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Udupi · Karnataka

श्री कृष्ण मठ

श्री कृष्ण मठ — उडुपी, कर्नाटक

श्री कृष्ण मठ; मध्वाचार्य-स्थापित (1285 ईस्वी मकर सङ्क्रान्ति) पश्चिमाभिमुख बाल-कृष्ण मूर्ति; कनक-किण्डि (नवग्रह-किण्डि अन्तर्-वातायन + कनक-किण्डि बाह्य-तोरण-दर्शन-वातायन); अष्ट-मठ-व्यवस्था (पलिमारु + अदमारु + कृष्णापुर + पुत्तिगे + शिरूर + सोदे + काणियूर + पेजावर); 2-वर्षीय पर्याय-घूर्णन; द्वैत-वेदान्त (तत्त्ववाद) सम्प्रदाय का प्रमुख-तीर्थ; परशुराम-क्षेत्र सप्त-मुक्ति-स्थलों में सम्मिलित

अन्य नाम: उडुपी श्री कृष्ण मठ · उडिपी कृष्ण मठ · उडुपी कृष्ण मन्दिर · मध्व-तीर्थ

  • द्वैत-वेदान्त
  • पश्चिमाभिमुख कृष्ण-मूर्ति विश्व का…
  • अष्ट-मठ-व्यवस्था
  • परशुराम-क्षेत्र सप्त-मुक्ति-स्थलों…
श्री कृष्ण मठ
दर्शन समय
04:00 – 21:00 (एकान्त-सेवा-समापन 20:30)
स्वरूप
बाल-कृष्ण मूर्ति
स्थान
Udupi · Karnataka
उत्तम ऋतु
सप्तोत्सव ~9-15 जनवरी 2026
काल
13वीं-शताब्दी ईस्वी

इस मन्दिर की विशेषता

  • द्वैत-वेदान्त (मध्व-तत्त्ववाद) सम्प्रदाय का सर्वोच्च-तीर्थ; मध्व-सम्प्रदाय-केन्द्र-स्थान
  • पश्चिमाभिमुख कृष्ण-मूर्ति विश्व का अद्वितीय कृष्ण-तीर्थ — कनक-किण्डि-वातायन-दर्शन-परम्परा (16वीं-शताब्दी कनक-दास-कथा-कारण)
  • अष्ट-मठ-व्यवस्था + 2-वर्षीय पर्याय-घूर्णन = विश्व का अद्वितीय वंशानुगत-घूर्णन-प्रशासन-तीर्थ (500+ वर्ष-पुरातन परम्परा)
  • परशुराम-क्षेत्र सप्त-मुक्ति-स्थलों में सम्मिलित (कोल्लूर मूकाम्बिका + उडुपी कृष्ण + कुक्के सुब्रह्मण्य + कुम्भाशी अनेगुड्डे विनायक + कोटेश्वर + शङ्करनारायण + गोकर्ण महाबलेश्वर)
  • गुरुवायुर के सङ्ग 'सौर अष्टमी-रोहिणी कृष्ण-जन्माष्टमी' मनाने वाले प्रमुख-तीर्थ-युग्म
  • 108 दिव्य-देशम् में नहीं (मध्व-सम्प्रदाय; आऴ्वार-वैष्णव-परम्परा-बाह्य)
01
मूल विग्रह

मुख्य देव एवं स्वरूप

श्री बाल-कृष्ण (साल-ग्राम-शिला-निर्मित मूर्ति — हाथ में मन्थन-दण्ड (मथानी) + मन्थन-रज्जु (दही-मथानी-रस्सी); पारम्परिक-कथन अनुसार रुक्मिणी-कृत + विश्वकर्मा-निर्मित; मूर्ति पश्चिम-मुख — कनक-दास-कथा-कारण); उप-देवता: मुख्य-प्राण (मध्व-तीर्थ-केन्द्रीय हनुमान-उपासना)

बाल-कृष्ण मूर्ति (साल-ग्राम-शिला; ~3.5 फीट); पश्चिम-मुख (कनक-दास-दर्शन-कथा-कारण); मूर्ति-दर्शन केवल कनक-किण्डि (पश्चिम-दीवार-वातायन) से जो दो भाग में: अन्तर्-नवग्रह-किण्डि (9-छिद्र) + बाह्य-कनकना-किण्डि (तोरण-स्वरूप)

