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Srirangam · Tamil Nadu

श्री रङ्गनाथस्वामी मन्दिर

श्री रङ्गनाथस्वामी मन्दिर (पेरिय कोइल / पेरिय कोविल) — श्रीरङ्गम द्वीप (कावेरी + कोल्लिडम सङ्गम-मध्य), ज़िला तिरुचिरापल्ली, तमिलनाडु

श्री रङ्गनाथस्वामी — 108 दिव्य देशम का प्रथम (पेरिय कोइल — महान-मन्दिर); विश्व का सर्वाधिक-वृहत् क्रियाशील हिन्दू-मन्दिर (156 एकड़); 8 स्वयं व्यक्त क्षेत्र (स्व-प्रकट विष्णु) में प्रथम; 5 पञ्च-रङ्ग क्षेत्र (कावेरी-तट) में अन्त्य-रङ्ग; श्री वैष्णव-सम्प्रदाय एवं श्री रामानुजाचार्य का प्रमुख-पीठ; भूलोक वैकुण्ठ-नाम-धारी

अन्य नाम: रङ्गनाथस्वामी मन्दिर · पेरिय कोइल / पेरियकोविल (महान-मन्दिर) · तिरुवरङ्ग तिरुपति · भूलोक वैकुण्ठ · भोगमण्डबम् · अन्त्य-रङ्ग

  • 108 दिव्य देशम का प्रथम
  • 8 स्वयं व्यक्त क्षेत्र
  • 5 पञ्च-रङ्ग क्षेत्र
  • विश्व का सर्वाधिक-वृहत् क्रियाशील…
श्री रङ्गनाथस्वामी मन्दिर
दर्शन समय
06:00 – 21:00
स्वरूप
अनन्त-शेष-शायी विष्णु
स्थान
Srirangam · Tamil Nadu
उत्तम ऋतु
अक्टूबर-मार्च सर्वोत्तम मौसम
काल
सङ्गम-कालीन

इस मन्दिर की विशेषता

  • 108 दिव्य देशम का प्रथम (पेरिय कोइल)
  • 8 स्वयं व्यक्त क्षेत्र (अष्टाक्षर क्षेत्र — 'ॐ नमो नारायणाय' 8-अक्षर) में प्रथम; अन्य: श्रीमुष्णम्, वेङ्कटाद्रि (तिरुपति), सालिग्रामम्, नैमिषारण्य, तोताद्रि, पुष्कर, बद्रीनाथ
  • 5 पञ्च-रङ्ग क्षेत्र (कावेरी-तट) में अन्त्य-रङ्ग — अन्य: आदि-रङ्ग श्रीरङ्गपटना, मध्य-रङ्ग शिवनासमुद्र, अप्पल-रङ्ग कोविलाडि, परिमल-रङ्ग इन्दालुर
  • विश्व का सर्वाधिक-वृहत् क्रियाशील हिन्दू-मन्दिर 156 एकड़ (63 हेक्टेयर; परिधि ~4 किमी); 7 सङ्केन्द्रीय प्राकार + 21 गोपुरम + 81 उप-शाला + 39 मण्डपम + 12 तीर्थम
  • 73 मीटर (239.5 फुट) राजगोपुरम — एशिया का सर्वाधिक-ऊँचा मन्दिर-गोपुरम (1987-प्रतिष्ठा-काल; पश्चात् मुरुदेश्वर द्वारा अधिक्रमित)
  • UNESCO एशिया-प्रशान्त सांस्कृतिक-धरोहर सम्मान-पुरस्कार 2017; UNESCO अस्थायी विश्व-धरोहर सूची-प्रविष्टि 5894
01
मूल विग्रह

मुख्य देव एवं स्वरूप

श्री रङ्गनाथ — विष्णु अनन्त-शेष-शायन (ब्रह्माण्डीय सर्प आदिशेष पर शयन); गर्भगृह में 6 मीटर (~20 फुट) लम्बी मूर्ति; आदिशेष की 5-फण (3½-कुण्डलित) शीश के नीचे; दक्षिण-मुख (विभीषण-कथा अनुसार लंका-दिशा-अभिमुख); स्वर्ण-विमान प्रणवाकार (तमिल 'ॐ' स्वरूप) — रङ्ग विमान

