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Varanasi · Uttar Pradesh

श्री विशालाक्षी गौरी मंदिर

श्री विशालाक्षी गौरी मंदिर — मीर घाट, काशी (वाराणसी)

विशालाक्षी — विशाल-नेत्रा देवी; काशी की अधिष्ठात्री शक्ति

अन्य नाम: विशालाक्षी गौरी · विशालाक्षी अम्मन् · माणिकर्णी देवी (सती के मणि-कुण्डल-पतन से) · काशी विशालाक्षी

  • 18 अष्टादश महा-शक्ति-पीठ
  • आदि शंकराचार्य-स्तुत 3 प्रमुख शक्त…
  • 51 शक्ति-पीठ परंपरा
  • 108 शक्ति-पीठ
श्री विशालाक्षी गौरी मंदिर
दर्शन समय
04:30 – 22:00
स्वरूप
विशाल-नेत्रा पार्वती-स्वरूप विग्रह
स्थान
Varanasi · Uttar Pradesh
उत्तम ऋतु
अक्टूबर-मार्च सर्वोत्तम
काल
स्थल-माहात्म्य: काशी खण्ड

इस मन्दिर की विशेषता

  • 18 अष्टादश महा-शक्ति-पीठ — आदि शंकराचार्य रचित स्तोत्रम् के 17वें पीठ रूप में 'वाराणस्यां विशालाक्षी, काश्मीरे तु सरस्वती'
  • आदि शंकराचार्य-स्तुत 3 प्रमुख शक्ति-पीठ — काँची काँकाक्षी + काशी विशालाक्षी + मधुरै मीनाक्षी
  • 51 शक्ति-पीठ परंपरा — सती के दक्षिण-कर्ण मणि-कुण्डल यहाँ गिरे (तंत्र-चूड़ामणि); भैरव: काल-भैरव; तत्-निकटवर्ती मणिकर्णिका घाट का नामकरण इसी कारण
  • 108 शक्ति-पीठ (देवी भागवत परंपरा) में सम्मिलित
  • 7 सप्तपुरी (काशी — मोक्षदायिनी नगरी) की अधिष्ठात्री शक्ति
  • काशी 9 गौरी यात्रा — 5वें दिवस (स्कंदमाता-दिवस) पूज्य गौरी
01
मूल विग्रह

मुख्य देव एवं स्वरूप

श्री विशालाक्षी देवी — आदि पराशक्ति / पार्वती-स्वरूप; विश्वनाथ-काशी की अधिष्ठात्री शक्ति; मंदिर-परिसर में विशालाक्षेश्वर शिवलिंग भी सम्मिलित

विशाल-नेत्रा पार्वती-स्वरूप विग्रह; गर्भगृह में आदि शंकराचार्य-स्थापित श्री-यन्त्र (श्री चक्र); तमिल नागरत्तार पुजारी-परंपरा द्वारा दैनिक कुङ्कुमार्चन

सम्प्रदाय: शाक्त — श्री-विद्या परंपरा (आदि शंकराचार्य-स्थापित श्री-यन्त्र)

02
स्थल-पुराण

कथा, इतिहास एवं महत्व

स्कन्द पुराण — काशी खण्ड

अध्याय 70, श्लोक 17 — 'काशी में पूजित, श्रवित अथवा दृष्ट विशालाक्षी देवी मोक्ष-कामी स्त्री-पुरुषों की समस्त इच्छाएँ पूर्ण करती हैं'

70.17

स्कन्द पुराण — काशी खण्ड

व्यास-अन्न-कथा — व्यासदेव के काशी-शाप-प्रसंग में देवी विशालाक्षी ने गृहिणी-वेश में अन्न-दान कर शाप-निवारण किया

देवी भागवत पुराण

108 शक्ति-पीठ सूची में सम्मिलित; विशालाक्षी-काशी का अग्रणी स्थान

तंत्र-चूड़ामणि

51 शक्ति-पीठ सूची — काशी / दक्षिण-कर्ण मणि-कुण्डल / काल-भैरव

अष्टादश शक्ति-पीठ स्तोत्रम्

आदि शंकराचार्य रचित — 'वाराणस्यां विशालाक्षी, काश्मीरे तु सरस्वती। अष्टादश सुपीठानि, योगिनामपि दुर्लभम्॥' (17वाँ पीठ)

