकृतिक शिला-मुख (पञ्च केदार में अद्वितीय मुख-iconography); प्रतिदिन रात्रि-अनावरण

सम्प्रदाय: शैव — पाण्डव-पञ्च केदार परंपरा; पुजारी गोपेश्वर के भट्ट एवं तिवारी ब्राह्मण

02
स्थल-पुराण

कथा, इतिहास एवं महत्व

पाण्डव-पञ्च केदार कथा (महाभारत-उत्तर परंपरा)

कुरुक्षेत्र-युद्ध-पश्चात् गोत्र-हत्या एवं ब्रह्म-हत्या के पाप-निवारण हेतु पाण्डव शिव-शरण; काशी → गुप्तकाशी → केदारक्षेत्र में शिव-अवश्वेषण; शिव नन्दि-रूप; भीम ने पहचाना; नन्दि पृथ्वी में लीन एवं 5-स्थानों पर पुनः प्रकट; रुद्रनाथ पर मुख का प्रकटन

संत एवं परम्परा

  • पाण्डव — मन्दिर-निर्माण की परम्परागत-मान्यता
  • गोपेश्वर के भट्ट एवं तिवारी ब्राह्मण — पुजारी-वंश
  • श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मन्दिर समिति (BKTC) — आधुनिक प्रशासन (1939 अधिनियम)

ऐतिहासिक घटनाक्रम

  1. 1939BKTC गठन (1939 अधिनियम); रुद्रनाथ सहित ~45 अधीनस्थ मन्दिरों का प्रबंधन; उत्तराखण्ड सरकार-स्वायत्त निकायbadrinath-kedarnath.gov.in (BKTC आधिकारिक)
03
नित्य उपासना

दर्शन समय एवं आरती

06:00 (खुले-सत्र मई-अक्टूबर; प्रातः आरती 06:00-08:00) से 19:30 (खुले-सत्र; सायं आरती 18:30-19:30) तक

प्रातः आरती06:00-08:00
दैनिक (मई-अक्टूबर)
प्रातः दर्शन08:00-13:00
दैनिक
मध्याह्न-विश्राम13:00-16:00
दैनिक (मन्दिर बन्द)
सायं दर्शन एवं आरती16:00-19:30
दैनिक

विशेष नियम: केवल पैदल-पहुँच (सागर से ~20-22 किमी ट्रेक); पञ्च केदार में सर्वाधिक-कठिन ट्रेक; पनार/लिति बुग्याल पर रात्रि-विश्राम; अनुशंसित 3-दिवसीय राउण्ड-ट्रिप; मानसून-त्याज्य

04
दर्शन

दर्शन के प्रकार

सामान्य निःशुल्क दर्शननिःशुल्क
समय
08:00-13:00 + 16:00-19:30 (खुले-सत्र मई-अक्टूबर)
उपयुक्त
सभी श्रद्धालु

BKTC-मन्दिर — कोई प्रवेश-शुल्क नहीं; केवल पैदल-पहुँच।

नारद-कुण्ड पूर्व-दर्शन स्नाननिःशुल्क

दर्शन-पूर्व नारद-कुण्ड पर पारंपरिक स्नान।

पितृधार पिण्ड-दान
उपयुक्त
पितृ-कर्म

मार्ग पर पितृधार रिज (~4,000 मी) — पितृ-तर्पण एवं पिण्ड-दान-स्थल; स्थानीय परम्परा अनुसार गया-तुल्य।

शीतकाल गोपीनाथ गोपेश्वर दर्शन
समय
नवंबर-मई

रुद्रनाथ बन्द होने पर उत्सव-मूर्ति गोपीनाथ मन्दिर (गोपेश्वर) में स्थानान्तरित; कात्यूरी-कालीन (9वीं-11वीं शताब्दी) मन्दिर; ~5 मी अष्ट-धातु त्रिशूल (12वीं शताब्दी) पूज्य।

05
उत्सव

प्रमुख पर्व एवं उत्सव

रुद्रनाथ कपाट उद्घाटन 2026वैशाख (मई)

सोमवार 18 मई 2026 — BKTC-आधिकारिक; उत्सव-मूर्ति गोपीनाथ गोपेश्वर से 14 मई पालकी-शोभायात्रा-प्रारम्भ; 16 मई रुद्रनाथ-स्ट्रेच में पहुँच।

श्रावण-पूर्णिमा वार्षिक मेलाश्रावण पूर्णिमा (रक्षाबन्धन-दिवस)

2026 — शुक्रवार 28 अगस्त 2026; रुद्रनाथ का वार्षिक प्रमुख मेला।

रुद्रनाथ कपाट बन्द 2026कार्तिक (अक्टूबर)

शनिवार 17 अक्टूबर 2026 (BKTC-आधिकारिक); उत्सव-मूर्ति गोपीनाथ गोपेश्वर स्थानान्तरण; दीपावली-पश्चात् औपचारिक शीतकालीन-स्थापना।

महाशिवरात्रि (गोपीनाथ-शीतकालीन-दर्शन)फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी

रुद्रनाथ बन्द; पूजा शीतकालीन-गद्दी गोपीनाथ मन्दिर (गोपेश्वर) पर। 2026 — रविवार 15 फरवरी।

06
आस्था

मनोकामना एवं फल

पञ्च केदार यात्रा-संकल्प (मुख-दर्शन)

पाण्डव-कथा अनुसार शिव-मुख (मुख-अर्विन्द) का प्रकटन-स्थल; पञ्च केदार-यात्रा का मुख-तीर्थ

स्रोत: पाण्डव-पञ्च केदार परम्परा

स्वयंभू शिला-मुख दर्शन-संकल्प (अद्वितीय)

