मुद्गल-पुराण
मोरगाँव हेतु 22 अध्याय समर्पित; अष्टविनायक-स्वरूप-गणनना — एकदन्त, महोदर, गजानन, लम्बोदर, विकट, विघ्नराज, धूम्रवर्ण, वक्रतुण्ड
Morgaon · Maharashtra
श्री मयूरेश्वर / मोरेश्वर गणपति मन्दिर — मोरगाँव, करहा नदी-तट, बारामती तालुका, ज़िला पुणे, महाराष्ट्र
मयूरेश्वर / मोरेश्वर — अष्टविनायक का प्रथम एवं अष्टम (आदि एवं अन्त) तीर्थ; गाणपत्य-सम्प्रदाय का आद्य पीठ; मयूर (मोर) पर सवार सिन्धु/सिन्धुरासुर-मर्दन गणेश
अन्य नाम: मयूरेश्वर · मोरेश्वर · श्री क्षेत्र मोरगाँव · आद्य गणेश

इस मन्दिर की विशेषता
श्री मयूरेश्वर/मोरेश्वर — मयूर (मोर) पर सवार गणेश; तीन-नेत्र, चतुर्भुज (पाश, अंकुश, मोदक + वर-मुद्रा); शीश पर नागराज-छत्र; पार्श्व में सिद्धि एवं बुद्धि-ब्रह्म-प्रतिमाएँ; नेत्र एवं नाभि में हीरे जड़े
स्वयंभू वामामुखी (वाम-शुण्ड) गणेश; पूर्व-मुख गर्भगृह; मूल-मूर्ति ब्रह्मा-प्रतिष्ठित; सिन्धुरासुर-असुर के देवक्रोध के पश्चात् पुनः-प्रतिष्ठित एवं पीतल-कवच में आबद्ध
सम्प्रदाय: गाणपत्य-सम्प्रदाय — अष्टविनायक यात्रा का आद्य-पीठ; मुद्गल-पुराण + गणेश-पुराण का प्रधान-तीर्थ
मोरगाँव हेतु 22 अध्याय समर्पित; अष्टविनायक-स्वरूप-गणनना — एकदन्त, महोदर, गजानन, लम्बोदर, विकट, विघ्नराज, धूम्रवर्ण, वक्रतुण्ड
त्रेता-युग कथा: चक्रपाणि-उग्र-पुत्र दैत्य सिन्धु (सिन्धुरासुर) सूर्य से अमृत-कलश प्राप्त-कर त्रिलोक-त्रास; देव-प्रार्थना पर गणेश मयूरेश्वर-रूप अवतार — षड्भुज, श्वेत-वर्ण, मयूर-वाहन; सेनापति कमलासुर-वध; इसी-स्थान पर सिन्धु-वध; ब्रह्माण्ड के तीन-श्रेष्ठ-गणेश-धामों में मयूरपुरी (मोरगाँव) सम्मिलित
बाल-गणेश ने रहस्यमय-अण्ड फोड़ा; उससे जो मयूर निकला उसने वाहन-स्वीकृति इस-शर्त पर दी कि उसका नाम गणेश-नाम-पूर्व आए — मयूर + ईश्वर = मयूरेश्वर
05:00 से 22:30 तक
विशेष नियम: गर्भगृह में फोटोग्राफी निषिद्ध; स्वतन्त्र-संकल्प-पूजा निषिद्ध (केवल पुजारी-मध्यस्थ); प्रायोजित-अभिषेक एवं षोडशोपचार-पूजा ट्रस्ट-कार्यालय से बुकिंग
वर्ष-पर्यन्त 365-दिन खुला; निःशुल्क वाहन-पार्किङ्ग।
चिञ्चवड देवस्थान ट्रस्ट-कार्यालय से बुकिंग।
दान-राशि ₹50; ट्रस्ट-संचालित।