अनन्त-शेष-शायी विष्णु — स्वयं व्यक्त (स्व-प्रकट); विश्व-वैष्णव-तीर्थ का प्रथम; पट्ट-महिषी रङ्गनायकी ठायार (लक्ष्मी) — स्वतन्त्र-शाला + 'पडि ताण्डाद पत्नी' (कभी देहली-पार न करने वाली पत्नी)-उपाधि

सम्प्रदाय: श्री वैष्णव सम्प्रदाय (तेङ्कलै उप-सम्प्रदाय); श्री रामानुजाचार्य (1017-1137 ईस्वी) का प्रमुख-पीठ; आचार्य की संरक्षित-देह 5वें प्राकार के दक्षिण-पश्चिम-कोण में 'तिरुवरसु'-शाला में स्थापित; पुजारी रामानुज-नियुक्त 74-शिष्य-वंशज तेङ्कलै आयङ्गर

02
स्थल-पुराण

कथा, इतिहास एवं महत्व

रामायण-विभीषण-कथा (दक्षिण-मुख रङ्गनाथ)

राम-राज्याभिषेक-पश्चात् विभीषण को रङ्गनाथ-मूर्ति वर-स्वरूप; लंका-वापसी-काल कावेरी-तट पर मूर्ति स्थापित; उठाने पर मूर्ति स्थायी-हुई; विभीषण-निवेदन पर विष्णु ने यहाँ-नित्य-निवास का वचन दिया परन्तु मुख लंका (दक्षिण)-दिशा-अभिमुख — आज भी दक्षिण-मुख

श्रीरङ्ग-माहात्म्य

रङ्ग-क्षेत्र-माहात्म्य; 8 स्वयं-व्यक्त-क्षेत्र-गणना; 5 पञ्च-रङ्ग-क्षेत्र-वर्णन

दिव्य-प्रबन्धम् (नालायिर दिव्य प्रबन्धम् — 12 आळ्वार-गायित 4000 तमिल-पासुर)

108 दिव्य-देशम-गायन; श्रीरङ्गम-प्रथम-दिव्य-देशम; 11 आळ्वार-पासुर-गायित (सबसे अधिक — किसी-भी-दिव्य-देशम पर)

संत एवं परम्परा

  • आचार्य श्री रामानुज (1017-1137 ईस्वी; 120 वर्ष) — श्री वैष्णव-सम्प्रदाय-स्थापना एवं प्रमुख-पीठ; संरक्षित-देह 5वें प्राकार दक्षिण-पश्चिम-कोण 'तिरुवरसु'-शाला में 888+ वर्ष — वर्ष में 2-बार चन्दन-केसर-कर्पूर-लेप
  • 12 आळ्वार सन्त-वंश (तिरुप्पाण-आळ्वार, तिरुमङ्गै-आळ्वार, आण्डाल, नम्म-आळ्वार आदि) — दिव्य-प्रबन्धम् रचना
  • नाथमुनि एवं यामुनाचार्य — पूर्व-आचार्य; रामानुज-गुरु-वंश
  • वेदान्त देशिक — 1323 ईस्वी सल्तनत-आक्रमण-काल गर्भगृह-ईंट-दीवार-निर्माण (मूर्ति-संरक्षण-हेतु) एवं पश्चात्-प्राकट्य
  • पिल्लै लोकाचार्य — 1323-आक्रमण-काल मूल-मूर्ति-तिरुमला-गुप्तीकरण (~60 वर्ष)
  • मणवाल मामुनिगल (तेङ्कलै-सम्प्रदाय-आचार्य) — रामानुज-पश्चात्
  • 44वें जीयर अहोबिल-मठ (श्री मुक्कूर अळगिय सिङ्गर) — राजगोपुरम-समापन (25 मार्च 1987 प्रतिष्ठा)
  • अच्युत देवराय विजयनगर (16वीं शताब्दी) — राजगोपुरम-नींव-आधार; ~400 वर्ष अधूरा रहा
  • तमिलनाडु सरकार HR&CE विभाग — आधुनिक-प्रशासन (3-न्यासी + अध्यक्ष + कार्यकारी-अधिकारी); दशावतार-शाला अहोबिल-मठ-संचालित (एकमात्र अपवाद)

