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Kanchipuram · Tamil Nadu

श्री वरदराज पेरुमाल मन्दिर

श्री वरदराज पेरुमाल मन्दिर (देवराजस्वामी / हस्तगिरि) — विष्णु काञ्ची, ज़िला कांचीपुरम, तमिलनाडु

श्री वरदराज पेरुमाल / देवराज स्वामी — 108 दिव्य देशम में सम्मिलित; काञ्चीपुरम का प्रमुख विष्णु-तीर्थ; तिरुमाला तिरुपति वेङ्कटेश्वर के पश्चात् द्वितीय-वृहत् खड़ा-स्वरूप विष्णु; वैष्णव-परम्परा के 'त्रि-प्रमुख-पेरुमाल कोइल': श्रीरङ्गम (कोइल) + तिरुमाला तिरुपति + काञ्ची वरदराज (पेरुमाल कोइल); काञ्चीपुरम-मूमूर्तिवासम (विष्णु+शिव+शक्ति) त्रिकूट का विष्णु

अन्य नाम: वरदराज पेरुमाल · देवराज स्वामी · हस्तगिरि · अट्टिगिरि · पेरारुलालन् पेरुमाल · तिरुक्काची

  • 108 दिव्य देशम में सम्मिलित
  • वैष्णव-परम्परा के 'त्रि-प्रमुख-पेर…
  • काञ्चीपुरम मूमूर्तिवासम त्रिकूट का…
  • काञ्चीपुरम
श्री वरदराज पेरुमाल मन्दिर
दर्शन समय
06:00 – 20:00
स्वरूप
पारम्परिक-मोलवर
स्थान
Kanchipuram · Tamil Nadu
उत्तम ऋतु
अक्टूबर-फरवरी सर्वोत्तम मौसम
काल
मूल-नींव पल्लव-काल

इस मन्दिर की विशेषता

  • 108 दिव्य देशम में सम्मिलित (अल्वार-गायित मङ्गलाशासनम् — तिरुमङ्गै-अल्वार सहित)
  • वैष्णव-परम्परा के 'त्रि-प्रमुख-पेरुमाल कोइल' में सम्मिलित: श्रीरङ्गम (कोइल) + तिरुमाला तिरुपति + काञ्ची वरदराज (पेरुमाल कोइल)
  • काञ्चीपुरम मूमूर्तिवासम त्रिकूट का विष्णु — विष्णु (वरदराज) + शिव (एकाम्बरेश्वर पञ्च भूत स्थलम् पृथ्वी-तत्त्व) + शक्ति (कामाक्षी अम्मन शक्ति-पीठ)
  • काञ्चीपुरम — सात मोक्षपुरियों में सम्मिलित (अयोध्या-मथुरा-माया-काशी-काञ्ची-अवन्तिका-द्वारका)
  • अट्टि वरदर 40-वर्षीय दर्शन — विश्व का एकमात्र विष्णु-मन्दिर जहाँ काष्ठ-मूर्ति जल-संरक्षित होती है एवं 40 वर्ष-में-एक-बार-दर्शन-योग्य होती है; नवीनतम 2019; अगला ~2059
  • विजयनगर-शैली 100-स्तम्भ कल्याण-मण्डपम् — कृष्णदेवराय-कालीन उत्कीर्ण अश्व-यलि-योद्धा-स्तम्भ; पाषाण-शृङ्खला-शिल्प
01
मूल विग्रह

मुख्य देव एवं स्वरूप

श्री वरदराज पेरुमाल — हस्तगिरि (हाथी-स्वरूप पहाड़ी; पद्मवत्-विमान) पर वृहत्-खड़ा-स्वरूप; तिरुमाला वेङ्कटेश्वर के पश्चात् द्वितीय-वृहत् खड़ा-विष्णु; गर्भगृह तक 24 पाषाण-सोपान; पट्ट-महिषी पेरुन्देवी ठायार (लक्ष्मी) पृथक-शाला में; नाम 'वरदराज' = वर-दाता-राजा

