अष्टादश शक्ति-पीठ स्तोत्रम्
आदि शंकराचार्य रचित — प्रथम श्लोक: 'लङ्कायां शाङ्करी देवी, कामाक्षी काञ्चिकापुरे । प्रद्युम्ने शृङ्खला देवी, चामुण्डा क्रौञ्चपट्टणे' — शाङ्करी का प्रथम-स्थान शास्त्रीय-प्रमाण
Trincomalee · Eastern Province
श्री शाङ्करी देवी शक्तिपीठ — कोनेश्वरम परिसर, स्वामी रॉक, फोर्ट फ्रेडरिक, त्रिङ्कोमलि, श्रीलङ्का
लङ्कायां शाङ्करी देवी — अष्टादश शक्ति-पीठों का प्रथम पीठ; दक्षिण कैलाश
अन्य नाम: शाङ्करी देवी · मधुमै अम्मन (तमिल — कोनेश्वरम-परिसर में) · लङ्कायां शाङ्करी

इस मन्दिर की विशेषता
श्री शाङ्करी देवी — सती / पार्वती-स्वरूप; 1622 में पुर्तगाली विध्वंस के पश्चात् मूल मूर्ति लुप्त; वर्तमान 1952-निर्मित चार-भुजा देवी-मूर्ति कोनेश्वरम् परिसर के निकट
वर्तमान देवी-मूर्ति: 1952 में स्थानीय तमिल हिन्दू समाज द्वारा पुनः-निर्मित चार-भुजा देवी-स्वरूप; मूल 'सहस्र-स्तम्भ-मण्डप' (हज़ार-खम्भों का मन्दिर) 1622 में लुप्त
सम्प्रदाय: शाक्त — कोनेश्वरम (शिव) परिसर के साथ शाक्त-शैव युगल
आदि शंकराचार्य रचित — प्रथम श्लोक: 'लङ्कायां शाङ्करी देवी, कामाक्षी काञ्चिकापुरे । प्रद्युम्ने शृङ्खला देवी, चामुण्डा क्रौञ्चपट्टणे' — शाङ्करी का प्रथम-स्थान शास्त्रीय-प्रमाण
त्रिङ्कोमलि-माहात्म्य; दक्षिण कैलाश / थेन कैलायम् नामकरण; रावण-शाङ्करी कथा एवं सहस्र-स्तम्भ-मण्डप का निर्माण
लङ्कायां शाङ्करी शक्ति-पीठ की दक्षिणतम-स्थिति
रावण-तपस्या स्थल; विभीषण द्वारा रावण-वध-पश्चात् मन्दिर-पुनर्स्थापना
06:00 से 18:00 तक
मन्दिर खुलने पर प्रथम-पूजा
Tirthayatra के अनुसार देवी-शाल का विस्तृत-समय
वस्त्र-संहिता: घुटनों तक ढका हुआ शालीन-वस्त्र; मन्दिर के भीतर नंगे-पाँव; दोपहर के गर्म-समय में पत्थर के तापमान से बचें
फोटोग्राफी: मन्दिर-परिसर में फोटो अनुमत; फोर्ट फ्रेडरिक-परिधि (नौसेना-क्षेत्र) में फोटोग्राफी प्रतिबंधित
शाङ्करी देवी-शाल का दर्शन निःशुल्क; कोई VIP/सेवा टिकट-तंत्र नहीं।
कोनेश्वरम परिसर में विशेष अभिषेक; शाङ्करी देवी-शाल में देवी-पूजन। 2026 — रविवार 15 फरवरी।
9-दिवसीय देवी-उपासना। 2026 — गुरुवार 19 मार्च से शुक्रवार 27 मार्च।
मन्दिर का प्रमुख वार्षिक रथोत्सव; 22-दिवसीय; तमिल नववर्ष (पुथन्डु) के आस-पास पूर्णता। 2003 में 379-वर्षीय विराम के पश्चात् पुनः-प्रारम्भ। 2026 तमिल पुथन्डु — 14 अप्रैल।
