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Mirzapur · Uttar Pradesh

श्री माँ विन्ध्यवासिनी देवी मंदिर

श्री माँ विन्ध्यवासिनी देवी मंदिर — विन्ध्याचल धाम, मिर्ज़ापुर

विन्ध्यवासिनी / विन्ध्येश्वरी — विन्ध्य-निवासिनी; योगमाया; वसुदेव-सहोदरी

अन्य नाम: विन्ध्येश्वरी · योगमाया · महामाया · एकानंशा · नारायणी · वसुदेव-सहोदरी (कृष्ण की बहन) · कजरी देवी · विन्ध्याचल देवी

  • विन्ध्याचल त्रिकोण
  • देवी माहात्म्यम्
  • श्री-विद्या एवं तंत्र-सिद्धि का प्…
  • 51-शक्ति-पीठ की पारंपरिक अंग-पतन स…
श्री माँ विन्ध्यवासिनी देवी मंदिर
दर्शन समय
05:00 – 22:30
स्वरूप
श्याम-शिला मुख-स्वरूप
स्थान
Mirzapur · Uttar Pradesh
उत्तम ऋतु
अक्टूबर-मार्च सर्वोत्तम
काल
स्थल-माहात्म्य: अति-प्राचीन

इस मन्दिर की विशेषता

  • विन्ध्याचल त्रिकोण (माहा-त्रिकोण यंत्र) — विन्ध्यवासिनी (महालक्ष्मी, पूर्व-कोण) + काली खोह (महाकाली, दक्षिण-कोण) + अष्टभुजा (महासरस्वती, पश्चिम-कोण); भारत में अद्वितीय 3-मंदिर देवी-त्रिकोण-यंत्र
  • देवी माहात्म्यम् (मार्कण्डेय पुराण) में स्वयं देवी द्वारा घोषित 'विन्ध्यवासिनी' (अर्थ: विन्ध्य पर निवास करने वाली)
  • श्री-विद्या एवं तंत्र-सिद्धि का प्रमुख सिद्ध-पीठ
  • 51-शक्ति-पीठ की पारंपरिक अंग-पतन सूची में नहीं — किन्तु महा-त्रिकोण-यंत्र-स्थल एवं सिद्ध-पीठ के रूप में सर्वमान्य
  • योगमाया (कृष्ण-भगिनी) रूप — भागवत पुराण 10.4 के आधार पर
01
मूल विग्रह

मुख्य देव एवं स्वरूप

श्री माँ विन्ध्यवासिनी — आदि शक्ति / महादेवी; काले-पत्थर का मुख-स्वरूप स्वर्ण-नेत्र-सहित; लाल-वस्त्र अलंकृत; योगमाया-स्वरूप (वैष्णव दृष्टि) एवं महा-त्रिकोण-यंत्र के भीतर महालक्ष्मी-स्वरूप (शाक्त दृष्टि) — दोनों परंपराओं में पूज्य

श्याम-शिला मुख-स्वरूप; स्वर्ण-नेत्र; लाल-वस्त्र; गर्भगृह में देवी-मुख का दर्शन; महिषासुर-मर्दिनी-स्वरूप

सम्प्रदाय: शाक्त — श्री-विद्या तंत्र परंपरा (वाम-मार्ग + दक्षिण-मार्ग दोनों सम्मानित — भारत में अत्यन्त-विरल); वैष्णव परंपरा में योगमाया (कृष्ण-भगिनी) के रूप में पूज्य

02
स्थल-पुराण

कथा, इतिहास एवं महत्व

मार्कण्डेय पुराण — देवी माहात्म्यम्

अध्याय 81-93 (दुर्गा सप्तशती); अन्तिम-अध्याय में स्वयं देवी द्वारा भविष्य-वाणी — 'भविष्य-युग में मैं नन्द-गोप के घर में जन्म लूँगी एवं शुम्भ-निशुम्भ के पुनर्जन्म का संहार करूँगी, विन्ध्य-पर्वत पर निवास करते हुए' — 'विन्ध्यवासिनी' नाम का शास्त्रीय-स्रोत

श्रीमद्भागवत पुराण

स्कन्ध 10, अध्याय 4, श्लोक 9-14 — योगमाया (यशोदा-पुत्री) कंस के हाथ से छूटकर देवी-स्वरूप में आकाश में प्रकट; कंस को चेतावनी; तदुपरान्त विन्ध्य-पर्वत पर निवास — विन्ध्यवासिनी

