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स्मृति शास्त्र प्रश्नोत्तर — 6 प्रश्न

स्मृति शास्त्र से जुड़े 6 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 6 प्रश्न

श्राद्धसारः कौन सा ग्रन्थ है?

श्राद्धसारः नृसिंह प्रसाद ग्रन्थ का प्रसिद्ध भाग है, जो श्राद्ध के सिद्धांतों का सार-संक्षेप प्रस्तुत करता है। श्राद्ध का अर्थ है पितृ-कर्म, और सार का अर्थ है सारांश। यह याज्ञवल्क्य स्मृति 1.264 की सटीक व्याख्या करता है, और तिथि-वार काम्य फलों का स्पष्ट संकलन देता है। इसी के अनुसार प्रतिपदा को कन्या, द्वितीया को कन्यावेदिन और पशू वै, तृतीया को अश्व, चतुर्थी को क्षुद्र पशु, पञ्चमी को पुत्र, षष्ठी को द्यूत विजय, सप्तमी को कृषि सफलता, और अष्टमी को व्यापार लाभ की प्राप्ति होती है।

श्राद्धसारःनृसिंह प्रसादश्राद्ध सारांश
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नृसिंह प्रसाद ग्रन्थ क्या है?

नृसिंह प्रसाद एक प्राचीन टीका-ग्रन्थ है, जो याज्ञवल्क्य स्मृति के श्राद्ध-सम्बन्धी श्लोकों की सटीक व्याख्या करता है। इसका सबसे प्रसिद्ध भाग श्राद्धसारः है। श्राद्ध का अर्थ है पितृ-कर्म, और सार का अर्थ है सारांश। इस ग्रन्थ ने याज्ञवल्क्य स्मृति 1.264 की सटीक व्याख्या प्रस्तुत की है, जिसके अनुसार द्वितीया श्राद्ध से कन्यावेदिन यानी सुयोग्य दामाद और पशू वै यानी प्रचुर पशु-धन की प्राप्ति होती है।

नृसिंह प्रसादश्राद्धसारःटीका ग्रन्थ
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याज्ञवल्क्य स्मृति 1.264 में क्या कहा गया है?

याज्ञवल्क्य स्मृति 1.264 का श्लोक है कन्यां कन्यावेदिनश्च पशून् वै सुसतानपि। द्यूतं कृषिं च वाणिज्यं द्विशफं चैकशफं तथा। यह श्लोक प्रतिपदा से अष्टमी तक की तिथियों के काम्य फल बताता है। द्वितीया का विशेष फल कन्यावेदिन यानी सुयोग्य दामाद और पशू वै यानी प्रचुर पशु-धन है। यह श्लोक नृसिंह प्रसाद-श्राद्धसारः ग्रन्थ में विस्तार से व्याख्यायित है।

याज्ञवल्क्य 1.264द्वितीया श्लोकतिथि फल
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पराशर स्मृति किसने रची है?

पराशर स्मृति को कलियुग के धर्म-नियंता महर्षि पराशर ने रचा है। इसमें पितरों के श्राद्ध और सूतक-पातक अशौच के समय शुद्धिकरण के कठोर नियमों का विस्तार से वर्णन है। यह कलियुग के लिए विशेष रूप से रची गई है, और इसमें स्पष्ट तथा व्यावहारिक नियम हैं।

पराशर स्मृतिमहर्षि पराशरकलियुग
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श्राद्ध के समय क्रोध करने से क्या होता है?

स्मृतियों के अनुसार श्राद्ध कर्म के दौरान यदि कोई व्यक्ति क्रोध करता है, मार्ग गमन करता है, या अनुचित आचरण करता है, तो पितर निराश होकर लौट जाते हैं। पितर सूक्ष्म वायु रूप में आते हैं, और अशांत वातावरण में वे नहीं ठहर सकते। इसलिए कर्ता को श्राद्ध के दिन क्रोध-रहित, शांत और धर्म के अनुसार आचरण करना चाहिए।

श्राद्ध क्रोधपितर निराशअनुचित आचरण
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याज्ञवल्क्य के अनुसार श्राद्धकर्ता कैसा होना चाहिए?

याज्ञवल्क्य स्मृति के अनुसार श्राद्धकर्ता को पवित्र आचरण वाला, पत्नी के प्रति निष्ठावान और क्रोध-रहित होना चाहिए। श्राद्ध के दिन क्रोध, मार्ग गमन, या अनुचित आचरण से पितर निराश होकर लौट जाते हैं। श्राद्ध की सफलता कर्ता के आंतरिक गुणों पर निर्भर करती है।

याज्ञवल्क्य स्मृतिश्राद्धकर्ता गुणपवित्र आचरण
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स्मृति शास्त्र — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर स्मृति शास्त्र श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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स्मृति शास्त्र को गहराई से समझने का तरीका

स्मृति शास्त्र प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

6 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

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