ऋग्वेद
यमुना-यम-संवाद (मण्डल 10, सूक्त 10) — यम-यमी की मूल कथा
Yamunotri (Uttarkashi District) · Uttarakhand
यमुनोत्री / यमुना देवी — सूर्य-पुत्री, यम-भगिनी
अन्य नाम: यमुनोत्री · यमुना धाम · सूर्य-पुत्री यमुना

इस मन्दिर की विशेषता
श्री यमुना देवी (सूर्य-पुत्री; यमराज की बहन; नदी-देवी)
काले संगमरमर का विग्रह (मुख्य मूर्ति); शिला-वर्षक मूर्ति देवी संध्या के समय शीतकाल हेतु खरसाली ले जाई जाती है
सम्प्रदाय: वैष्णव / सनातन देवी-तीर्थ
यमुना-यम-संवाद (मण्डल 10, सूक्त 10) — यम-यमी की मूल कथा
यमुना-तट के अनेक संदर्भ; कृष्ण-लीला
केदार खण्ड एवं यमुना-माहात्म्य; चार-धाम यात्रा-क्रम का वर्णन
यमुना-तट कृष्ण-लीला; यमुना-स्तुति
06:30 से 21:00 तक · मध्याह्न विश्राम 12:00-14:00 (मध्याह्न विश्राम)
दिन की प्रथम आरती
दिन की अन्तिम आरती; मंदिर 21:00 बजे बन्द
मुख्य यमुना देवी दर्शन निःशुल्क। दर्शन से पूर्व सूर्य कुंड में स्नान एवं दिव्य शिला-दर्शन परंपरा।
उत्तराखंड सरकार द्वारा अनिवार्य ऑनलाइन पंजीकरण; नाम, फोटो, ID, स्वास्थ्य-सत्यापन। निःशुल्क।
यमुनोत्री धाम के द्वार वर्ष में पहली बार खुलते हैं; अबूझ-मुहूर्त माना जाता है। मूर्ति खरसाली से डोली-यात्रा द्वारा यमुनोत्री लाई जाती है। 2026 — 19 अप्रैल।
यमुना द्वारा यम को राखी-तिलक का मूल पर्व; यमुनोत्री में विशेष पूजा। मंदिर-कपाट-बन्द-दिवस परंपरागत रूप से यही (शीतकाल हेतु)। 2026 — कपाट-बन्द ~11 नवम्बर (भाई दूज)।
यमुना-गंगा-संगम-स्मरण; यमुनोत्री में विशेष पूजा
सूर्य-उत्तरायण आरम्भ; सूर्य-पुत्री यमुना की विशेष पूजा (शीतकालीन-स्थल खरसाली में)
यमुना यमराज की बहन; यमुनोत्री-दर्शन एवं यमुना-स्नान से मान्यता अनुसार अकाल-मृत्यु एवं यम-दण्ड से मुक्ति; पितृ-तर्पण हेतु विशेष
स्रोत: स्कन्द पुराण केदार खण्ड + ब्रह्म पुराण
उत्तराखंड के छोटा चार धाम (यमुनोत्री-गंगोत्री-केदारनाथ-बद्रीनाथ) का प्रथम धाम; क्रम-यात्रा का प्रारम्भ
स्रोत: आदि शंकराचार्य परंपरा
यमुना-स्नान से जन्म-जन्मांतर के पाप-नाश; भागवत-वर्णित यमुना-तट की पवित्रता
स्रोत: श्रीमद् भागवत पुराण
यमुना-यम कथा से रक्षाबन्धन परंपरा का मूल; भाई-बहन के लिए विशेष पूजा-स्थल
स्रोत: ऋग्वेद यम-यमी संवाद + पौराणिक परंपरा
प्राकृतिक गर्म-जल कुंड (88°C / 190°F); श्रद्धालु आलू एवं चावल पोटली में बाँधकर पकाते हैं — प्रसाद के रूप में देवी को अर्पित। दर्शन से पूर्व स्नान-स्थल (गौरी कुंड)
पवित्र शिला; यमुनोत्री-दर्शन से पूर्व प्रार्थना का स्थल; मान्यता: इसके दर्शन से पुण्य-प्राप्ति
गर्म-जल कुंड; श्रद्धालु यहाँ स्नान करते हैं (तापमान सूर्य कुंड से कम)
यमुना नदी का वास्तविक हिमनद-उद्गम; मंदिर तक केवल चुनिंदा ट्रैकर ही पहुँचते हैं
देवी यमुना का शीतकालीन निवास-स्थल; जब मंदिर बन्द होता है तब यहीं पूजा होती है। शनिदेव मंदिर के लिए भी प्रसिद्ध — यमुना की पिता-कुटुम्बीय परंपरा।
हनुमान मंदिर एवं यमुनोत्री-गंगोत्री विभाजन-बिन्दु
प्रथम धाम — यमुनोत्री → गंगोत्री → केदारनाथ → बद्रीनाथ क्रम; पारंपरिक 10-12 दिवसीय यात्रा
4 मंदिर
उद्गम-स्थल; नदी-देवी यात्रा का प्रारम्भ
केन्द्रीय; 1-2 दिवसीय पूर्ण क्षेत्र-यात्रा
एक-दिवसीय यात्रा का प्रथम पड़ाव — सहस्त्रधारा/देहरादून से प्रारम्भ