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दैनिक आचरण एवं संस्कार प्रश्नोत्तर — 5 प्रश्न

दैनिक आचरण एवं संस्कार से जुड़े 5 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 5 प्रश्न

तुलसी को जल चढ़ाने का समय

तुलसी को जल देने का सर्वोत्तम समय सुबह स्नान के बाद सूर्योदय के समय है। रविवार, एकादशी, ग्रहण काल और सूर्यास्त के बाद तुलसी को जल नहीं देना चाहिए।

तुलसी पूजातुलसी जलविष्णु प्रिया
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ताँबे के लोटे से जल चढ़ाने का महत्व

ताँबे को सूर्य की धातु माना गया है। शास्त्र में सूर्य अर्घ्य के लिए ताँबे का पात्र अनिवार्य है। आयुर्वेद में भी ताँबे के जल के अनेक स्वास्थ्य लाभ बताए गए हैं — पाचन सुधार, रोग प्रतिरोधक क्षमता और रक्त शुद्धि।

ताँबाजल अर्पणसूर्य अर्घ्य
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सूर्य को अर्घ्य देने का सही तरीका

स्नान के बाद ताँबे के लोटे में जल, रोली, अक्षत और लाल पुष्प डालकर, पूर्व दिशा में मुख करके हाथ ऊपर उठाकर जल की धारा गिराएँ। 'ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नमः' मंत्र जपें। जल पैर पर न पड़े।

सूर्य अर्घ्यसूर्य देवजल अर्पण
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प्रातः काल उठने के बाद पृथ्वी को नमन क्यों करते हैं?

पृथ्वी को माता माना गया है जो हमें अन्न, जल और आश्रय देती है। उस पर पैर रखने की विवशता के लिए क्षमा माँगना हमारी कृतज्ञता और विनम्रता का भाव है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी यह पैरों का तापमान सामान्य रखने में सहायक है।

भूमि वंदनापृथ्वी नमनप्रातःकाल
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सुबह उठकर पहले पाँव कहाँ रखना चाहिए?

उठने के पहले दाहिने हाथ की हथेली के दर्शन करें, फिर भूमि को स्पर्श करते हुए 'समुद्रवसने देवि... पादस्पर्शं क्षमस्वमे' मंत्र बोलें। जो स्वर चल रहा हो, उसी ओर का पैर पहले रखें।

प्रातःकालभूमि वंदनाधर्माचरण
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दैनिक आचरण एवं संस्कार — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर दैनिक आचरण एवं संस्कार श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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दैनिक आचरण एवं संस्कार को गहराई से समझने का तरीका

दैनिक आचरण एवं संस्कार प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

5 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।