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Trimbak (Nashik District) · Maharashtra

श्री त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर

त्र्यम्बकेश्वर — त्रि-नेत्र शिव; ब्रह्मा-विष्णु-महेश त्रिमुख ज्योतिर्लिंग

अन्य नाम: त्र्यम्बकेश्वर · त्र्यम्बक · गौतमी-तट का त्र्यम्बक · त्रिमूर्ति ज्योतिर्लिंग

  • 12 ज्योतिर्लिंग
  • द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र का दशम…
  • 12 ज्योतिर्लिंगों में अद्वितीय त्र…
  • 4 कुंभ मेला स्थलों में से एक
श्री त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर
दर्शन समय
05:30 – 21:00
स्वरूप
त्रिमुख ज्योतिर्लिंग
स्थान
Trimbak (Nashik District) · Maharashtra
उत्तम ऋतु
अक्टूबर-मार्च सर्वोत्तम
काल
मूल पीठ: अति-प्राचीन

इस मन्दिर की विशेषता

  • 12 ज्योतिर्लिंग (दशम — 'त्र्यम्बकं गौतमीतटे')
  • द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र का दशम-पद
  • 12 ज्योतिर्लिंगों में अद्वितीय त्रिमुख (ब्रह्मा+विष्णु+महेश) लिंग
  • 4 कुंभ मेला स्थलों में से एक (नाशिक-त्र्यम्बकेश्वर सिंहस्थ)
01
मूल विग्रह

मुख्य देव एवं स्वरूप

श्री त्र्यम्बकेश्वर (शिव — ब्रह्मा, विष्णु, महेश के तीन मुख वाला अद्वितीय ज्योतिर्लिंग)

त्रिमुख ज्योतिर्लिंग — गर्भगृह में ज़मीन के तल में एक गड्ढे में स्थापित (अन्य ज्योतिर्लिंगों के विपरीत प्रोट्रूडिंग पाषाण-लिंग नहीं — ज़मीन में अवतल); तीन छोटे मुख-स्वरूप शिवलिंग जो ब्रह्मा, विष्णु, महेश के प्रतीक

सम्प्रदाय: शैव (अद्वितीय त्रिमूर्ति-स्वरूप)

02
स्थल-पुराण

कथा, इतिहास एवं महत्व

शिव पुराण

कोटिरुद्र संहिता — त्र्यम्बकेश्वर माहात्म्य; गौतम ऋषि एवं गोदावरी-अवतरण कथा

ब्रह्म पुराण

गोदावरी-माहात्म्य; ब्रह्मगिरि पर्वत एवं त्र्यम्बक क्षेत्र का विस्तृत वर्णन

स्कन्द पुराण

त्र्यम्बक-माहात्म्य खण्ड

द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र

आदि शंकराचार्य — 'वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे' — दशम पद

संत एवं परम्परा

  • गौतम ऋषि — त्र्यम्बक क्षेत्र के प्रथम ऋषि; 12-वर्षीय अकाल-काल में अद्वितीय तप-शक्ति से अन्न-जल पाया; ईर्ष्या-वश अन्य ऋषियों ने उनके खेत में गाय भेजी, जिसकी मृत्यु से गौ-हत्या-दोष लगा; गौ-दोष-मुक्ति हेतु शिव से प्रार्थना — शिव ने ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट होकर गंगा को 'गोदावरी' रूप में पृथ्वी पर अवतरित किया
  • देवी गोदावरी (गंगा का दक्षिणी अवतार) — कुशावर्त कुंड से उत्पन्न; भारत की द्वितीय सबसे लंबी नदी; 'दक्षिण की गंगा'
  • पेशवा बालाजी बाजी राव (नाना साहेब, 1740-1761) — मराठा साम्राज्य के तृतीय पेशवा; 1690 के औरंगज़ेब-विध्वंस के पश्चात् वर्तमान भव्य मंदिर का पुनर्निर्माता; काले बेसाल्ट-निर्माण के प्रवर्तक

