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शिव महिमा प्रश्नोत्तर — 35 प्रश्न

शिव महिमा से जुड़े 35 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 35 प्रश्न

शिव जी के गले में जो सर्प है वह वासुकी है या शेषनाग?

शिव जी के गले में लिपटे सर्प का नाम वासुकी है, न कि शेषनाग। शेषनाग भगवान विष्णु के सर्प हैं। वासुकी नागों के राजा और शिव के परम भक्त हैं, जिन्हें समुद्र मंथन में भाग लेने के बाद शिव ने गले में स्थान दिया।

वासुकीशेषनागशिव नाग
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रुद्राक्ष की उत्पत्ति कैसे हुई, शिव पुराण के अनुसार?

शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव ने दीर्घ तपस्या के बाद जब नेत्र खोले तो उनके नेत्रों से गिरे अश्रु-बिंदुओं से रुद्राक्ष के वृक्ष उत्पन्न हुए। 'रुद्र' (शिव) के 'अक्ष' (नेत्र) से उत्पन्न होने के कारण यह 'रुद्राक्ष' कहलाया और शिव का साक्षात स्वरूप माना गया।

रुद्राक्ष उत्पत्तिशिव पुराणशिव अश्रु
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दक्ष ने शिव और सती को यज्ञ में क्यों नहीं बुलाया?

दक्ष ने शिव और सती को इसलिए नहीं बुलाया क्योंकि दक्ष को शिव से पुराना बैर था — सती ने उनकी इच्छा के विरुद्ध शिव का वरण किया था और एक पूर्व के यज्ञ में शिव के न उठने से दक्ष ने अपना अपमान माना था। यह उनकी प्रतिशोध की भावना थी।

दक्ष यज्ञशिव सती निमंत्रणदक्ष अपमान
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दक्ष प्रजापति कौन थे और शिव से उनका क्या विवाद था?

दक्ष प्रजापति ब्रह्मा के मानस पुत्र और सृष्टि के प्रमुख प्रजापति थे। शिव से उनका विवाद इसलिए था क्योंकि सती ने उनकी इच्छा के विरुद्ध शिव का वरण किया, और एक यज्ञ में शिव के खड़े न होने को दक्ष ने अपना अपमान मानकर शत्रुता मोल ली।

दक्ष प्रजापतिशिव दक्ष विवादसती
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शिव जी के गले में सर्प क्यों होता है?

शिव जी के गले में नागराज वासुकी इसलिए हैं क्योंकि वासुकी उनके परम भक्त थे और समुद्र मंथन में रस्सी बनकर घायल हुए। इस भक्ति से प्रसन्न होकर शिव जी ने उन्हें अपने गले में आभूषण की तरह सदा रहने का वरदान दिया।

शिव नागवासुकीनागराज
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शिव की जटाओं में गंगा को धारण करने की कथा क्या है?

गंगा अहंकार से शिव को बहाने की इच्छा से उतरी, परंतु शिव ने जटाएं खोलकर उन्हें उलझा लिया। कई वर्षों बाद भगीरथ की विनती पर एक धारा को धरती पर उतारा। उस धारा से सगर के पुत्रों को मोक्ष मिला और शिव गंगाधर कहलाए।

गंगाधरगंगा जटाभागीरथी
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शिव जी व्याघ्र चर्म यानी बाघ की खाल क्यों पहनते हैं?

शिव पुराण के अनुसार दारुकवन में ऋषियों ने क्रोध में बाघ उत्पन्न किया जो शिव को मारने आया, लेकिन शिव ने उसे क्षण भर में मार डाला और उसकी खाल अपने शरीर पर लपेट ली। यह अहंकार और वासना पर विजय का प्रतीक है।

व्याघ्र चर्मबाघ की खालदारुकवन
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शिव जी भस्म कहाँ से लाते हैं?

शिव जी मुख्यतः चिताभस्म — मृत शरीर के जलने के बाद बची राख — धारण करते हैं, क्योंकि वे महाकाल और श्मशान के स्वामी हैं। भक्तों के लिए यज्ञाग्नि से बनी या गोमय से बनी भस्म का उपयोग किया जाता है।

शिव भस्मचिताभस्ममहाकाल
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त्रिपुर संहार में शिव का दिव्य रथ कैसे बना था?

पृथ्वी=रथ, सूर्य-चंद्र=पहिए, मेरु=धनुष, वासुकी=डोर, विष्णु=बाण, अग्नि=बाण की नोक, ब्रह्मा=सारथी। विष्णु वृषभ रूप में रथ में जुड़े। इस असंभव रथ पर सवार होकर शिव ने एक ही बाण से तीनों पुरों को भस्म किया।

त्रिपुर संहारशिव दिव्य रथपृथ्वी रथ
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त्रिपुरासुर कौन थे और उनकी उत्पत्ति कैसे हुई?