पारम्परिक-मोलवर (मुख्य-मूर्ति) पाषाण-निर्मित खड़ा-विष्णु — हस्तगिरि-शीर्ष पर 24-सोपान-ऊर्ध्व गर्भगृह; द्वितीय अद्वितीय-मूर्ति 'अट्टि वरदर' अट्टि-काष्ठ-निर्मित ~3 मी / ~9 फुट खड़ा-स्वरूप — अनन्त-सरोवर-तट के भूमिगत-कक्ष में रजत-पेटी में जलमग्न; प्रत्येक 40 वर्ष में 48-दिवसीय दर्शन; 2019 जुलाई-अगस्त नवीनतम (1 करोड़+ श्रद्धालु); अगला ~2059

सम्प्रदाय: श्री वैष्णव सम्प्रदाय — श्री रामानुजाचार्य का जीवन-कालीन प्रमुख-निवास; विशिष्टाद्वैत-सिद्धान्त-स्थापना का केन्द्रीय-स्थल; तिरुक्काची नम्बि-मध्यस्थ-कथन 'षट्-शब्द (आरु वार्थैगल)' का उद्भव

02
स्थल-पुराण

कथा, इतिहास एवं महत्व

ब्रह्म-अश्वमेध-यज्ञ कथा (मूल-स्थल-पुराण)

अशरीरवाणी ने ब्रह्मा को बताया कि 100 अश्वमेध-यज्ञ-संपादन से विष्णु-दर्शन-प्राप्ति; उसी-वाणी ने सूचित किया कि सत्यव्रत क्षेत्र (काञ्ची) में एक यज्ञ अन्यत्र 100 के तुल्य। ब्रह्मा ने काञ्ची में यज्ञ-प्रारम्भ किया। वेगवती नदी (सरस्वती-स्वरूप; आधुनिक पालार) ने यज्ञ-स्थल बहाने का प्रयास किया; विष्णु ने सपाट-शयन-कर प्रवाह रोका; ब्रह्मा ने यज्ञ-संपादन किया; होम-कुण्ड से विष्णु वरदराज-स्वरूप प्रकट हुए।

इन्द्र-हस्तगिरि-कथा

सरस्वती-शाप से इन्द्र को हाथी-स्वरूप प्राप्त; विष्णु ने हस्तगिरि (हाथी-पहाड़ी)-रूप में मुक्ति दी; इन्द्र ने सरस्वती-साक्ष्य-हेतु गर्भगृह-गलियारे-छत पर स्वर्ण एवं रजत-गिरगिट स्थापित किए — आज भी श्रद्धालु स्पर्श-कर पाप/दोष-निवारण-संकल्प करते हैं।

अट्टि वरदर 40-वर्षीय कथा

अनन्त-सरोवरम् तीर्थ-कुण्ड में अट्टि-काष्ठ-निर्मित ~9-फुट खड़ा-मूर्ति रजत-पेटी में जलमग्न; प्रत्येक 40 वर्ष में 48-दिवसीय दर्शन-हेतु निकाली जाती है। नवीनतम: 1 जुलाई-17 अगस्त 2019 (1 करोड़+ श्रद्धालु); अगला ~2059।

दिव्य-प्रबन्धम् (नालायिर दिव्य प्रबन्धम्)

