अष्टविनायक-स्थल-पुराण-परम्परा (मुद्गल-पुराण + गणेश-पुराण-व्युत्पन्न-कथा)
कौण्डिन्यपुर के राजा भीम के पुत्र युवराज रुक्मांगद ने ऋषि वाचक्नवी की पत्नी मुकुन्दा के प्रणय-निवेदन को अस्वीकार किया; इन्द्र ने रुक्मांगद-वेष धरकर मुकुन्दा-संग-संग किया; उस-संयोग से गृत्समद का जन्म; गृत्समद ने पुष्पक-वन (बाद में भद्रक-वन / भद्रकवन = आधुनिक महाड) में गणेश की दीर्घ-तपस्या की; गणेश ने प्रकट-होकर वर दिया (ब्राह्मण-स्थिति-वर सहित); गणेश ने उसी-वन में नित्य-निवास का वचन दिया → वरदविनायक