सम्प्रदाय: द्वैत-वेदान्त (मध्व-तत्त्ववाद) — मध्वाचार्य-स्थापित; प्रशासन: 8-मठ (अष्ट-मठ) पर्याय-घूर्णन-व्यवस्था (पलिमारु + अदमारु + कृष्णापुर + पुत्तिगे + शिरूर + सोदे + काणियूर + पेजावर) 2-वर्षीय कार्यकाल-घूर्णन-अनुसार; 2026-2028 पर्याय: शिरूर मठ (श्री वेद-वर्धन तीर्थ स्वामीजी; 18 जनवरी 2026 कार्यभार-ग्रहण); 2028-2030 पर्याय: सोदे मठ

02
स्थल-पुराण

कथा, इतिहास एवं महत्व

श्री कृष्ण-मूर्ति का जलयान-दुर्घटना मूल-कथा

श्री बाल-कृष्ण-मूर्ति का मूल — पारम्परिक-कथन-अनुसार रुक्मिणी-कृत संकल्पित मूर्ति विश्वकर्मा-निर्मित साल-ग्राम-शिला से; द्वारका में कृष्ण-स्वयं-पूज्य; कृष्ण-निर्गमन-पश्चात् गोपी-चन्दन-मिट्टी में दबा दी गई। एक द्वारका-नाविक ने मिट्टी-पिण्ड को अपनी नौका के भार-पत्थर (बैलस्ट) रूप में रखा; मलपे-तट (उडुपी-समीप) पर भीषण-तूफान-काल मध्वाचार्य ने अपनी योग-शक्ति से नौका-रक्षण किया एवं मिट्टी-पिण्ड ग्रहण किया। उसे तोड़ने पर बाल-कृष्ण एवं बलराम दोनों विग्रह प्रकट हुए। बलराम-मूर्ति वडभण्डेश्वर मन्दिर (मलपे) में + कृष्ण-मूर्ति उडुपी मठ में 1285 ईस्वी मकर सङ्क्रान्ति-दिन प्रतिष्ठित।

कनक-दास + कनक-किण्डि कथा (पश्चिम-मुख-परिवर्तन)

16वीं-शताब्दी हरि-दास सन्त कनक-दास (1509-1609; व्यासतीर्थ-शिष्य) को जाति-कारण मन्दिर-पूर्व-द्वार-प्रवेश-अस्वीकार-हुआ। उन्होंने मन्दिर के पश्चिम-दीवार-बाहर बैठ कर भक्ति-गीत गाए। पारम्परिक-कथा: कृष्ण-मूर्ति स्वतः पश्चिम-मुख हुई एवं पश्चिम-दीवार में एक छिद्र-वातायन-स्वतः प्रकट हुआ जिससे कनक-दास को दर्शन-प्राप्ति हुई। तब से मूर्ति पश्चिम-मुख ही पूज्य; श्रद्धालु इसी कनक-किण्डि-वातायन (अन्तर्-नवग्रह-किण्डि 9-छिद्र + बाह्य-कनकना-किण्डि तोरण-स्वरूप) से दर्शन करते हैं।

अष्ट-मठ-स्थापना एवं पर्याय-घूर्णन-व्यवस्था

मध्वाचार्य ने अपने 8 प्रमुख-शिष्यों को 8 मठों का नेतृत्व सौंपा: पलिमारु, अदमारु, कृष्णापुर, पुत्तिगे, शिरूर, सोदे, काणियूर, पेजावर। प्रत्येक मठ क्रम-अनुसार 2-वर्षीय पर्याय-कार्यकाल पर मन्दिर-प्रबन्धन-दायित्व ग्रहण करता है (16-वर्षीय पूर्ण-चक्र); पर्याय-हस्तान्तरण 18 जनवरी सम-वर्षों में ~02:30 AM पर्याय-महोत्सव-समारोह में होता है। 500+ वर्ष-पुरातन परम्परा (Wikipedia अनुसार 2021 में 500 वर्ष पूर्ण)। तैयारी-समारोह 1 वर्ष पूर्व: बाले + अक्की + कट्टिगे + बाथा।