ऐतिहासिक घटनाक्रम

  1. 1137श्री रामानुजाचार्य की देह-त्यागावस्था; 'तिरुवरसु'-शाला में चन्दन-केसर-कर्पूर-लेप-संरक्षण-परम्परा-प्रारम्भ — 888+ वर्ष से वर्ष में 2-बार लेप (अन्य कोई-संरक्षक-पदार्थ नहीं); आसन-मुद्रा में, ज्ञान-मुद्रा-धारी, नख-दर्शनीयSannidhi.net + Wikipedia + 6+ बहु-स्रोत
  2. 1323दिल्ली-सल्तनत (मुहम्मद बिन तुगलक-काल; मलिक काफूर / उलूग खान) का श्रीरङ्गम-आक्रमण; जन-संहार; मूल-मूर्ति पिल्लै लोकाचार्य द्वारा तिरुमला-गुप्तीकरण ~60 वर्ष; रङ्गनायकी उत्सव-मूर्ति बिल्व-वृक्ष-नीचे दफनाई गई; वेदान्त-देशिक द्वारा गर्भगृह-ईंट-दीवार-निर्माण-संरक्षण; पश्चात्-पुनः-प्राकट्यOpIndia + Aanmeegam + Wikipedia बहु-स्रोत
  3. 198725 मार्च 1987 — 44वें जीयर अहोबिल-मठ (श्री मुक्कूर अळगिय सिङ्गर) द्वारा 73-मीटर राजगोपुरम-समापन एवं प्रतिष्ठा; एशिया का सर्वाधिक-ऊँचा मन्दिर-गोपुरम तत्कालीन-कालAhobila Mutt आधिकारिक + ramanuja.org
  4. 2015महा-कुम्भाभिषेकम् + ₹20 करोड़ धरोहर-जीर्णोद्धार (UNESCO-पुरस्कार-कारण)The News Minute + Deccan Chronicle
  5. 2017UNESCO एशिया-प्रशान्त सांस्कृतिक-धरोहर-संरक्षण सम्मान-पुरस्कार; 43-आवेदनों (10 देशों) में दक्षिण-भारत का एकमात्र धार्मिक-स्थलThe News Minute + Deccan Chronicle
03
नित्य उपासना

दर्शन समय एवं आरती

06:00 से 21:00 तक

सुप्रभातम् + विश्व-रूप सेवा06:00-07:15
दैनिक
तिरुमञ्जनम्08:00
दैनिक
प्रातः दर्शन09:00-12:00
दैनिक
मध्याह्न-विश्राम (कुछ-शाला बन्द)12:00-13:15
दैनिक
अपराह्न दर्शन13:15-18:00
दैनिक
सायरत्चै आरती18:00
दैनिक
रात्रि दर्शन एवं समापन18:00-21:00
दैनिक
उत्सव-काल — 04:00 से मध्य-रात्रि-पश्चात् तक विस्तार04:00-23:30+
उत्सव-काल

विशेष नियम: गर्भगृह-फोटोग्राफी निषिद्ध; द्वीप-पहुँच कावेरी-कोल्लिडम सेतु-द्वारा; पुजारी तेङ्कलै-सम्प्रदाय-वंशज; गैर-हिन्दू कतिपय-शाला-तक पहुँच-नियन्त्रित; तेङ्कलै-वडकलै सम्प्रदाय-तिलक-भेद-नियम-अधीन

04
दर्शन

दर्शन के प्रकार

सामान्य निःशुल्क दर्शननिःशुल्क
समय
06:00-21:00 (मध्याह्न-अपवाद; उत्सव-काल विस्तार)
उपयुक्त
सभी श्रद्धालु

विश्व का सर्वाधिक-वृहत् मन्दिर-परिसर; 7 प्राकार + 21 गोपुरम पैदल-परिक्रमा।

विशेष सशुल्क दर्शन (HR&CE)

