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तंत्र परिचय प्रश्नोत्तर — 5 प्रश्न

तंत्र परिचय से जुड़े 5 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 5 प्रश्न

तंत्र साधना का असली अर्थ क्या है?

तंत्र का असली अर्थ: 'जिससे ज्ञान का विस्तार हो।' तंत्र = शरीर को मंदिर मानकर ब्रह्मांड की शक्ति जगाना। तंत्रालोक: शिव (चेतना) + शक्ति (ऊर्जा) की एकता का विज्ञान। काला जादू नहीं — मोक्ष का त्वरित मार्ग। 'यत् पिण्डे तत् ब्रह्मांडे।'

परिचयपरिभाषाअर्थ
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तंत्र और मंत्र में क्या अंतर है?

मंत्र = पवित्र ध्वनि (तंत्र का एक अंग)। तंत्र = सम्पूर्ण साधना प्रणाली जिसमें मंत्र + यंत्र + क्रिया तीनों शामिल हैं। केवल 'ॐ नमः शिवाय' जपना = मंत्र साधना; शिव यंत्र + मंत्र + हवन + अभिषेक = तंत्र साधना।

तंत्र मंत्र अंतरपरिभाषायंत्र
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तंत्र साधना क्या होती है?

तंत्र = तीन स्तंभ: मंत्र (ध्वनि शक्ति) + यंत्र (ज्यामितीय आकृति) + तंत्र (विधि)। महानिर्वाण तंत्र: तत्त्व-मंत्र से ज्ञान विस्तार और रक्षा — यह तंत्र है। तीन मार्ग: दक्षिणाचार (सात्विक), वामाचार (उग्र), कौलाचार (सर्वोच्च)। अंतिम लक्ष्य मोक्ष है।

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तंत्र और मंत्र में क्या अंतर है?

मंत्र तंत्र का एक अंग है — ध्वनि के माध्यम से देवता का आह्वान। तंत्र = मंत्र + यंत्र + मुद्रा + ध्यान + अनुष्ठान का समग्र विज्ञान है। यंत्र देवता का ज्यामितीय रूप है और मुद्रा शरीर के माध्यम से देवता को जागृत करती है।

तंत्र मंत्र अंतरयंत्रत्रिकोण
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तंत्र साधना क्या होती है?

तंत्र एक प्राचीन साधना परंपरा है जिसमें शरीर, मन और ब्रह्मांडीय शक्ति के संयोग से मोक्ष का मार्ग बताया गया है। इसके दो मार्ग हैं — दक्षिणाचार (सात्विक, सभी के लिए) और वामाचार (उच्च दीक्षित के लिए)। तंत्र का अंतिम लक्ष्य मोक्ष है।

तंत्रसाधनापरिचय
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तंत्र परिचय — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर तंत्र परिचय श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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तंत्र परिचय को गहराई से समझने का तरीका

तंत्र परिचय प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

5 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।