योग भंग
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6ठे, 8वें या 12वें भाव में राजयोग बनने के नुकसान?
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संक्षिप्त उत्तर
इन खराब भावों में योग बनने से इंसान की किस्मत उसका साथ नहीं देती। उसे जिंदगी में बहुत ज्यादा संघर्ष, कोर्ट-कचहरी और दुश्मनों का सामना करना पड़ता है।
यदि नवम और दशम भाव के स्वामी युति बनाकर दुस्थानों (6ठे-रोग/शत्रु, 8वें-मृत्यु/बाधा, 12वें-व्यय) में बैठ जाएं, तो योग की शक्ति अत्यंत क्षीण हो जाती है।
जातक को भाग्य का समर्थन नहीं मिलता और उसे पग-पग पर संघर्ष, शत्रुओं का विरोध और अप्रत्याशित बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
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