मध्वाचार्य-अदृश्य-कथा (अनन्तेश्वर मन्दिर में)

मध्वाचार्य ने अपने 79वें-वर्ष में अनन्तेश्वर मन्दिर (अष्टमी-शताब्दी अलूप-निर्मित शिव-मन्दिर; उडुपी कृष्ण मठ-समीप; पुत्तिगे मठ-प्रबन्धित) में ऐतरेय उपनिषद् पर प्रवचन-काल पुष्प-वर्षा के साथ अदृश्य हो गए; पारम्परिक-कथन-अनुसार वे व्यास-सङ्ग बद्रिकाश्रम-गमन कर चिर-जीवित हैं — मध्व-नवमी-कथा-केन्द्र।

अन्नदान-परम्परा (विश्व-प्रसिद्ध उडुपी-व्यञ्जन-शैली)

दैनिक नित्य-अन्नदान — मध्याह्न 12:00-14:00 + सायं 19:00-21:00; पारम्परिक उडुपी-व्यञ्जन-शैली (साम्बार, रसम्, मन्न, पायसम्); अष्ट-मठ-व्यवस्था-समर्थित।

संत एवं परम्परा

  • मध्वाचार्य (पारम्परिक 1238-1317 / वैकल्पिक 1199-1278) — द्वैत-वेदान्त (तत्त्ववाद) सम्प्रदाय-स्थापक; उडुपी कृष्ण मठ + अनन्तेश्वर मन्दिर-अदृश्य (मध्व-नवमी); अष्ट-मठ-स्थापक
  • विश्वकर्मा (पारम्परिक) — रुक्मिणी-संकल्पित कृष्ण-मूर्ति-निर्माता
  • कनक-दास (1509-1609) — हरि-दास सन्त; व्यासतीर्थ-शिष्य; कनक-किण्डि-कथा-केन्द्र; ~240 कन्नड़-देवरनाम-रचयिता; उपनाम 'कागिनेले आदिकेशव'
  • पुरन्दर-दास (1484-1564) — कनक-दास के समकालीन हरि-दास; कर्नाटक-संगीत-पितामह; स्वरावलि-अलङ्कार-मायामालव-गौला-शिक्षण-संहिता-निर्माता; उडुपी-भक्ति-गीत-रचयिता
  • व्यासतीर्थ (1460-1539) — पूर्व-पर्याय मध्व-स्वामी; कनक-दास + पुरन्दर-दास-गुरु
  • अष्ट-मठ-स्वामीजी-वंश — पलिमारु + अदमारु + कृष्णापुर + पुत्तिगे + शिरूर + सोदे + काणियूर + पेजावर; 2-वर्षीय पर्याय-घूर्णन
  • शिरूर मठ श्री वेद-वर्धन तीर्थ स्वामीजी — वर्तमान-पर्याय (2026-2028; 18 जनवरी 2026 कार्यभार-ग्रहण)
  • पुत्तिगे मठ — अनन्तेश्वर मन्दिर-प्रबन्धक
  • श्री राघवेन्द्र तीर्थ (पुत्तिगे मठ, 16वीं-शताब्दी) — मध्व-सरोवर-पाषाण-नवीकरण-कर्ता

