मार्कण्डेय पुराण — देवी माहात्म्यम्
अध्याय 81-93 (दुर्गा सप्तशती); अन्तिम-अध्याय में स्वयं देवी द्वारा भविष्य-वाणी — 'भविष्य-युग में मैं नन्द-गोप के घर में जन्म लूँगी एवं शुम्भ-निशुम्भ के पुनर्जन्म का संहार करूँगी, विन्ध्य-पर्वत पर निवास करते हुए' — 'विन्ध्यवासिनी' नाम का शास्त्रीय-स्रोत
