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देवता ज्ञान प्रश्नोत्तर — 5 प्रश्न

देवता ज्ञान से जुड़े 5 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 5 प्रश्न

कल्कि अवतार कब आएगा और कैसे पहचानें?

कल्कि अवतार कलियुग के अंतिम चरण में आएंगे — अभी कलियुग के ~5,128 वर्ष बीते हैं, कुल 4,32,000 हैं। कल्कि पुराण: शम्भल ग्राम में जन्म, पिता विष्णुयश, सफेद अश्व पर, अधर्म नाश। यह अभी लाखों वर्ष दूर है।

कल्कि अवतारकलियुग अंतभविष्य अवतार
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त्रिदेव — ब्रह्मा, विष्णु, महेश में कौन सबसे बड़ा?

इसका कोई एकमात्र उत्तर नहीं — शिव पुराण में शिव, विष्णु पुराण में विष्णु सर्वोच्च। समन्वित सिद्धांत: त्रिदेव एक ही ब्रह्म के तीन रूप (सृष्टि-स्थिति-संहार), कोई बड़ा-छोटा नहीं। स्कंद पुराण: 'शिव ही विष्णु, विष्णु ही शिव।'

त्रिदेवब्रह्मा विष्णु महेशतुलना
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ब्रह्मा, विष्णु, महेश की पत्नियां और शक्तियां कौन?

ब्रह्मा + सरस्वती (ज्ञान/विद्या), विष्णु + लक्ष्मी (धन/समृद्धि), शिव + पार्वती (शक्ति/प्रेम)। पार्वती = दुर्गा, काली, अन्नपूर्णा। शक्ति के बिना देव अधूरे — अर्धनारीश्वर। देवी महात्म्य: शक्ति ही परम सत्ता।

त्रिदेवपत्नियांशक्ति
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विष्णु के दस अवतार कौन-कौन से हैं?

दशावतार: 1.मत्स्य 2.कूर्म 3.वराह 4.नरसिंह 5.वामन 6.परशुराम 7.राम 8.कृष्ण 9.बुद्ध (मत भिन्नता — कुछ में बलराम) 10.कल्कि (भविष्य में)। गीता 4.7: 'यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति...' — धर्म की हानि पर अवतार।

दशावतारविष्णु अवतारभागवत पुराण
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ब्रह्मा जी की पूजा क्यों नहीं होती?

शिव पुराण: ब्रह्मा ने शिवलिंग के बारे में असत्य बोला, शिव ने शाप दिया। पद्म पुराण: पत्नी सावित्री का शाप। दार्शनिक कारण: सृष्टि कार्य पूर्ण। पुष्कर (राजस्थान) में एकमात्र प्रमुख मंदिर। विभिन्न पुराणों में कथा भिन्न है।

ब्रह्मा पूजाशापपद्म पुराण
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देवता ज्ञान — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर देवता ज्ञान श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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देवता ज्ञान को गहराई से समझने का तरीका

देवता ज्ञान प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

5 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।