स्कन्द पुराण — काशी खण्ड
अध्याय 70, श्लोक 17 — 'काशी में पूजित, श्रवित अथवा दृष्ट विशालाक्षी देवी मोक्ष-कामी स्त्री-पुरुषों की समस्त इच्छाएँ पूर्ण करती हैं'
70.17
Varanasi · Uttar Pradesh
श्री विशालाक्षी गौरी मंदिर — मीर घाट, काशी (वाराणसी)
विशालाक्षी — विशाल-नेत्रा देवी; काशी की अधिष्ठात्री शक्ति
अन्य नाम: विशालाक्षी गौरी · विशालाक्षी अम्मन् · माणिकर्णी देवी (सती के मणि-कुण्डल-पतन से) · काशी विशालाक्षी

इस मन्दिर की विशेषता
श्री विशालाक्षी देवी — आदि पराशक्ति / पार्वती-स्वरूप; विश्वनाथ-काशी की अधिष्ठात्री शक्ति; मंदिर-परिसर में विशालाक्षेश्वर शिवलिंग भी सम्मिलित
विशाल-नेत्रा पार्वती-स्वरूप विग्रह; गर्भगृह में आदि शंकराचार्य-स्थापित श्री-यन्त्र (श्री चक्र); तमिल नागरत्तार पुजारी-परंपरा द्वारा दैनिक कुङ्कुमार्चन
सम्प्रदाय: शाक्त — श्री-विद्या परंपरा (आदि शंकराचार्य-स्थापित श्री-यन्त्र)
अध्याय 70, श्लोक 17 — 'काशी में पूजित, श्रवित अथवा दृष्ट विशालाक्षी देवी मोक्ष-कामी स्त्री-पुरुषों की समस्त इच्छाएँ पूर्ण करती हैं'
70.17
व्यास-अन्न-कथा — व्यासदेव के काशी-शाप-प्रसंग में देवी विशालाक्षी ने गृहिणी-वेश में अन्न-दान कर शाप-निवारण किया
108 शक्ति-पीठ सूची में सम्मिलित; विशालाक्षी-काशी का अग्रणी स्थान
51 शक्ति-पीठ सूची — काशी / दक्षिण-कर्ण मणि-कुण्डल / काल-भैरव
आदि शंकराचार्य रचित — 'वाराणस्यां विशालाक्षी, काश्मीरे तु सरस्वती। अष्टादश सुपीठानि, योगिनामपि दुर्लभम्॥' (17वाँ पीठ)
पार्वती को विशालाक्षी (विशाल-नेत्रा) नाम से प्रथम-दर्शन कथा
04:30 से 22:00 तक · मध्याह्न विश्राम 11:00-17:00 (मध्याह्न विश्राम)
मंदिर खुलने से पूर्व; दिन की प्रथम आरती
दिन की अन्तिम आरती
विशालाक्षी देवी का दर्शन निःशुल्क; पंक्ति-आधारित।
आदि शंकराचार्य-स्थापित श्री-यन्त्र पर विशेष कुङ्कुम-अर्चन (तमिल-परंपरा-अनुसार नागरत्तार पुजारी द्वारा सम्पन्न)। संकल्प हेतु मंदिर-पुजारी से सीधे बात करें।
विशालाक्षेश्वर शिवलिंग का अभिषेक; विश्वनाथ-यात्रा के साथ सम्मिलित। 2026 — रविवार 15 फरवरी।
9-दिवसीय देवी-उपासना; राम-नवमी (27 मार्च) पर पूर्णता। 2026 — गुरुवार 19 मार्च से शुक्रवार 27 मार्च।
विशालाक्षी मंदिर का सर्वोच्च वार्षिक मेला; महिलाएँ भ्राता-कल्याण-हेतु व्रत; कजरी-गीत-गायन; नागरत्तार ट्रस्ट द्वारा विशेष आयोजन। 2026 — सोमवार 31 अगस्त।
नवरात्रि का 5वाँ दिवस (स्कंदमाता-दिवस) काशी 9-गौरी यात्रा में विशालाक्षी गौरी-दर्शन के लिए विशिष्ट। 2026 — रविवार 11 अक्टूबर से मंगलवार 20 अक्टूबर (विजयदशमी)।
