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Chopta · Uttarakhand

श्री तुङ्गनाथ महादेव मंदिर

श्री तुङ्गनाथ महादेव मंदिर — चोप्ता, ज़िला रुद्रप्रयाग, उत्तराखण्ड (विश्व का सर्वाधिक-ऊँचा शिव मंदिर — 3,680 मीटर)

तुङ्गनाथ — 'शिखरों के अधिपति'; पञ्च केदार का तृतीय केदार; शिव के बाहु (भुजा) का प्रकटन-स्थल

अन्य नाम: तृतीय केदार · बाहु-केदार · नीलकण्ठ

  • पञ्च केदार
  • विश्व का सर्वाधिक-ऊँचा शिव मंदिर
  • चन्द्रशिला-शिखर
श्री तुङ्गनाथ महादेव मंदिर
दर्शन समय
06:00 (खुले-सत्र के दौरान) – 20:00 (खुले-सत्र के दौरान)
स्वरूप
स्थायी शिवलिङ्ग
स्थान
Chopta · Uttarakhand
उत्तम ऋतु
अप्रैल-जून एवं सितंबर-अक्टूबर सर्वोत…
काल
1,000+ वर्ष प्राचीन वर्तमान-संरचना

इस मन्दिर की विशेषता

  • पञ्च केदार — तृतीय केदार; शिव-बाहु प्रकटन-स्थल; अन्य 4: केदारनाथ (कूबड़ — 3583 मी), मध्यमहेश्वर (नाभि — 3497 मी), रुद्रनाथ (मुख — 3559 मी), कल्पेश्वर (केश — 2200 मी)
  • विश्व का सर्वाधिक-ऊँचा शिव मंदिर — 3,680 मीटर (12,073 फुट)
  • चन्द्रशिला-शिखर (4,000 मीटर) के नीचे अवस्थित — राम-तप-स्थल
01
मूल विग्रह

मुख्य देव एवं स्वरूप

श्री तुङ्गनाथ महादेव — पाण्डव-पञ्च केदार-कथा अनुसार शिव की बाहु (भुजा) यहाँ प्रकट; गर्भगृह में शिवलिङ्ग सहित व्यास, काल-भैरव एवं पाण्डव-मूर्तियाँ; शीतकाल में उत्सव-मूर्ति (डोली) मक्कुमठ (मुक्कुमठ) ग्राम के मार्कण्डेय मंदिर में स्थानान्तरित

स्थायी शिवलिङ्ग; पाण्डव + व्यास + काल-भैरव सहायक-मूर्तियाँ; उत्सव-मूर्ति शीतकाल में मक्कुमठ-स्थानान्तरण

सम्प्रदाय: शैव — पाण्डव-पञ्च केदार परंपरा

02
स्थल-पुराण

कथा, इतिहास एवं महत्व

पाण्डव-पञ्च केदार कथा (महाभारत-उत्तर परंपरा)

कुरुक्षेत्र-युद्ध के पश्चात् पाण्डव कृष्ण की सलाह पर वाराणसी पहुँचे; शिव गढ़वाल में नन्दि-रूप (बैल) में पलायन; गुप्तकाशी में भीम ने बैल पहचाना; शिव पृथ्वी में लीन एवं 5-स्थानों पर पुनः-प्रकट: केदारनाथ (कूबड़), तुङ्गनाथ (बाहु), रुद्रनाथ (मुख), मध्यमहेश्वर (नाभि), कल्पेश्वर (केश)

रामायण-सम्बद्ध परंपरा

श्री राम ने रावण-वध के पाप-निवारण हेतु तुङ्गनाथ के निकटवर्ती चन्द्रशिला-शिखर पर तप किया