ऐतिहासिक घटनाक्रम

  1. 8008वीं-शताब्दी ईस्वी — अनन्तेश्वर मन्दिर (शिव) अलूप-राजवंश-निर्मित; उडुपी का प्राचीनतम मन्दिरWikipedia Anantheshwara + Udupi Pages + Templetimings बहु-स्रोत
  2. 1285मकर सङ्क्रान्ति 1285 ईस्वी — मध्वाचार्य द्वारा उडुपी कृष्ण मठ-स्थापना + बाल-कृष्ण-मूर्ति-प्रतिष्ठा (मलपे-तट जलयान-दुर्घटना-कथा-अनुसार)Wikipedia Madhvacharya + Karnataka.com + Holydham 3+ बहु-स्रोत
  3. 1317पारम्परिक-तिथि (मध्व-तिथि-अनुसार) — मध्वाचार्य 79-वर्ष-आयु में अनन्तेश्वर मन्दिर में ऐतरेय-उपनिषद्-प्रवचन-काल अदृश्य; बद्रिकाश्रम-गमन (मध्व-नवमी-कथा)Wikipedia + Madhva परम्परा
  4. 152116वीं-शताब्दी — कनक-दास (1509-1609) कनक-किण्डि-कथा; पश्चिम-मुख कृष्ण-दर्शन-परम्परा-स्थापनाWikipedia Kanakana Kindi + India-A2Z बहु-स्रोत
  5. 2021पर्याय-व्यवस्था 500-वर्ष-पूर्णWikipedia Paryaya
  6. 202618 जनवरी 2026 — शिरूर मठ श्री वेद-वर्धन तीर्थ स्वामीजी-कार्यभार-ग्रहण (पर्याय 2026-2028); 19 जनवरी 2026 — नवीनतम वस्त्र-संहिता: पुरुष-दिन-पर्यन्त शर्ट-त्याग अनिवार्यThe Week + Daijiworld + The Federal + Deccan Chronicle बहु-स्रोत
03
नित्य उपासना

दर्शन समय एवं आरती

04:00 से 21:00 (एकान्त-सेवा-समापन 20:30) तक · मध्याह्न विश्राम 12:00-16:00 (मध्याह्न-विश्राम)

मन्दिर-उद्घाटन04:00
दैनिक
निर्माल्य-विसर्जन05:00
दैनिक
मङ्गल-आरती05:30
दैनिक
उषाकाल-पूजा06:00
दैनिक
अक्षय-पात्र गो-पूजा06:15
दैनिक
विश्वरूप-दर्शन06:20
दैनिक
पञ्चामृत-अभिषेक06:30
दैनिक
उद्वर्तन-पूजा07:00
दैनिक
कलश-पूजा07:30
दैनिक
तीर्थ-पूजा07:40
दैनिक
(मन्दिर-मध्याह्न-विश्राम)12:00-16:00
दैनिक
महा-पूजा19:30
दैनिक
रथ-शोभायात्रा (उत्थान-द्वादशी-से-पावस-काल)19:00-20:00
मौसमी-दैनिक
एकान्त-सेवा (मन्दिर-समापन)20:30
दैनिक

वस्त्र-संहिता: (19 जनवरी 2026-पर्याय शिरूर मठ-नवीन वस्त्र-संहिता-दिन-पर्यन्त-लागू): पुरुष: शर्ट-त्याग अनिवार्य (शाल-वस्त्र-अनुमत); धोती/पैण्ट; शॉर्ट्स-निषिद्ध। स्त्री: साड़ी/सलवार-कमीज/लम्बी-स्कर्ट; स्लीवलेस/शॉर्ट/जीन्स/टी-शर्ट सभी-हेतु निषिद्ध। पूर्व: पुरुष-शर्ट-त्याग केवल पूर्व-11 AM महा-पूजा-तक था

फोटोग्राफी: गर्भगृह-फोटोग्राफी निषिद्ध; प्राङ्गण-फोटोग्राफी अनुमति-सहित

विशेष नियम: मूर्ति-दर्शन केवल कनक-किण्डि-वातायन से (पूर्व-द्वार-प्रवेश-पश्चात्); मध्याह्न-विश्राम 12:00-16:00 कोई दर्शन-नहीं; वस्त्र-संहिता दिन-पर्यन्त-लागू (19 जनवरी 2026-से); अनन्तेश्वर + चन्द्रमौलीश्वर-दर्शन उडुपी कृष्ण मठ-दर्शन-पूर्व पारम्परिक-क्रम (चन्द्रमौलीश्वर → अनन्तेश्वर → कृष्ण मठ)

04
दर्शन

दर्शन के प्रकार

सामान्य निःशुल्क दर्शन (कनक-किण्डि-वातायन से)निःशुल्क
समय
04:00-12:00 + 16:00-21:00