शिव पुराण

पार्वती को विशालाक्षी (विशाल-नेत्रा) नाम से प्रथम-दर्शन कथा

संत एवं परम्परा

  • आदि शंकराचार्य (8वीं-9वीं शताब्दी) — काशी-यात्रा के समय श्री-यन्त्र (श्री चक्र) की गर्भगृह में स्थापना; अष्टादश शक्ति-पीठ स्तोत्रम् में 'वाराणस्यां विशालाक्षी' (17वाँ पीठ) के रूप में स्तुति; अन्नपूर्णा-स्तोत्रम् भी रचित जो विशालाक्षी-अन्नपूर्णा-अभेद की परंपरा को सिद्ध करता है
  • महर्षि व्यास — काशी-शाप के पश्चात् देवी विशालाक्षी द्वारा अन्न-दान-कथा का मुख्य प्रसंग
  • नागरत्तार चेट्टियार (नट्टुकोट्टै नागरत्तार — चेट्टीनाड, तमिल नाडु) — 1893 ईस्वी के मंदिर-निर्माता; आज भी मंदिर के न्यासी; तमिल-परंपरा-अनुसार दैनिक पूजा एवं कुङ्कुमार्चन
  • मुथुस्वामी दीक्षितर (कर्नाटक सङ्गीत-त्रिमूर्ति) — 'पद्म-पत्र विशालाक्षी' कीर्तन रचयिता

ऐतिहासिक घटनाक्रम

  1. 8008वीं-9वीं शताब्दी — आदि शंकराचार्य द्वारा गर्भगृह में श्री-यन्त्र की स्थापना; अष्टादश शक्ति-पीठ स्तोत्रम् में स्तुतिTirthayatra + TemplesinIndia + Astroved
  2. 18931893 ईस्वी — चेट्टीनाड के नट्टुकोट्टै नागरत्तार चेट्टियार वर्ग द्वारा वर्तमान मंदिर-संरचना का निर्माण (हवेली-शैली + दक्षिणी गोपुर सम्मिश्रण)Wikipedia + Optimatravels + Kashi Arrival
  3. 20212021 के पश्चात् — काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के विस्तार में विशालाक्षी मंदिर की पैदल-पहुँच विश्वनाथ-गंगाद्वार से 250 मीटर के अन्तर्गत सुरक्षितShri Kashi Vishwanath Trust + Wikipedia
03
नित्य उपासना

दर्शन समय एवं आरती

04:30 से 22:00 तक · मध्याह्न विश्राम 11:00-17:00 (मध्याह्न विश्राम)

मंगला आरती04:00
दैनिक

मंदिर खुलने से पूर्व; दिन की प्रथम आरती

प्रातः दर्शन एवं पूजा04:30-11:00
दैनिक
भोग आरती (मध्याह्न)12:00
दैनिक
सायं दर्शन17:00-21:30
दैनिक
सन्ध्या आरती19:00
दैनिक
शयन आरती22:00
दैनिक

दिन की अन्तिम आरती

04
दर्शन

दर्शन के प्रकार

सामान्य निःशुल्क दर्शननिःशुल्क
समय
04:30-11:00 एवं 17:00-22:00
उपयुक्त
सभी श्रद्धालु

विशालाक्षी देवी का दर्शन निःशुल्क; पंक्ति-आधारित।

श्री चक्र / श्री यन्त्र कुङ्कुमार्चन
उपयुक्त
श्री-विद्या-उपासक एवं संकल्प हेतु

आदि शंकराचार्य-स्थापित श्री-यन्त्र पर विशेष कुङ्कुम-अर्चन (तमिल-परंपरा-अनुसार नागरत्तार पुजारी द्वारा सम्पन्न)। संकल्प हेतु मंदिर-पुजारी से सीधे बात करें।

05
उत्सव

प्रमुख पर्व एवं उत्सव

महाशिवरात्रिफाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी

विशालाक्षेश्वर शिवलिंग का अभिषेक; विश्वनाथ-यात्रा के साथ सम्मिलित। 2026 — रविवार 15 फरवरी।

चैत्र (वासन्तिक) नवरात्रिचैत्र शुक्ल प्रतिपदा-नवमी

9-दिवसीय देवी-उपासना; राम-नवमी (27 मार्च) पर पूर्णता। 2026 — गुरुवार 19 मार्च से शुक्रवार 27 मार्च।

कजरी तीज (कजली तीज) — वार्षिक मन्दिर-मेलाभाद्रपद कृष्ण तृतीया

विशालाक्षी मंदिर का सर्वोच्च वार्षिक मेला; महिलाएँ भ्राता-कल्याण-हेतु व्रत; कजरी-गीत-गायन; नागरत्तार ट्रस्ट द्वारा विशेष आयोजन। 2026 — सोमवार 31 अगस्त।

शारदीय नवरात्रि — काशी 9 गौरी यात्रा (5वाँ दिवस)आश्विन शुक्ल प्रतिपदा-दशमी

नवरात्रि का 5वाँ दिवस (स्कंदमाता-दिवस) काशी 9-गौरी यात्रा में विशालाक्षी गौरी-दर्शन के लिए विशिष्ट। 2026 — रविवार 11 अक्टूबर से मंगलवार 20 अक्टूबर (विजयदशमी)।