108 दिव्य-देशम में 'तिरुक्काची' मङ्गलाशासनम् — तिरुमङ्गै-अल्वार-गायित

संत एवं परम्परा

  • ब्रह्मा — अश्वमेध-यज्ञ-कर्ता; मूल-स्थापना
  • इन्द्र — हस्तगिरि-प्रकट; स्वर्ण-रजत-गिरगिट-स्थापना
  • तिरुमङ्गै अल्वार + अन्य अल्वार-सन्त — दिव्य-प्रबन्धम्-गायन
  • श्री रामानुजाचार्य (1017-1137 ईस्वी) — काञ्चीपुरम जीवन-कालीन-प्रमुख-निवास; विशिष्टाद्वैत-सिद्धान्त-स्थापना का केन्द्रीय-स्थल
  • तिरुक्काची नम्बि — श्री रामानुज एवं श्री वरदराज पेरुमाल के बीच मध्यस्थ; 'षट्-शब्द (आरु वार्थैगल)' विशिष्टाद्वैत-सिद्धान्त-संप्रेषक; देवराजाष्टकम्-रचयिता
  • पेरिय तिरुमलै नम्बि — श्री रामानुज के मामा (माता-कुल) एवं गुरु; रामायण-शिक्षक; तिरुमाला में दैनिक ~8 किमी आकाश-गङ्गा-धारा से जल-वाहन-कर वेङ्कटेश्वर-अभिषेक; वेङ्कटेश्वर ने उन्हें दर्शन देकर धारा का नाम 'आकाश गङ्गा' घोषित किया
  • श्री रामानुज-गोविन्दराज तिरुपति-प्रतिष्ठा (1130 ईस्वी) — चिदम्बरम-गोविन्दराज उत्सव-मूर्ति का तिरुपति-स्थानान्तरण-पश्चात्; काञ्ची-देवराज + तिरुपति-गोविन्दराज दोनों रामानुज-सम्बद्ध
  • पञ्चमतभञ्जनम् तातदेशिक एवं लक्ष्मी कुमार तातदेशिक (विजयनगर-काल) — 100-स्तम्भ कल्याण-मण्डपम् प्रारम्भ एवं समापन
  • कृष्णदेवराय (विजयनगर-राजा; 1509-1529) — 1517 ईस्वी रथ-दान
  • थथाचारियर परिवार — वंशानुगत मानद-न्यासी (आधुनिक-काल)

ऐतिहासिक घटनाक्रम

  1. 1053चोल-कालीन पाषाण-संरचना जीर्णोद्धारWikipedia + Pragyata बहु-स्रोत
  2. 1130श्री रामानुज द्वारा तिरुपति में गोविन्दराज स्वामी मन्दिर-प्रतिष्ठा (चिदम्बरम-स्थानान्तरण-पश्चात्); काञ्ची-तिरुपति-वंशीय-वैष्णव-सम्बन्ध-स्थापनाWikipedia Govindaraja Temple + Chinnajeeyar बहु-स्रोत
  3. 1517विजयनगर-राजा कृष्णदेवराय द्वारा रथ-दानWikipedia + Pragyata
  4. 2019अट्टि वरदर 40-वर्षीय-दर्शन: 1 जुलाई-17 अगस्त 2019; 48-दिन; 1 करोड़+ श्रद्धालुBharatpedia + Atlas Obscura + Casual Walker बहु-स्रोत
  5. 2026वैकासी ब्रह्मोत्सवम् 2026: 25 मई-5 जून 2026; गरुड-सेवै 30 मई 2026 प्रातः 04:00News Today + Skanda News
03
नित्य उपासना

दर्शन समय एवं आरती

06:00 से 20:00 तक

प्रातः दर्शन06:00-12:00
दैनिक
मध्याह्न-विश्राम (बन्द)12:00-16:00
दैनिक
सायं दर्शन16:00-20:00
दैनिक
ब्रह्मोत्सव-काल विस्तार04:00-22:00+
उत्सव-काल

विशेष नियम: गर्भगृह-फोटोग्राफी निषिद्ध; 24-सोपान-चढ़ाई हस्तगिरि-गर्भगृह-तक; अट्टि वरदर-दर्शन 40-वर्षीय (नवीनतम 2019; अगला ~2059); तिरुमङ्गै-अल्वार-गायित दिव्य-देशम वैष्णव-दर्शन-शैली

04
दर्शन

दर्शन के प्रकार

सामान्य निःशुल्क दर्शननिःशुल्क
समय
06:00-12:00 + 16:00-20:00 (दैनिक)
उपयुक्त
सभी श्रद्धालु