पश्चिम-मुख बाल-कृष्ण-मूर्ति-दर्शन कनक-किण्डि-वातायन से (अन्तर्-नवग्रह-किण्डि 9-छिद्र + बाह्य-कनकना-किण्डि तोरण-स्वरूप)।

विश्वरूप-दर्शन (प्रात:-काल)निःशुल्क
समय
06:20 दैनिक

मूर्ति का दिव्य-अलङ्कार-दर्शन; मङ्गल-आरती-पश्चात्।

पञ्चामृत-अभिषेक + विशेष-अर्चना सेवा

व्यक्तिगत/परिवार-नाम-गोत्र-सङ्ग; पर्याय-मठ-कार्यालय-बुकिंग।

नित्य-अन्नदान (मध्याह्न + सायं)निःशुल्क
समय
12:00-14:00 + 19:00-21:00

विश्व-प्रसिद्ध उडुपी-व्यञ्जन-शैली पारम्परिक-भोजन (साम्बार, रसम्, मन्न, पायसम्); अष्ट-मठ-समर्थित।

रथ-शोभायात्रा-दर्शन (उत्थान-द्वादशी-से-पावस-काल)निःशुल्क
समय
सायं 19:00-20:00

दैनिक मन्दिर-रथ-शोभायात्रा; मौसमी-काल केवल।

सप्तोत्सव-दर्शन (वार्षिक 7-दिवसीय; मकर सङ्क्रान्ति-पूर्व 5 दिन-से प्रारम्भ)निःशुल्क

9 जनवरी ~ प्रारम्भ; तेप्पोत्सव + ब्रह्म-रथ-शोभायात्रा + 3 रथ-उत्सव; मकर सङ्क्रान्ति-दिन शिखर — मूर्ति-स्थापना-वर्षगाँठ।

पर्याय-महोत्सव-दर्शन (द्वि-वार्षिक; 18 जनवरी सम-वर्ष)निःशुल्क

अष्ट-मठ-घूर्णन-पर्याय-हस्तान्तरण-समारोह; ~02:30 AM; 2026 में शिरूर मठ-कार्यभार-ग्रहण; अगला 2028: सोदे मठ।

05
उत्सव

प्रमुख पर्व एवं उत्सव

सप्तोत्सव (वार्षिक 7-दिवसीय)पौष-मास (जनवरी; मकर सङ्क्रान्ति-पूर्व 5 दिन-से प्रारम्भ); 2026: ~9-15 जनवरी 2026

तेप्पोत्सव + ब्रह्म-रथ-शोभायात्रा + 3 रथ-उत्सव; मकर सङ्क्रान्ति-दिन शिखर — मूर्ति-स्थापना-वर्षगाँठ (1285 ईस्वी)

पर्याय-महोत्सव (द्वि-वार्षिक; 18 जनवरी सम-वर्ष)माघ-मास (18 जनवरी सम-वर्ष); 2026: 18 जनवरी 2026 (शिरूर मठ ~02:30 AM कार्यभार-ग्रहण)

अष्ट-मठ-पर्याय-हस्तान्तरण-समारोह; 16-वर्षीय पूर्ण-चक्र; तैयारी-समारोह 1 वर्ष पूर्व (बाले + अक्की + कट्टिगे + बाथा)

मध्व-नवमीमाघ शुक्ल नवमी; 2026: 27 जनवरी 2026

मध्वाचार्य 79-वर्ष-आयु में अनन्तेश्वर मन्दिर-अदृश्य-स्मरण; बद्रिकाश्रम-गमन-कथा-वर्षगाँठ

श्री कृष्ण लीलोत्सव / विट्ठल-पिण्डी (कृष्ण-जन्माष्टमी)अष्टमी-रोहिणी (केरल-कर्नाटक सौर-पञ्चाङ्ग); 2026: ~5-6 सितंबर 2026 (मध्व-वैष्णव-परम्परा-अनुसार स्मार्त-तिथि-से 1 दिन बाद)