पञ्च केदार में अद्वितीय — मुख (मुख-अर्विन्द) ही प्रधान-प्रतीक; नेत्र एवं मूँछों पर स्वर्ण-आभूषण; नीलकण्ठ-स्वरूप

स्रोत: स्थल-परम्परा + Wikipedia

पितृधार पिण्ड-दान-संकल्प

स्थानीय परम्परा अनुसार पितृधार रिज पर पिण्ड-दान गया-तुल्य; पितृ-तर्पण एवं श्राद्ध-कर्म

स्रोत: स्थानीय-परम्परा

वैतरणी-नदी दर्शन-संकल्प (कॉस्मिक नदी)

मन्दिर-पार्श्व वैतरणी (बैतरणी / रुद्रगङ्गा) नदी — पुराण-परम्परा में पितरों द्वारा पार-कृत मोक्ष-दायिनी नदी से समीकृत; पिण्ड-दान-परम्परा का आधार

स्रोत: Wikipedia + EcoHeritage CPREEC

07
जप

मन्त्र एवं स्तोत्र

  • ॐ नमः शिवाय (पञ्चाक्षरी)मूल मंत्रशैव परम्पराइस मन्दिर हेतु
  • शिव पञ्चाक्षर स्तोत्र (आदि शंकराचार्य)स्तोत्रआदि शंकराचार्यपञ्च केदार-यात्रा-काल में पारायण
  • शिव-आरती 'ॐ जय शिव ओङ्कारा'आरतीशैव परम्पराप्रातः एवं सायं आरती-काल में
08
तीर्थाटन

समीप के तीर्थ एवं परिपथ

सूर्य-कुण्ड + चन्द्र-कुण्ड + तारा-कुण्ड + मान-कुण्ड100 मी

मन्दिर-परिसर के 4 पवित्र-कुण्ड

नारद-कुण्ड200 मी

दर्शन-पूर्व पारम्परिक स्नान-स्थल

वैतरणी / बैतरणी / रुद्रगङ्गा नदी100 मी

पुराण-परम्परा में पितरों द्वारा पार-कृत मोक्ष-दायिनी कॉस्मिक नदी से समीकृत

नन्दि-कुण्ड (Nandi Kund)8 किमी

नन्दि-परम्परा सम्बद्ध कुण्ड; मार्ग पर प्राचीन-लोह तलवारें शिला में स्थापित (किंवदन्ती)

पितृधार रिज (Pitradhar)5 किमी

पितृ-तर्पण एवं पिण्ड-दान-स्थल; स्थानीय परम्परा अनुसार गया-तुल्य

गोपीनाथ मन्दिर, गोपेश्वर (शीतकालीन-गद्दी)24 किमी

रुद्रनाथ की शीतकालीन-गद्दी; कात्यूरी-कालीन (9वीं-11वीं शताब्दी) मन्दिर; ~5 मी अष्ट-धातु त्रिशूल (12वीं शताब्दी) — परम्परा अनुसार शिव द्वारा कामदेव पर प्रक्षेपित

अनुसूया देवी मन्दिर (मण्डल वैकल्पिक-मार्ग)10 किमी

अत्रि-पत्नी अनुसूया-देवी का प्राचीन मन्दिर

बंशी-नारायण मन्दिर15 किमी

विष्णु-मन्दिर; 2-केदार ट्रेक-मार्ग पर मध्य-बिन्दु

पञ्च केदार यात्रा (5-तीर्थ)

मुख-तीर्थ; क्रम: केदारनाथ (कूबड़) → मध्यमहेश्वर (नाभि) → तुङ्गनाथ (बाहु) → रुद्रनाथ (मुख) → कल्पेश्वर (केश)

5 मंदिर · 12 दिन

रुद्रनाथ-कल्पेश्वर 2-केदार ट्रेक

हेलङ्ग → ऊर्गम → कल्पेश्वर → दुमक → बंशी-नारायण → पनार → रुद्रनाथ — 2-केदार-संयुक्त परिक्रमा

2 मंदिर

गोपीनाथ गोपेश्वर शीतकालीन-दर्शन-यात्रा

नवंबर-मई 6 मास तक उत्सव-मूर्ति का गोपीनाथ मन्दिर (गोपेश्वर) पर पूजा

1 मंदिर

09
मार्गदर्शन

यात्रा एवं संपर्क

पता
श्री रुद्रनाथ मन्दिर, सागर-ट्रेक, गोपेश्वर-समीप, ज़िला चमोली, उत्तराखण्ड
हवाई अड्डा
जॉली ग्रांट हवाई अड्डा (DED, देहरादून) — ~258 किमी
रेलवे
ऋषिकेश रेलवे स्टेशन — ~241 किमी
बस-स्टैण्ड
सागर (Saggar) — अन्तिम मोटर-योग्य बिन्दु; गोपेश्वर ~3-5 किमी; गोपेश्वर बस-स्टैण्ड चमोली-ज़िला-हेड-क्वार्टर
उत्तम ऋतु
मई-जून + सितंबर-अक्टूबर सर्वोत्तम; कपाट उद्घाटन 18 मई 2026 सोमवार; श्रावण-पूर्णिमा मेला 28 अगस्त 2026; कपाट बन्द 17 अक्टूबर 2026 शनिवार; मानसून (जुलाई-अगस्त) भू-स्खलन-जोखिम; नवंबर-मई हिमपात-बन्द (गोपीनाथ-शिफ्ट)
22 किमीSagar
24 किमीGopeshwar
26 किमीMandal
90 किमीRudraprayag
50 किमीJoshimath
241 किमीRishikesh
258 किमीJolly Grant Airport
50 किमीChopta
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