शिव स्वयं प्रकट 12 स्थान। सम्पूर्ण यात्रा = सभी पाप नाश + शिवलोक। सोमनाथ→घृष्णेश्वर। 'सौराष्ट्रे सोमनाथं...' प्रातः स्मरण = दर्शन तुल्य। जीवन में 12 = दुर्लभ पुण्य।
12 ज्योतिर्लिंग = शिव स्वयं प्रकट (ज्योति स्वरूप) — शिव पुराण। सम्पूर्ण यात्रा = महापुण्य।