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काशी के शिवलिंग प्रश्नोत्तर — 25 प्रश्न

काशी के शिवलिंग से जुड़े 25 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 25 प्रश्न

कुक्कुटेश्वर शिवलिंग वाराणसी में कहाँ स्थित है?

यह वाराणसी के भेलूपुर स्थित दुर्गा कुण्ड क्षेत्र में दुर्गा मंदिर के दक्षिणी द्वार के ठीक बाहर स्थित है। यह बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से लगभग 1.3 किलोमीटर उत्तर में है।

दुर्गा कुण्डभेलूपुरभौगोलिक स्थिति
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काशी में कुक्कुटेश्वर शिवलिंग की स्थापना किसने की थी?

इसकी स्थापना भगवान शिव के प्रिय 'कुक्कुट' नामक शिव गण ने की थी। इसका वर्णन स्कंद पुराण के काशी खंड (अध्याय 53) में मिलता है, जहाँ कुक्कुट गण काशी की दिव्यता से मोहित होकर यहीं बस गए और शिवलिंग स्थापित किया।

कुक्कुटेश्वर शिवलिंगशिव गण कुक्कुटस्कंद पुराण
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पिंगलेश्वर शिवलिंग को स्थानीय लोग किस नाम से जानते हैं और यह कहाँ स्थित है?

यह वाराणसी के प्राचीन पिशाचमोचन क्षेत्र (C-21/40) में स्थित है। स्थानीय जनमानस और लोक-परंपरा में इसे 'नकुलेश्वर महादेव' के नाम से जाना जाता है।

नकुलेश्वर महादेवपिशाचमोचनभौगोलिक स्थिति
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काशी में पिंगलेश्वर शिवलिंग किसने स्थापित किया था?

इसकी स्थापना साक्षात् शिव के अत्यंत तेजस्वी अनुचर 'पिंगल गण' ने की थी। इसका ऐतिहासिक प्रमाण स्कंद पुराण के काशी खंड में मिलता है।

पिंगलेश्वर शिवलिंगशिव गण पिंगलस्कंद पुराण
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काशी में नंदीशेनेश्वर शिवलिंग किसने स्थापित किया था?

इस शिवलिंग की स्थापना शिव के पराक्रमी गण 'नंदीषेण' ने की थी, जिसका प्रामाणिक उल्लेख स्कंद पुराण के काशी खंड (अध्याय 53-54) में प्राप्त होता है।

नंदीशेनेश्वर शिवलिंगशिवगण नंदीषेणस्कंद पुराण
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काशी के नंदीवन में सोमानंदीश्वर शिवलिंग की स्थापना किसने की और इसका प्रामाणिक उल्लेख किस पुराण में है?

इसकी स्थापना भगवान शिव के उग्र गण 'सोमनंदी' ने की थी। इसका प्रामाणिक उल्लेख स्कंद पुराण के काशी खंड (अध्याय 53) में प्राप्त होता है, जब शिव ने गणों को राजा दिवोदास की परीक्षा लेने काशी भेजा था।

सोमानंदीश्वर शिवलिंगशिव गण सोमनंदीस्कंद पुराण
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काशी में महोदरेश्वर शिवलिंग की स्थापना किसने की और इसका प्रामाणिक उल्लेख किस पुराण में है?

इसकी स्थापना भगवान शिव के परम गण 'महोदर' ने की थी। इसका प्रामाणिक उल्लेख स्कंद पुराण के काशी खण्ड (अध्याय ५३-५४) में प्राप्त होता है।

महोदरेश्वर शिवलिंगशिव गण महोदरस्कंद पुराण
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काशी में महाकालेश्वर शिवलिंग कहाँ स्थित है और इसकी स्थापना किसने की?

यह काशी के दारा नगर में महामृत्युंजय महादेव मंदिर प्रांगण में स्थित है। इसकी स्थापना शिव के परम गण 'महाकाल' ने की थी, जिसका वर्णन स्कंद पुराण के काशी खंड में है।

महाकालेश्वर शिवलिंगकाशीदारा नगर
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'शंकुकर्ण' नाम का अर्थ और व्युत्पत्ति क्या है?

