वाल्मीकि रामायण
बाल काण्ड + अयोध्या काण्ड — कोसल राजधानी अयोध्या का वर्णन
Ayodhya · Uttar Pradesh
श्री राम जन्मभूमि / श्री राम मंदिर
अन्य नाम: राम मंदिर · श्री राम मंदिर · अयोध्या राम मंदिर · रामलला मंदिर

इस मन्दिर की विशेषता
श्री रामलला (श्री राम का 5-वर्षीय बाल-स्वरूप)
गर्भगृह में प्रतिष्ठित 51-इंच कृष्ण-शिला मूर्ति — मूर्तिकार श्री अरुण योगिराज (जन्म 15 दिसंबर 1983, मैसूरु, कर्नाटक; विश्वकर्मा ब्राह्मण समुदाय; पाँच पीढ़ी की मूर्तिकार परंपरा — पिता योगिराज शिल्पी (राज्य पुरस्कार-विजेता), पितामह बी॰ बसवन्ना शिल्पी (मैसूरु महल के कलाकार, 1983 राष्ट्रीय पुरस्कार); MBA डिग्री लेकर भी 2008 में मूर्तिकला में लौटे)। पत्थर बुज्जेगौड़नापुरा गाँव, हेगडादेवनकोटे तालुक, मैसूरु जिले से — अनुमानित 2.5 अरब वर्ष प्राचीन। कृष्ण-शिला के चयन का कारण: 'दूध, जल आदि तरलों से कोई रासायनिक प्रतिक्रिया नहीं — दैनिक अभिषेक के लिए आदर्श'। साथ ही 1949 की 'रामलला विराजमान' मूर्ति उत्सव-मूर्ति के रूप में।
सम्प्रदाय: वैष्णव
बाल काण्ड + अयोध्या काण्ड — कोसल राजधानी अयोध्या का वर्णन
वैष्णव खण्ड — अयोध्या माहात्म्य (10 अध्याय, 990 श्लोक); अध्याय 10 अयोध्या तीर्थयात्रा को समर्पित
जन्मस्थान विघ्नेश्वर के उत्तर-पूर्व, वसिष्ठ कुण्ड के उत्तर एवं लोमश आश्रम के पश्चिम स्थित
अयोध्या — आदिपुरी, विष्णु की प्रथम नगरी; 7 मोक्षदायिनी सप्तपुरियों में प्रथम; सरयू तट पर तमसा एवं घाघरा संगम के निकट
बाल काण्ड — श्री राम के अयोध्या में जन्म एवं बाल लीलाओं का वर्णन
07:00 से 21:30 तक · मध्याह्न विश्राम 11:30-14:00 (भोग आरती एवं विश्राम)
दिन की प्रथम आरती; पास आवश्यक — केवल आधिकारिक online.srjbtkshetra.org से निःशुल्क बुकिंग
देव-श्रृंगार के समय; पास आवश्यक
देव-शयन के समय; दिन की अंतिम आरती
रामलला का गर्भगृह दर्शन; क्यू में प्रतीक्षा। मध्याह्न में भोग एवं विश्राम हेतु मंदिर बंद।
OTP-आधारित निःशुल्क पंजीकरण; निर्धारित समय-स्लॉट; समर्पित प्रवेश-लेन। पास 100% निःशुल्क।
प्रत्येक आरती के लिए अलग निःशुल्क पास; सीमित स्थान
मंदिर का प्रमुख वार्षिक पर्व — भगवान् श्री राम के जन्मदिवस का उत्सव। 2024 से अद्वितीय 'सूर्य तिलक' अनुष्ठान: मध्याह्न ठीक 12:00 बजे लगभग 3-4 मिनट तक सूर्य की किरणें मूर्ति के मस्तक पर पड़ती हैं — OPTICA बेंगलुरु + CBRI रुड़की + भारतीय तारा भौतिकी संस्थान (IIA) बेंगलुरु द्वारा निर्मित ऑप्टिकल प्रणाली (लेंस + दर्पण + चान्द्र-पंचांग गियर मैकेनिज़्म) सूर्य की स्थिति को प्रति वर्ष राम नवमी पर ठीक से सेट करता है। पंचधातु निर्माण, स्प्रिंग-रहित डिज़ाइन, शताब्दी-लंबा जीवन। साथ ही अभिषेक, श्रृंगार, वैदिक मंत्रोच्चार। राम नवमी 2026 — 26-27 मार्च।
भीड़: अत्यंत भीड़; सुगम पास 1+ माह पूर्व बुक करें
