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ज्योतिष प्रश्नोत्तर — 17 प्रश्न

ज्योतिष से जुड़े 17 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 17 प्रश्न

नवग्रह शांति मंत्र का जप एक साथ कैसे करें?

सरलतम: नवग्रह स्तोत्र ('जपाकुसुमसंकाशं...') प्रतिदिन = 5 मिनट = 9 ग्रह शांत। क्रमिक: 9 ग्रह × 108 = 972 जप। एकत्र बीज मंत्र (सभी बीज एक में) 108 बार। शनिवार/रविवार। सूर्योदय।

नवग्रहएक साथशांति
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शनि देव को तेल क्यों चढ़ाते हैं?

कथा: माता छाया ने तेल से शनि ठीक किए=तेल प्रिय। छाया दान=तेल में चेहरा देखकर=शनि(छाया पुत्र)। शनिवार शाम, पीपल/मंदिर, लोहा पात्र, 'ॐ शं शनैश्चराय नमः'।

शनितेलसरसों
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राहु मंत्र का जप राहु दोष शांति के लिए कैसे करें?

बीज: 'ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः' 18,000। सरल: 'ॐ रां राहवे नमः' 108 नित्य। शनिवार/बुधवार रात्रि, काले वस्त्र, गोमेद/रुद्राक्ष माला, सरसों दीपक। 40 दिन। दुर्गा सप्तशती भी प्रभावी। ज्योतिषी परामर्श।

राहुमंत्रदोष
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शनि साढ़ेसाती कब लगती है — कैसे पहचानें?

शनि 12वीं+1ली+2री राशि=7.5 वर्ष(3×2.5)। उदय=आर्थिक, मध्य=स्वास्थ्य(सबसे कठिन), अस्त=परिवार। लक्षण: तंगी, बीमारी, बाधा, कलह। .com देखें।

शनि साढ़ेसातीकबलक्षण
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मंत्र जप से कालसर्प दोष का निवारण कैसे करें?

मंत्र: महामृत्युंजय सवा लाख+हवन (सर्वाधिक प्रभावी)। 'ॐ नमः शिवाय'। राहु: 'ॐ रां राहवे नमः' 18,000। केतु: 'ॐ कें केतवे नमः' 17,000। विष्णु सहस्रनाम। अन्य: त्र्यम्बकेश्वर/महाकाल पूजा, रुद्राभिषेक, नाग पंचमी। ज्योतिषी से कुण्डली परामर्श।

कालसर्पराहु केतुमंत्र
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केतु मंत्र का जप केतु दोष शांति के लिए कैसे करें?

बीज: 'ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः' 17,000। सरल: 'ॐ कें केतवे नमः' 108। मंगलवार/शनिवार, भूरे वस्त्र, 7 मुखी रुद्राक्ष। गणेश पूजा। केतु = मोक्षकारक भी। ज्योतिषी परामर्श।

केतुमंत्रदोष
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मंत्र जप से पितृ दोष कैसे दूर होता है?

मंत्र: पितृ गायत्री, महामृत्युंजय, 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय', 'ॐ पितृभ्यो नमः'। विधि: पितृ पक्ष श्राद्ध+तर्पण, अमावस्या तर्पण (तिल+जल), गया श्राद्ध सर्वश्रेष्ठ, पीपल जल, गरुड़ पुराण, अन्नदान = सबसे प्रभावी।

पितृ दोषश्राद्धतर्पण
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प्रत्यंतर दशा क्या होती है

अंतर्दशा के भीतर सूक्ष्म ग्रह काल। महादशा→अंतर्दशा→प्रत्यंतर्दशा। कुछ सप्ताह-माह। विशिष्ट घटनाओं का सटीक समय। सबसे सूक्ष्म भविष्यवाणी स्तर।

प्रत्यंतर दशादशाज्योतिष
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ग्रहों का मनुष्य पर प्रभाव वैज्ञानिक प्रमाण

सिद्ध: सूर्य (विटामिन D/ऋतुएं), चंद्र (ज्वारभाटा)। अप्रमाणित: शनि/मंगल/गुरु आदि = नगण्य गुरुत्वाकर्षण। राहु-केतु = गणितीय बिंदु। सूर्य/चंद्र = हाँ; शेष = प्रमाण नहीं। विश्वास व्यक्तिगत।

ग्रहप्रभाववैज्ञानिक
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ज्योतिष का वैज्ञानिक आधार क्या

विवादित। ज्योतिष: खगोलीय गणित + हजारों वर्ष अनुभव। विज्ञान: pseudoscience; ग्रह प्रभाव अप्रमाणित। संतुलित: सांस्कृतिक विरासत + मार्गदर्शन; 'वैज्ञानिक प्रमाणित' = अतिशयोक्ति। कर्म > ग्रह।

ज्योतिषवैज्ञानिकआधार
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मंगल गायत्री मंत्र का जप मंगल दोष के लिए कैसे करें?

'ॐ अंगारकाय विद्महे भूमिपुत्राय धीमहि तन्नो कुजः प्रचोदयात्'। बीज: 'ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः' 10,000। मंगलवार, लाल वस्त्र, मूंगा माला। हनुमान पूजा = मंगल शांति। ज्योतिषी से मांगलिक दोष पुष्टि करवाएं।

मंगलगायत्रीमांगलिक
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ग्रह शांति के लिए कौन से मंत्र जपने चाहिए?

सार्वभौमिक: नवग्रह स्तोत्र, महामृत्युंजय, गायत्री। 9 ग्रह बीज: सूर्य (ह्रां), चंद्र (श्रां), मंगल (क्रां), बुध (ब्रां), गुरु (ग्रां), शुक्र (द्रां), शनि (प्रां), राहु (भ्रां), केतु (स्रां)। कुण्डली → ज्योतिषी → विशिष्ट ग्रह जप।

ग्रह शांतिनवग्रहमंत्र
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नवग्रह मंत्रों का जप कैसे और कब करें?

9 ग्रह बीज मंत्र: सूर्य (ह्रां) 7K, चंद्र (श्रां) 11K, मंगल (क्रां) 10K, बुध (ब्रां) 9K, गुरु (ग्रां) 19K, शुक्र (द्रां) 16K, शनि (प्रां) 23K, राहु (भ्रां) 18K, केतु (स्रां) 17K। ग्रह के दिन जप। नवग्रह स्तोत्र नित्य। कुण्डली परामर्श → विशिष्ट ग्रह जप।

नवग्रहग्रह मंत्रजप
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शनि मंत्र का जप शनि दोष निवारण के लिए कैसे करें?

मंत्र: 'ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः' 23,000 या 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' 108 नित्य। शनिवार, काले/नीले वस्त्र, लोहे की माला, सायंकाल, सरसों तेल दीपक। हनुमान चालीसा शनिवार। सरसों तेल दान। काले कुत्ते को रोटी। ज्योतिषी परामर्श।

शनिमंत्रसाढ़ेसाती
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ज्योतिष — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर ज्योतिष श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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ज्योतिष को गहराई से समझने का तरीका

ज्योतिष प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

17 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

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शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

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