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व्रत का फल प्रश्नोत्तर — 4 प्रश्न

व्रत का फल से जुड़े 4 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 4 प्रश्न

योगिनी एकादशी का व्रत करने से क्या फल मिलता है (88,000 ब्राह्मणों का पुण्य)?

इस एक व्रत को करने से 88,000 ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर पुण्य मिलता है। यह व्रत कुष्ठ रोग जैसी बीमारियों को ठीक करता है और व्यक्ति को वैकुंठ धाम ले जाता है।

पुण्य फल88000 ब्राह्मणस्वर्ग प्राप्ति
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मोहिनी एकादशी का व्रत करने से क्या फल मिलता है?

यह व्रत सुमेरु पर्वत जितने बड़े पापों को भी नष्ट कर देता है। इसे करने से 1000 गायों के दान और अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य मिलता है और पितरों को शांति मिलती है।

पुण्य फलमोह मुक्तिअश्वमेध यज्ञ
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वरूथिनी एकादशी व्रत करने का क्या फल मिलता है?

इस व्रत को करने से दस हजार साल की तपस्या, अश्वमेध यज्ञ, सूर्य ग्रहण के समय सोना दान करने और कन्यादान करने से भी ज्यादा पुण्य मिलता है। इसका पुण्य इतना है कि चित्रगुप्त भी उसका हिसाब नहीं लगा सकते।

पुण्य फलअश्वमेध यज्ञकन्यादान
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विवाह बाधा और राहु शांति के लिए दुर्गाष्टमी व्रत का क्या महत्व है?

राहु (जो भ्रम और अचानक कष्ट देता है) की शांति के लिए यह व्रत सबसे असरदार है। साथ ही, जिन लड़कियों की शादी में रुकावट आ रही हो, वे इस व्रत में 'कात्यायनी मंत्र' पढ़ें तो शादी जल्दी होती है।

राहु शांतिविवाह बाधाकात्यायनी मंत्र
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व्रत का फल — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर व्रत का फल श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

विषय को सही क्रम से पढ़ें

व्रत का फल को गहराई से समझने का तरीका

व्रत का फल प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

4 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।