त्रिपुरासुर तारकासुर के तीन पुत्र थे — तारकाक्ष, कमलाक्ष और विद्युन्माली। कार्तिकेय द्वारा तारकासुर के वध के बाद इन्होंने देवताओं से बदला लेने के लिए ब्रह्मा की कठोर तपस्या की और तीन आकाश-नगरों के स्वामी बनकर त्रिपुरासुर कहलाए।

त्रिपुरासुरतारकासुर पुत्रतारकाक्ष
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भगीरथ ने शिव जी से गंगा को क्यों माँगा था?

भगीरथ ने शिव से गंगा इसलिए माँगी क्योंकि उनके पूर्वज — राजा सगर के साठ हजार पुत्र — कपिल मुनि के क्रोध से भस्म हो गए थे और उनकी मुक्ति गंगाजल से ही संभव थी। गंगा का प्रचंड वेग संभालने के लिए शिव की जटाओं की आवश्यकता थी।

भगीरथगंगासगर पुत्र मोक्ष
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हलाहल विष पीने से शिव का गला नीला क्यों पड़ गया?

हलाहल की अत्यंत तीव्र विषाक्तता और उष्मा के प्रभाव से शिव जी का कंठ नीला पड़ गया। माता पार्वती ने गला दबाकर विष को नीचे उतरने से रोका था इसलिए वह कंठ में ही स्थिर रहा और नीला पड़ा। तभी से शिव 'नीलकंठ' कहलाए।

नीलकंठहलाहल प्रभावशिव गला नीला
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शिव जी का तीसरा नेत्र किस कारण खुलता है?

शिव का तीसरा नेत्र तब खुलता है जब अधर्म, अहंकार या सृष्टि पर भयंकर संकट आता है। कामदेव द्वारा तपस्या भंग करने पर, सती के आत्मदाह पर और त्रिपुरासुर वध के समय यह नेत्र खुला। यह नेत्र संहार, विवेक और ज्ञान का प्रतीक है।

शिव तीसरा नेत्रकामदेव दहनसंहार
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शिव पुराण में भस्म का क्या महत्व बताया गया है?

शिव पुराण में भस्म को शिव का साक्षात स्वरूप बताया गया है। इसे लगाने से पाप नष्ट होते हैं, जीवन की नश्वरता का बोध होता है और वैराग्य जागता है। ललाट पर तीन रेखाओं में लगाई जाने वाली त्रिपुंड्र भस्म आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक है।

भस्म महत्वशिव पुराणविभूति
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सती ने यज्ञकुंड में आत्मदाह क्यों किया?

सती ने यज्ञकुंड में आत्मदाह इसलिए किया क्योंकि उनके पिता दक्ष ने पति शिव का घोर अपमान किया और यज्ञ में उनके लिए भाग नहीं रखा। अपने पिता द्वारा पति की निंदा और अपने चारों ओर देवताओं की चुप्पी सती के लिए असह्य हो गई।

सती आत्मदाहसती दक्ष यज्ञशिव पत्नी
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तारकासुर के तीन पुत्रों ने ब्रह्माजी से क्या वरदान माँगा था?

तीनों पुत्रों ने माँगा — सोने, चाँदी और लोहे के तीन उड़ते नगर। अभिजित नक्षत्र में एक सीध में आने पर किसी एक व्यक्ति का असंभव रथ से एक बाण में तीनों नष्ट करने पर ही मृत्यु हो। ब्रह्माजी ने यह वरदान दिया और मय दानव ने तीनों नगर बनाए।

त्रिपुरासुर वरदानतीन नगरअभिजित नक्षत्र
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शिव जी की जटाओं में गंगा कैसे आई?

भगीरथ की तपस्या से गंगा धरती पर आने को तैयार हुई, लेकिन उनके प्रचंड वेग से पृथ्वी नष्ट हो जाती। भगीरथ ने शिव से विनती की। शिव ने जटाएं खोलकर गंगा को समेट लिया और उनका अहंकार चूर किया, फिर एक धारा भागीरथी के रूप में धरती पर उतारी।

गंगाधरगंगा जटाभगीरथ
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शिव जी के तीसरे नेत्र की उत्पत्ति कैसे हुई?

