वराह पुराण
वेंकटाचल माहात्म्य — प्रमुख स्रोत; प्रसिद्ध श्लोक: 'वेंकटाद्रि समं स्थानं ब्रह्माण्डे नास्ति किञ्चन। वेंकटेश समो देवो न भूतो न भविष्यति॥' (वेंकटाद्रि के समान कोई स्थान नहीं, वेंकटेश के समान कोई देव न था न होगा)
Tirupati · Andhra Pradesh
श्री वेंकटेश्वर / श्रीनिवास / गोविन्द / बालाजी
अन्य नाम: तिरुपति बालाजी · वेंकटेश्वर स्वामी · श्रीनिवास · गोविन्द · बालाजी · वेंकटाद्रि नाथ

इस मन्दिर की विशेषता
श्री वेंकटेश्वर (विष्णु)
स्वयंभू मूल विग्रह 'ध्रुव बेरम / मूलविरट्' (~8 फ़ुट) — पूर्वाभिमुख खड़ी मुद्रा; वक्षस्थल पर व्यूह लक्ष्मी अंकित। पंच बेरमुलु: (1) ध्रुव बेरम — मूल मूर्ति, (2) भोग श्रीनिवास / कौतुक बेरम — 1 फ़ुट रजत प्रतिमा (614 ई. में दान), (3) उग्र श्रीनिवास / स्नपन बेरम — रौद्र रूप, कैशिक द्वादशी पर वार्षिक शोभायात्रा, (4) मलयप्प स्वामी / उत्सव बेरम — 1330 ई. से मुख्य शोभायात्रा-मूर्ति, (5) कोलुवु श्रीनिवास / बलि बेरम — कोषाध्यक्ष-संरक्षक
सम्प्रदाय: वैष्णव (वैखानस आगम पद्धति — रामानुजाचार्य द्वारा 12वीं शताब्दी में संस्थापित)
वेंकटाचल माहात्म्य — प्रमुख स्रोत; प्रसिद्ध श्लोक: 'वेंकटाद्रि समं स्थानं ब्रह्माण्डे नास्ति किञ्चन। वेंकटेश समो देवो न भूतो न भविष्यति॥' (वेंकटाद्रि के समान कोई स्थान नहीं, वेंकटेश के समान कोई देव न था न होगा)
वेंकटाचल माहात्म्य — तिरुवेंकटमुदयान को साक्षात् श्रीकृष्ण के रूप में मानता है; वल्मीक (मूर्ति-प्रकटन स्थल) = देवकी; तमरिंद वृक्ष = वसुदेव; शेषाचलम = बलराम (आदिशेष-अवतार); तिरुमला = मथुरा; स्वामी पुष्करिणी = यमुना; गिरि-वन-जीव = गोप-कन्याएँ
श्री व्यास द्वारा रचित — 'वेंकटाद्रि समम्...' श्लोक का द्वितीय स्रोत
सभी में वेंकटाचल माहात्म्य के उद्धरण उपलब्ध
02:30 (सुप्रभातम् सेवा से) से 01:00 अगले दिन (24-घंटे के निकट सेवाएँ) तक
श्री वेंकटेश सुप्रभातम् पाठ — बंगारु वकीली (स्वर्ण द्वार) पर। प्रतिवादि भयंकर अण्णंगाचार्य रचित (29 श्लोक सुप्रभात + 11 स्तोत्र + 16 प्रपत्ति + 14 मंगलम् = कुल 70 श्लोक)
तुलसी एवं माला अर्पण
सामान्य दर्शन काल
पुष्प-श्रृंगार के साथ रात्रि दर्शन
वैकुण्ठम् क्यू कॉम्प्लेक्स से क्यू-दर्शन; निःशुल्क परन्तु लम्बा प्रतीक्षा-काल
₹300 प्रति व्यक्ति; पूर्व-बुकिंग; तेज़ क्यू
तिरुपति से अलिपिरि (3,550 सीढ़ी, 9.8 किमी, 3-5 घंटे) या श्रीवारि मेट्टू (2,388 सीढ़ी, 2.1 किमी, 1.5-2 घंटे) चढ़कर पहुँचने पर निःशुल्क दिव्य दर्शन। टोकन ऊपर मिलता है।
श्रीवाणी ट्रस्ट को दान — दर्शन के साथ-साथ भारत भर में मंदिर निर्माण में सहायता। Vaikuntha Ekadashi 2026 हेतु 8,000 टिकट।
1000 दीप अलंकरण
विष्णु सहस्रनाम पाठ
वेंकटेश-पद्मावती विवाह सेवा (दैनिक)
गुरुवार विशेष
विशिष्ट अन्न-समर्पण
तिरुमला का सर्वोच्च वार्षिक उत्सव। प्रारम्भ: अंकुरार्पणम् + ध्वजारोहणम्; समापन: चक्र स्नानम् + ध्वज अवरोहणम्। 13 वाहन-शोभायात्रा का क्रम: पेद्द शेष → चिन्न शेष → हंस → सिंह → मुथ्यापु पन्दिरि → कल्पवृक्ष → सर्वभूपाल → मोहिनी अवतार + गरुड़ → हनुमंत → गज → सूर्य प्रभा → चन्द्र प्रभा → रथोत्सवम् → चक्र स्नानम्। गरुड़ वाहनम (5वाँ दिन) = सर्वाधिक प्रतीक्षित। 2026 विशेष — अधिक मास वर्ष DOUBLE ब्रह्मोत्सवम्: (1) सालकटला ब्रह्मोत्सवम् 15-23 सितंबर 2026 (गरुड़ वाहनम 19 सितंबर 7 PM; रथोत्सवम् 22 सितंबर), तत्पश्चात् (2) नवरात्रि ब्रह्मोत्सवम् 12-20 अक्टूबर 2026 (पूर्व का अनुमान 24 सितंबर - 2 अक्टूबर ग़लत था — Phase E सत्यापन)।
