स्थानीय-शाक्त-तारा-नाम-व्युत्पत्ति कथा
स्थानीय-बङ्गाल-शाक्त-परम्परा-अनुसार सती-तृतीय-नयन (बङ्गाली में 'तारा' = आँख/नयन) यहाँ गिरा — इसलिए ग्राम 'तारापीठ' नाम-धारी हुआ (पूर्व-नाम चण्डीपुर)। Wikipedia-Shakta-pithas-तालिका-में #60-स्थान सती-तृतीय-नयन-अङ्ग-सहित सूचीबद्ध (देवी-भागवत-पुराण-कैनोनिकल-51-में परिशिष्ट-सटीक-स्थान-विवाद-स्तर — flag)। दश-महाविद्या-द्वितीय उग्र-तारा-स्वरूप-केन्द्रीय।