ऐतिहासिक घटनाक्रम

  1. 16901690 ईस्वी — औरंगज़ेब की सेना द्वारा त्र्यम्बकेश्वर मंदिर का विध्वंसWikipedia Trimbakeshwar Temple + Trimbakeshwar Trust
  2. 1755मध्य-18वीं शताब्दी — मराठा पेशवा बालाजी बाजी राव (नाना साहेब, शासन 1740-1761) द्वारा वर्तमान संरचना का पुनर्निर्माण; काले बेसाल्ट पाषाण से हेमाडपंथी शैली; भव्य शिखर एवं सूक्ष्म नक्काशी। (Wikipedia पुनर्निर्माण का सटीक वर्ष नहीं देता; नाना साहेब = बालाजी बाजी राव III पेशवा।)Trimbakeshwar Trust + Wikipedia
  3. 202631 अक्टूबर 2026 — नाशिक-त्र्यम्बकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेला 2027-28 का ध्वजारोहण समारोह; 21-माह की कुंभ-यात्रा का प्रारम्भ; गोदावरी-तट पर त्र्यम्बकेश्वर के निकट विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक सम्मेलनNashik Kumbh Mela 2027-2028 Official
  4. 20272 अगस्त, 31 अगस्त, 11-12 सितंबर 2027 — सिंहस्थ कुंभ मेला के 3 अमृत स्नान (शाही स्नान); करोड़ों श्रद्धालु गोदावरी में स्नान हेतुNashik Kumbh Mela 2027 Official
03
नित्य उपासना

दर्शन समय एवं आरती

05:30 से 21:00 तक

काकड़ आरती (प्रातः जागरण)05:30-06:00
दैनिक

दिन की प्रथम आरती; मंदिर-द्वार-खुलने का अनुष्ठान

अभिषेकम् दर्शन05:00-07:30
दैनिक

विशेष अनुष्ठान — स्लॉट सीमित, अग्रिम बुकिंग आवश्यक

रुद्राभिषेक07:00-08:30
दैनिक
विशेष पूजा सत्र07:00, 13:00, 16:30
दैनिक
धूप आरती (सायं)18:00-18:30
दैनिक

सायं-काल का प्रमुख अनुष्ठान

शेज आरती (शयन)21:00-21:30
दैनिक

दिन की अन्तिम आरती; मंदिर बन्द

04
दर्शन

दर्शन के प्रकार

सामान्य निःशुल्क दर्शननिःशुल्क
समय
05:30-21:00
उपयुक्त
सभी भक्त

मुख्य त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन निःशुल्क। सोमवार को विशेष भीड़।

VIP विशेष दर्शन
उपयुक्त
समय-सीमित भक्त

विशेष टिकट से शीघ्र-दर्शन; मूल्य आधिकारिक काउंटर पर सत्यापित करें।

अभिषेकम् दर्शन (Special Pass)
उपयुक्त
ज्योतिर्लिंग के सम्मुख स्नान-विधि देखने हेतु

प्रातः 5:00-7:30 केवल; अग्रिम बुकिंग आवश्यक; सीमित स्लॉट।

05
अनुष्ठान

विशेष पूजा एवं सेवा

  • काल सर्प शान्ति पूजा2100
  • नारायण-नागबलि पूजा (3-दिवसीय)5500
  • त्रिपिण्डी श्राद्ध
  • पितृ-दोष पूजा
06
उत्सव

प्रमुख पर्व एवं उत्सव

महाशिवरात्रिफाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी

वर्ष का सर्वोच्च पर्व — 4-प्रहर पूजा; मध्य-रात्रि विशेष महामृत्युञ्जय जप; ब्रह्मगिरि प्रदक्षिणा। 2026 — 15 फरवरी रविवार।

सिंहस्थ कुंभ मेला (12-वर्षीय)सिंह राशि में बृहस्पति प्रवेश-काल

नाशिक-त्र्यम्बकेश्वर सिंहस्थ — 4 कुंभ-स्थलों में से एक। 21-माह की पूर्ण कुंभ-यात्रा: 31 अक्टूबर 2026 (ध्वजारोहण) से 24 जुलाई 2028 (समापन)। 3 अमृत स्नान (शाही स्नान) 2 अगस्त 2027, 31 अगस्त 2027, 11-12 सितंबर 2027। करोड़ों श्रद्धालु; नागा साधु अखाड़े।

श्रावण मास सोमवारश्रावण

सम्पूर्ण मास शिव-उपासना; प्रति सोमवार विशेष रुद्राभिषेक; कांवड़ यात्री गोदावरी-जल भर कर पहुँचते हैं