शरद पूर्णिमाआश्विन पूर्णिमा

विशेष अभिषेक एवं चन्द्र-किरण-अर्पण।

अन्नकूट (दिवाली के अगले दिन)कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा

अन्नपूर्णा-विशालाक्षी संयुक्त अन्नकूट-उत्सव

देव दीपावलीकार्तिक पूर्णिमा

काशी के 84 घाटों पर दीप-प्रज्ज्वलन; विशालाक्षी मंदिर में विस्तृत समय

06
आस्था

मनोकामना एवं फल

मोक्ष-कामना (काशी-मोक्षदायिनी)

काशी खण्ड 70.17 — 'काशी में पूजित, श्रवित अथवा दृष्ट विशालाक्षी देवी मोक्ष-कामी स्त्री-पुरुषों की समस्त इच्छाएँ पूर्ण करती हैं'

स्रोत: स्कन्द पुराण काशी खण्ड 70.17

आदि शंकराचार्य 3-शक्ति-पीठ यात्रा-संकल्प

काँची कामाक्षी + काशी विशालाक्षी + मधुरै मीनाक्षी — आदि शंकराचार्य-स्तुत 3 प्रमुख शक्ति-पीठों की संयुक्त-यात्रा

स्रोत: आदि शंकराचार्य परंपरा

अन्नपूर्णा-व्रत-संकल्प

व्यास-काशी-शाप-कथा के अनुसार विशालाक्षी = अन्नपूर्णा-स्वरूपा; अन्न-धन-समृद्धि हेतु

स्रोत: स्कन्द पुराण काशी खण्ड + अन्नपूर्णा स्तोत्रम् (आदि शंकराचार्य)

कजरी तीज भ्राता-कल्याण व्रत

वार्षिक कजरी तीज मेले में भ्राता-कल्याण-हेतु व्रत-संकल्प

स्रोत: उत्तर-भारत व्रत-परंपरा

श्री-विद्या साधना

आदि शंकराचार्य-स्थापित श्री-यन्त्र पर पञ्चदशाक्षरी-मंत्र-जप

स्रोत: श्री-विद्या तंत्र परंपरा

त्रिमूर्ति काशी-दर्शन (विश्वनाथ + अन्नपूर्णा + विशालाक्षी + काल-भैरव)

काशी-यात्रा की पूर्णता हेतु चार-तीर्थ संयुक्त-दर्शन (250-1500 मीटर के भीतर समस्त)

स्रोत: काशी स्थल-परंपरा

07
जप

मन्त्र एवं स्तोत्र

  • अष्टादश शक्ति-पीठ स्तोत्रम्स्तोत्रआदि शंकराचार्य रचितइस मन्दिर हेतु17वाँ श्लोक — 'वाराणस्यां विशालाक्षी, काश्मीरे तु सरस्वती। अष्टादश सुपीठानि, योगिनामपि दुर्लभम्॥' — विशालाक्षी का शास्त्रीय प्रमाण
  • अन्नपूर्णा स्तोत्रम् / अन्नपूर्णा अष्टकम्स्तोत्रआदि शंकराचार्य रचित — 12 श्लोकइस मन्दिर हेतु'अन्नपूर्णे सदापूर्णे शङ्करप्राणवल्लभे' — विशालाक्षी-अन्नपूर्णा-अभेद की परंपरा (व्यास-कथा के आधार पर) के कारण विशालाक्षी मंदिर में नियमित पारायण
  • श्री विद्या पञ्चदशाक्षरी मंत्रमंत्रश्री-विद्या तंत्र परंपराइस मन्दिर हेतु'क ए ई ल ह्रीं — ह स क ह ल ह्रीं — स क ल ह्रीं' — 15-अक्षर महात्रिपुर-सुन्दरी मंत्र; आदि शंकराचार्य-स्थापित श्री-यन्त्र पर पारायण
  • पद्म-पत्र विशालाक्षीकीर्तन (कर्नाटक सङ्गीत)मुथुस्वामी दीक्षितर रचितइस मन्दिर हेतुविशालाक्षी-समर्पित दक्षिण-भारतीय शास्त्रीय रचना
  • ॐ ह्रीं विशालाक्ष्यै नमःमूल मंत्रश्री-विद्या परंपराइस मन्दिर हेतु
08
तीर्थाटन

समीप के तीर्थ एवं परिपथ

मणिकर्णिका घाट (निकटवर्ती)200 मी

सती के मणि-कुण्डल (दक्षिण-कर्ण) यहाँ गिरे — मणिकर्णिका नाम का स्रोत; काशी का प्रमुख दाह-संस्कार-घाट

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर (12 ज्योतिर्लिंगों में सम्मिलित)250 मी

विशालाक्षी के पति-स्वरूप; 12 ज्योतिर्लिंगों में अग्रणी; काशी-दर्शन का केन्द्रीय तीर्थ