संत एवं परम्परा

  • पाण्डव (विशेषतः अर्जुन) — मंदिर की प्रथम-नींव-स्थापना की परंपरागत-मान्यता
  • महर्षि व्यास — गर्भगृह में सहायक-मूर्ति के रूप में पूज्य
  • काल भैरव — गर्भगृह में सहायक-मूर्ति
  • आदि शंकराचार्य (8वीं शताब्दी) — तुङ्गनाथ-शाल की पुनः-खोज एवं पुनरुद्धार-परंपरा; पञ्च केदार के अन्य पीठों में दक्षिण-भारतीय वंश-परंपरा स्थापित की किन्तु तुङ्गनाथ ने मक्कुमठ-स्थानीय-गढ़वाली ब्राह्मण-वंश को बनाए रखा
  • मक्कुमठ-ग्राम के मैथाणी ब्राह्मण (खासी ब्राह्मण) — तुङ्गनाथ के अद्वितीय-स्थानीय पुजारी-वंश; पञ्च केदार के अन्य 4 शाल दक्षिण-भारतीय-परंपरा से किन्तु तुङ्गनाथ केवल स्थानीय-गढ़वाली ब्राह्मण-संचालित
  • श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) — आधुनिक प्रशासन

ऐतिहासिक घटनाक्रम

  1. 9008वीं-10वीं शताब्दी — कात्यूरी-काल स्थापत्य; वर्तमान पाषाण-संरचनाWikipedia Tungnath + Uttarakhand Tourism + ecoheritage बहु-स्रोत
  2. 8008वीं शताब्दी — आदि शंकराचार्य द्वारा तुङ्गनाथ की पुनः-खोज एवं पुनरुद्धार (परंपरागत-मान्यता)Wikipedia + Inheritage Foundation + BhaktiBharat बहु-स्रोत
03
नित्य उपासना

दर्शन समय एवं आरती

06:00 (खुले-सत्र के दौरान) से 20:00 (खुले-सत्र के दौरान) तक · मध्याह्न विश्राम 12:00-15:00 (मध्याह्न विश्राम)

कपाट उद्घाटन06:00
दैनिक (अप्रैल-नवंबर)
प्रातः आरती06:30-07:00
दैनिक
प्रातः दर्शन07:00-12:00
दैनिक
अपराह्न दर्शन15:00-18:00
दैनिक
सायं आरती18:30
दैनिक
कपाट बन्द19:00-20:00
दैनिक

विशेष नियम: केवल पैदल-पहुँच (कोई सड़क/हेलिकॉप्टर नहीं); चोप्ता से 3.5 किमी सीधी चढ़ाई; ऑक्सीजन-कमी; मानसून (जुलाई-अगस्त) में भू-स्खलन-जोखिम; गर्भगृह में एक-साथ ~10 श्रद्धालु

04
दर्शन

दर्शन के प्रकार

सामान्य निःशुल्क दर्शननिःशुल्क
समय
06:00-20:00 (खुले-सत्र के दौरान)
उपयुक्त
सभी श्रद्धालु

कोई प्रवेश-शुल्क नहीं; पैदल-मार्ग केवल; फोटोग्राफी पूजा के दौरान सम्मानजनक-रूप से अनुमत।

शीतकाल मक्कुमठ दर्शननिःशुल्क
समय
नवंबर-अप्रैल

तुङ्गनाथ बन्द होने पर उत्सव-मूर्ति मार्कण्डेय/मार्कटेश्वर मंदिर मक्कुमठ-ग्राम में ~6 मास तक पूज्य।

डोली शोभायात्रा (कपाट उद्घाटन)
उपयुक्त
उद्घाटन-3-दिवसीय यात्रा

मक्कुमठ मार्कण्डेय मंदिर → भूतनाथ मंदिर → चोप्ता → तुङ्गनाथ — कपाट-उद्घाटन से 3 दिवस पूर्व प्रारम्भ।

05
उत्सव

प्रमुख पर्व एवं उत्सव

महाशिवरात्रि (मक्कुमठ-शीतकालीन-दर्शन)फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी

मन्दिर हिमपात के कारण बन्द; पूजा शीतकालीन-गद्दी मक्कुमठ-मार्कण्डेय मंदिर पर; निशीथ-काल 00:09-01:01 (15-16 फरवरी रात)। 2026 — रविवार 15 फरवरी।