रथोत्सवत्र्यम्बकेश्वर का वार्षिक रथ-यात्रा उत्सव

भगवान त्र्यम्बकेश्वर की रजत-रथ-यात्रा; नगर-परिक्रमा

गोदावरी जयन्ती

गोदावरी देवी का जन्म-दिन उत्सव; कुशावर्त कुंड पर विशेष पूजा एवं स्नान

07
आस्था

मनोकामना एवं फल

12 ज्योतिर्लिंग यात्रा का दशम तीर्थ + त्रिमूर्ति-दर्शन

आदि शंकराचार्य द्वादश-ज्योतिर्लिंग स्तोत्र के दशम पद 'त्र्यम्बकं गौतमीतटे'; ब्रह्मा+विष्णु+महेश त्रिमूर्ति का एक-स्थानीय दर्शन (अन्य 11 ज्योतिर्लिंगों में अनुपलब्ध)

स्रोत: द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र (आदि शंकराचार्य) + शिव पुराण

महामृत्युञ्जय जप एवं मृत्यु-भय निवारण

महामृत्युञ्जय मंत्र में 'त्र्यम्बकम्' — मंदिर का मूल नाम; त्र्यम्बकेश्वर में महामृत्युञ्जय जप का विशेष माहात्म्य; अकाल-मृत्यु-निवारण एवं दीर्घायु

स्रोत: ऋग्वेद 7.59.12 + शिव पुराण

काल-सर्प दोष-निवारण (कुंडली-दोष)

त्र्यम्बकेश्वर भारत का प्रमुख स्थल जहाँ काल-सर्प शान्ति पूजा अनुष्ठित होती है; ज्योतिष-कुंडली में राहु-केतु काल-सर्प दोष-निवारण हेतु

स्रोत: ज्योतिष शास्त्र + तंत्र परंपरा

पितृ-दोष एवं पूर्वजों की आत्मा-मुक्ति (नारायण-नागबलि)

त्र्यम्बकेश्वर भारत का एकमात्र स्थल जहाँ नारायण-नागबलि 3-दिवसीय पूजा होती है; अप्राकृतिक/असमय मृत्यु से दिवंगत पूर्वजों की आत्मा-शान्ति; पितृ-दोष विशेष पूजा भी केवल यहीं

स्रोत: गरुड़ पुराण + वैदिक श्राद्ध-शास्त्र

गोदावरी (दक्षिण-गंगा) में स्नान — गौ-हत्या-समान महा-पाप-निवारण

कुशावर्त कुंड — गोदावरी का मूल-स्रोत; गौतम-ऋषि-कथा अनुसार महा-पाप-निवारण की क्षमता; पितृ-तर्पण एवं पिण्ड-दान

स्रोत: ब्रह्म पुराण गोदावरी-माहात्म्य

08
जप

मन्त्र एवं स्तोत्र

  • महामृत्युञ्जय मंत्र — 'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्...'मंत्रऋग्वेद 7.59.12; यजुर्वेदइस मन्दिर हेतुमंत्र में 'त्र्यम्बकम्' शब्द — मंदिर के नाम का मूल; त्र्यम्बकेश्वर का प्रमुख मंत्र; मृत्यु-भय निवारण एवं दीर्घायु हेतु
  • द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र — 'त्र्यम्बकं गौतमीतटे'स्तोत्रआदि शंकराचार्य — द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र का दशम-पदइस मन्दिर हेतु
  • रुद्राष्टाध्यायी / श्री रुद्रम् चमकम्स्तोत्रयजुर्वेद, तैत्तिरीय संहितारुद्राभिषेक का प्रमुख स्तोत्र
  • गोदावरी स्तोत्रस्तोत्रब्रह्म पुराणइस मन्दिर हेतुगोदावरी (दक्षिण-गंगा) की स्तुति
09
तीर्थाटन

समीप के तीर्थ एवं परिपथ

कुशावर्त कुंड (गोदावरी का मूल-स्रोत)100 मी

गोदावरी नदी का मूल-स्रोत; पारंपरिक मान्यता अनुसार शिव ने त्रिशूल से इसी कुंड का निर्माण कर गंगा को 'गोदावरी' रूप में अवतरित किया। दर्शन एवं काल-सर्प पूजा से पूर्व पवित्र स्नान अनिवार्य।

