विस्तृत उत्तर
केतु मंत्र
- 1बीज मंत्र: 'ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः' — 17,000 जप।
- 2सरल: 'ॐ कें केतवे नमः' — 108 नित्य।
- 3केतु गायत्री: 'ॐ अश्वध्वजाय विद्महे शूलहस्ताय धीमहि तन्नो केतुः प्रचोदयात्'
जप विधि: मंगलवार/शनिवार। भूरे/धूमिल वस्त्र। 7 मुखी रुद्राक्ष या गोमेद माला। सायंकाल। 40 दिन नियमित।
अन्य उपाय: गणेश पूजा (केतु = गणेश से संबंधित, कुछ मतों में)। बिल्ली/कुत्ते को भोजन। दान: सप्तधातु, तिल, कंबल।
ध्यान रखें: केतु = मोक्षकारक ग्रह भी। केतु दशा = आध्यात्मिक उन्नति का समय भी हो सकता है। ज्योतिषी से कुण्डली विश्लेषण करवाएं।