वार्षिक-रात्रि-उत्सव; हुलिवेश (बाघ-नृत्य) पारम्परिक लोक-कला हाल-मार्क

मकर सङ्क्रान्तिपौष शुक्ल; 2026: 14 जनवरी 2026

मूर्ति-स्थापना-वर्षगाँठ (1285 ईस्वी); सप्तोत्सव-शिखर-दिन

रथ-सप्तमीमाघ शुक्ल सप्तमी

सूर्य-रथ-उत्सव

हनुमान-जयन्तीमार्गशीर्ष (दिसंबर)

मुख्य-प्राण-हनुमान-उपासना (मध्व-तीर्थ-केन्द्रीय)

06
आस्था

मनोकामना एवं फल

पश्चिम-मुख कृष्ण-दर्शन-संकल्प (कनक-किण्डि-वातायन से)

विश्व का अद्वितीय पश्चिम-मुख कृष्ण-तीर्थ; कनक-दास-कथा-कारण पश्चिम-मुख मूर्ति; अन्तर्-नवग्रह-किण्डि (9-छिद्र) + बाह्य-कनकना-किण्डि (तोरण) से दर्शन; भक्ति-सर्वोपरि-संकल्प-तीर्थ

स्रोत: Wikipedia Kanakana Kindi + India-A2Z + Travel.earth बहु-स्रोत

मध्व-नवमी-व्रत-संकल्प (मध्वाचार्य-अदृश्य-वर्षगाँठ)

माघ शुक्ल नवमी (27 जनवरी 2026) — मध्वाचार्य-अदृश्य-दिन-स्मरण; द्वैत-तत्त्ववाद-संकल्प-तीर्थ

स्रोत: Dharma Renaissance Blog + Drikpanchang + Hindu-Blog बहु-स्रोत

पर्याय-महोत्सव-दर्शन-संकल्प (द्वि-वार्षिक 18 जनवरी)

अष्ट-मठ-पर्याय-हस्तान्तरण ~02:30 AM समारोह; 2026 शिरूर मठ-कार्यभार-ग्रहण; विश्व का अद्वितीय-वंशानुगत-घूर्णन-प्रशासन-दर्शन-संकल्प-तीर्थ

स्रोत: The Week + Daijiworld + Karnataka Tourism बहु-स्रोत

सप्तोत्सव-दर्शन-संकल्प (वार्षिक 7-दिवसीय मकर सङ्क्रान्ति)

मूर्ति-स्थापना-वर्षगाँठ (1285 ईस्वी) + तेप्पोत्सव + ब्रह्म-रथ + 3 रथ-उत्सव; उडुपी का वार्षिक-शिखर-उत्सव

स्रोत: Deccan Chronicle + Hans India + Udayavani बहु-स्रोत

नित्य-अन्नदान-सेवन-संकल्प (विश्व-प्रसिद्ध उडुपी-व्यञ्जन)

मध्याह्न 12:00-14:00 + सायं 19:00-21:00; विश्व-प्रसिद्ध उडुपी-व्यञ्जन-शैली पारम्परिक-भोजन; अष्ट-मठ-समर्थित; सेवा-संकल्प-तीर्थ

स्रोत: Temple Darshan Time + Karnataka Tourism बहु-स्रोत

द्वैत-वेदान्त (मध्व-तत्त्ववाद) उपासना-संकल्प

मध्वाचार्य-स्थापित द्वैत-वेदान्त (तत्त्ववाद) सम्प्रदाय का सर्वोच्च-तीर्थ; अद्वैत (शङ्कर) एवं विशिष्टाद्वैत (रामानुज) से भिन्न; मध्व-सम्प्रदाय-केन्द्र-स्थान-दर्शन-संकल्प-तीर्थ

स्रोत: Wikipedia Madhvacharya + परम्परा

परशुराम-क्षेत्र सप्त-मुक्ति-स्थल तीर्थयात्रा-संकल्प

कोल्लूर मूकाम्बिका + उडुपी कृष्ण + कुक्के सुब्रह्मण्य + कुम्भाशी अनेगुड्डे विनायक + कोटेश्वर + शङ्करनारायण + गोकर्ण महाबलेश्वर — परशुराम-क्षेत्र सप्त-मुक्ति-स्थल-तीर्थयात्रा; उडुपी-कृष्ण कृष्ण-स्थान