विशेष अभिषेक एवं चन्द्र-किरण-अर्पण।
अन्नपूर्णा-विशालाक्षी संयुक्त अन्नकूट-उत्सव
काशी के 84 घाटों पर दीप-प्रज्ज्वलन; विशालाक्षी मंदिर में विस्तृत समय
काशी खण्ड 70.17 — 'काशी में पूजित, श्रवित अथवा दृष्ट विशालाक्षी देवी मोक्ष-कामी स्त्री-पुरुषों की समस्त इच्छाएँ पूर्ण करती हैं'
स्रोत: स्कन्द पुराण काशी खण्ड 70.17
काँची कामाक्षी + काशी विशालाक्षी + मधुरै मीनाक्षी — आदि शंकराचार्य-स्तुत 3 प्रमुख शक्ति-पीठों की संयुक्त-यात्रा
स्रोत: आदि शंकराचार्य परंपरा
व्यास-काशी-शाप-कथा के अनुसार विशालाक्षी = अन्नपूर्णा-स्वरूपा; अन्न-धन-समृद्धि हेतु
स्रोत: स्कन्द पुराण काशी खण्ड + अन्नपूर्णा स्तोत्रम् (आदि शंकराचार्य)
वार्षिक कजरी तीज मेले में भ्राता-कल्याण-हेतु व्रत-संकल्प
स्रोत: उत्तर-भारत व्रत-परंपरा
आदि शंकराचार्य-स्थापित श्री-यन्त्र पर पञ्चदशाक्षरी-मंत्र-जप
स्रोत: श्री-विद्या तंत्र परंपरा
काशी-यात्रा की पूर्णता हेतु चार-तीर्थ संयुक्त-दर्शन (250-1500 मीटर के भीतर समस्त)
स्रोत: काशी स्थल-परंपरा
सती के मणि-कुण्डल (दक्षिण-कर्ण) यहाँ गिरे — मणिकर्णिका नाम का स्रोत; काशी का प्रमुख दाह-संस्कार-घाट
विशालाक्षी के पति-स्वरूप; 12 ज्योतिर्लिंगों में अग्रणी; काशी-दर्शन का केन्द्रीय तीर्थ
आदि शंकराचार्य-कृत अन्नपूर्णा-स्तोत्रम् का तीर्थ; विशालाक्षी-अन्नपूर्णा-अभेद-परंपरा
मंदिर इसी घाट से सम्बद्ध; गंगा-स्नान-स्थल
विशालाक्षी-शक्ति-पीठ के संगत भैरव; काशी के सम्पूर्ण नगर-रक्षक
काशी षडाङ्ग योग के 6 तीर्थों में सम्मिलित (विशालाक्षी के साथ)
काशी षडाङ्ग योग के 6 तीर्थों में सम्मिलित
काशी का प्रमुख गंगा-आरती घाट; प्रति-सायं विश्व-प्रसिद्ध गंगा-आरती
केन्द्रीय (उत्तरी पीठ) — काँची कामाक्षी (तमिल नाडु) + काशी विशालाक्षी (उत्तर प्रदेश) + मधुरै मीनाक्षी (तमिल नाडु)
3 मंदिर
17वाँ पीठ — 'वाराणस्यां विशालाक्षी, काश्मीरे तु सरस्वती'
18 मंदिर
दक्षिण-कर्ण मणि-कुण्डल पीठ; भैरव: काल-भैरव
51 मंदिर
काशी की अधिष्ठात्री शक्ति; 7 सप्तपुरी (अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार, काशी, उज्जैन, द्वारका, काँची) में काशी का प्रतिनिधि देवी-पीठ
7 मंदिर
5वाँ दिवस (स्कंदमाता-दिवस) पूज्य गौरी; अन्य 8: मुख-निर्मलिका, ज्येष्ठा, सौभाग्य, श्रृंगार, ललिता, भवानी, मंगला, महालक्ष्मी
9 मंदिर
विश्वनाथ + विशालाक्षी + गंगा + काल-भैरव + ढुण्ढिराज गणेश + दण्डपाणि — एक-दिवसीय यात्रा
6 मंदिर
केन्द्रीय शक्ति-तीर्थ; काशी-यात्रा की पूर्णता हेतु 4-तीर्थ संयुक्त (250-1500 मीटर के भीतर)
4 मंदिर