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित — सरयू तट के 55 घाटों पर लाखों दीप। दीपोत्सव 2024 ने दो गिनीज विश्व रिकॉर्ड बनाये: (1) सबसे बड़ा तेल-दीप प्रदर्शन = 25,12,585 दीप; (2) सबसे अधिक लोग एक साथ 'दीप परिक्रमा' = 1,121 वेदाचार्य। पिछला रिकॉर्ड (2023): 22,23,676। 2019 का रिकॉर्ड: राम की पैड़ी पर 4.5 लाख दीप।
भीड़: घाटों पर सायं 5-7 बजे चरम भीड़; होटल 2-3 माह पूर्व बुक करें
अयोध्या नगरी की 56 किमी परिधि की पवित्र परिक्रमा — श्री राम के राज्य की प्राचीन सीमा का प्रतीक; मार्ग में 5000+ मंदिर; 3-5 दिन में पूर्ण। प्राण-प्रतिष्ठा के बाद 2024 की 14 कोसी परिक्रमा में 30 लाख तीर्थयात्री सम्मिलित।
14 कोसी की लघु संस्करण; देवोत्थानी एकादशी से प्रारंभ; अयोध्या के मुख्य तीर्थ-स्थलों की परिक्रमा
श्री राम-सीता विवाह का स्मरणोत्सव; मंदिर में विशेष श्रृंगार एवं पूजन
रावण-वध का उत्सव; अयोध्या-नगर में रामलीला परंपरा
अयोध्या 7 मोक्षदायिनी सप्तपुरियों में प्रथम — विष्णु की 'आदिपुरी'
स्रोत: स्कन्द पुराण, वैष्णव खण्ड, अयोध्या माहात्म्य
श्री रामरक्षास्तोत्र का नित्य पाठ — विष्णु सहस्रनाम का फल; सर्व-संकट निवारण
स्रोत: श्री रामरक्षास्तोत्र फलश्रुति (बुधकौशिक ऋषि)
'श्रीराम' तारक मंत्र — समस्त पापों से मुक्ति
स्रोत: रामायण एवं रामचरितमानस की सर्वत्र मान्यता
76 सीढ़ियों पर स्थित चार-कोणीय किले-सदृश मंदिर; गुफा में हनुमानजी का निवास माना जाता है — जन्मभूमि/रामकोट के रक्षक। मंगलवार-शनिवार चरम भीड़। राम-यात्रा हनुमान गढ़ी दर्शन के बिना अधूरी मानी जाती है।
'सोने का महल' — परंपरानुसार माता कैकेयी द्वारा सीता-राम को विवाह-उपहार; केवल सीता-राम युगल मूर्ति; स्वर्ण-मुकुट, रजत-छत वाला गर्भगृह
श्री राम के अश्वमेध यज्ञ स्थल पर स्थित; काले-पाषाण की प्राचीन मूर्तियाँ (राम, सीता, लक्ष्मण, हनुमान, भरत, शत्रुघ्न) — सम्राट विक्रमादित्य द्वारा स्थापित मान्यता
श्री राम के पिता राजा दशरथ का राजमहल; पारंपरिक वास्तुकला का प्राचीन भवन
मान्यतानुसार श्री राम के पुत्र कुश द्वारा स्थापित — अयोध्या के प्राचीनतम शिव मंदिरों में
सरयू नदी पर 14 पवित्र घाटों की शृंखला; मान्यता: वनवास से पूर्व श्री राम ने इसी स्थान पर सरयू स्नान किया; दैनिक सरयू आरती सायं 5-6 बजे (काशी गंगा आरती समकक्ष); 7:30 PM लेज़र शो; 2019 दीपोत्सव में 4.5 लाख दीप का गिनीज रिकॉर्ड
केन्द्र-बिंदु एवं समापन-स्थल — श्री राम की राज्य-सीमा की परिक्रमा
5000 मंदिर · 3 दिन
केन्द्र-बिंदु
केन्द्रीय आरम्भ-बिंदु — पाँच ज़िलों में विस्तृत वृहद् परिक्रमा
अयोध्या = सप्तपुरियों की 'आदिपुरी' (प्रथम मोक्षदायिनी नगरी); 7 नगरियाँ: अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार, काशी, काँची, उज्जैन, द्वारका
7 मंदिर
जन्मस्थान — यात्रा का आरम्भ-बिंदु; आगे: चित्रकूट, पंचवटी, हम्पी (किष्किन्धा), रामेश्वरम् (सेतुबंध)