विशेष-कतार दर्शन-टिकट HR&CE-काउण्टर से।

तिरुवरसु — रामानुजाचार्य संरक्षित-देह-दर्शननिःशुल्क

5वें प्राकार के दक्षिण-पश्चिम-कोण; आसन-मुद्रा-ज्ञान-मुद्रा-धारी; 888+ वर्ष-चन्दन-केसर-कर्पूर-संरक्षण।

1000-स्तम्भ मण्डपम् (आयिरम् काल मण्डपम्)निःशुल्क

वस्तुतः 953 ग्रेनाइट-स्तम्भ; 16वीं शताब्दी; अश्व-सवार, द्वारपालक, विष्णु-दशावतार, ध्वनि-स्तम्भ (musical pillars) उत्कीर्ण।

शेष-रायर मण्डपम् (अश्वारोही-स्तम्भ)निःशुल्क

1000-स्तम्भ-दक्षिण; 41×32 मी; एक-शिला अश्वारोही-व्याघ्र-वध स्तम्भ; होयसल (~1200 ईस्वी) + कृष्णदेव राय-तुलुव विजयनगर-अलङ्करण।

11 आळ्वार-पासुर-दिव्य-प्रबन्धम् पारायण-संकल्प

किसी-भी-दिव्य-देशम पर सर्वाधिक 11 आळ्वार-पासुर-संख्या — 108-दिव्य-देशम-यात्रा-प्रारम्भ-संकल्प।

वैकुण्ठ एकादशी परमपद वासल / स्वर्ग वासल
समय
20 दिसंबर 2026

वर्ष में केवल इसी-दिन खुलता है; 20-दिवसीय वैकुण्ठ-एकादशी-उत्सव-काल (पगल-पत्तु 10 + इरा-पत्तु 10) में ~10 लाख वार्षिक श्रद्धालु।

05
उत्सव

प्रमुख पर्व एवं उत्सव

वैकुण्ठ एकादशी 2026 (20-दिवसीय)मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी (तमिल मार्गळि)

रविवार 20 दिसंबर 2026 (Drik Panchang); 20-दिवसीय उत्सव — पगल पत्तु (दिवस-10) + इरा पत्तु (रात्रि-10); परमपद वासल / स्वर्ग वासल केवल इसी-दिन खुलता है; ~10 लाख वार्षिक श्रद्धालु; श्रीरङ्गम का सर्वाधिक-प्रमुख-उत्सव।

पङ्गुनि उत्तरम् ब्रह्मोत्सवम् 2026 (कल्याण-उत्सव)पङ्गुनि (फाल्गुन-चैत्र) उत्तर-नक्षत्र

ध्वजारोहणम् 24 मार्च 2026 (मङ्गलवार); रङ्गनाथ-रङ्गनायकी सेर्ति सेवै (दिव्य-सङ्गम) 1 अप्रैल 2026 — कल्याण-समापन। गरुड-वाहन, हनुमन्त-वाहन, रथ-शोभायात्रा।

आदि ब्रह्मोत्सवम्आषाढ (तमिल आडि)

10-दिवसीय आदि-ब्रह्मोत्सव।

चित्रा पौर्णमीचैत्र पूर्णिमा

चित्रा-नक्षत्र पूर्णिमा-उत्सव।

तेप्पोत्सवम् (तीर्थवारी / जल-तैरण-उत्सव)थैमास (पौष-माघ)

मन्दिर-तीर्थ-कुण्ड में रङ्गनाथ-रङ्गनायकी-तैरण-शोभायात्रा।

पवित्रोत्सवम्श्रावण

मन्दिर-पवित्रीकरण-उत्सव।

रामानुज जयन्ती (तिरुवादिरै)चित्तिरै (चैत्र) तिरुवादिरै-नक्षत्र

श्री रामानुजाचार्य जन्म-वर्षगाँठ; तिरुवरसु-शाला विशेष-अभिषेक।

06
आस्था

मनोकामना एवं फल

108 दिव्य-देशम यात्रा-प्रारम्भ-संकल्प (प्रथम-दिव्य-देशम)

