विष्णु-पुराण + ब्रह्म-पुराण + मत्स्य-पुराण + भागवत-पुराण
अनन्त-शयन विष्णु-स्तुति; अनन्त-पद्मनाभ-धाम-वर्णन
Thiruvananthapuram · Kerala
श्री (अनन्त) पद्मनाभस्वामी मन्दिर — पश्चिम नाडा, पूर्व किला (East Fort), पजहवङ्गाडी, तिरुवनन्तपुरम् (त्रिवेन्द्रम्), केरल
श्री अनन्त-पद्मनाभस्वामी — विश्व का सर्वाधिक-धनी हिन्दू-मन्दिर; त्रावणकोर-राजवंश का प्रमुख-इष्ट-देव; 108 दिव्य-देशम में सम्मिलित; अनन्त-शयन विष्णु; 18-फुट मूर्ति 12,008 शालिग्राम-शिला + कटु-शर्करा-योगम् आयुर्वेदिक-लेपन से निर्मित — विश्व-अद्वितीय
अन्य नाम: पद्मनाभस्वामी · अनन्त-पद्मनाभ · श्री पद्मनाभ · त्रिवेन्द्रम् पद्मनाभस्वामी

इस मन्दिर की विशेषता
श्री अनन्त-पद्मनाभस्वामी — महाविष्णु अनन्त-शयन (योग-निद्रा) पञ्च-फण आदिशेष/अनन्त-नाग पर शयन; 18-फुट मूर्ति; नाभि से कमल-निःसरण उस पर ब्रह्मा-आसीन; दक्षिण-हस्त शिवलिङ्ग पर स्थापित; पार्श्व में श्रीदेवी (लक्ष्मी) एवं भूदेवी; ऋषि भृगु एवं मार्कण्डेय कटु-शर्करा-योगम्-निर्मित गर्भगृह में स्थित
12,008 शालिग्राम-शिला (नेपाल गण्डकी नदी से लाये) से निर्मित + कटु-शर्करा-योगम् (~108 आयुर्वेदिक-घटक: औषधीय-वनस्पति, गुड़/शर्करा, बालू, बन्धक-द्रव्य) से लिप्त — विश्व-अद्वितीय निर्माण; मुख्य-मूर्ति पर अभिषेक निषिद्ध (केवल कटु-शर्करा-योगम्-संरक्षण-हेतु); पुष्प-निकासन मयूर-पिच्छ से (शिला-क्षति-निवारण); 906 ME / 1731 ईस्वी अनिज़म तिरुनाल मार्तण्ड वर्मा द्वारा पुनः-प्रतिष्ठा
सम्प्रदाय: वैष्णव — श्री वैष्णव परम्परा (केरल विशिष्ट); त्रावणकोर-राजवंश-दीक्षा; पद्मनाभदास-परम्परा (राजा-गण देवता के सेवक); केवल-हिन्दू-प्रवेश; पारम्परिक-वेश-नियम कठोर
अनन्त-शयन विष्णु-स्तुति; अनन्त-पद्मनाभ-धाम-वर्णन
108 दिव्य-देशम में मङ्गलाशासनम्; अल्वार-पासुर-गायित
ऋषि विल्वमङ्गलाथु स्वामियार ने विष्णु-दर्शन-प्रार्थना की; प्रभु ने बाल-स्वरूप-धारण-कर पूजा-विग्रह-अपवित्र किया; ऋषि-दण्ड-पश्चात् बालक 'अनन्तंकाडु में मुझे ढूँढो' कह-कर अदृश्य हो गया; ऋषि ने पुलय-स्त्री के बालक-तर्जना-स्वर सुना, अनुसरण-कर इलुप्पा (भारतीय-नवनीत-वृक्ष) में बालक का विलीनीकरण देखा; पतित-वृक्ष ने अनन्त-शयन विष्णु का स्वरूप-धारण किया; प्रथम-नैवेद्य पुलय-स्त्री द्वारा नारियल-खोल में चावल-कांजी + उप्पुमांग (नमक-आम) — परम्परा आज-तक
