ब्रह्म-अश्वमेध-यज्ञ कथा (मूल-स्थल-पुराण)
अशरीरवाणी ने ब्रह्मा को बताया कि 100 अश्वमेध-यज्ञ-संपादन से विष्णु-दर्शन-प्राप्ति; उसी-वाणी ने सूचित किया कि सत्यव्रत क्षेत्र (काञ्ची) में एक यज्ञ अन्यत्र 100 के तुल्य। ब्रह्मा ने काञ्ची में यज्ञ-प्रारम्भ किया। वेगवती नदी (सरस्वती-स्वरूप; आधुनिक पालार) ने यज्ञ-स्थल बहाने का प्रयास किया; विष्णु ने सपाट-शयन-कर प्रवाह रोका; ब्रह्मा ने यज्ञ-संपादन किया; होम-कुण्ड से विष्णु वरदराज-स्वरूप प्रकट हुए।