स्रोत: Templenet + Hindu-Blog बहु-स्रोत

07
जप

मन्त्र एवं स्तोत्र

  • कनक-दास-देवरनाम (~240 कन्नड़-भक्ति-गीत)हरि-दास भक्ति-गीतकनक-दास (1509-1609; उपनाम 'कागिनेले आदिकेशव')इस मन्दिर हेतुकनक-किण्डि-कथा-केन्द्र; पश्चिम-मुख कृष्ण-दर्शन-परम्परा-स्थापक-सन्त
  • पुरन्दर-दास-देवरनाम + स्वरावलि-अलङ्कारहरि-दास भक्ति-गीत + कर्नाटक-संगीत-शिक्षण-संहितापुरन्दर-दास (1484-1564; कर्नाटक-संगीत-पितामह)इस मन्दिर हेतुउडुपी-भक्ति-गीत; मायामालव-गौला-राग-केन्द्रित
  • द्वादश-स्तोत्र (मध्वाचार्य)मध्व-स्तोत्र-संग्रहमध्वाचार्य (1238-1317 पारम्परिक)इस मन्दिर हेतु12 स्तोत्र; उडुपी कृष्ण मठ-दैनिक-पूजा-संहिता का प्रमुख-अङ्ग
  • विष्णु सहस्रनामसहस्रनाम-स्तोत्रमहाभारत अनुशासन-पर्व
  • नारायण-कवचस्तोत्रभागवत पुराण
08
तीर्थाटन

समीप के तीर्थ एवं परिपथ

अनन्तेश्वर मन्दिर (शिव; 8वीं-शताब्दी अलूप-निर्मित)100 मी

उडुपी का प्राचीनतम मन्दिर; पुत्तिगे मठ-प्रबन्धित; मध्वाचार्य 79वें-वर्ष में यहाँ ऐतरेय-उपनिषद्-प्रवचन-काल अदृश्य (मध्व-नवमी-कथा); पारम्परिक-क्रम: चन्द्रमौलीश्वर → अनन्तेश्वर → कृष्ण मठ

चन्द्रमौलीश्वर मन्दिर (शिव)100 मी

पारम्परिक-क्रम: प्रथम-दर्शन; अनन्तेश्वर-पूर्व

मध्व-सरोवर (मध्व-पुष्करिणी)50 मी

स्वामीजी-पूजा-पूर्व-स्नान-तीर्थ; पारम्परिक-कथन-अनुसार 12-वर्ष में गङ्गा-अवतरण; भागीरथी-मूर्ति दक्षिण-पश्चिम-कोण; 16वीं-शताब्दी श्री राघवेन्द्र तीर्थ (पुत्तिगे मठ) द्वारा पाषाण-नवीकरण

मलपे समुद्र-तट + वडभण्डेश्वर मन्दिर (बलराम)6 किमी

कृष्ण-मूर्ति-शिप-व्रेक-स्थल; बलराम-मूर्ति-स्थापित (कृष्ण-मूर्ति-सङ्ग प्राप्त बलराम-विग्रह); मलपे-तट से कृष्ण-मूर्ति-यात्रा का ऐतिहासिक-केन्द्र

कोल्लूर मूकाम्बिका (परशुराम-क्षेत्र सप्त-मुक्ति-स्थल देवी-स्थान)80 किमी

परशुराम-क्षेत्र सप्त-मुक्ति-स्थल-तीर्थयात्रा देवी-स्थान

कुक्के सुब्रह्मण्य (परशुराम-क्षेत्र नाग-तीर्थ)110 किमी

परशुराम-क्षेत्र सप्त-मुक्ति-स्थल-तीर्थयात्रा नाग/षण्मुख-स्थान

मुरुदेश्वर श्री शिव मन्दिर120 किमी

विश्व-प्रसिद्ध 123 फीट शिव-मूर्ति + समुद्र-तट-मन्दिर

गोकर्ण महाबलेश्वर (परशुराम-क्षेत्र शिव-तीर्थ)220 किमी

परशुराम-क्षेत्र सप्त-मुक्ति-स्थल-तीर्थयात्रा शिव-स्थान

उडुपी त्रि-मन्दिर पारम्परिक-दर्शन-क्रम (चन्द्रमौलीश्वर → अनन्तेश्वर → कृष्ण मठ)

