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ज्योतिष उपाय प्रश्नोत्तर — 15 प्रश्न

ज्योतिष उपाय से जुड़े 15 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 15 प्रश्न

नवग्रह यंत्र कैसे स्थापित करें?

शुक्ल पक्ष रविवार/नवरात्रि। पूर्व/ईशान दिशा, लाल कपड़ा, पंचामृत+गंगाजल शुद्धि, 'ब्रह्मा मुरारि त्रिपुरांतकारी...' 108 बार। प्रतिदिन धूप-दीप। 9 ग्रह एक साथ शांत। प्रामाणिक यंत्र+नित्य पूजा अनिवार्य।

नवग्रह यंत्रस्थापनाविधि
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शनि साढ़ेसाती से बचने के 10 उपाय?

शनिवार पूजा+दीपक, पीपल 7 परिक्रमा, 'ॐ शं शनैश्चराय' 108, हनुमान मंगल+शनि, दान(तिल/तेल/लोहा/कंबल), छाया दान, शनि चालीसा, गरीब सेवा, शनि मंदिर, सत्य+कर्म(सबसे बड़ा)।

साढ़ेसातीउपायशनि शांति
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मंगल महादशा में क्या करना चाहिए?

7 वर्ष। हनुमान पूजा(मंगलवार), 'ॐ अं अंगारकाय' 108, मूंगा(ज्योतिषी), लाल वस्तु/मसूर/गुड़ दान, सुंदरकांड, क्रोध नियंत्रण(योग)। शुभ=भूमि/साहस/खेल। ऊर्जा=खेल/व्यायाम/सेवा में लगाएँ।

मंगलमहादशा7 वर्ष
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शनि महादशा में क्या करें?

19 वर्ष(सबसे लंबी)। दैनिक: 'ॐ शं शनैश्चराय' 108, हनुमान चालीसा, पीपल तेल दीपक। शनिवार: तिल/तेल/लोहा/कंबल दान, छाया दान, कौवा रोटी, शनि चालीसा। सेवा: गरीब/वृद्ध/दिव्यांग। शनि=शिक्षक — कर्म शुद्धि=सबसे बड़ा उपाय। अपमान/झूठ/शोषण=कठोर दंड।

शनिमहादशा19 वर्ष
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शनि स्तोत्र से शनि दोष कैसे दूर?

दशरथ कृत शनि स्तोत्र(सबसे प्रभावी), वज्रपंजर कवच, बीज मंत्र('ॐ प्रां प्रीं प्रौं'), शनि गायत्री, चालीसा, महामृत्युंजय। शनिवार+दान+हनुमान+कर्म शुद्धि=40 दिन।

शनि स्तोत्रदोषनिवारण
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ग्रहों की दशा खराब हो तो क्या उपाय करें?

नवग्रह स्तोत्र(रोज़ 3 min), हनुमान चालीसा, नवग्रह हवन, ग्रह-विशिष्ट बीज मंत्र 108+दान+वार व्रत, रत्न(ज्योतिषी), गरीब सेवा, गीता कर्मयोग। ज्योतिषी से कुंडली-विशिष्ट। कर्म शुद्धि=सबसे बड़ा उपाय।

दशाग्रहउपाय
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केतु महादशा में क्या समस्या आती है और उपाय?

7 वर्ष। अचानक हानि/रोग/वैराग्य/दिशाहीनता। 'ॐ कें केतवे' 108, गणेश पूजा(केतु नियंत्रक), गणपति अथर्वशीर्ष, कुत्ते को रोटी, सप्तरंगी/सप्तधान्य दान, लहसुनिया(ज्योतिषी)। आध्यात्मिक साधना=सर्वोत्तम। केतु=मोक्ष द्वार।

केतुमहादशा7 वर्ष
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शुक्र महादशा में क्या लाभ होता है?

20 वर्ष(सबसे लंबी)। शुभ: विवाह सुख, धन-ऐश्वर्य, वाहन, कला/संगीत, सौंदर्य। अशुभ उपाय: 'ॐ द्रां द्रीं द्रौं' 108, हीरा/ओपल(ज्योतिषी), शुक्रवार व्रत+सफ़ेद दान, लक्ष्मी पूजा, श्री सूक्त। शुक्र=लक्ष्मी=ऐश्वर्य। संयम आवश्यक।

शुक्रमहादशा20 वर्ष
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गुरु महादशा में कौन से शुभ कार्य करें?

16 वर्ष(सबसे शुभ ग्रह)। शुभ कार्य: विवाह, संतान, उच्च शिक्षा, तीर्थ, गुरु दीक्षा, व्यापार विस्तार, दान-पुण्य, ज्ञान प्रसार। अशुभ उपाय: 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं' 108, पुखराज, गुरुवार व्रत+केला दान, सत्यनारायण, विष्णु सहस्रनाम। ज्ञान+दान+धर्म=गुरु प्रसन्न।

गुरुबृहस्पतिमहादशा
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राहु दोष निवारण मंत्र?

बीज: 'ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः' 108। मूल: 'ॐ रां राहवे नमः' 18000। दुर्गा मंत्र, गणपति अथर्वशीर्ष, महामृत्युंजय। शनि/बुधवार शाम। गोमेद(ज्योतिषी)।

राहुमंत्रनिवारण
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शनि देव को प्रसन्न करने का सरल उपाय?

सरलतम: शनिवार पीपल तेल दीपक। 'ॐ शं शनैश्चराय' 108। तिल+तेल दान। कौवे को रोटी। हनुमान चालीसा। सबसे बड़ा: सच्चाई+मेहनत+गरीब सम्मान।

शनिप्रसन्नसरल
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राहु महादशा में क्या उपाय करें?

18 वर्ष। 'ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे' 108(बुध/शनिवार शाम), दुर्गा पूजा(राहु नियंत्रक), गणपति अथर्वशीर्ष, नागपंचमी। दान: नारियल नदी, तिल, उड़द, कंबल। गोमेद(ज्योतिषी)। नशा/झूठ=वर्जित। शुभ राहु=विदेश/IT/राजनीति उन्नति।

राहुमहादशा18 वर्ष
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ग्रह दोष में हवन करने का विशेष लाभ क्या?

अग्नि=देवमुख, आहुति सीधे ग्रहों तक। मंत्र+आहुति=दोहरा प्रभाव। वायु शुद्धि(94% बैक्टीरिया)। नवग्रह हवन=9 ग्रह शांत। साढ़ेसाती/कालसर्प/गृहप्रवेश। योग्य पंडित अनिवार्य।

हवनग्रह दोषअग्निहोत्र
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ज्योतिष उपाय — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर ज्योतिष उपाय श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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ज्योतिष उपाय को गहराई से समझने का तरीका

ज्योतिष उपाय प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

15 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।