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पञ्चदशी और षोडशी मंत्र प्रश्नोत्तर — 5 प्रश्न

पञ्चदशी और षोडशी मंत्र से जुड़े 5 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 5 प्रश्न

माँ त्रिपुर सुंदरी का ध्यान श्लोक क्या है?

ध्यान श्लोक: 'बालार्कायुततेजसं त्रिनयनां रक्ताम्बरोल्लासिनीम्...' अर्थ: 10,000 बाल सूर्य-तेज, तीन नेत्र, रक्तिम वस्त्र, विविध अलंकार, अर्धचंद्र, हाथों में ईख-धनुष-अंकुश-पुष्पबाण-पाश। श्रीचक्र पर विराजमान, तीनों लोकों की आधारभूता।

त्रिपुर सुंदरी ध्यानबालार्क तेजश्रीचक्रस्थित
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त्रिपुर सुंदरी गायत्री मंत्र क्या है?

त्रिपुर सुंदरी गायत्री मंत्र: 'क्लीं त्रिपुरादेवि विद्महे कामेश्वरि धीमहि। तन्नः क्लिन्ने प्रचोदयात्॥'

त्रिपुर गायत्रीक्लीं त्रिपुरादेविकामेश्वरि धीमहि
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षोडशी मंत्र क्या है और पञ्चदशी से कैसे अलग है?

षोडशी मंत्र = पञ्चदशी + एक रहस्यमयी बीज (प्रायः 'श्रीं') = 16 अक्षर। पञ्चदशी से अधिक गोपनीय और शक्तिशाली। एक रूप: 'श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं सौः ॐ ह्रीं श्रीं क ए ई ल ह्रीं...' विभिन्न स्वरूप: पंचाक्षर, षडाक्षर षोडशी।

षोडशी मंत्र16 अक्षरश्रीं बीज
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पञ्चदशी मंत्र के तीन कूट कौन से हैं?

पञ्चदशी के तीन कूट: (1) वाग्भव कूट 'क ए ई ल ह्रीं' = ज्ञान शक्ति, (2) कामराज कूट 'ह स क ह ल ह्रीं' = इच्छा शक्ति, (3) शक्ति कूट 'स क ल ह्रीं' = क्रिया शक्ति। तीनों शरीर के विभिन्न चक्रों से संबंधित।

तीन कूटवाग्भव कूटकामराज कूट
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पञ्चदशी मंत्र क्या है?

पञ्चदशी मंत्र = श्री विद्या का मूल मंत्र। 15 बीज अक्षर: 'क ए ई ल ह्रीं। ह स क ह ल ह्रीं। स क ल ह्रीं॥' अत्यंत गोपनीय — केवल योग्य गुरु से दीक्षा द्वारा प्राप्त। जाप = मानसिक या अत्यंत धीमे स्वर में।

पञ्चदशी मंत्र15 बीज अक्षरश्री विद्या मूल मंत्र
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पञ्चदशी और षोडशी मंत्र — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर पञ्चदशी और षोडशी मंत्र श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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पञ्चदशी और षोडशी मंत्र को गहराई से समझने का तरीका

पञ्चदशी और षोडशी मंत्र प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

5 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।