23-एकड़ दीवारित परिसर; हस्तगिरि 24-सोपान-चढ़ाई गर्भगृह-तक।

विशेष सशुल्क दर्शन (HR&CE)

विशेष-कतार HR&CE-काउण्टर से।

अट्टि वरदर 40-वर्षीय-दर्शन-संकल्प (अगला ~2059)

नवीनतम 2019 (1 करोड़+ श्रद्धालु); अनन्त-सरोवरम् भूमिगत-कक्ष-रजत-पेटी से 48-दिन निकाली जाती है।

100-स्तम्भ कल्याण-मण्डपम् दर्शन

विजयनगर-शैली; अश्व-यलि-योद्धा-स्तम्भ; रामायण-महाभारत-उत्कीर्णन; प्रसिद्ध पाषाण-शृङ्खला-शिल्प।

स्वर्ण-रजत-गिरगिट-स्पर्श-संकल्प

गर्भगृह-गलियारे-छत पर इन्द्र-स्थापित स्वर्ण एवं रजत-गिरगिट; स्पर्श-कर पाप/दोष-निवारण-संकल्प।

वैकासी ब्रह्मोत्सवम् 10-दिवसीय (मई-जून)

70-फुट काष्ठ-रथ-शोभायात्रा लक्ष्मी एवं भूदेवी-सहित; तृतीय-दिवस गरुड-सेवै 04:00 (अत्यन्त-प्रसिद्ध)।

05
उत्सव

प्रमुख पर्व एवं उत्सव

वैकासी ब्रह्मोत्सवम् 2026 (10-दिवसीय)वैकासी (मई-जून)

25 मई-5 जून 2026; तृतीय-दिन गरुड-सेवै 30 मई 2026 04:00 — भगवान वरदराज गरुड-वाहन-आरूढ़ निर्गमन-दोपहर वापसी; 70-फुट काष्ठ-रथ-शोभायात्रा लक्ष्मी एवं भूदेवी-सहित।

अट्टि वरदर 40-वर्षीय-दर्शन40-वर्ष अन्तराल

नवीनतम: 1 जुलाई-17 अगस्त 2019 (48-दिन; 1 करोड़+ श्रद्धालु); अगला ~2059; अनन्त-सरोवरम् भूमिगत-कक्ष से रजत-पेटी निकालना।

एकादशी एवं विष्णु-पर्वविशेष-तिथि

वैकुण्ठ एकादशी + अन्य-एकादशियाँ + विष्णु-जयन्ती-समारोह।

रामानुज-जयन्ती (तिरुवादिरै-चित्तिरै)चित्तिरै (चैत्र) तिरुवादिरै-नक्षत्र

श्री रामानुजाचार्य जन्म-वर्षगाँठ — काञ्ची-जीवन-काल-स्मरण।

06
आस्था

मनोकामना एवं फल

108 दिव्य देशम यात्रा-संकल्प

तिरुमङ्गै-अल्वार-गायित 'तिरुक्काची' दिव्य-देशम; वैष्णव-यात्रा-शृङ्खला-अन्तर्गत

स्रोत: दिव्य-प्रबन्धम्

वर-प्राप्ति-संकल्प (वरदराज नाम-अनुसार)

'वरदराज' = वर-दाता-राजा; नाम-अनुसार वर-प्राप्ति-तीर्थ; ब्रह्मा को वर-दान-कथा अनुसार

स्रोत: ब्रह्म-अश्वमेध-कथा

त्रि-प्रमुख-पेरुमाल कोइल-यात्रा-संकल्प

श्रीरङ्गम (कोइल) + तिरुमाला तिरुपति + काञ्ची वरदराज (पेरुमाल कोइल) — वैष्णव-त्रि-प्रमुख-तीर्थ-यात्रा

स्रोत: वैष्णव-परम्परा बहु-स्रोत

अट्टि वरदर 40-वर्षीय-दर्शन-संकल्प (अद्वितीय)

