पीठ-माला ग्रन्थ
त्रिपुर सुन्दरी को 51 शक्ति-पीठों में सम्मिलित; सती के दक्षिण-चरण (पाद-अङ्गुष्ठ-सहित) यहाँ गिरने का स्रोत; भैरव: त्रिपुरेश
Udaipur · Tripura
श्री माँ त्रिपुर सुन्दरी मंदिर (मातबाड़ी) — राधाकिशोरपुर पहाड़ी, उदयपुर, ज़िला गोमती, त्रिपुरा
त्रिपुर सुन्दरी / त्रिपुरेश्वरी — श्री-विद्या की सर्वोच्च देवी; षोडशी महाविद्या; सती-दक्षिण-चरण पीठ
अन्य नाम: त्रिपुरेश्वरी · षोडशी (Soroshi) · ललिता त्रिपुर सुन्दरी · मातबाड़ी (माँ-का-घर) · छोटो-माँ (देवी चण्डी की लघु-मूर्ति) · त्रिपुरा-राज्य की कुलदेवी

इस मन्दिर की विशेषता
श्री माँ त्रिपुर सुन्दरी — गर्भगृह में दो श्याम-शिला (कस्ती) मूर्तियाँ; मुख्य मूर्ति 5 फुट (1.57m × 0.64m), चार-भुजा-स्थानक, शिव के वक्ष पर खड़ी, स्वर्ण-मुकुट; लघु 'छोटो-माँ' (देवी चण्डी) 2 फुट
मुख्य त्रिपुर सुन्दरी मूर्ति — 4 भुजाएँ, शिव-वक्ष-स्थानक, स्वर्ण-मुकुट, श्याम-कस्ती शिला; निकट 2 फुट छोटो-माँ चण्डी मूर्ति; दोनों एक ही गर्भगृह में
सम्प्रदाय: शाक्त — विशेष-रूप से श्री-विद्या / श्रीकुल तंत्र परंपरा; 10 महाविद्याओं में तृतीय (षोडशी); शैव एवं वैष्णव दोनों परंपराओं के श्रद्धालु पूज्य
त्रिपुर सुन्दरी को 51 शक्ति-पीठों में सम्मिलित; सती के दक्षिण-चरण (पाद-अङ्गुष्ठ-सहित) यहाँ गिरने का स्रोत; भैरव: त्रिपुरेश
ललिता सहस्रनाम — हयग्रीव-अगस्त्य संवाद; त्रिपुर सुन्दरी = ललिता = आदि पराशक्ति; शास्त्रीय-आधार
त्रिपुर सुन्दरी सर्वोच्च-चेतना / परम-शक्ति-स्वरूप के रूप में स्थापना
देवी को परम-विद्या के रूप में केन्द्रीय-स्थापन; ललिता एवं लक्ष्मी दोनों को 'श्री' कहा गया
आदि शंकराचार्य रचित 100 श्लोक — आनन्द लहरी (प्रारम्भिक 41) + सौन्दर्य लहरी (अगले 59) — त्रिपुर सुन्दरी-स्तुति का प्रमुख स्तोत्र
05:00 से 21:00 तक · मध्याह्न विश्राम ग्रीष्म 5:00 AM-9:00 PM; शीत 5:30 AM-8:30 PM
दिन की प्रथम आरती; बाल्य-भोग सहित
श्रद्धालुओं हेतु प्रसाद-भोजन
सायं प्रमुख आरती
दिन की अन्तिम सेवा
पंक्ति-दर्शन; कोई प्रवेश-शुल्क नहीं।
माता त्रिपुर सुन्दरी मंदिर न्यास-संचालित आधिकारिक ऑनलाइन-सेवा (2025 से प्रारम्भ); मातबाड़ी का प्रसिद्ध 'पेड़ा' प्रसाद घर पर मँगवा सकते हैं।
विशिष्ट-तिथियों पर आधिकारिक संकल्प-पूजा।
त्रिपुरा, असम, बंगाल एवं बांग्लादेश से 2+ लाख श्रद्धालु; दिवाली-दिन 2 अनुष्ठान — माता रानी पूजा 10:00 AM + दिवाली विशेष पूजा 12:00 PM + पथ-बलि (पशुबलि) + यज्ञ। 2026 — रविवार 8 नवंबर।
विशेष अभिषेक; निशीथ-काल 12:09 AM-1:01 AM (16 फरवरी)। 2026 — रविवार 15 फरवरी।
9-दिवसीय देवी-उपासना; घटस्थापना 19 मार्च; दुर्गा-अष्टमी एवं राम-नवमी एक-साथ 26 मार्च 2026 पर। 2026 — गुरुवार 19 मार्च से शुक्रवार 27 मार्च।