108 दिव्य-देशम का प्रथम (पेरिय कोइल) — यात्रा-प्रारम्भ-संकल्प-तीर्थ; 11 आळ्वार-पासुर-गायित (सर्वाधिक)

स्रोत: दिव्य-प्रबन्धम् + OneIndiaOnline

वैकुण्ठ-प्रवेश-संकल्प (वैकुण्ठ एकादशी परमपद वासल)

वैकुण्ठ-एकादशी पर परमपद वासल/स्वर्ग वासल केवल इसी-दिन खुलता है — वैकुण्ठ-प्रवेश-दर्शन-संकल्प; भूलोक वैकुण्ठ-नाम-धारी मन्दिर

स्रोत: Drik Panchang + Wikipedia Vaikuntha Ekadashi

8 स्वयं-व्यक्त-विष्णु-क्षेत्र यात्रा-संकल्प

8 स्वयं-व्यक्त (अष्टाक्षर) क्षेत्र में प्रथम; अष्टाक्षर मूल-मन्त्र 'ॐ नमो नारायणाय' 8-अक्षर-प्रथम-अक्षर-प्रतिनिधि

स्रोत: Hindu Blog + Wikipedia

श्री रामानुजाचार्य-सम्प्रदाय-दीक्षा संकल्प (तिरुवरसु-दर्शन)

श्री रामानुज-संरक्षित-देह-दर्शन 888+ वर्ष; श्री वैष्णव-सम्प्रदाय-दीक्षा-तीर्थ; गद्य-त्रय-पारायण-संकल्प

स्रोत: Sannidhi.net + Wikipedia

5 पञ्च-रङ्ग-क्षेत्र यात्रा-समापन (अन्त्य-रङ्ग)

कावेरी-तट 5-पञ्च-रङ्ग-क्षेत्र का अन्त्य-रङ्ग — अन्तिम-तीर्थ; त्रि-रङ्ग दर्शन (आदि + मध्य + अन्त्य) एक-दिवसीय-संकल्प

स्रोत: Wikipedia Pancharanga Kshetrams

विभीषण-कथा-दक्षिण-मुख-दर्शन-संकल्प

विभीषण के लिए दक्षिण (लंका)-मुख — विभीषण-कथा-स्थल; शरण-गति-संकल्प

स्रोत: Wikipedia Vibhishana

07
जप

मन्त्र एवं स्तोत्र

  • ॐ नमो नारायणाय (अष्टाक्षर मूल-मन्त्र)मूल मन्त्रवैष्णव परम्परा — 8-स्वयं व्यक्त क्षेत्रों का 8-अक्षर-प्रतिनिधित्वइस मन्दिर हेतुश्रीरङ्गम 8-स्वयं-व्यक्त-क्षेत्र में प्रथम; अष्टाक्षर का प्रथम-अक्षर
  • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय (द्वादशाक्षर)मन्त्रवैष्णव परम्परा
  • नालायिर दिव्य प्रबन्धम् (4000 तमिल पासुर)तमिल वैष्णव स्तोत्र12 आळ्वार-सन्त (9-10वीं शताब्दी)इस मन्दिर हेतुश्रीरङ्गम — 11 आळ्वार-पासुर-गायित दिव्य-देशम — सर्वाधिक
  • रङ्गनाथ-अष्टकम् (आदि शङ्कराचार्य)स्तोत्रआदि शङ्कराचार्यइस मन्दिर हेतु
  • विष्णु सहस्रनाम स्तोत्रस्तोत्रमहाभारत अनुशासन पर्व
  • श्री रामानुज-प्रपन्न-मन्त्र एवं गद्य-त्रयगद्य-स्तोत्रश्री रामानुज (1017-1137)इस मन्दिर हेतुश्री रामानुजाचार्य-रचित — श्रीरङ्गम तिरुवरसु-दर्शन-काल पारायण
08
तीर्थाटन

