दत्तात्रेय के विविध अल्पज्ञात मंत्र (पितृ दोष एवं क्लेश शांति हेतु)
मंत्र संग्रह
मंत्र 1 (नाम स्मरण): “दिगंबरा−दिगंबरा श्रीपाद वल्लभ दिगंबरा”
मंत्र 2 (तांत्रोक्त बीज): ॐ द्रां दत्तात्रेयाय नमः
मंत्र 3 (गायत्री): “ॐ दिगंबराय विद्महे योगीश्वराय धीमहि तन्नो दत्तः प्रचोदयात”
मंत्र 4 (मानसिक जप): “ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां...” (अनेक बार, मानसिक रूप से)
मंत्र 5 (विपुलमूर्ति): ॐ झं द्रां विपुलमुर्तेये नमः स्वाहाः
देवता
भगवान दत्तात्रेय (त्रिदेव – ब्रह्मा, विष्णु, महेश – के सम्मिलित अवतार, गुरु तत्व के प्रतीक)।
स्रोत
इन मंत्रों का स्पष्ट पौराणिक स्रोत उल्लेखित नहीं है, ये मुख्यतः गुरु-शिष्य परंपरा और दत्त संप्रदाय में प्रचलित हैं।
प्रयोजन
पितृ दोष निवारण, जीवन के विभिन्न कष्टों से मुक्ति, मानसिक शांति, गृह क्लेश शांति, तथा आध्यात्मिक उन्नति।
विधि
उपरोक्त मंत्रों का जप स्फटिक माला से 108 बार नियमित रूप से करने का विधान है (मंत्र 1, 2, 3, 4)। 'विपुलमूर्ति मंत्र' (मंत्र 4) का जप चंदन की माला पर करने से परिवार में प्रेम और खुशियां आती हैं। दत्तात्रेय जयंती, गुरु पूर्णिमा तथा प्रत्येक मास की पूर्णिमा और अमावस्या को इन मंत्रों का जप विशेष फलदायी होता है। संध्याकाल में स्वच्छ स्थान पर लाल वस्त्र बिछाकर भगवान दत्तात्रेय की मूर्ति स्थापित कर, कुमकुम तिलक, फल-फूल अर्पित कर, घी का दीपक जलाकर, निम्न मंत्र से विनियोग करें:
"ॐ अस्य श्री दत्तात्रेय स्तोत्र मंत्रस्य भगवान नारद ऋषि: अनुष्टुप छन्द:, श्री दत्त परमात्मा देवता:, श्री दत्त प्रीत्यर्थे जपे विनोयोग:।"
इसके पश्चात मूल मंत्र का 108 बार जप रुद्राक्ष माला से करना चाहिए।
महत्व
भगवान दत्तात्रेय को गुरुओं का भी गुरु माना जाता है। उनके मंत्र गुरु तत्व को जाग्रत करने, पितरों की शांति और त्रिविध तापों (आध्यात्मिक, आधिदैविक, आधिभौतिक) के शमन के लिए अत्यंत प्रभावी माने जाते हैं। यद्यपि दत्तात्रेय भगवान की उपासना व्यापक है, तथापि उनके ये विशिष्ट बीज मंत्र, गायत्री और तांत्रोक्त मंत्र सामान्य साधकों में अल्पज्ञात हैं और विशेष कृपा एवं सिद्धि प्रदान करने वाले हैं।