पारम्परिक नियम — यात्रा मोरगाँव से प्रारम्भ + 7-अन्य-तीर्थों के पश्चात् मोरगाँव-समापन; प्रारम्भ-काल बंधन-संकल्प; समापन-काल बंधन-मुक्ति।
सोमवार 14 सितंबर 2026 (Drik Panchang महाराष्ट्र-सर्वसम्मति); अश्विन शुक्ल तक मास-पर्यन्त समारोह।
गणेश-जन्म-दिवस; प्रमुख-समारोह।
विजय-दशमी प्रशस्ति।
विशेष शोभायात्रा-परम्परा।
मासिक-गणेश-व्रत; चन्द्र-दर्शन-पश्चात् पारणा।
गाणपत्य-सम्प्रदाय का आद्य-पीठ; अष्टविनायक यात्रा का प्रथम-तीर्थ; प्रारम्भ-काल सङ्कल्प-बन्धन
स्रोत: गणेश-पुराण + मुद्गल-पुराण
7-अन्य-तीर्थों के पश्चात् मोरगाँव-समापन का पारम्परिक-नियम; यात्रा-समापन-काल सङ्कल्प-मुक्ति-दर्शन
स्रोत: अष्टविनायक-यात्रा-परम्परा
विघ्न-हर्ता गणेश-स्वरूप; कार्य-आरम्भ-काल विघ्न-निवारण-सङ्कल्प; सिद्धि + बुद्धि-ब्रह्म-प्रतिमा-पार्श्व — सर्व-कार्य-सिद्धि एवं विवेक-प्राप्ति
स्रोत: गणेश-पुराण
सिन्धु/सिन्धुरासुर-मर्दन कथा-प्रतीक — शत्रु-विजय एवं भयापसारण
स्रोत: गणेश-पुराण
मोरया गोसावी की मासिक चिञ्चवड-मोरगाँव पद-यात्रा-परम्परा अनुसरण; गाणपत्य-सम्प्रदाय-दीक्षा
स्रोत: Wikipedia Morya Gosavi + LiveHistoryIndia
कृत-युग में शङ्कर-पार्वती-द्वारा गणेश-पूजा-स्थल; मोरया गोसावी-तपस्या-स्थल
मोरगाँव की पवित्र नदी; स्नान-तीर्थ
खण्डोबा-शिव-मार्तण्ड-भैरव; महाराष्ट्र का प्रमुख खण्डोबा-तीर्थ
मुलामुथा नदी-सङ्गम; चिन्तामणि-गणेश; पेशवा माधवराव-समाधि-स्थल
अष्टविनायक यात्रा-क्रम-अनुसार द्वितीय-तीर्थ; भीमा नदी-तट; उत्तर-मुख दक्षिणामूर्ति गणेश
मोरया गोसावी-मुख्य-पीठ; 'गणपति बाप्पा मोरया' जयघोष-उद्भव; गाणपत्य-सम्प्रदाय-केन्द्र
12वीं-शताब्दी शिव-मन्दिर; होयसल-शैली पाषाण-शिल्प
तालुका मुख्यालय; होटल-निवास-व्यवस्था
प्रथम + अष्टम (आदि + अन्त) तीर्थ; क्रम: 1. मोरगाँव (मयूरेश्वर) → 2. सिद्धटेक (सिद्धिविनायक) → 3. पाली (बल्लालेश्वर) → 4. महाड (वरदविनायक) → 5. थेऊर (चिन्तामणि) → 6. लेण्याद्री (गिरिजात्मज) → 7. ओझर (विघ्नेश्वर) → 8. रांजणगाँव (महागणपति) → **मोरगाँव-समापन (अनिवार्य)**
8 मंदिर · 3 दिन
मोरया गोसावी की मासिक चिञ्चवड-मोरगाँव पद-यात्रा-परम्परा; गाणपत्य-सम्प्रदाय-केन्द्र
2 मंदिर
पुणे-नगर से एक-दिवसीय आध्यात्मिक-परिक्रमा
3 मंदिर