श्री श्रीनाथजी (श्रीकृष्ण 7-वर्षीय बाल-गोवर्धन-धारी रूप) — स्व-प्रकट (स्वयम्भू) काले-संगमर्मर बस-राहत-मूर्ति गोवर्धन-पर्वत से; बाँया-हाथ ऊपर उठा (गोवर्धन-धारणा-मुद्रा), दाँया-हाथ कमर पर; जीवन्त-बाल-स्वरूप-उपासना (दिन में 8-बार वस्त्र-परिवर्तन); उप-देवता: नवनीतप्रियजी (नाथद्वारा-निवास); विट्ठलनाथजी (गोविन्दजी का गृह)
स्वयम्भू बाल-कृष्ण-मूर्ति काले-संगमर्मर बस-राहत; गोवर्धन-पर्वत-धारक रूप (विष्णु-इन्द्र-गर्व-शमन-कथा-केन्द्र); 8-दिन-बार वस्त्र-परिवर्तन परम्परा
सम्प्रदाय: पुष्टि-मार्ग (कृपा-मार्ग) — वल्लभाचार्य (1479-1530/31; तेलुगु ब्राह्मण) स्थापित; पुत्र विट्ठलनाथजी (गुसाईंजी) ने सम्प्रदाय-संस्थागत किया; उनके 7 पुत्रों ने 7 प्रमुख-स्वरूप ग्रहण किए (श्रीनाथजी ज्येष्ठ-पुत्र-गिरिधर के पास); प्रशासन: नाथद्वारा मन्दिर अधिनियम 1959 (राजस्थान); नाथद्वारा मन्दिर मण्डल (निगम); तिलकायत महाराज वंशानुगत-संरक्षक-प्रबन्धक-न्यासी (स्वामी नहीं — 1959-अधिनियम-अनुसार); वर्तमान तिलकायत: श्री इन्द्रदमनजी ('राकेशजी') महाराज (एकल-स्रोत-flag)