शिव पुराण
कोटिरुद्र संहिता — त्र्यम्बकेश्वर माहात्म्य; गौतम ऋषि एवं गोदावरी-अवतरण कथा
Trimbak (Nashik District) · Maharashtra
त्र्यम्बकेश्वर — त्रि-नेत्र शिव; ब्रह्मा-विष्णु-महेश त्रिमुख ज्योतिर्लिंग
अन्य नाम: त्र्यम्बकेश्वर · त्र्यम्बक · गौतमी-तट का त्र्यम्बक · त्रिमूर्ति ज्योतिर्लिंग

इस मन्दिर की विशेषता
श्री त्र्यम्बकेश्वर (शिव — ब्रह्मा, विष्णु, महेश के तीन मुख वाला अद्वितीय ज्योतिर्लिंग)
त्रिमुख ज्योतिर्लिंग — गर्भगृह में ज़मीन के तल में एक गड्ढे में स्थापित (अन्य ज्योतिर्लिंगों के विपरीत प्रोट्रूडिंग पाषाण-लिंग नहीं — ज़मीन में अवतल); तीन छोटे मुख-स्वरूप शिवलिंग जो ब्रह्मा, विष्णु, महेश के प्रतीक
सम्प्रदाय: शैव (अद्वितीय त्रिमूर्ति-स्वरूप)
कोटिरुद्र संहिता — त्र्यम्बकेश्वर माहात्म्य; गौतम ऋषि एवं गोदावरी-अवतरण कथा
गोदावरी-माहात्म्य; ब्रह्मगिरि पर्वत एवं त्र्यम्बक क्षेत्र का विस्तृत वर्णन
त्र्यम्बक-माहात्म्य खण्ड
आदि शंकराचार्य — 'वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे' — दशम पद
05:30 से 21:00 तक
दिन की प्रथम आरती; मंदिर-द्वार-खुलने का अनुष्ठान
विशेष अनुष्ठान — स्लॉट सीमित, अग्रिम बुकिंग आवश्यक
सायं-काल का प्रमुख अनुष्ठान
दिन की अन्तिम आरती; मंदिर बन्द
मुख्य त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन निःशुल्क। सोमवार को विशेष भीड़।
विशेष टिकट से शीघ्र-दर्शन; मूल्य आधिकारिक काउंटर पर सत्यापित करें।
प्रातः 5:00-7:30 केवल; अग्रिम बुकिंग आवश्यक; सीमित स्लॉट।
वर्ष का सर्वोच्च पर्व — 4-प्रहर पूजा; मध्य-रात्रि विशेष महामृत्युञ्जय जप; ब्रह्मगिरि प्रदक्षिणा। 2026 — 15 फरवरी रविवार।
नाशिक-त्र्यम्बकेश्वर सिंहस्थ — 4 कुंभ-स्थलों में से एक। 21-माह की पूर्ण कुंभ-यात्रा: 31 अक्टूबर 2026 (ध्वजारोहण) से 24 जुलाई 2028 (समापन)। 3 अमृत स्नान (शाही स्नान) 2 अगस्त 2027, 31 अगस्त 2027, 11-12 सितंबर 2027। करोड़ों श्रद्धालु; नागा साधु अखाड़े।
सम्पूर्ण मास शिव-उपासना; प्रति सोमवार विशेष रुद्राभिषेक; कांवड़ यात्री गोदावरी-जल भर कर पहुँचते हैं
भगवान त्र्यम्बकेश्वर की रजत-रथ-यात्रा; नगर-परिक्रमा
गोदावरी देवी का जन्म-दिन उत्सव; कुशावर्त कुंड पर विशेष पूजा एवं स्नान
आदि शंकराचार्य द्वादश-ज्योतिर्लिंग स्तोत्र के दशम पद 'त्र्यम्बकं गौतमीतटे'; ब्रह्मा+विष्णु+महेश त्रिमूर्ति का एक-स्थानीय दर्शन (अन्य 11 ज्योतिर्लिंगों में अनुपलब्ध)
स्रोत: द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र (आदि शंकराचार्य) + शिव पुराण
महामृत्युञ्जय मंत्र में 'त्र्यम्बकम्' — मंदिर का मूल नाम; त्र्यम्बकेश्वर में महामृत्युञ्जय जप का विशेष माहात्म्य; अकाल-मृत्यु-निवारण एवं दीर्घायु
स्रोत: ऋग्वेद 7.59.12 + शिव पुराण
त्र्यम्बकेश्वर भारत का प्रमुख स्थल जहाँ काल-सर्प शान्ति पूजा अनुष्ठित होती है; ज्योतिष-कुंडली में राहु-केतु काल-सर्प दोष-निवारण हेतु
स्रोत: ज्योतिष शास्त्र + तंत्र परंपरा
त्र्यम्बकेश्वर भारत का एकमात्र स्थल जहाँ नारायण-नागबलि 3-दिवसीय पूजा होती है; अप्राकृतिक/असमय मृत्यु से दिवंगत पूर्वजों की आत्मा-शान्ति; पितृ-दोष विशेष पूजा भी केवल यहीं
स्रोत: गरुड़ पुराण + वैदिक श्राद्ध-शास्त्र
कुशावर्त कुंड — गोदावरी का मूल-स्रोत; गौतम-ऋषि-कथा अनुसार महा-पाप-निवारण की क्षमता; पितृ-तर्पण एवं पिण्ड-दान
स्रोत: ब्रह्म पुराण गोदावरी-माहात्म्य
गोदावरी नदी का मूल-स्रोत; पारंपरिक मान्यता अनुसार शिव ने त्रिशूल से इसी कुंड का निर्माण कर गंगा को 'गोदावरी' रूप में अवतरित किया। दर्शन एवं काल-सर्प पूजा से पूर्व पवित्र स्नान अनिवार्य।
गोदावरी का वास्तविक उद्गम-स्थल (1,295 मीटर); पवित्र शिव-पर्वत; ब्रह्मगिरि-प्रदक्षिणा (24 किमी) का माहात्म्य। श्रावण-काल में हज़ारों श्रद्धालु प्रदक्षिणा करते हैं।
मान्यता अनुसार गंगा-अवतरण का प्रथम बिन्दु; ब्रह्मगिरि-प्रदक्षिणा का मुख्य पड़ाव
मान्यता अनुसार हनुमान की माता अंजना का जन्म एवं हनुमान का अवतरण-स्थल
गौतम ऋषि की मूल तपस्या-स्थली एवं गौ-हत्या-दोष-निवारण के प्रसंग का स्थल
नीलकंठ शिव का प्राचीन मंदिर; नील-पर्वत पर
साईं बाबा का प्रसिद्ध समाधि-मंदिर; महाराष्ट्र तीर्थ-यात्रा का अनिवार्य अंग
दशम ज्योतिर्लिंग — 'त्र्यम्बकं गौतमीतटे' (आदि शंकराचार्य द्वादश-ज्योतिर्लिंग स्तोत्र दशम-पद)
12 मंदिर
महाराष्ट्र के 3 ज्योतिर्लिंगों में अग्रणी (त्र्यम्बकेश्वर + भीमाशंकर + घृष्णेश्वर)
3 मंदिर
12-वर्षीय कुंभ-चक्र के 4 स्थलों में अग्रणी; गोदावरी-तट पर सिंहस्थ कुंभ
4 मंदिर
केन्द्रीय; 2-दिवसीय पूर्ण क्षेत्र-यात्रा
महाराष्ट्र के 4 प्रमुख तीर्थों में अग्रणी