'शंकु' (तीक्ष्ण/नुकीला) + 'कर्ण' (कान) = ब्रह्मांडीय नाद की सूक्ष्म आवृत्तियां ग्रहण करने में सक्षम सत्ता। यह शिवलिंग नाद-ब्रह्म का प्रतीक है — यहां मंत्र ब्रह्मांडीय ऊर्जा से अनुनाद स्थापित कर तत्काल फलित होते हैं।

शंकुकर्णनाम अर्थव्युत्पत्ति
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शंकुकर्णेश्वर महादेव पर अभिषेक के बाद ताली क्यों बजाते हैं?

अभिषेक के बाद ताली का नाद ध्यानमग्न शिव का ध्यान आकृष्ट करता है। शंकुकर्ण नाम ही ब्रह्मांडीय नाद की सूक्ष्म आवृत्तियां ग्रहण करने से जुड़ा है — इसलिए यहां ताली का नाद विशेष प्रभावी और मंत्रों को बहुगुणित करने वाला।

शंकुकर्णेश्वरतालीअभिषेक
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शंकुकर्णेश्वर महादेव की आराधना से क्या-क्या फल प्राप्त होते हैं?

फल — (1) असाध्य रोगमुक्ति और अकाल मृत्यु से रक्षा, (2) अष्टमेश-मारकेश ग्रह दशा शांति, (3) पितृ दोष-शाप निवारण, (4) संतान-रोजगार (40 सोमवार), (5) कैवल्य मोक्ष — शिव स्वयं तारक मंत्र देते हैं।

शंकुकर्णेश्वरफलश्रुतिअकाल मृत्यु
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शंकुकर्णेश्वर महादेव के सान्निध्य में घट दान का क्या विधान है?

महर्षि व्यास के अनुसार वैशाख पूर्णिमा पर जल-भरा घड़ा ब्राह्मण को दान = गया में 100 बार श्राद्ध का पुण्य। जल-भरा घट प्राणों की पूर्णता का प्रतीक — पितृ-तृप्ति और प्राण-रक्षा दोनों।

घट दानशंकुकर्णेश्वरवैशाख पूर्णिमा
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शंकुकर्णेश्वर महादेव के समीप कौन-कौन से मंदिर और देवस्थान हैं?

समीपस्थ — वायव्य में मांडव्येश्वर, उत्तर में सिद्धेश्वर (प्राचीन कुंड पर), निकट द्वारेश्वर-द्वारेश्वरी (सदाशिव-पार्वती), उत्तर में मुख-शिवलिंग व छागलेश्वर, पश्चिम में कपर्दीश्वर व अंगारेश्वर (तड़ाग सहित)।

शंकुकर्णेश्वरमांडव्येश्वरसिद्धेश्वर
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शंकुकर्णेश्वर महादेव के सान्निध्य में महामृत्युंजय अनुष्ठान का विशेष महत्व क्या है?

तीन शक्तियां — काशी क्षेत्र (करोड़ों गुना फल), शिवगण-ऊर्जान्वित लिंग, और प्राण-दिशा (वायव्य कोण)। गुप्त नाद-ऊर्जा मंत्रों को बहुगुणित करती है। अष्टमेश-मारकेश दशा के अरिष्ट योग खंडित होते हैं।

शंकुकर्णेश्वरमहामृत्युंजयअनुष्ठान
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काशी खंड अध्याय 69 में शंकुकर्णेश्वर का क्या स्थान है — 68 मोक्षदायी शिवलिंग

काशी खंड अध्याय 69 में 68 मोक्षदायी शिवलिंगों में शंकुकर्णेश्वर 'महातेज लिंग' के रूप में वर्णित हैं। कुरुक्षेत्र का स्थाणु, नैमिषारण्य का देवदेव लिंग भी इनमें हैं। श्लोक 173 — इनके नाम सुनने मात्र से हजारों जन्मों के पाप नष्ट।

काशी खंडअध्याय 6968 शिवलिंग
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शंकुकर्णेश्वर महादेव को 'गुप्त शिवलिंग' क्यों कहते हैं?

दो कारण — (1) ऐतिहासिक: ऐबक, लोदी, औरंगजेब के आक्रमणों से बचाने के लिए छिपाया गया, (2) दार्शनिक: शिव का वास साधक के सूक्ष्म शरीर (लिंग देह) में गुप्त रूप से है — गुप्त शिवलिंग इसी सत्य का प्रतीक।

गुप्त शिवलिंगशंकुकर्णेश्वरकाशी
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शंकुकर्णेश्वर महादेव वायव्य कोण में क्यों स्थित हैं — इसका आध्यात्मिक कारण क्या है?

