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क्षमा प्रार्थना और विसर्जन प्रश्नोत्तर — 3 प्रश्न

क्षमा प्रार्थना और विसर्जन से जुड़े 3 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 3 प्रश्न

मिट्टी के शिवलिंग का विसर्जन कैसे करें?

पार्थिव (मिट्टी) शिवलिंग का विसर्जन: मंत्रों से विसर्जन करके पवित्र नदी, सरोवर या पीपल/वट वृक्ष के नीचे आदरपूर्वक विसर्जित करें। मंदिर के स्थापित शिवलिंग (स्फटिक, नर्मदेश्वर, पाषाण) का विसर्जन कभी नहीं करते।

पार्थिव शिवलिंग विसर्जनमिट्टीनदी सरोवर
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'न मम' का मतलब क्या है — शिवार्पणम् क्या होता है?

'न मम' = 'यह मेरा नहीं है।' शिवार्पणम् = अनुष्ठान का संपूर्ण पुण्य भगवान शिव के चरणों में समर्पित करना। 'ॐ अनेन... न मम' — यह पूजन कर्म शिव का है, मेरा कोई अधिकार नहीं। यह अहंकार का पूर्ण शमन है।

न ममशिवार्पणमअहंकार विसर्जन
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पूजा के अंत में क्षमा प्रार्थना क्यों करते हैं?

कोई भी कर्मकांड पूर्णतः त्रुटिहीन नहीं होता — उच्चारण दोष, द्रव्य कमी, मन भटकाव संभव है। इसलिए अंत में क्षमा प्रार्थना अनिवार्य है। मंत्र: 'करचरणकृतं वाक् कायजं... सर्वमेतत् क्षमस्व जय जय करुणाब्धे श्री महादेव शम्भो।'

क्षमा प्रार्थनात्रुटि उच्चारणकरचरण कृतम
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क्षमा प्रार्थना और विसर्जन — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर क्षमा प्रार्थना और विसर्जन श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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क्षमा प्रार्थना और विसर्जन को गहराई से समझने का तरीका

क्षमा प्रार्थना और विसर्जन प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

3 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।