समीप के तीर्थ एवं परिपथ

तिरुवानैक्कोइल / जम्बुकेश्वर मन्दिर (पञ्च भूत स्थलम् — जल)3 किमी

5 पञ्च भूत स्थलम् (शिव-पञ्च-भूत-तत्त्व-मन्दिर) में जल-तत्त्व; अप्पु-लिङ्ग; अकिलाण्डेश्वरी-शक्ति; द्वीप-समीप शैव-वैष्णव-संगम

रॉक-फोर्ट उच्ची-पिल्लयार मन्दिर (तिरुचिरापल्ली)12 किमी

तिरुचि-रॉक-फोर्ट पर उच्च गणेश-मन्दिर; ऐतिहासिक-दर्शन

थायुमानवर / थिरुवरङ्गुलम् मन्दिर10 किमी

63 नायन्मार-शिव-तीर्थ

श्रीरङ्गम द्वीप कावेरी-कोल्लिडम-घाट500 मी

कावेरी एवं कोल्लिडम-तट-घाट; स्नान-तीर्थ

108 दिव्य देशम (वैष्णव यात्रा-शृङ्खला)

प्रथम (पेरिय कोइल) दिव्य-देशम; यात्रा-प्रारम्भ-तीर्थ; 11 आळ्वार-पासुर-गायित (सर्वाधिक)

108 मंदिर · 30 दिन

8 स्वयं-व्यक्त विष्णु-क्षेत्र (अष्टाक्षर-क्षेत्र)

प्रथम; क्रम: श्रीरङ्गम → श्रीमुष्णम् → वेङ्कटाद्रि-तिरुपति → सालिग्रामम् → नैमिषारण्य → तोताद्रि → पुष्कर → बद्रीनाथ

8 मंदिर

5 पञ्च-रङ्ग-क्षेत्र कावेरी-तट यात्रा (त्रि-रङ्ग एक-दिवसीय)

अन्त्य-रङ्ग; क्रम: आदि-रङ्ग श्रीरङ्गपटना (कर्नाटक) → मध्य-रङ्ग शिवनासमुद्र → अन्त्य-रङ्ग श्रीरङ्गम; + अप्पल-रङ्ग कोविलाडि + परिमल-रङ्ग इन्दालुर

5 मंदिर

श्री वैष्णव-सम्प्रदाय आचार्य-यात्रा (रामानुजाचार्य पीठ-दर्शन)

प्रमुख-पीठ; तिरुवरसु-संरक्षित-देह-दर्शन; मेळुकोटे (कर्नाटक) + तिरुनारायणपुरम् + अहोबिलम् + तिरुकोष्टियूर-संयुक्त

5 मंदिर

09
मार्गदर्शन

यात्रा एवं संपर्क

पता
श्री रङ्गनाथस्वामी मन्दिर, श्रीरङ्गम द्वीप (कावेरी + कोल्लिडम सङ्गम-मध्य), ज़िला तिरुचिरापल्ली, तमिलनाडु — PIN 620006
हवाई अड्डा
तिरुचिरापल्ली अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (TRZ) — ~15 किमी
रेलवे
तिरुचिरापल्ली जङ्क्शन (Trichy Junction; TPJ) — ~10-12 किमी; श्रीरङ्गम स्टेशन (SRGM) — मन्दिर-समीप 1-2 किमी
बस-स्टैण्ड
श्रीरङ्गम बस-स्टैण्ड (मन्दिर-समीप); तिरुचिरापल्ली Central Bus Stand (~12 किमी) से शहर-बस-सेवा
उत्तम ऋतु
अक्टूबर-मार्च सर्वोत्तम मौसम; वैकुण्ठ एकादशी 20 दिसंबर 2026 + 20-दिवसीय उत्सव; पङ्गुनि उत्तरम् ब्रह्मोत्सवम् 24 मार्च-1 अप्रैल 2026; तेप्पोत्सवम् थैमास; अप्रैल-जून ग्रीष्म (40°C+); मानसून ग्रीष्म-अक्टूबर
वेबसाइट
https://srirangam.co.in
12 किमीTiruchirappalli
2 किमीSrirangam railway station
15 किमीTiruchi Airport
325 किमीChennai
130 किमीMadurai
55 किमीThanjavur
75 किमीKumbakonam
320 किमीBengaluru
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