9-रात्रि उत्सव। 2026 घटस्थापना — रविवार 11 अक्टूबर; विजयदशमी — मंगलवार 20 अक्टूबर।
लक्ष्मी-पूजन। 2026 — रविवार 8 नवंबर।
कोनेश्वरम परिसर में पारंपरिक दीप-उत्सव (नवंबर-दिसंबर)।
आदि शंकराचार्य-रचित अष्टादश शक्ति-पीठ स्तोत्रम् का प्रथम-पीठ — 'लङ्कायां शाङ्करी देवी'; यात्रा का प्रारम्भिक-स्थल
स्रोत: अष्टादश शक्ति-पीठ स्तोत्रम् (आदि शंकराचार्य)
सती की जङ्घा (जघन-प्रदेश) यहाँ गिरी; भैरव: त्रिकोणेश्वर / कोणनाथ
स्रोत: देवी भागवत + तंत्र-चूड़ामणि (बहु-स्रोत सहमति)
नागुलेश्वरम (जाफना) + केतीश्वरम (मन्नार) + कोनेश्वरम (त्रिङ्कोमलि) + मुन्नेश्वरम (पुत्तलम) + थोण्डेश्वरम (मतर) — श्रीलङ्का के 5 शिव-मन्दिरों की संयुक्त-यात्रा
स्रोत: स्थल-परंपरा
कोनेश्वरम/त्रिङ्कोमलि (रावण की शिव-तपस्या एवं मन्दिर) + कन्निया (रावण-मातृ-तर्पण) + सीता अम्मन (नुवारा एलिया) + मनवारी (राम-शिवलिङ्ग) + कतरगाम (मुरुगन) + मुन्नेश्वरम (राम-प्रायश्चित्त)
स्रोत: रामायण-परंपरा
त्रिङ्कोमलि = 'दक्षिण कैलाश' / 'थेन कैलायम्' — कैलाश-पर्वत के समान-देशान्तर पर; शिव-शक्ति युगल-दर्शन का दक्षिणतम-स्थल
स्रोत: स्थल-परंपरा
पञ्च ईश्वरम् में सम्मिलित प्रमुख शिव-लिङ्ग; त्रिकोणेश्वर/कोणनाथ; शाङ्करी देवी का संगत भैरव
~400 फुट चट्टान-शिखर; रावण के स्वामी रॉक हिलाने के प्रयास में शिव-कृपा से तलवार-पतन से बना भग्न-चीरा
मूल मन्दिर के पत्थर से 1624 में निर्मित ऐतिहासिक किला
7 गर्म-कुएँ; रावण द्वारा अपनी माँ के अन्तिम-संस्कार-तर्पण हेतु बाण-मार-कर निकाले गए कथा-स्थल
विश्व के सबसे प्राकृतिक-गहरे बन्दरगाहों में से एक; मन्दिर से प्रत्यक्ष-दृश्य
श्रीलङ्का का प्रसिद्ध समुद्र-तट
मई-अक्टूबर स्नॉर्केलिंग-स्थल
1वाँ पीठ (यात्रा का प्रारम्भिक-स्थल) — 'लङ्कायां शाङ्करी देवी'; पश्चात्: कामाक्षी काञ्ची (2)
18 मंदिर
केन्द्रीय शिव-शक्ति युगल — कोनेश्वरम (शाङ्करी सहित) + नागुलेश्वरम (जाफना) + केतीश्वरम (मन्नार) + मुन्नेश्वरम (पुत्तलम) + थोण्डेश्वरम/तेनवरम (मतर)
5 मंदिर · 5 दिन
रावण-शिव-तपस्या एवं मन्दिर-स्थल — कोनेश्वरम/त्रिङ्कोमलि → कन्निया (रावण-मातृ-तर्पण) → सीता अम्मन मन्दिर नुवारा एलिया (सीता-कारावास) → मनवारी (राम-शिवलिङ्ग) → कतरगाम (मुरुगन) → मुन्नेश्वरम (राम-प्रायश्चित्त)
6 मंदिर · 7 दिन