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पंचांग एवं कैलेंडर प्रश्नोत्तर — 8 प्रश्न

पंचांग एवं कैलेंडर से जुड़े 8 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 8 प्रश्न

अधिक मास में कौन से पुण्य कर्म करें

पुरुषोत्तम मास पुण्य = कई गुना। विष्णु भक्ति (गीता/सहस्रनाम), दान (अन्न/वस्त्र/गो), व्रत, तीर्थ स्नान, भागवत कथा, तुलसी पूजा। शुभ कार्य वर्जित, पर पुण्य = अनंत।

अधिक मासपुण्यकर्म
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खरमास क्या है इसमें कौन से काम वर्जित

खरमास = सूर्य धनु/मीन राशि (~दिसंबर-जनवरी + मार्च-अप्रैल)। गुरु कमजोर → शुभ कार्य वर्जित (विवाह/गृह प्रवेश)। पूजा/दान/दैनिक = अनुमत। अधिक मास से भिन्न।

खरमासमलमासवर्जित
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पूर्णिमांत और अमांत पंचांग में अंतर

अमांत: माह = अमावस्या तक (गुजरात/दक्षिण/सरकारी)। पूर्णिमांत: माह = पूर्णिमा तक (उत्तर भारत)। शुक्ल पक्ष = दोनों समान; कृष्ण = माह नाम भिन्न।

पूर्णिमांतअमांतपंचांग
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अधिक मास में विवाह क्यों नहीं करते

अधिक मास = मलमास (अशुद्ध); कोई देवता अधिपति नहीं। विवाह/गृह प्रवेश/संस्कार वर्जित। पुण्य कर्म (दान/व्रत/भक्ति) = विशेष शुभ। ~32.5 माह में एक बार।

अधिक मासविवाहवर्जित
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हिंदू कैलेंडर और अंग्रेजी कैलेंडर तारीख अलग क्यों

अंग्रेजी = सौर (सूर्य आधारित; 365.25 दिन)। हिंदू = चांद्र-सौर (चंद्र माह + सौर वर्ष)। चंद्र माह (29.5 दिन) ≠ सौर माह = तिथि भिन्न। दीवाली = कार्तिक अमावस्या → हर साल अलग अंग्रेजी तारीख।

हिंदू कैलेंडरअंग्रेजीअंतर
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नक्षत्र अनुसार शुभ कार्य कैसे तय करें

27 नक्षत्र = शुभ/अशुभ। विवाह: रोहिणी, मृगशिरा, स्वाति, अनुराधा। खरीदारी: पुष्य सर्वोत्तम। यात्रा: अश्विनी, पुष्य, रेवती। पंचांग/ऐप = सरलतम — आज का नक्षत्र+शुभ/अशुभ दिखता है।

नक्षत्रशुभ कार्यमुहूर्त
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पंचांग कैसे पढ़ें सरल भाषा में

5 अंग: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह), नक्षत्र (चंद्र स्थिति), योग (सूर्य+चंद्र), करण (तिथि आधा)। शुभ = शुभ तिथि+नक्षत्र+योग। ऑनलाइन: = सरलतम।

पंचांगपढ़नासरल
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विक्रम संवत और शक संवत में अंतर

विक्रम = 57 ई.पू. (ग्रेगोरियन+57); उत्तर भारत, नेपाल। शक = 78 ई. (ग्रेगोरियन-78); भारत राष्ट्रीय कैलेंडर; दक्षिण/महाराष्ट्र। दोनों नववर्ष = चैत्र शुक्ल प्रतिपदा।

विक्रम संवतशक संवतअंतर
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पंचांग एवं कैलेंडर — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर पंचांग एवं कैलेंडर श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

विषय को सही क्रम से पढ़ें

पंचांग एवं कैलेंडर को गहराई से समझने का तरीका

पंचांग एवं कैलेंडर प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

8 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।