देवी भागवत पुराण

भारतवर्ष के प्रमुख शाक्त-तीर्थों में विन्ध्याचल की गणना

हरिवंश पुराण

कृष्ण-योगमाया भगिनी-कथा एवं विन्ध्य-निवास की पुष्टि

स्कन्द पुराण — अवन्ती-क्षेत्र माहात्म्य

महर्षि अगस्त्य ने दक्षिण-यात्रा से पूर्व विन्ध्यवासिनी की आराधना की

विन्ध्याचल माहात्म्य (औषानस पुराण-परंपरा)

क्षेत्र-समर्पित स्वतंत्र माहात्म्य ग्रन्थ — देवी का महा-त्रिकोण यंत्र-स्वरूप (महालक्ष्मी + महाकाली + महासरस्वती); तारक-कुण्ड, लक्ष्मी-कुण्ड, नारायण-कुण्ड का वर्णन

संत एवं परम्परा

  • महर्षि अगस्त्य — दक्षिण-यात्रा से पूर्व विन्ध्यवासिनी की आराधना
  • श्री कृष्ण-योगमाया कथा (भागवत पुराण 10.4) — योगमाया यशोदा-पुत्री; कंस के समय कृष्ण से विनिमय; कंस के हाथ से छूटकर देवी-स्वरूप में प्रकट; विन्ध्य-निवासी बनी
  • महारानी अहिल्याबाई होलकर (18वीं शताब्दी) — केन्द्रीय गर्भगृह का पुनर्निर्माण
  • विन्ध्य तीर्थ परिषद् — परंपरागत न्यासी; उत्तर प्रदेश सरकार का प्रबन्ध-निरीक्षण (2015-16 से)
  • केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह + मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ — 1 अगस्त 2021 विन्ध्य कॉरिडोर आधारशिला
  • आदि शंकराचार्य (परंपरागत मान्यता) — विन्ध्येश्वरी स्तोत्रम् रचयिता (समीक्षात्मक-संस्करण द्वारा पुष्ट नहीं किन्तु शाक्त-परंपरा द्वारा संरक्षित)

ऐतिहासिक घटनाक्रम

  1. 5005वीं-6वीं शताब्दी ईस्वी — देवी माहात्म्यम् (मार्कण्डेय पुराण) में 'विन्ध्यवासिनी' नाम का शास्त्रीय-उद्भवWikipedia Devi Mahatmya + Vindhyachal Temple
  2. 178018वीं शताब्दी — महारानी अहिल्याबाई होलकर (इन्दौर) द्वारा केन्द्रीय गर्भगृह का पुनर्निर्माणvindhyachalmandir.com + vindhyatirthparishad.org
  3. 20152015-16 — उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रबन्ध-निरीक्षण का अधिकार ग्रहण (कुप्रबन्ध एवं भीड़-नियंत्रण के कारण)Swarajya Magazine
  4. 20211 अगस्त 2021 — केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह द्वारा विन्ध्य कॉरिडोर परियोजना की आधारशिला; ₹150 करोड़ (बाद में ₹224 करोड़ तक विस्तारित)Zee News + Business Standard
  5. 2024मई 2024 — विन्ध्य कॉरिडोर का प्रथम चरण पर्याप्त-पूर्ण; पिङ्क अहरौरा बलुआ-पत्थर परिक्रमा-मार्ग; काली-खोह ↔ अष्टभुजा रोपवे (₹16 करोड़) चालू; दर्शन-समय बहु-घंटे से ~20 मिनट तक न्यूनीकृतSwarajya Mirzapur Ground Report
  6. 20254-5 जुलाई 2025 — गर्भगृह में पुजारियों के बीच पूजा-समय-विवाद; पुलिस FIR; 25 आरोप दर्जFree Press Journal
03
नित्य उपासना

दर्शन समय एवं आरती

05:00 से 22:30 तक · मध्याह्न विश्राम आरती-समय गर्भगृह बन्द (12:00-13:30 राजश्री आरती; 19:15-20:15 छोटी आरती; 21:30-22:30 बड़ी शयन आरती)

मंगला आरती (सामान्य दिवस)04:00-05:00
दैनिक

दिन की प्रथम आरती; गर्भगृह बन्द

मंगला आरती (नवरात्रि-विशेष)03:00-04:00
नवरात्रि

नवरात्रि-काल में 1 घंटा पूर्व

राजश्री आरती (मध्याह्न)12:00-13:30 (नवरात्रि 12:00-13:00)
दैनिक

गर्भगृह बन्द

छोटी / सन्ध्या आरती19:15-20:15 (नवरात्रि 19:30-20:30)
दैनिक

सायं प्रमुख आरती; गर्भगृह बन्द

बड़ी शयन आरती21:30-22:30
दैनिक

दिन की अन्तिम आरती; गर्भगृह बन्द; पश्चात् शयन-काल (अगली प्रातः मंगला तक पूजा निषिद्ध)