अनन्त-पद्मनाभ का प्रथम-प्रकटन कासरगोड-ज़िले अनन्तपुर झील-मन्दिर पर (केरल का एकमात्र झील-मन्दिर; 9वीं-शताब्दी; मूर्ति बैठ-स्वरूप); तिरुवनन्तपुरम् अनन्त-शयन-स्वरूप का प्रमुख-धाम
03:30 से 21:00 तक
विशेष नियम: केवल-हिन्दू-प्रवेश (कठोर-नियम); गैर-हिन्दू केवल हलफनामा-हस्ताक्षर-पश्चात्; पारम्परिक-वेश-नियम कठोर — पुरुष: मुण्डु/धोती कमर-नीचे, छाती-नग्न (अङ्गवस्त्र-वैकल्पिक), कोई शर्ट/पैण्ट नहीं (प्रवेश-पर भाड़े पर उपलब्ध); स्त्री: साड़ी, मुण्डुम-नेरियथुम्, अर्ध-साड़ी, या स्कर्ट-ब्लाउज़ (सलवार के ऊपर धोती-लपेट अनिवार्य); मुख्य-मूर्ति पर अभिषेक निषिद्ध (कटु-शर्करा-योगम्-संरक्षण); गर्भगृह-फोटोग्राफी पूर्ण-निषिद्ध
ओत्तक्कल-मण्डपम् से एक-मूर्ति को 3 पृथक-द्वारों से दर्शन: मुख-शिवलिङ्ग + नाभि-ब्रह्मा + चरण — विश्व-अद्वितीय।
₹150 (बिना-प्रसादम्) / ₹180 (प्रसादम्-सहित); 06:30-07:00।
₹250 दो-व्यक्ति; 20:30-21:00।
ब्रह्म-मुहूर्त-काल पूर्व-पूजा-दर्शन।
1750 त्रिप्पडि-दानम्-स्मरण; राज्य-समर्पण-संकल्प-तीर्थ।
365¼ एक-शिला-उत्कीर्ण ग्रेनाइट-स्तम्भ (सौर-वर्ष के प्रत्येक-दिन हेतु एक); स्तम्भ-गणना-परिक्रमा।
28 पाषाण-स्तम्भ जिन्हें ताड़न से 7 सङ्गीत-स्वर उत्पन्न होते हैं।
10-दिवसीय; पूर्व-प्रवेश पर पाण्डव-फायबरग्लास-प्रतिमा-स्थापना; दिन-9 पल्लिवेट्ट (राज-शिकार); समापन अरट्टु शोभायात्रा शङ्खुमुखम् समुद्र-तट पर उत्सव-मूर्तियों के समुद्र-स्नान-हेतु; पश्चिमी-द्वार पर 1001 तोप-गोले की सलामी।
10-दिवसीय; अनुष्ठान पैन्कुनी के समान; समान शङ्खुमुखम् अरट्टु समुद्र-स्नान-समापन।
त्रावणकोर-महाराजा शोभायात्रा-नेतृत्व पैदल, तलवार-धारी; सुसज्जित-हाथी; पद्मनाभ-वाहन स्वर्ण, अन्य रजत।
मार्तण्ड वर्मा द्वारा 1750-संस्थापित; ऋग्-यजुर्-साम वेद-पारायण; 6-वर्ष में एक-बार; मकर सङ्क्रान्ति पर लक्ष-दीपम् समापन।
मुरजपम्-समापन; 1 लाख तेल-दीप पूरे-मन्दिर-परिसर में प्रज्ज्वलित; 6-वर्षीय; नवीनतम जनवरी 2026; अगला ~जनवरी 2032।
नवरात्रि-समारोह।