विश्व का एकमात्र विष्णु-मन्दिर जहाँ काष्ठ-मूर्ति 40-वर्षीय जल-संरक्षित-दर्शन; जीवन-में-एक-बार-दर्शन-दुर्लभ-संकल्प

स्रोत: Bharatpedia + Atlas Obscura बहु-स्रोत

पाप/दोष-निवारण-संकल्प (स्वर्ण-रजत-गिरगिट-स्पर्श)

इन्द्र-शाप-मुक्ति-स्थापित गिरगिट-स्पर्श से पाप/दोष-निवारण; इन्द्र-कथा अनुसार

स्रोत: Go Tirupati + Business Today + Tamilnadu Favourite Tourism बहु-स्रोत

विशिष्टाद्वैत-सिद्धान्त-दीक्षा संकल्प (श्री रामानुज-स्थल)

वरदराज पेरुमाल ने तिरुक्काची नम्बि के माध्यम से रामानुज को 6-आधारभूत विशिष्टाद्वैत-सिद्धान्त दिये; विशिष्टाद्वैत-दीक्षा-तीर्थ

स्रोत: Ramanuja List Archive + Ramanuja Wiki Foundry

काञ्चीपुरम मूमूर्तिवासम त्रिकूट-यात्रा-संकल्प

विष्णु (वरदराज) + शिव (एकाम्बरेश्वर) + शक्ति (कामाक्षी अम्मन) त्रिकूट; एक-नगर तीन-सम्प्रदाय

स्रोत: Wikipedia + Madras Musings

गरुड-सेवै दर्शन-संकल्प (वैकासी ब्रह्मोत्सवम् तृतीय-दिन)

गरुड-वाहन-आरूढ़ वरदराज-दर्शन — वैकासी ब्रह्मोत्सवम् का अत्यन्त-प्रसिद्ध-दिवस

स्रोत: News Today + Skanda News

07
जप

मन्त्र एवं स्तोत्र

  • ॐ नमो भगवते वासुदेवायद्वादशाक्षर मन्त्रभागवत-परम्परा
  • ॐ नमो नारायणायअष्टाक्षर मन्त्रवैष्णव परम्परा
  • देवराजाष्टकम् (तिरुक्काची नम्बि-रचित)अष्टकम्तिरुक्काची नम्बि (श्री रामानुज-काल)इस मन्दिर हेतुवरदराज पेरुमाल हेतु अद्वितीय अष्टकम्
  • नालायिर दिव्य प्रबन्धम् 'तिरुक्काची' पासुर-गायन (तिरुमङ्गै-अल्वार)तमिल वैष्णव स्तोत्रतिरुमङ्गै अल्वारइस मन्दिर हेतु108 दिव्य-देशम मङ्गलाशासनम्
  • विशिष्टाद्वैत आरु वार्थैगल (6-शब्द) पारायणवेदान्त-सिद्धान्त-पारायणश्री रामानुज (तिरुक्काची नम्बि-मध्यस्थ-वरदराज-कथन)इस मन्दिर हेतुवरदराज पेरुमाल ने तिरुक्काची नम्बि के माध्यम से रामानुज को 6 आधारभूत विशिष्टाद्वैत-सिद्धान्त दिये
08
तीर्थाटन

समीप के तीर्थ एवं परिपथ

एकाम्बरेश्वर मन्दिर (पञ्च भूत स्थलम् — पृथ्वी-तत्त्व)4 किमी

5 पञ्च भूत स्थलम् (शिव-पञ्च-तत्त्व-मन्दिर) में पृथ्वी-तत्त्व; काञ्चीपुरम मूमूर्तिवासम त्रिकूट का शिव

कामाक्षी अम्मन मन्दिर (शक्ति-पीठ)4 किमी

आदि-शक्ति-पीठ (नाभि-स्थान); काञ्चीपुरम मूमूर्तिवासम त्रिकूट की शक्ति; ललिता-त्रिपुर-सुन्दरी-स्वरूप