फोटोग्राफी: गर्भगृह में फोटोग्राफी एवं मोबाइल-वीडियोग्राफी निषिद्ध

04
दर्शन

दर्शन के प्रकार

सामान्य निःशुल्क दर्शननिःशुल्क
समय
05:00-12:00; 13:30-19:15; 20:15-21:30 (आरती-काल को छोड़कर)
उपयुक्त
सभी श्रद्धालु

विन्ध्य कॉरिडोर पूर्णता के पश्चात् सामान्य दर्शन-समय ~20 मिनट तक न्यूनीकृत।

सुगम दर्शन (शास्त्री-सहायक)
उपयुक्त
सीमित-समय श्रद्धालु

विन्ध्य तीर्थ परिषद् द्वारा संचालित आधिकारिक सुगम-दर्शन-सेवा।

आरती बुकिंग / मुण्डन बुकिंग / अतिथि-गृह बुकिंग
उपयुक्त
विशिष्ट-संकल्प हेतु

मंदिर-न्यास की आधिकारिक सेवाएँ।

लाइव ऑनलाइन दर्शननिःशुल्क

मंदिर-न्यास से प्रसारित आधिकारिक लाइव-दर्शन।

05
उत्सव

प्रमुख पर्व एवं उत्सव

महाशिवरात्रिफाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी

विन्ध्याचल के निकटवर्ती शिव-तीर्थों (रामेश्वर मंदिर सहित) में विशेष अभिषेक। 2026 — रविवार 15 फरवरी।

चैत्र (वासन्तिक) नवरात्रिचैत्र शुक्ल प्रतिपदा-नवमी

9-दिवसीय शाक्त-उत्सव; तंत्रिक-साधकों का संगम; घटस्थापना मुहूर्त 06:52 IST 19 मार्च 2026। 2026 — गुरुवार 19 मार्च से शुक्रवार 27 मार्च।

कजरी तीज (कजली) — विन्ध्याचल कजली मेलाभाद्रपद कृष्ण तृतीया

मिर्ज़ापुर-बनारस की प्रसिद्ध कजरी-तीज परंपरा का केन्द्र; भाद्रपद में लोक-कजली गायन-प्रतियोगिता। 2026 — सोमवार 31 अगस्त।

जन्माष्टमी (विन्ध्यवासिनी = कृष्ण-भगिनी)भाद्रपद कृष्ण अष्टमी

विन्ध्यवासिनी योगमाया = यशोदा-पुत्री = कृष्ण-भगिनी; मंदिर एवं गंगा-घाटों पर विशेष जन्म-उत्सव। सितंबर 2026 प्रारम्भ में आयोजित।

शारदीय (शरद) नवरात्रि — महा-शिखर पर्वआश्विन शुक्ल प्रतिपदा-दशमी

विन्ध्याचल का सर्वोच्च वार्षिक पर्व; नवरात्रि-काल में मंगला आरती 03:00-04:00 बजे; महाअष्टमी एवं कालरात्रि (काली खोह में) पर तांत्रिक-साधना का शिखर। 2026 घटस्थापना — रविवार 11 अक्टूबर (मुहूर्त 06:19-10:12); विजयदशमी — मंगलवार 20 अक्टूबर।

त्रिकोण परिक्रमा (नवरात्रि-विशेष)वर्ष-पर्यन्त (नवरात्रि एवं प्रत्येक-पक्ष अष्टमी पर पीक)

गंगा-स्नान (पक्का घाट) → विन्ध्यवासिनी (महालक्ष्मी) → काली खोह (महाकाली) → अष्टभुजा (महासरस्वती) → विन्ध्यवासिनी समापन; कुल ~8 किमी; पाद-परिक्रमा 3-4 घंटे; वाहन/रोपवे 1-2 घंटे।

06
आस्था

मनोकामना एवं फल

महिषासुर-संहार-स्वरूप शत्रु-नाश एवं विघ्न-निवारण

विन्ध्यवासिनी = दुर्गा महिषासुर-मर्दिनी-स्वरूप; शुम्भ-निशुम्भ + चण्ड-मुण्ड + महिषासुर-संहारिणी

स्रोत: देवी माहात्म्यम् (मार्कण्डेय पुराण अध्याय 81-93)

