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गुरु तत्व और गुरु कृपा प्रश्नोत्तर — 8 प्रश्न

गुरु तत्व और गुरु कृपा से जुड़े 8 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 8 प्रश्न

बिना गुरु के तंत्र साधना करने से क्या होता है?

बिना गुरु के तंत्र साधना असंभव और आत्मघाती है — गुरु के बिना मंत्र केवल शब्द मात्र रहते हैं और साधना प्राणहीन क्रिया बन जाती है।

बिना गुरुआत्मघातीप्राणहीन
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शक्तिपात क्या होता है?

शक्तिपात गुरु की कृपा का वह रूप है जो शिष्य में संचारित होकर सोई कुंडलिनी जाग्रत करती है और साधना के विघ्नों से रक्षा करती है — मोक्ष केवल इसी गुरु-कृपा से संभव है।

शक्तिपातगुरु कृपाकुंडलिनी जागरण
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'ध्यानमूलं गुरोर्मूर्तिः' श्लोक का क्या अर्थ है?

'ध्यानमूलं गुरोर्मूर्तिः...' का अर्थ: ध्यान का मूल = गुरु की मूर्ति; पूजा का मूल = गुरु के चरण; मंत्र का मूल = गुरु का वाक्य; मोक्ष का मूल = केवल गुरु की कृपा।

ध्यानमूलंगुरु गीतामोक्ष मूल
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सद्गुरु में कौन से दो गुण होने चाहिए?

सद्गुरु में दो गुण अनिवार्य हैं: (1) श्रोत्रिय — शास्त्रों का पूर्ण ज्ञान, (2) ब्रह्मनिष्ठ — ब्रह्म का अपरोक्ष (साक्षात्) अनुभव।

सद्गुरु गुणश्रोत्रियब्रह्मनिष्ठ
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'गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः' श्लोक का क्या अर्थ है?

'गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः...' का अर्थ: गुरु ही ब्रह्मा हैं, गुरु ही विष्णु हैं, गुरु ही महेश्वर हैं, गुरु ही साक्षात् परब्रह्म हैं — ऐसे श्रीगुरु को नमन।

गुरुर्ब्रह्माब्रह्मा विष्णु महेशपरब्रह्म
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गुरु गीता में गुरु के बारे में क्या कहा गया है?

गुरु गीता (स्कंद पुराण): 'गुरुर्ब्रह्मागुरुर्विष्णुःगुरुर्देवोमहेश्वरः। गुरुःसाक्षात्परब्रह्म...' — गुरु ही ब्रह्मा, विष्णु, महेश और साक्षात परब्रह्म हैं।

गुरु गीतास्कंद पुराणगुरुर्ब्रह्मा
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'गुरु' शब्द का क्या अर्थ है?

'गुरु' शब्द का अर्थ: 'गु' = अज्ञान रूपी अंधकार, 'रु' = ज्ञान रूपी प्रकाश — गुरु वह सार्वभौमिक तत्त्व है जो अज्ञान के अंधकार को ज्ञान के प्रकाश से नष्ट करता है।

गुरु शब्द अर्थगु रुअज्ञान नाश
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तंत्र मार्ग में गुरु कौन होते हैं?

तंत्र मार्ग में गुरु केवल शिक्षक नहीं बल्कि साक्षात शिव-स्वरूप और एक सार्वभौमिक तत्त्व हैं — 'गु' = अज्ञान अंधकार, 'रु' = ज्ञान प्रकाश से नष्ट करने वाले।

तंत्र गुरुशिव स्वरूपगुरु तत्व
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गुरु तत्व और गुरु कृपा — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर गुरु तत्व और गुरु कृपा श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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गुरु तत्व और गुरु कृपा को गहराई से समझने का तरीका

गुरु तत्व और गुरु कृपा प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

8 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।