श्री अन्नपूर्णा देवी मंदिर200 मी

आदि शंकराचार्य-कृत अन्नपूर्णा-स्तोत्रम् का तीर्थ; विशालाक्षी-अन्नपूर्णा-अभेद-परंपरा

मीर घाट (मंदिर का नामकरण-घाट)230 मी

मंदिर इसी घाट से सम्बद्ध; गंगा-स्नान-स्थल

श्री काल-भैरव मंदिर (काशी के कोतवाल)1.5 किमी

विशालाक्षी-शक्ति-पीठ के संगत भैरव; काशी के सम्पूर्ण नगर-रक्षक

श्री ढुण्ढिराज गणेश मंदिर (विश्वनाथ परिसर में)300 मी

काशी षडाङ्ग योग के 6 तीर्थों में सम्मिलित (विशालाक्षी के साथ)

श्री दण्डपाणि मंदिर300 मी

काशी षडाङ्ग योग के 6 तीर्थों में सम्मिलित

दशाश्वमेध घाट600 मी

काशी का प्रमुख गंगा-आरती घाट; प्रति-सायं विश्व-प्रसिद्ध गंगा-आरती

आदि शंकराचार्य 3 शक्ति-पीठ (कामाक्षी + विशालाक्षी + मीनाक्षी)

केन्द्रीय (उत्तरी पीठ) — काँची कामाक्षी (तमिल नाडु) + काशी विशालाक्षी (उत्तर प्रदेश) + मधुरै मीनाक्षी (तमिल नाडु)

3 मंदिर

अष्टादश महा-शक्ति-पीठ यात्रा (आदि शंकराचार्य)

17वाँ पीठ — 'वाराणस्यां विशालाक्षी, काश्मीरे तु सरस्वती'

18 मंदिर

51 शक्ति-पीठ यात्रा-संकल्प

दक्षिण-कर्ण मणि-कुण्डल पीठ; भैरव: काल-भैरव

51 मंदिर

7 सप्तपुरी मोक्षदायिनी यात्रा

काशी की अधिष्ठात्री शक्ति; 7 सप्तपुरी (अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार, काशी, उज्जैन, द्वारका, काँची) में काशी का प्रतिनिधि देवी-पीठ

7 मंदिर

काशी 9 गौरी यात्रा (नवरात्रि-विशेष)

5वाँ दिवस (स्कंदमाता-दिवस) पूज्य गौरी; अन्य 8: मुख-निर्मलिका, ज्येष्ठा, सौभाग्य, श्रृंगार, ललिता, भवानी, मंगला, महालक्ष्मी

9 मंदिर

काशी षडाङ्ग योग 6-तीर्थ यात्रा

विश्वनाथ + विशालाक्षी + गंगा + काल-भैरव + ढुण्ढिराज गणेश + दण्डपाणि — एक-दिवसीय यात्रा

6 मंदिर

त्रिमूर्ति काशी-दर्शन (विश्वनाथ + अन्नपूर्णा + विशालाक्षी + काल-भैरव)

केन्द्रीय शक्ति-तीर्थ; काशी-यात्रा की पूर्णता हेतु 4-तीर्थ संयुक्त (250-1500 मीटर के भीतर)

4 मंदिर

09
मार्गदर्शन

यात्रा एवं संपर्क

पता
श्री काशी विशालाक्षी माता शक्तिपीठ मंदिर, काशी लाहौरी टोला, गणपति गेस्ट हाउस के निकट, मीर घाट, वाराणसी — 221001, उत्तर प्रदेश
हवाई अड्डा
लाल बहादुर शास्त्री अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (VNS, बाबतपुर) — ~25 किमी
रेलवे
वाराणसी जंक्शन (BSB) — ~4-5 किमी
बस-स्टैण्ड
गोदोलिया चौक से ~10 मिनट पैदल — दशाश्वमेध → मीर घाट मार्ग; अथवा विश्वनाथ धाम के गंगाद्वार/ललिता घाट से प्रवेश; अथवा दशाश्वमेध से नौका द्वारा मीर घाट
उत्तम ऋतु
अक्टूबर-मार्च सर्वोत्तम; चैत्र एवं शारदीय नवरात्रि एवं कजरी तीज (31 अगस्त 2026) पीक; गर्मी (अप्रैल-जून) में दिन का तापमान 42°C+ हो सकता है
0.25 किमीKashi Vishwanath Temple
0.2 किमीAnnapurna Devi Mandir
0.2 किमीManikarnika Ghat
0.23 किमीMir Ghat
0.6 किमीDashashwamedh Ghat
1.5 किमीKala Bhairava Mandir
5 किमीVaranasi Junction
25 किमीLal Bahadur Shastri Airport
12 किमीSarnath
125 किमीAllahabad/Prayagraj