श्री-विद्या एवं तंत्र-सिद्धि

महा-त्रिकोण यंत्र-स्थल; काली खोह में तांत्रिक-कोर; भारत के अति-विरल वाम-मार्ग + दक्षिण-मार्ग दोनों मान्य-तीर्थ — पूर्ण-सिद्धि-साधना हेतु

स्रोत: विन्ध्याचल माहात्म्य + तंत्र शास्त्र

योगमाया-प्रार्थना / कृष्ण-भगिनी-संकल्प

भागवत 10.4 कथा के अनुसार विन्ध्यवासिनी = कृष्ण-भगिनी योगमाया; कृष्ण-भक्तों हेतु भी विशिष्ट तीर्थ

स्रोत: श्रीमद्भागवत पुराण 10.4.9-14

त्रिकोण-परिक्रमा-संकल्प (अद्वितीय)

विन्ध्यवासिनी + काली खोह + अष्टभुजा — भारत का अद्वितीय 3-मंदिर देवी-यंत्र-परिक्रमा; नवरात्रि-काल अथवा कृष्ण-अष्टमी-रात्रि पर सर्वाधिक फलदायी

स्रोत: विन्ध्याचल माहात्म्य

प्रयाग-विन्ध्याचल-काशी देवी-तीर्थ-त्रिकोण

पूर्वी-गंगा-मैदान का शास्त्रीय देवी-तीर्थ-त्रिकोण — संगम-स्नान (प्रयाग) → देवी-दर्शन (विन्ध्याचल) → विश्वनाथ (काशी)

स्रोत: स्थल-परंपरा

महिलाओं हेतु कजली-तीज व्रत

भाद्रपद कृष्ण तृतीया पर कजली-व्रत; विन्ध्याचल कजली-मेला का केन्द्र

स्रोत: उत्तर-भारत कजली-व्रत परंपरा

07
जप

मन्त्र एवं स्तोत्र

  • श्री विन्ध्येश्वरी स्तोत्रम् (विन्ध्यवासिनी स्तोत्रम्)स्तोत्रपरंपरागत रूप से आदि शंकराचार्य-कृत (समीक्षात्मक-संस्करण से अप्रमाणित किन्तु शाक्त-परंपरा द्वारा संरक्षित)इस मन्दिर हेतुप्रारम्भिक श्लोक — 'निशुम्भशुम्भमर्दिनीं प्रचण्डमुण्डखण्डिनीम् । वने रणे प्रकाशिनीं भजामि विन्ध्यवासिनीम्' — विन्ध्यवासिनी का प्रमुख स्तोत्र
  • श्री विन्ध्येश्वरी चालीसाचालीसाहिन्दी देवी-भक्ति परंपरा (40 श्लोक)इस मन्दिर हेतुप्रारम्भिक दोहा — 'नमो नमो विन्ध्येश्वरी, नमो नमो जगदम्ब। सन्तजनों के काज में, माँ करती नहीं विलम्ब' — मंगलवार/शुक्रवार/अष्टमी पर पारायण
  • दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्यम्)ग्रन्थमार्कण्डेय पुराण अध्याय 81-93 — 700 श्लोकइस मन्दिर हेतुविशेषतः नारायणी-स्तुति (अध्याय 11) एवं अन्तिम-अध्याय की विन्ध्यवासिनी-भविष्य-वाणी; नवरात्रि-पारायण की मूल
  • योगमाया-प्रार्थना (भागवत पुराण से)स्तुतिभागवत पुराण 10.2.6-12 (गर्भ-स्तुति) एवं 10.4.9-14 (कंस-स्तुति)इस मन्दिर हेतुविन्ध्यवासिनी = योगमाया के रूप में सीधे सम्बोधित
08
तीर्थाटन

समीप के तीर्थ एवं परिपथ

श्री काली खोह (त्रिकोण-2 — महाकाली)2 किमी

महाकाली-गुफा शाल; रक्तबीज-संहार के पश्चात् देवी का विश्राम-स्थल; पीछे भैरव-शाल — विन्ध्याचल का तांत्रिक-कोर; महा-त्रिकोण यंत्र का दक्षिण-कोण

श्री अष्टभुजा देवी (त्रिकोण-3 — महासरस्वती)3 किमी

पहाड़ी-शिखर पर 8-भुजा-देवी; 160 प्रस्तर-सीढ़ी (अथवा रोपवे); परंपरा-अनुसार कंस-पलायन-पश्चात् विन्ध्य में आयी कृष्ण-भगिनी; महा-त्रिकोण यंत्र का पश्चिम-कोण