कैलासनाथर मन्दिर (पल्लव-कालीन शिव)3 किमी

8वीं-शताब्दी पल्लव-स्थापत्य का सर्वोत्तम-नमूना

वैकुण्ठ पेरुमाल मन्दिर (पल्लव दिव्य-देशम)2 किमी

108 दिव्य-देशम में सम्मिलित; पल्लव-कालीन

अष्टभुजम् पेरुमाल + यथोत्कारी पेरुमाल मन्दिर (विष्णु काञ्ची दिव्य-देशम)1 किमी

विष्णु काञ्ची-समूह के अन्य दिव्य-देशम; एक-दिवसीय-संयुक्त-दर्शन

अनन्त-सरोवरम् तीर्थ-कुण्ड (मन्दिर-परिसर)100 मी

अट्टि वरदर रजत-पेटी जल-संरक्षित-स्थल; तीर्थ-स्नान-कुण्ड

108 दिव्य देशम (वैष्णव यात्रा-शृङ्खला)

'तिरुक्काची' दिव्य-देशम; काञ्चीपुरम-विष्णु-काञ्ची-दिव्य-देशम-क्लस्टर का प्रमुख

108 मंदिर

त्रि-प्रमुख पेरुमाल कोइल यात्रा

श्रीरङ्गम (कोइल) + तिरुमाला तिरुपति + काञ्ची वरदराज (पेरुमाल कोइल) — वैष्णव-त्रि-प्रमुख-तीर्थ

3 मंदिर

काञ्चीपुरम मूमूर्तिवासम त्रिकूट (एक-नगर तीन-सम्प्रदाय)

वरदराज (विष्णु) + एकाम्बरेश्वर (शिव) + कामाक्षी अम्मन (शक्ति) त्रिकूट; एक-दिवसीय-दर्शन-संयोजन

3 मंदिर

विष्णु काञ्ची दिव्य-देशम क्लस्टर

वरदराज + वैकुण्ठ-पेरुमाल + अष्टभुजम् पेरुमाल + यथोत्कारी पेरुमाल + अन्य विष्णु काञ्ची दिव्य-देशम — एक-दिवसीय-यात्रा

14 मंदिर

सात मोक्षपुरी यात्रा

काञ्चीपुरम मोक्षपुरी का प्रमुख विष्णु-तीर्थ — अयोध्या, मथुरा, माया (हरिद्वार), काशी, **काञ्ची**, अवन्तिका, द्वारका

7 मंदिर

09
मार्गदर्शन

यात्रा एवं संपर्क

पता
अरुल्मिगु देवराजस्वामी मन्दिर, लिटिल काञ्चीपुरम् (विष्णु काञ्ची), ज़िला कांचीपुरम, तमिलनाडु — PIN 631501
हवाई अड्डा
चेन्नई अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (MAA) — ~72-75 किमी
रेलवे
कांचीपुरम रेलवे स्टेशन (KPM) — ~2-3 किमी; चेन्नई एगमोर/सेन्ट्रल — ~70 किमी
बस-स्टैण्ड
कांचीपुरम बस-स्टैण्ड (TNSTC) — मन्दिर-समीप; चेन्नई-कांचीपुरम-MTC एवं TNSTC बस-सेवा
उत्तम ऋतु
अक्टूबर-फरवरी सर्वोत्तम मौसम; वैकासी ब्रह्मोत्सवम् 25 मई-5 जून 2026; अप्रैल-जून तापमान 40°C+; अट्टि वरदर अगला-दर्शन ~2059
प्रबन्धन
तमिलनाडु HR&CE विभाग; मानद-न्यासी थथाचारियर परिवार (वंशानुगत)
3 किमीKanchipuram Railway Station
75 किमीChennai
110 किमीTirupati
80 किमीVellore
60 किमीMahabalipuram
110 किमीPondicherry
200 किमीChidambaram
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