तुङ्गनाथ कपाट उद्घाटन 2026बैसाख-वैशाख (अप्रैल-मई)

BKTC द्वारा पञ्चगर्ण ज्योतिषीय-गणना के अनुसार बैसाखी पर तिथि-घोषणा। 2026 हेतु दो-तिथि स्रोत-असहमति: 22 अप्रैल 2026 (कुछ स्रोत) एवं 2 मई 2026 (अन्य स्रोत) — आधिकारिक BKTC-घोषणा हेतु प्रतीक्षा करें। 3-दिवसीय डोली शोभायात्रा मक्कुमठ → चोप्ता → तुङ्गनाथ।

ग्रीष्म-दर्शन शिखर-कालवैशाख-ज्येष्ठ-आषाढ़-कार्तिक

अप्रैल-जून एवं सितंबर-अक्टूबर सर्वोत्तम; जुलाई-अगस्त मानसून-काल भू-स्खलन-जोखिम।

तुङ्गनाथ कपाट बन्द 2026कार्तिक-मार्गशीर्ष (नवंबर)

~4-5 नवंबर 2026 (अनुमानित विजय-दशमी-समीप-काल); उत्सव-मूर्ति का तुङ्गनाथ → चोप्ता → मक्कुमठ डोली-स्थानान्तरण; ~6 मास तक मक्कुमठ में पूजा।

06
आस्था

मनोकामना एवं फल

पञ्च केदार यात्रा-संकल्प (तृतीय केदार — बाहु-दर्शन)

पाण्डव-कथा के अनुसार शिव के बाहु (भुजा) का प्रकटन-स्थल; पञ्च केदार-यात्रा का 3रा-तीर्थ

स्रोत: पाण्डव-पञ्च केदार परंपरा

विश्व का सर्वाधिक-ऊँचा शिव-दर्शन-संकल्प

3,680 मीटर — विश्व का सर्वाधिक-ऊँचा शिव-मन्दिर; अद्वितीय-शिखर-दर्शन-पुण्य

स्रोत: स्थल-परंपरा (बहु-स्रोत-सत्यापित)

चन्द्रशिला राम-तप-स्थल यात्रा-संकल्प

तुङ्गनाथ से 1.5 किमी अधिक चढ़ाई पर चन्द्रशिला-शिखर (4,000 मी) पर श्री राम का रावण-वध-पाप-निवारण-तप-स्थल; चन्द्र-देव की तपस्या भी यहीं

स्रोत: रामायण-सम्बद्ध परंपरा

पाण्डव-तप-संकल्प

अर्जुन-स्थापित प्रथम-नींव; पाण्डवों का पाप-मोक्ष-संकल्प-स्थल

स्रोत: पाण्डव-पञ्च केदार कथा

07
जप

मन्त्र एवं स्तोत्र

  • ॐ नमः शिवायमूल मंत्रशैव परंपराइस मन्दिर हेतुतुङ्गनाथ-दर्शन का प्रमुख-मंत्र
  • शिव पञ्चाक्षर स्तोत्रस्तोत्रआदि शंकराचार्य रचित — 5 श्लोक (न-म-शि-वा-य)इस मन्दिर हेतुतुङ्गनाथ-शिव के नीलकण्ठ-रूप पर पारायण
  • रुद्राष्टाध्यायी / श्री रुद्रम्वैदिक सूक्तयजुर्वेदअभिषेक-काल में पारायण
08
तीर्थाटन

समीप के तीर्थ एवं परिपथ

चन्द्रशिला शिखर (4,000 मी)1.5 किमी

श्री राम का रावण-वध-पाप-तप-स्थल; चन्द्र-देव की तपस्या; 360° हिमालय-दृश्य (नन्दा देवी + चौखम्बा + त्रिशूल)