ब्रह्मगिरि पर्वत5 किमी

गोदावरी का वास्तविक उद्गम-स्थल (1,295 मीटर); पवित्र शिव-पर्वत; ब्रह्मगिरि-प्रदक्षिणा (24 किमी) का माहात्म्य। श्रावण-काल में हज़ारों श्रद्धालु प्रदक्षिणा करते हैं।

गंगाद्वार मंदिर (ब्रह्मगिरि-शिखर पर)5.5 किमी

मान्यता अनुसार गंगा-अवतरण का प्रथम बिन्दु; ब्रह्मगिरि-प्रदक्षिणा का मुख्य पड़ाव

अंजनेरी पर्वत (हनुमान-जन्मस्थल)7 किमी

मान्यता अनुसार हनुमान की माता अंजना का जन्म एवं हनुमान का अवतरण-स्थल

गौतम-ऋषि गुफा एवं आश्रम3 किमी

गौतम ऋषि की मूल तपस्या-स्थली एवं गौ-हत्या-दोष-निवारण के प्रसंग का स्थल

नीलगिरि मंदिर1.5 किमी

नीलकंठ शिव का प्राचीन मंदिर; नील-पर्वत पर

शिर्डी (साईं बाबा समाधि मंदिर)110 किमी

साईं बाबा का प्रसिद्ध समाधि-मंदिर; महाराष्ट्र तीर्थ-यात्रा का अनिवार्य अंग

द्वादश ज्योतिर्लिंग यात्रा

दशम ज्योतिर्लिंग — 'त्र्यम्बकं गौतमीतटे' (आदि शंकराचार्य द्वादश-ज्योतिर्लिंग स्तोत्र दशम-पद)

12 मंदिर

महाराष्ट्र पञ्च-ज्योतिर्लिंग यात्रा (त्र्यम्बकेश्वर + भीमाशंकर + घृष्णेश्वर + ओंकारेश्वर + वैद्यनाथ)

महाराष्ट्र के 3 ज्योतिर्लिंगों में अग्रणी (त्र्यम्बकेश्वर + भीमाशंकर + घृष्णेश्वर)

3 मंदिर

4 कुंभ मेला स्थल (नाशिक/त्र्यम्बकेश्वर + प्रयागराज + हरिद्वार + उज्जैन)

12-वर्षीय कुंभ-चक्र के 4 स्थलों में अग्रणी; गोदावरी-तट पर सिंहस्थ कुंभ

4 मंदिर

त्र्यम्बक-क्षेत्र तीर्थ-समूह (त्र्यम्बकेश्वर + कुशावर्त + ब्रह्मगिरि + अंजनेरी + गंगाद्वार)

केन्द्रीय; 2-दिवसीय पूर्ण क्षेत्र-यात्रा

महाराष्ट्र शिव-शक्ति यात्रा (त्र्यम्बकेश्वर + शिर्डी + भीमाशंकर + पंढरपुर)

महाराष्ट्र के 4 प्रमुख तीर्थों में अग्रणी

10
मार्गदर्शन

यात्रा एवं संपर्क

पता
श्री त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग देवस्थान ट्रस्ट, त्र्यम्बक — 422212, नाशिक जिला, महाराष्ट्र
हवाई अड्डा
नाशिक हवाई अड्डा (ओझर — NSK) — ~40 किमी; छत्रपति शिवाजी महाराज अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, मुंबई (BOM) — ~170 किमी
रेलवे
नाशिक रोड रेलवे स्टेशन (NK) — ~30 किमी; मध्य रेलवे का प्रमुख स्टेशन
उत्तम ऋतु
अक्टूबर-मार्च सर्वोत्तम; तापमान 12-28°C। मानसून (जून-सितंबर) में ब्रह्मगिरि-दृश्य अद्भुत — किन्तु गोदावरी-स्नान सावधानी। अप्रैल-मई गर्म (32-38°C)। महाशिवरात्रि, श्रावण सोमवार एवं सिंहस्थ कुंभ-काल पर पीक भीड़।
30 किमीNashik city
40 किमीNashik Airport
110 किमीShirdi
285 किमीBhimashankar Jyotirlinga
180 किमीMumbai
210 किमीPune
220 किमीAurangabad
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