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विस्तृत उत्तर
यदि नवम और दशम भाव के स्वामी युति बनाकर दुस्थानों (6ठे-रोग/शत्रु, 8वें-मृत्यु/बाधा, 12वें-व्यय) में बैठ जाएं, तो योग की शक्ति अत्यंत क्षीण हो जाती है। जातक को भाग्य का समर्थन नहीं मिलता और उसे पग-पग पर संघर्ष, शत्रुओं का विरोध और अप्रत्याशित बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
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