चोप्ता घास-मैदान ('मिनी स्विट्ज़रलैण्ड')3.5 किमी

तुङ्गनाथ-ट्रेक-आधार; प्रसिद्ध बुग्याल

देवरिया ताल (Deoria Tal — 2,438 मी)10 किमी

चौखम्बा-प्रतिबिम्ब-वाला अल्पाइन-झील; लोकप्रिय युगल-ट्रेक

कान्चुला खराक कस्तूरी-मृग अभयारण्य7 किमी

5 वर्ग-किमी कस्तूरी-मृग संरक्षण

मक्कुमठ ग्राम (शीतकालीन-गद्दी)25 किमी

मार्कण्डेय/मार्कटेश्वर मंदिर — शीतकाल में तुङ्गनाथ-उत्सव-मूर्ति का 6-मासीय निवास

मध्यमहेश्वर (पञ्च केदार #2 — नाभि)50 किमी

पञ्च केदार का अगला-तीर्थ

केदारनाथ (पञ्च केदार #1 — कूबड़)100 किमी

पञ्च केदार के अग्रणी एवं 12 ज्योतिर्लिङ्ग में सम्मिलित

पञ्च केदार यात्रा (5-तीर्थ, 10-16 दिवसीय)

तृतीय केदार — बाहु; क्रम: ऋषिकेश/हरिद्वार → केदारनाथ (कूबड़, 16 किमी ट्रेक) → चोप्ता → तुङ्गनाथ (बाहु, 3.5 किमी ट्रेक) → गोपेश्वर → रुद्रनाथ (मुख, 18-20 किमी ट्रेक) → उखीमठ → मध्यमहेश्वर (नाभि, 16-18 किमी ट्रेक) → हेलंग → कल्पेश्वर (केश, 2 किमी ट्रेक — वर्ष-पर्यन्त-खुला); कुल ~1,400-1,500 किमी सड़क + ~60 किमी ट्रेक

5 मंदिर · 14 दिन

तुङ्गनाथ-चन्द्रशिला डबल-ट्रेक

तुङ्गनाथ-मंदिर-दर्शन + 1.5 किमी अतिरिक्त-चढ़ाई चन्द्रशिला-शिखर (राम-तप-स्थल); भारत के सर्वाधिक-लोकप्रिय शीत/सर्व-काल ट्रेकों में सम्मिलित

2 मंदिर · 2 दिन

गढ़वाल हिमालयी ट्रेकिंग

तुङ्गनाथ-चन्द्रशिला; देवरिया ताल; कान्चुला खराक — गढ़वाल हिमालय का प्रमुख ट्रेक-सर्किट

09
मार्गदर्शन

यात्रा एवं संपर्क

पता
श्री तुङ्गनाथ महादेव मंदिर, चोप्ता-तुङ्गनाथ ट्रेक, ज़िला रुद्रप्रयाग, उत्तराखण्ड (PIN-कोड क्षेत्रीय)
हवाई अड्डा
जॉली ग्रांट हवाई अड्डा (DED, देहरादून) — ~200-260 किमी
रेलवे
ऋषिकेश रेलवे स्टेशन — ~183-241 किमी
बस-स्टैण्ड
चोप्ता (आधार) — 3.5 किमी ट्रेक; उखीमठ ~29 किमी; रुद्रप्रयाग ~63 किमी
उत्तम ऋतु
अप्रैल-जून एवं सितंबर-अक्टूबर सर्वोत्तम; महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 (मक्कुमठ-दर्शन); कपाट-उद्घाटन अप्रैल/मई 2026; मानसून (जुलाई-अगस्त) भू-स्खलन-जोखिम; नवंबर-अप्रैल हिमपात-बन्द (मक्कुमठ-शिफ्ट)
3.5 किमीChopta
5 किमीChandrashila Peak
29 किमीUkhimath
25 किमीMakkumath
63 किमीRudraprayag
200 किमीRishikesh Railway
230 किमीJolly Grant Airport
460 किमीDelhi
100 किमीKedarnath