श्री कृष्ण-मूर्ति का जलयान-दुर्घटना मूल-कथा
श्री बाल-कृष्ण-मूर्ति का मूल — पारम्परिक-कथन-अनुसार रुक्मिणी-कृत संकल्पित मूर्ति विश्वकर्मा-निर्मित साल-ग्राम-शिला से; द्वारका में कृष्ण-स्वयं-पूज्य; कृष्ण-निर्गमन-पश्चात् गोपी-चन्दन-मिट्टी में दबा दी गई। एक द्वारका-नाविक ने मिट्टी-पिण्ड को अपनी नौका के भार-पत्थर (बैलस्ट) रूप में रखा; मलपे-तट (उडुपी-समीप) पर भीषण-तूफान-काल मध्वाचार्य ने अपनी योग-शक्ति से नौका-रक्षण किया एवं मिट्टी-पिण्ड ग्रहण किया। उसे तोड़ने पर बाल-कृष्ण एवं बलराम दोनों विग्रह प्रकट हुए। बलराम-मूर्ति वडभण्डेश्वर मन्दिर (मलपे) में + कृष्ण-मूर्ति उडुपी मठ में 1285 ईस्वी मकर सङ्क्रान्ति-दिन प्रतिष्ठित।
