विस्तृत उत्तर
शास्त्रों के अनुसार यदि नवम या दशम भाव का स्वामी अष्टम (रन्ध्र) या एकादश (त्रिषडाय) का भी स्वामी हो, तो योग भंग हो जाता है। मेष लग्न में दशमेश शनि एकादश भाव का स्वामी होने से दोषयुक्त है। मिथुन लग्न में नवमेश शनि अष्टम भाव (बाधा) का स्वामी होने से भयंकर दोष उत्पन्न करता है, जिससे राजयोग पूर्णतः भंग मान लिया जाता है।