सीता कुण्ड1.5 किमी

रामायण-परंपरा में लंका से लौटते समय सीता हेतु लक्ष्मण-बाण से उत्पन्न पवित्र-कुण्ड

रामगया घाट (गंगा-तट)2 किमी

श्री राम ने पिता दशरथ-श्राद्ध यहाँ संपन्न किया; दैनिक सायं गंगा-आरती; पिण्ड-दान-स्थल

रामेश्वर मंदिर2 किमी

श्री राम-स्थापित शिवलिंग (श्राद्ध-संकल्प के समय)

पक्का घाट (गंगा-स्नान-घाट)800 मी

श्रद्धालुओं हेतु प्रमुख गंगा-स्नान-घाट; दर्शन से पूर्व स्नान-स्थल; दैनिक आरती

तारा देवी मंदिर4 किमी

10 महाविद्याओं में सम्मिलित; विन्ध्याचल के विस्तृत महाविद्या-मंदिर-वलय का भाग

नाग कुण्ड1 किमी

नाग-वंश-कालीन प्राचीन वावड़ी (stepwell)

त्रिकोण परिक्रमा (विन्ध्याचल अद्वितीय 3-मंदिर देवी-यंत्र)

केन्द्रीय-शाल — पक्का घाट गंगा-स्नान → विन्ध्यवासिनी (महालक्ष्मी) → काली खोह (महाकाली) → अष्टभुजा (महासरस्वती) → विन्ध्यवासिनी समापन; कुल ~8 किमी; पाद-परिक्रमा 3-4 घंटे, वाहन/रोपवे 1-2 घंटे

3 मंदिर

महा-त्रिकोण यंत्र साधना-परिक्रमा

विन्ध्याचल माहात्म्य के अनुसार तीनों कोणों की पैदल-परिक्रमा देवी के जीव-स्वरूप श्री-त्रिकोण यंत्र की प्रत्यक्ष-यात्रा

3 मंदिर

तांत्रिक भैरवी-भैरव साधना-सर्किट

काली खोह गुफा (महाकाली) + पीछे भैरव-शाल — भारत-व्यापी तांत्रिक-समुदाय द्वारा महाविद्या-साधना (विशेषतः काली एवं तारा) के प्रमुख सिद्ध-स्थानों में सम्मानित

2 मंदिर

प्रयाग-विन्ध्याचल-काशी देवी-तीर्थ-त्रिकोण

पूर्वी-गंगा-मैदान का शास्त्रीय देवी-तीर्थ-त्रिकोण — संगम-स्नान (प्रयाग) → देवी-दर्शन (विन्ध्याचल) → विश्वनाथ + विशालाक्षी (काशी); विशेषतः कुम्भ एवं माघ-मेला-काल में लाखों श्रद्धालु

3 मंदिर

राम-पाद तीर्थ-सर्किट (विन्ध्याचल के भीतर)

सीता कुण्ड → सीता रसोई → रामगया घाट → रामेश्वर मंदिर — रामायण-काल वनवास-स्थल

4 मंदिर

09
मार्गदर्शन

यात्रा एवं संपर्क

पता
महा शक्ति पीठ, माँ विन्ध्यवासिनी धाम, विन्ध्याचल, मिर्ज़ापुर — 231307, उत्तर प्रदेश
हवाई अड्डा
लाल बहादुर शास्त्री अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (VNS, बाबतपुर — वाराणसी) — ~72 किमी
रेलवे
विन्ध्याचल रेलवे स्टेशन (BDL) — मंदिर से ~1 किमी (पैदल-दूरी); दिल्ली-हावड़ा एवं मुम्बई-हावड़ा ट्रंक-मार्ग पर
बस-स्टैण्ड
मिर्ज़ापुर जंक्शन — ~8-9 किमी; ऑटो/ई-रिक्शा विन्ध्याचल तक उपलब्ध
उत्तम ऋतु
अक्टूबर-मार्च सर्वोत्तम; शारदीय नवरात्रि (11-20 अक्टूबर 2026) सर्वोच्च — ~15 लाख श्रद्धालु; चैत्र नवरात्रि (मार्च 2026); कजली तीज (31 अगस्त 2026); गर्मी (मई-जून) में दिन का तापमान 45°C+
1 किमीVindhyachal Railway Station
9 किमीMirzapur Junction
2 किमीKali Khoh
3 किमीAshtabhuja
70 किमीVaranasi
72 किमीVNS Airport
90 किमीPrayagraj
95 किमीSangam
90 किमीSonbhadra