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तीर्थ एवं धार्मिक स्थल प्रश्नोत्तर — 12 प्रश्न

तीर्थ एवं धार्मिक स्थल से जुड़े 12 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 12 प्रश्न

कोणार्क सूर्य मंदिर का रहस्य

कोणार्क मंदिर 13वीं सदी में राजा नरसिंहदेव प्रथम ने बनवाया। यह सूर्य के रथ के रूप में निर्मित है जिसमें 24 पहिए और 7 घोड़े हैं। सूर्योदय की किरण सीधे गर्भगृह में पड़ती थी। 1984 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर घोषित किया।

कोणार्क मंदिरसूर्य मंदिरउड़ीसा
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मदुरई मीनाक्षी मंदिर की कहानी

पांड्य राजा की यज्ञ-पुत्री मीनाक्षी (देवी पार्वती का अवतार) ने देवों को पराजित करते हुए कैलाश में शिव को पहचाना और मदुरई में उनसे विवाह किया। इसी दिव्य विवाह के स्थान पर मीनाक्षी-सुंदरेश्वर मंदिर स्थित है।

मीनाक्षी मंदिरमदुरईतमिलनाडु
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उज्जैन महाकालेश्वर के दर्शन का समय

महाकालेश्वर में भस्म आरती सुबह 4-6 बजे, दद्योदक आरती 7-7:45 बजे, भोग आरती 10-10:45 बजे, संध्या आरती 7-7:45 बजे और शयन आरती रात 10:30-11 बजे होती है। भस्म आरती के लिए ऑनलाइन बुकिंग आवश्यक है।

महाकालेश्वरउज्जैनभस्म आरती
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वृंदावन की बाँके बिहारी मंदिर की विशेषता

बाँके बिहारी मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता पर्दा दर्शन है — पुजारी बार-बार परदा खोलते-बंद करते हैं। यहाँ मंगला आरती नहीं होती। ठाकुरजी स्वामी हरिदास की साधना से निधिवन में प्रकट हुए थे। यह 1864 में बना।

बाँके बिहारीवृंदावनकृष्ण मंदिर
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मथुरा-वृंदावन में कितने मंदिर हैं?

वृंदावन में अनुमानत: 5,000 से अधिक मंदिर हैं। इनमें बाँके बिहारी, राधावल्लभ, गोविंद देव, प्रेम मंदिर, ISKCON मंदिर प्रमुख हैं। मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि और द्वारकाधीश मंदिर विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं।

मथुरावृंदावनमंदिर
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काशी की पाँच कोसी परिक्रमा की विधि

काशी विश्वनाथ के दर्शन और ज्ञानवापी जल से संकल्प लेकर, मणिकर्णिका घाट के चक्र पुष्करिणी कुंड से 84 किलोमीटर की परिक्रमा आरंभ होती है। पाँच पड़ावों पर विश्राम करते हुए यह पंचकोसी यात्रा पूर्ण होती है।

काशी परिक्रमापंचकोसी यात्रावाराणसी
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51 शक्तिपीठ कहाँ-कहाँ हैं?

51 शक्तिपीठ पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में भारत, नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका और तिब्बत तक फैले हैं। कामाख्या, कालीघाट, ज्वाला देवी, हिंगलाज, नैना देवी, तारापीठ आदि प्रमुख पीठ हैं। हर पीठ में एक देवी और एक भैरव की पूजा होती है।

शक्तिपीठमाता सतीदेवी तीर्थ
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अष्टविनायक के आठ गणेश मंदिर कहाँ हैं?

अष्टविनायक महाराष्ट्र में पुणे और रायगढ़ के आसपास आठ स्वयंभू गणेश मंदिर हैं — मोरगाँव (मयूरेश्वर), सिद्धटेक (सिद्धिविनायक), पाली (बल्लालेश्वर), महाड़ (वरदविनायक), थेऊर (चिंतामणी), लेण्याद्री (गिरिजात्मज), ओझर (विघ्नेश्वर) और रांजणगाँव (महागणपति)।

अष्टविनायकगणेश मंदिरमहाराष्ट्र
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पंच केदार क्या हैं और कहाँ हैं?

पंच केदार उत्तराखंड में भगवान शिव के पाँच मंदिर हैं — केदारनाथ (कूबड़), मदमहेश्वर (नाभि), तुंगनाथ (भुजाएँ), रुद्रनाथ (मुख) और कल्पेश्वर (जटाएँ)। महाभारत के बाद पांडवों ने इन्हें उन स्थानों पर बनाया जहाँ बैल रूपी शिव के विभिन्न अंग प्रकट हुए थे।

पंच केदारशिव मंदिरउत्तराखंड
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चार धाम यात्रा का क्रम क्या होना चाहिए?

चार धाम यात्रा का सही क्रम है — पहले यमुनोत्री, फिर गंगोत्री, उसके बाद केदारनाथ और अंत में बद्रीनाथ। यह पश्चिम से पूर्व की दिशा में होती है और इसी क्रम में यात्रा करना शास्त्रोक्त एवं पूर्ण फलदायी माना जाता है।

चार धामयमुनोत्रीगंगोत्री
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अमरनाथ यात्रा पर बर्फ का शिवलिंग कैसे बनता है?

अमरनाथ गुफा की छत से पानी की बूंदें टपककर जमती हैं और ठोस हिम शिवलिंग बनाती हैं। इसका आकार चंद्रमा की कलाओं के साथ घटता-बढ़ता है — श्रावण पूर्णिमा पर यह अपने पूर्ण आकार में होता है।

अमरनाथबर्फ का शिवलिंगहिमानी शिवलिंग
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गया में पिंड दान क्यों करते हैं?

गयासुर नामक असुर की देह पर भगवान विष्णु ने यज्ञ किया था और वरदान दिया कि यहाँ पिंड दान करने से पितरों को सीधे मोक्ष मिलेगा। गरुड़ पुराण सहित अनेक पुराणों में गया को पितृ तीर्थ और मोक्ष स्थली कहा गया है।

गयापिंड दानपितृ तर्पण
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तीर्थ एवं धार्मिक स्थल — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर तीर्थ एवं धार्मिक स्थल श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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तीर्थ एवं धार्मिक स्थल को गहराई से समझने का तरीका

तीर्थ एवं धार्मिक स्थल प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

12 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।