अष्टादश शक्ति-पीठ स्तोत्रम्
आदि शंकराचार्य रचित — प्रथम श्लोक: 'लङ्कायां शाङ्करी देवी, कामाक्षी काञ्चिकापुरे । प्रद्युम्ने शृङ्खला देवी, चामुण्डा क्रौञ्चपट्टणे' — शृङ्खला का 3रा-पीठ शास्त्रीय-प्रमाण
Pandua · West Bengal
श्री शृङ्खला देवी शक्ति-पीठ — प्रद्युम्ननगर (आधुनिक पाण्डुआ, ज़िला हुगली, पश्चिम बंगाल)
शृङ्खला देवी — प्रद्युम्ने शृङ्खला; अष्टादश शक्ति-पीठ का 3रा पीठ; उदर-खण्ड शक्ति-पीठ; भवतारिणी पीठम्
अन्य नाम: शृङ्खला देवी · श्रृंखला देवी · भवतारिणी पीठम् · प्रद्युम्ने शृङ्खला · उदर-पीठ

इस मन्दिर की विशेषता
श्री शृङ्खला देवी — काली/दुर्गा-स्वरूप के रूप में पूज्य; 'शृङ्खला' का अर्थ: शिव से बन्धन एवं मातृ-प्रसवोत्तर मेखला; मूल मूर्ति 13वीं-14वीं शताब्दी में विध्वंस के पश्चात् लुप्त
मूल देवी-मूर्ति लुप्त (13वीं-14वीं शताब्दी विध्वंस-पश्चात्); स्थल पर वर्तमान में पाण्डुआ मीनार (125 फुट, 5-तल ASI N-WB-69) एवं बारी मस्जिद/बाईस दरवाज़ा मस्जिद (~1340 ईस्वी) के अवशेष; मस्जिद के पाषाण-स्तम्भों पर घण्टा-शृङ्खला, मकर, कीर्तिमुख, माला-अलंकार के हिन्दू मन्दिर के पुनः-प्रयुक्त शिल्प-प्रमाण
सम्प्रदाय: शाक्त (शास्त्रीय) — वर्तमान में कोई सक्रिय हिन्दू मन्दिर नहीं; मासिक अमावस्या-पूजा (2022 से) देवोत्थान-प्रयास
आदि शंकराचार्य रचित — प्रथम श्लोक: 'लङ्कायां शाङ्करी देवी, कामाक्षी काञ्चिकापुरे । प्रद्युम्ने शृङ्खला देवी, चामुण्डा क्रौञ्चपट्टणे' — शृङ्खला का 3रा-पीठ शास्त्रीय-प्रमाण
स्कन्ध 7 — दक्ष-यज्ञ-कथा एवं सती के अंगों का पतन; प्रद्युम्ननगर बंग-देश में उदर-खण्ड का पतन
51 शक्ति-पीठ-सूची में प्रद्युम्ननगर सम्मिलित; भवतारिणी पीठम् के रूप में निरूपण
06:00 से 20:00 तक · मध्याह्न विश्राम ASI-संरक्षित-क्षेत्र खुला 06:00-20:00; कोई सक्रिय हिन्दू-मन्दिर नहीं — कोई आरती/भोग चक्र नहीं
ASI-संरक्षित-स्थल; मीनार-अन्तर्भाग बन्द; पाषाण-स्तम्भों पर हिन्दू-शिल्प दृश्य
30 मई 2022 से देवोत्थान-प्रयास
मीनार एवं मस्जिद-अवशेष का बाह्य-दर्शन; पुनः-प्रयुक्त हिन्दू पाषाण-स्तम्भों पर घण्टा-शृङ्खला, मकर एवं कीर्तिमुख-अलंकार दृश्य।
माघ-मास में स्थानीय मेला-ताला महोत्सव — हिन्दू एवं मुस्लिम दोनों समाजों का मीनार-परिसर पर एकत्र-समावेश।
30 मई 2022 से प्रत्येक अमावस्या पर देवोत्थान-पूजा।
स्थानीय मीनार-परिसर पर एकत्र; माघ पूर्णिमा प्रमुख तिथि। 2026 माघ-स्नान-काल: 3 जनवरी - 15 फरवरी 2026; माघ पूर्णिमा: रविवार 1 फरवरी 2026।
स्थल का शिव-शक्ति युगल-स्वरूप; आगन्तुक श्रद्धालुओं द्वारा बाह्य-संकल्प। 2026 — रविवार 15 फरवरी।
30 मई 2022 से संयुक्त हिन्दू मोर्चा द्वारा प्रति-अमावस्या आयोजित।
बंगाल का सर्वोच्च-पर्व; आगन्तुक श्रद्धालु संकल्प हेतु पधारते हैं। 2026 घटस्थापना — रविवार 11 अक्टूबर; विजयदशमी — मंगलवार 20 अक्टूबर।
आदि शंकराचार्य-रचित अष्टादश स्तोत्रम् का 3रा पीठ — 'प्रद्युम्ने शृङ्खला देवी'; पूर्व: कामाक्षी काँची (2); पश्चात्: चामुण्डा क्रौञ्च-पट्टण (4)
स्रोत: अष्टादश शक्ति-पीठ स्तोत्रम्
कालीघाट + बहुला + बक्रेश्वर + तारापीठ + नलहाटी + कङ्कालीतला + अट्टहास + शृङ्खला (पाण्डुआ) + युगाद्या + योगाद्या — बंगाल शाक्त-तीर्थ चक्र का अनिवार्य पड़ाव
स्रोत: बंगाल शाक्त-परंपरा
एकमात्र 51-शक्ति-पीठ जहाँ हिन्दू पहुँच निरन्तर अनुपलब्ध; देवोत्थान-समर्थन एवं संकल्प
स्रोत: स्थल-इतिहास
125 फुट, 5-तल मीनार + 70.4m × 12.8m मस्जिद; पाषाण-स्तम्भों पर घण्टा-शृङ्खला, मकर, कीर्तिमुख — मूल हिन्दू मन्दिर के पुनः-प्रयुक्त शिल्प-प्रमाण
अद्वितीय 13-शिखर तांत्रिक मन्दिर
19वीं शताब्दी (1841-1861) मोहम्मद मोहसिन-निर्मित इमामबाड़ा
17वीं शताब्दी प्रारम्भ पुर्तगाली चर्च; हुगली इमामबाड़ा से 25 मिनट
बंगाल का प्रमुख शैव-तीर्थ
श्री रामकृष्ण परमहंस का जन्मस्थल
3रा पीठ — 'प्रद्युम्ने शृङ्खला देवी'; पूर्व: कामाक्षी काँची (2); पश्चात्: चामुण्डा क्रौञ्च-पट्टण (4)
18 मंदिर
कालीघाट → बहुला → बक्रेश्वर → तारापीठ → नलहाटी → कङ्कालीतला → अट्टहास → शृङ्खला (पाण्डुआ) → युगाद्या → योगाद्या
10 मंदिर · 9 दिन
पाण्डुआ (शृङ्खला + मीनार) → हंसेश्वरी (बँसबेरिया) → बँडल चर्च → हुगली इमामबाड़ा → तारकेश्वर
5 मंदिर · 2 दिन