अन्तिम-शिखर-दर्शन: मुख्य-कृष्ण मठ; पारम्परिक-क्रम-अनुसार चन्द्रमौलीश्वर + अनन्तेश्वर-पश्चात् कृष्ण मठ-दर्शन

3 मंदिर

परशुराम-क्षेत्र सप्त-मुक्ति-स्थल तीर्थयात्रा

सप्त-स्थलों में कृष्ण-स्थान — कोल्लूर मूकाम्बिका + उडुपी कृष्ण + कुक्के सुब्रह्मण्य + कुम्भाशी अनेगुड्डे विनायक + कोटेश्वर + शङ्करनारायण + गोकर्ण महाबलेश्वर

7 मंदिर

मध्व-यात्रा (द्वैत-वेदान्त तीर्थ-क्लस्टर)

मध्व-सम्प्रदाय का सर्वोच्च-तीर्थ; अष्ट-मठ-पर्याय-व्यवस्था का मूल-केन्द्र

8 मंदिर

उडुपी + गुरुवायुर सौर-अष्टमी-रोहिणी कृष्ण-तीर्थ-युग्म

केरल-कर्नाटक के 2 प्रमुख कृष्ण-तीर्थ जो सौर-पञ्चाङ्ग-अनुसार अष्टमी-रोहिणी कृष्ण-जन्माष्टमी मनाते हैं

2 मंदिर

उडुपी + मलपे-वडभण्डेश्वर (बलराम) कृष्ण-बलराम-युग्म-दर्शन

मलपे-तट से प्राप्त मूर्ति-युग्म-तीर्थयात्रा; ऐतिहासिक-कृष्ण-मूर्ति-शिप-व्रेक-स्थल

2 मंदिर

09
मार्गदर्शन

यात्रा एवं संपर्क

पता
श्री कृष्ण मठ, कार स्ट्रीट, थेन्कपेटे, उडुपी, कर्नाटक — PIN 576101
हवाई अड्डा
मङ्गलूर अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (IXE, बजपे)
रेलवे
उडुपी रेलवे स्टेशन (UD; कोङ्कण रेलवे) — मन्दिर-से 2 किमी
बस-स्टैण्ड
उडुपी KSRTC बस-स्टैण्ड (मन्दिर-समीप); कर्नाटक RTC नियमित-बस-सेवा
उत्तम ऋतु
सप्तोत्सव ~9-15 जनवरी 2026 + मकर सङ्क्रान्ति 14 जनवरी 2026 (मूर्ति-स्थापना-वर्षगाँठ); पर्याय-महोत्सव 18 जनवरी 2026 (द्वि-वार्षिक); मध्व-नवमी 27 जनवरी 2026; कृष्ण-जन्माष्टमी विट्ठल-पिण्डी ~5-6 सितंबर 2026; शीत-मासों (नवंबर-फरवरी) में पश्चिम-घाट/कोङ्कण-यात्रा आरामदायक; पावस ऋतु (जून-सितंबर) में भारी-वर्षा
प्रबन्धन
अष्ट-मठ (8-मठ) पर्याय-घूर्णन-व्यवस्था 2-वर्षीय कार्यकाल-घूर्णन: पलिमारु + अदमारु + कृष्णापुर + पुत्तिगे + शिरूर + सोदे + काणियूर + पेजावर; 2026-2028 पर्याय: शिरूर मठ (श्री वेद-वर्धन तीर्थ स्वामीजी; 18 जनवरी 2026 कार्यभार-ग्रहण); 2028-2030 पर्याय: सोदे मठ; 500+ वर्ष-पुरातन परम्परा; मध्वाचार्य-वंशानुगत-स्थापना
2 किमीUdupi Railway
0.1 किमीAnantheshwara
6 किमीMalpe Beach
60 किमीMangalore
80 किमीKollur Mookambika
120 किमीMurudeshwar
220 किमीGokarna
404 किमीBangalore
880 किमीMumbai