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श्राद्ध मुहूर्त प्रश्नोत्तर — 7 प्रश्न

श्राद्ध मुहूर्त से जुड़े 7 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 7 प्रश्न

अपराह्न काल का समय क्या है?

अपराह्न काल अपराह्न 01:34 से अपराह्न 04:04 तक का विशेष समय है, जो लगभग 2 घंटे 30 मिनट का होता है। यदि पूर्व मुहूर्तों में कार्य पूर्ण न हो, तो इस काल तक ब्राह्मण भोजन और विसर्जन संपन्न कर लेना चाहिए। यह तीन मुहूर्तों में सबसे लंबा और अंतिम है।

अपराह्न कालश्राद्ध समयब्राह्मण भोजन
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रौहिण मुहूर्त किसे कहते हैं?

रौहिण मुहूर्त अपराह्न 12:44 से अपराह्न 01:34 तक का विशेष समय है, जो लगभग 50 मिनट का होता है। यह कुतुप मुहूर्त के ठीक बाद का समय है, जो तर्पण और पिण्डदान की प्रक्रिया के लिए उत्तम है। यह श्राद्ध के तीन मुहूर्तों में दूसरा मुहूर्त है।

रौहिण मुहूर्ततर्पण समयपिण्डदान
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कुतुप मुहूर्त का समय क्या है?

कुतुप मुहूर्त का समय पूर्वाह्न 11:53 से अपराह्न 12:44 तक है, जो लगभग 51 मिनट का होता है। यह सूर्य के पूर्ण प्रभाव का समय है, और पितर इस मुहूर्त में अत्यंत प्रसन्नता से उपस्थित होते हैं। यह श्राद्ध आरंभ का सर्वोत्तम समय है।

कुतुप मुहूर्त समय11:5312:44
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कुतुप मुहूर्त क्या है?

कुतुप मुहूर्त पूर्वाह्न 11:53 से अपराह्न 12:44 तक का विशेष श्राद्ध समय है। यह सूर्य के पूर्ण प्रभाव का समय है, और इस मुहूर्त में पितर अत्यंत प्रसन्नता से उपस्थित होते हैं। श्राद्ध के तीन मुहूर्तों में यह सबसे पहला और सबसे पवित्र मुहूर्त है।

कुतुप मुहूर्तश्राद्ध समयसूर्य प्रभाव
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श्राद्ध करने का सही समय क्या है?

श्राद्ध का सही समय मध्याह्न दोपहर के पश्चात् है। तीन शास्त्रीय मुहूर्त हैं, कुतुप मुहूर्त 11:53 से 12:44 तक, रौहिण मुहूर्त 12:44 से 01:34 तक, और अपराह्न काल 01:34 से 04:04 तक। प्रातःकाल, सूर्यास्त के बाद और रात्रि वर्जित हैं। वायु पुराण के अनुसार पितरों का समय मध्याह्न के बाद होता है।

श्राद्ध सही समयमध्याह्नकुतुप मुहूर्त
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क्या रात में श्राद्ध हो सकता है?

नहीं, रात्रि में श्राद्ध नहीं हो सकता। शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध कर्म कभी भी प्रातःकाल, सूर्यास्त के पश्चात् या रात्रि में नहीं किया जाना चाहिए। वायु पुराण के अनुसार पितरों का समय मध्याह्न के पश्चात् का होता है। सही समय कुतुप, रौहिण और अपराह्न काल है।

रात्रि श्राद्धवर्जितश्राद्ध समय
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क्या प्रातःकाल श्राद्ध कर सकते हैं?

नहीं, प्रातःकाल श्राद्ध वर्जित है। शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध कर्म प्रातःकाल, सूर्यास्त के पश्चात् या रात्रि में नहीं किया जाना चाहिए। वायु पुराण के अनुसार पितरों का समय मध्याह्न के पश्चात् का होता है। सही समय कुतुप, रौहिण और अपराह्न काल है।

प्रातःकालश्राद्ध समयवर्जित
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श्राद्ध मुहूर्त — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर श्राद्ध मुहूर्त श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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श्राद्ध मुहूर्त को गहराई से समझने का तरीका

श्राद्ध मुहूर्त प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

7 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।