शिव पुराण
कोटिरुद्र संहिता — सोमनाथ-माहात्म्य; चन्द्र-देव की दक्ष-शाप-कथा
Veraval · Gujarat
श्री सोमनाथ महादेव — आदि-ज्योतिर्लिंग
अन्य नाम: सोमनाथ महादेव · देव-पाटन · प्रभास-पाटन का सोमेश्वर · आदि ज्योतिर्लिंग

इस मन्दिर की विशेषता
श्री सोमनाथ महादेव (शिव — चन्द्र-देव द्वारा प्रतिष्ठित प्रथम ज्योतिर्लिंग)
स्वयंभू शिवलिंग — गर्भगृह में मूल ज्योतिर्लिंग
सम्प्रदाय: शैव
कोटिरुद्र संहिता — सोमनाथ-माहात्म्य; चन्द्र-देव की दक्ष-शाप-कथा
प्रभास खण्ड — प्रभास क्षेत्र एवं सोमनाथ का विस्तृत वर्णन
स्कन्ध 11 — श्रीकृष्ण का अन्तिम महाप्रस्थान प्रभास क्षेत्र में (भालका तीर्थ)
मौसल पर्व — प्रभास क्षेत्र में यदु-वंश का अन्त एवं श्रीकृष्ण का देहत्याग
सोम-सूक्त — सोम-देव की प्राचीन स्तुति
06:00 से 21:00 तक
दिन की प्रथम आरती
मुख्य ज्योतिर्लिंग दर्शन निःशुल्क। मोबाइल फोन, कैमरा, चमड़े की वस्तुएँ, बैग वर्जित — मुख्य द्वार पर निःशुल्क लॉकर उपलब्ध।
श्री सोमनाथ ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट से ऑनलाइन पूजा एवं प्रसाद की बुकिंग।
वर्ष का सर्वोच्च पर्व — विशेष अभिषेक, रुद्राभिषेक, रात्रि-जागरण, चार-प्रहर पूजा। दर्शन-समय विस्तारित। 2026 — 15 फरवरी रविवार।
सोमनाथ का सबसे बड़ा वार्षिक मेला — 5 दिनों का सांस्कृतिक एवं धार्मिक आयोजन; प्रथम दिन सायंकालीन उद्घाटन; मध्य-रात्रि विशेष अर्चना एवं महा-आरती; अरब-सागर पर असंख्य दीप; कार्तिक स्नान की पूर्णता। 2026 — 24 नवम्बर मंगलवार।
सम्पूर्ण मास शिव-उपासना; प्रति सोमवार विशेष रुद्राभिषेक; लाखों कांवड़िये एवं भक्त
जब अमावस्या सोमवार को आये — चन्द्र-देव से सम्बद्ध सोमनाथ का विशेष मास-पर्व
भालका तीर्थ (मंदिर से 5 किमी) पर विशेष आयोजन — श्रीकृष्ण के अन्तिम-लीला स्थल पर। 2026 — 4 सितंबर शुक्रवार (वैष्णव)
सोमनाथ चन्द्र-देव द्वारा प्रतिष्ठित; कुण्डली में चन्द्र-दोष, अमावस्या-दोष, मानसिक अस्थिरता हेतु सोमनाथ-दर्शन एवं रुद्राभिषेक श्रेष्ठ माने जाते हैं
स्रोत: शिव पुराण कोटिरुद्र संहिता + ज्योतिष-शास्त्र परंपरा
आदि शंकराचार्य के द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र अनुसार 12 ज्योतिर्लिंगों की यात्रा का प्रथम तीर्थ सोमनाथ; 12 ज्योतिर्लिंग दर्शन से सात जन्मों के पाप-नाश
स्रोत: द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र (आदि शंकराचार्य)
8 बार विध्वंस के बाद पुनर्निर्माण — 'अमृतत्व का प्रतीक'; सरदार पटेल का 1947 पुनर्निर्माण-संकल्प स्वतंत्र भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक माना जाता है
स्रोत: ऐतिहासिक एवं राष्ट्रीय परंपरा
प्रभास क्षेत्र — श्रीकृष्ण के अन्तिम-लीला (भालका तीर्थ) एवं देहत्याग का स्थल; द्वापर-कलियुग संधि-क्षेत्र; मोक्ष-दायी तीर्थ
स्रोत: श्रीमद् भागवत पुराण स्कन्ध 11 + महाभारत मौसल पर्व
तीन पवित्र नदियों — कपिला, हिरण्या एवं सरस्वती — का अरब-सागर में अद्भुत त्रिवेणी संगम; सरदार पटेल ने इसी संगम के जल से सोमनाथ पुनर्निर्माण का संकल्प लिया (13 नवम्बर 1947)। प्रभास क्षेत्र का मूल पवित्र-तीर्थ।
श्रीकृष्ण के अन्तिम-लीला का स्थल — पीपल-वृक्ष के नीचे विश्राम करते समय व्याध 'जरा' द्वारा पैर में हिरण-समझकर बाण लगा; श्रीकृष्ण ने व्याध को क्षमा-दान दिया एवं वहीं देह-त्याग। द्वापर युग समापन एवं कलियुग आरम्भ का संधि-स्थल।
श्रीकृष्ण के देह-उत्सर्ग के पश्चात् अंतिम-संस्कार स्थल; भगवद्गीता-पाठ मंदिर
सोमनाथ ट्रस्ट का प्राचीन शिल्प-संग्रहालय; पुरातत्व-अवशेष
प्रभास-पाटन का प्राचीन सूर्य मंदिर
प्रथम ज्योतिर्लिंग — 'सौराष्ट्रे सोमनाथं च' (आदि शंकराचार्य द्वादश-ज्योतिर्लिंग स्तोत्र के प्रथम पद में स्तुत)
12 मंदिर
गुजरात के 2 ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख; द्वारका-कृष्ण-धाम के साथ संयुक्त यात्रा
केन्द्रीय; 4-तीर्थ-समूह की पूर्ण यात्रा 1-2 दिनों में
श्रीकृष्ण के द्वारका-जीवन से अन्तिम-देहत्याग तक की यात्रा का समापन-स्थल