मणिक्य वंश के 14 देवताओं (चतुर्दश देवता) की पूजा; पुरानी अगरतला के चतुर्दश देवता मंदिर में 7-दिवसीय मेला (मातबाड़ी से भिन्न-स्थल किन्तु समान राज्य-देवी-तंत्र-तंत्र)। 2026 — मंगलवार 21 जुलाई।
दुर्गा-पूजा का विस्तृत-अलंकार। 2026 घटस्थापना — रविवार 11 अक्टूबर; विजयदशमी — मंगलवार 20 अक्टूबर।
देवी-प्रादुर्भाव दिवस; ललिता सहस्रनाम पारायण। 2026 — बुधवार 4 मार्च।
शरद नवरात्रि के 5वें दिन ललिता-विशेष-पूजा।
ललिता त्रिपुर सुन्दरी = श्रीकुल तंत्र की सर्वोच्च देवी; षोडशी महाविद्या; श्री-यन्त्र की अधिष्ठात्री
स्रोत: ब्रह्माण्ड पुराण ललितोपाख्यान + त्रिपुर रहस्य + सौन्दर्य लहरी
सती के दक्षिण-चरण-पीठ; भैरव: त्रिपुरेश; पीठ-माला ग्रन्थ-प्रमाणित
स्रोत: पीठ-माला ग्रन्थ
उत्तर-पूर्व भारत का द्वितीय सर्वाधिक-दर्शनीय शाक्त-तीर्थ (कामाख्या के पश्चात्); संयुक्त-यात्रा का प्रमुख-तीर्थ
स्रोत: उत्तर-पूर्व शाक्त-परंपरा
मातबाड़ी का प्रसिद्ध पेड़ा-प्रसाद; देवी की कृपा हेतु; 2025 से ऑनलाइन गृह-वितरण भी उपलब्ध
स्रोत: स्थल-परंपरा
त्रिपुर सुन्दरी मंदिर भारत के उन कुछ शाक्त-मंदिरों में सम्मिलित जहाँ पशुबलि कानूनी रूप से अनुमत; दीवाली एवं विशेष-तिथियों पर पारंपरिक पशुबलि का स्थल; 2019 में SC-stay के पश्चात् पुनः-प्रारम्भ
स्रोत: त्रिपुरा शाक्त-परंपरा (कानूनी रूप से अनुमत)
1625-1660 ईस्वी महाराजा कल्याण मणिक्य द्वारा निर्मित; 6.4 एकड़ (224 गज × 160 गज); देवी का स्नान-तालाब; पवित्र बोस्टामी काले-कछुए (Nilssonia nigricans — IUCN द्वारा 2002 में विलुप्त घोषित परन्तु यहाँ एवं असम के हयग्रीव माधव मंदिर में पुनः-खोजे गए) — कूर्म पीठ की पहचान से सम्बद्ध
1660-1675 ईस्वी महाराजा गोविन्द मणिक्य द्वारा निर्मित (गोमती नदी-तट); 17वीं शताब्दी बंगाली चार-चाला स्थापत्य; रवीन्द्रनाथ टैगोर के नाटक 'राजर्षि' एवं 'बिसर्जन' में अमर; ASI-संरक्षित
1760 ईस्वी महाराजा कृष्ण मणिक्य द्वारा निर्मित; मणिक्य वंश के 14 राज-देवताओं (बुरासा/शिव, लम्प्रा/विष्णु आदि) का घर; खर्ची पूजा का केन्द्र
1930 ईस्वी महाराजा बीर बिक्रम किशोर मणिक्य द्वारा निर्मित; भारत का सर्वाधिक-बड़ा जल-महल; अगरतला से 53 किमी दक्षिण
11वीं-12वीं शताब्दी ईस्वी शैव शैल-तक्षण मूर्तियाँ; उनाकोटीश्वर काल भैरव ~30 फुट
दक्षिण-चरण-पीठ; भैरव: त्रिपुरेश
51 मंदिर
कामाख्या (गुवाहाटी, असम) + त्रिपुर सुन्दरी (उदयपुर, त्रिपुरा) + नार्तियांग दुर्गा (मेघालय) — उत्तर-पूर्व का द्वितीय सर्वाधिक-दर्शनीय शाक्त-तीर्थ (कामाख्या के पश्चात्)
3 मंदिर
मातबाड़ी (उदयपुर) → भुवनेश्वरी (उदयपुर) → चतुर्दश देवता (पुरानी अगरतला) → अगरतला त्रिपुर सुन्दरी उप-मंदिर → नीरमहल → उनाकोटी
6 मंदिर · 3 दिन
3री महाविद्या (षोडशी) का प्रमुख-स्थल
10 मंदिर