वायव्य कोण के अधिपति वायु देव हैं — वायु प्राण का प्रतीक। प्राण-दिशा में स्थापित होने से यह शिवलिंग प्राणों की रक्षा, आयु-वृद्धि, असाध्य रोग नाश और अकाल मृत्यु रोकने में अमोघ है।

शंकुकर्णेश्वरवायव्य कोणवायु
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शंकुकर्णेश्वर महादेव कौन हैं और इनकी स्थापना किसने की?

शंकुकर्णेश्वर महादेव काशी का गुप्त शिवलिंग है, जिसे शिवगण 'शंकुकर्ण' ने स्थापित किया। काशी खंड अध्याय 69 में इसे काशी के 68 मोक्षदायी शिवलिंगों में गिना गया है।

शंकुकर्णेश्वर महादेवकाशीशिवगण
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शिवगण-स्थापित लिंग क्या होता है — इसकी विशेषता क्या है?

शिवगण शिव की ऊर्जा के विस्तारित स्वरूप हैं। उनके स्थापित लिंग में उस गण की विशिष्ट शक्ति समाहित होती है (जैसे घंटाकर्णेश्वर में नाद-शक्ति)। गण आज भी सूक्ष्म रूप में काशी में विद्यमान और लिंग की उपासनारत हैं।

शिवगणशिवलिंगशिव ऊर्जा
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काशी में कुल कितने शिवलिंग हैं और कौन-कौन ने स्थापित किए?

काशी में ५११+ शिवलिंग — १२ स्वयंभू, ४६ देवताओं द्वारा, ४७ ऋषियों द्वारा, ४० शिवगणों द्वारा, २९४ शिवभक्तों द्वारा स्थापित। काशी तांत्रिक दृष्टि से एक 'महा-यंत्र' है। वर्तमान में ~३२४ शिवलिंग अस्तित्व में।

काशीशिवलिंग511
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घंटाकर्णेश्वर मंदिर में क्या-क्या वर्जित है?

प्रमुख निषेध — (१) विष्णु या किसी देवता की निंदा सख्त मना, (२) अपशब्द-परनिंदा वर्जित, (३) अधिक बोलना मना — मौन और श्रवण प्रमुख, (४) बिना स्नान/मार्जन दर्शन वर्जित।

घंटाकर्णेश्वरनिषेधमंदिर नियम
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घंटाकर्णेश्वर महादेव के दर्शन से मानसिक रोग दूर होते हैं — क्या यह सच है?

प्रत्यक्ष श्लोक-प्रमाण नहीं है। पर घंटाकर्ण स्वयं पिशाच से शिवगण बने — इसलिए आगमिक मान्यता है कि इनकी आराधना से पिशाच-वृत्ति (मानसिक विकार) दूर होती है। नाद-योग और ध्वनि-चिकित्सा का वैज्ञानिक आधार भी इसे समर्थन देता है।

घंटाकर्णेश्वरमानसिक रोगपिशाच बाधा
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काशी में शिवगणों द्वारा स्थापित शिवलिंगों की सूची

काशी खंड के अनुसार — दंडपाणि ने दंडीश्वर, घंटाकर्ण ने घंटाकर्णेश्वर, वीरभद्र ने वीरभद्रेश्वर, कुण्डोदर ने कुण्डोदरेश्वर, महाकाल ने महाकालेश्वर, क्षेमक ने क्षेमेश्वर, पंचशीर्ष ने पंचशिखेश्वर की स्थापना की।

शिवगणकाशीशिवलिंग
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घंटाकर्णेश्वर महादेव मंदिर कहाँ है — काशी में सटीक स्थान

वाराणसी के कर्णघंटा मोहल्ले (K 60/66) में — चौक और मैदागिन के बीच। समीप ही घंटाकर्ण हृद (कर्णघंटा तालाब — K 60/67) और व्यासेश्वर महादेव का मंदिर भी है।

घंटाकर्णेश्वर महादेवकाशीवाराणसी
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काशी के शिवलिंग — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर काशी के शिवलिंग श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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काशी के शिवलिंग को गहराई से समझने का तरीका

काशी के शिवलिंग प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

25 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

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पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

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