भीड़: गरुड़ वाहनम पर 3-4 लाख; आवास 6+ माह पूर्व बुक करें
वैकुण्ठ द्वार (परमपद-द्वार) 10 दिनों के लिए खुलता है। 2026 हेतु 30 दिसम्बर 2025 - 8 जनवरी 2026। एकादशी के दिन प्रातः 9-11 बजे श्री मलयप्प स्वामी (श्री देवी + भू देवी सहित) की स्वर्ण रथ शोभायात्रा। द्वादशी पर 5:30-6:30 AM स्वामी पुष्करिणी में चक्र स्नानम्।
एक दिवस में 7 वाहनों पर भगवान् का परिक्रमा — सूर्य की उत्तरायण-दिशा को सम्मान। प्रातः सूर्य प्रभा से रात्रि चन्द्र प्रभा तक।
स्वामी पुष्करिणी में 5-दिवसीय नौका-उत्सव; अन्तिम दिन भगवान् पुष्करिणी में स्नान करते हैं
3-दिवसीय जलाभिषेक उत्सव — गर्भगृह में मूल विग्रह का विशेष अभिषेक (वर्ष में मात्र इसी अवसर पर)
मान्यता: श्री वेंकटेश ने कुबेर से विवाह-व्यय हेतु ऋण लिया था; आज भी भक्त 'मन्नत-पूर्ति' पर हुण्डी में दान देकर ऋण-चुकाई में सहभागी होते हैं — 'श्री वारि हुण्डी' विश्व का सर्वाधिक धनदान-पात्र (2025-26 अनुमानित ₹1,729 करोड़)
स्रोत: वेंकटाचल माहात्म्य — वराह पुराण
मान्यता: जो भक्त अपने केश दान करता है, माता नीलादेवी (नीलाद्रि स्वामिनी) उन्हें ग्रहण करती हैं; भगवान् वेंकटेश का वर। तिरुमला में सामान्य दिनों में लगभग 25,000-40,000 भक्त मुण्डन-व्रत करते हैं; पीक दिनों पर रिकॉर्ड 85,518 (12 जून 2015) तक पहुँच चुका। 1,300+ नाई शिफ्टों में सेवारत।
स्रोत: स्थल-परंपरा (पुराण-संदर्भ)
वैकुण्ठ एकादशी पर 'वैकुण्ठ द्वार दर्शन' से वर्ष-भर के पापों से मुक्ति एवं वैकुण्ठ-गमन का मार्ग
स्रोत: पद्म पुराण + भविष्योत्तर पुराण
श्री वेंकटेश की पत्नी श्री पद्मावती देवी (अलमेलु मंगा) का मुख्य मंदिर — लक्ष्मी का अवतार। TTD-संचालित। वसन्तोत्सवम् (3-दिवसीय, वैशाख पूर्णिमा) मुख्य उत्सव। तिरुपति यात्रा अधूरी मानी जाती है पद्मावती दर्शन के बिना।
1130 ई. में रामानुजाचार्य द्वारा प्रतिष्ठित — चिदम्बरम (तिरुचित्र-कूट) से बचाये गये उत्सव-विग्रह के रक्षार्थ। गोविन्दराज को वेंकटेश का ज्येष्ठ भ्राता मानने की परंपरा। योग-निद्रा (शयन) मुद्रा में।
5 पंच भूत स्थलों में से एक — वायु तत्त्व का शिव लिंग। राहु-केतु एवं काल-सर्प दोष निवारण हेतु विश्व-प्रसिद्ध।
तिरुपति का एकमात्र शिव मंदिर; कपिल तीर्थ जलप्रपात के निकट
मंदिर के दैनिक अभिषेक हेतु जल का स्रोत; मान्यता: श्री वेंकटेश के चरण-कमलों से उद्भूत; भगवान् ने अपने भक्त तिरुमला नंबि के बोझ-न्यूनार्थ इसे सृजित किया
मान्यतानुसार वेंकटेश-पद्मावती विवाह यहीं संपन्न हुआ
मान्यता: विवाहोपरांत 6 मास भगवान् ने यहाँ माता पद्मावती के साथ निवास किया
75वाँ दिव्य देशम् — आलवारों द्वारा नालायिर दिव्य प्रबन्धम् में स्तुत 108 वैष्णव दिव्य क्षेत्रों में सर्वोच्च लोकप्रिय एवं तीर्थयात्रित स्थल
108 मंदिर
केन्द्रीय एवं अंतिम बिन्दु — वेंकटाद्रि (7वाँ पर्वत) पर मुख्य मंदिर
केन्द्र — श्री वारि मंदिर तिरुमला; अन्य 6: गोविन्दराज, पद्मावती (तिरुचनूर), कल्याण वेंकटेश्वर (नारायणवनम् + श्रीनिवास मंगापुरम्), कपिलेश्वर, श्री कालहस्ती
नित्य पाठ-स्थल