विश्व का एकमात्र मन्दिर जहाँ एक-मूर्ति को 3 पृथक-द्वारों से दर्शन; पूर्ण-विष्णु-दर्शन (मुख-नाभि-चरण) हेतु अद्वितीय-संकल्प
स्रोत: Britannica + Wikipedia + East Indian Traveller बहु-स्रोत
मार्तण्ड वर्मा का पूर्ण-राज्य-समर्पण-आदर्श; भगवान को पूर्ण-आत्म-समर्पण-संकल्प-तीर्थ; पद्मनाभदास-दीक्षा
स्रोत: HinduPost + Wikipedia Marthanda Varma
नेपाल-गण्डकी-नदी-से-लाए 12,008 शालिग्राम-शिला + कटु-शर्करा-योगम्-निर्मित विश्व-अद्वितीय मूर्ति-दर्शन
स्रोत: spst.in आधिकारिक + Wikipedia + Kirtankar बहु-स्रोत
विश्व का सर्वाधिक-धनी हिन्दू-मन्दिर ~$22 अरब-कोष; 5/6 वौल्ट-उद्घाटित; भगवान की सर्व-समृद्धि-संकल्प-तीर्थ
स्रोत: Wikipedia Treasure + LiveHistoryIndia
विश्व का एकमात्र अबन्ध-वौल्ट; नागबन्धनम्-सीलबन्द; गरुड-मन्त्र-सिद्ध-योगी-मात्र-उद्घाटन-योग्य; तान्त्रिक-रहस्य-दर्शन-संकल्प
स्रोत: EDTimes + LiveHistoryIndia
6-वर्ष में एक-बार; 1 लाख तेल-दीप-प्रज्ज्वलन; मुरजपम् 56-दिवसीय वेद-पारायण-समापन-दिवस; अनुपम-तीर्थानुभव
स्रोत: Cultural Heritage of India + Kerala Tourism
365¼ एक-शिला-स्तम्भ — सौर-वर्ष के प्रत्येक-दिन हेतु एक; काल-चक्र-संकल्प-तीर्थ
स्रोत: Kerala Tourism + Wikipedia
पैन्कुनी एवं अल्पशि उत्सवम्-समापन अरट्टु शोभायात्रा का समुद्र-स्नान-स्थल; उत्सव-मूर्तियों का अनुष्ठानिक-समुद्र-स्नान
16वीं-शताब्दी त्रावणकोर-राजवंश-राजधानी-महल; सर्वाधिक-वृहत् भारतीय काष्ठ-महल; पद्मनाभ-राजवंश-इतिहास-केन्द्र
28 पाषाण-स्तम्भ; ताड़न से 7 सङ्गीत-स्वर उत्पन्न
365¼ एक-शिला-उत्कीर्ण ग्रेनाइट-स्तम्भ; सौर-वर्ष के प्रत्येक-दिन हेतु एक
अनन्त-पद्मनाभ का प्रथम-प्रकटन-स्थल; केरल का एकमात्र झील-मन्दिर; 9वीं-शताब्दी; मूर्ति बैठ-स्वरूप
विश्व-प्रसिद्ध समुद्र-तट; तीर्थ-पर्यटन-संयोजन
विश्व का सर्वाधिक-वृहत् स्त्री-तीर्थ-संगम (अट्टुकल पोङ्गाला); Guinness Records
केरल-दिव्य-देशम-समूह में सम्मिलित; अल्वार-मङ्गलाशासनम्-गायित
108 मंदिर
अनन्त-पद्मनाभस्वामी (मूल-तीर्थ) + पद्मनाभपुरम् पैलेस (राजधानी-महल) + अनन्तपुर झील-मन्दिर (मूल-स्थानम् कासरगोड) — त्रिविध-दर्शन-संयोजन
3 मंदिर
पद्मनाभस्वामी + अट्टुकल भगवती + शङ्खुमुखम् समुद्र-तट + कोवलम् — एक-दिवसीय
4 मंदिर