शिव जी का तीसरा नेत्र तब प्रकट हुआ जब माता पार्वती ने उनकी दोनों आँखें ढक दीं और सृष्टि में अंधकार छा गया — शिव ने संकट में तीसरा नेत्र प्रकट किया। एक अन्य कथा में कामदेव द्वारा तप भंग करने पर तीसरा नेत्र खुला और कामदेव भस्म हुए।

शिव तीसरा नेत्रत्रिनेत्रपार्वती
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शिव जी शरीर पर भस्म क्यों लगाते हैं?

शिव जी भस्म इसलिए लगाते हैं क्योंकि वे मृत्यु के स्वामी हैं और भस्म शरीर की नश्वरता का बोध कराती है। एक कथा के अनुसार सती के भस्म होने के बाद उन्होंने उसे अपने शरीर पर लगाया। भस्म पाप-नाशक, वैराग्य की प्रतीक और उनका श्रृंगार भी है।

शिव भस्मचिताभस्मभोलेनाथ
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दक्ष ने यज्ञ में शिव जी का अपमान कैसे किया?

दक्ष ने यज्ञ में शिव का भाग नहीं रखा और सती के सामने ही शिव को श्मशानवासी, अघोरी और देवताओं के अयोग्य कहकर कटु अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया। देवताओं ने भी दक्ष के भय से शिव का पक्ष नहीं लिया।

दक्ष शिव अपमानसतीयज्ञ
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शिव जी के माथे पर चंद्रमा कैसे आया, शिव पुराण में क्या लिखा है?

शिव पुराण के अनुसार दक्ष के श्राप से क्षयग्रस्त चंद्रमा ने शिव की कठोर तपस्या की। शिव ने प्रसन्न होकर चंद्रमा को मृत्यु से बचाया और अपने मस्तक पर धारण किया। इसी कारण शिव 'चंद्रशेखर' कहलाए और सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की स्थापना हुई।

शिव चंद्रशेखरचंद्रमा दक्ष श्रापशिव पुराण
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शिव के माथे पर अर्धचंद्र क्यों होता है?

शिव के माथे पर अर्धचंद्र इसलिए है क्योंकि उन्होंने दक्ष के श्राप से ग्रस्त चंद्रमा की रक्षा करके उन्हें अपने मस्तक पर स्थान दिया। समुद्र मंथन के हलाहल विष की गर्मी को शांत करने के लिए भी चंद्रमा को मस्तक पर धारण किया गया।

शिव चंद्रमाअर्धचंद्रचंद्रशेखर
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शिव जी रुद्राक्ष क्यों धारण करते हैं?

शिव जी रुद्राक्ष इसलिए धारण करते हैं क्योंकि रुद्राक्ष उनके अपने नेत्रों के अश्रु से उत्पन्न उनका ही स्वरूप है। शिव पुराण के अनुसार रुद्राक्ष महापापों का नाशक, भक्ति का प्रतीक और लोककल्याणकारी है।

रुद्राक्षशिवआत्मस्वरूप
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शिव के पाँच मुखों के नाम क्या हैं?

शिव के पाँच मुखों के नाम हैं — सद्योजात (पश्चिम), वामदेव (उत्तर), तत्पुरुष (पूर्व), अघोर (दक्षिण) और ईशान (ऊर्ध्व)। ये पाँच मुख क्रमशः पाँच दिशाओं और पाँच तत्वों के प्रतीक हैं।

शिव पंचमुखपंचाननसद्योजात
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सती बिना बुलाए दक्ष के यज्ञ में क्यों गईं?

सती बिना बुलाए इसलिए गईं क्योंकि पिता के घर के प्रति स्वाभाविक मोह था और उन्हें लगा कि पुत्री को निमंत्रण की आवश्यकता नहीं। शिव ने मना किया था, परंतु सती की पुत्री-भावना प्रबल रही और वे यज्ञ में पहुँच गईं।

सती दक्ष यज्ञसतीपिता का घर
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नीलकंठ नाम पड़ने के बाद देवताओं ने शिव की स्तुति में क्या कहा?

देवताओं ने शिव की स्तुति में कहा कि सम्पूर्ण सृष्टि की रक्षा के लिए स्वयं विष पीना परोपकार की सर्वोच्च मिसाल है। उन्होंने 'नीलकंठ', 'महाकाल', 'लोककल्याणी' कहकर पुष्प-वर्षा की और शिव की जय-जयकार की।

नीलकंठ स्तुतिदेवता स्तुतिशिव महिमा
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हलाहल विष को पीने के लिए शिव ने क्यों आगे बढ़े?

शिव ने हलाहल इसलिए पिया क्योंकि उनकी अनंत करुणा थी और वे सृष्टि के स्वामी हैं। कोई अन्य देव या दानव उस विष को ग्रहण करने में सक्षम नहीं था। शिव जी की योगशक्ति और दिव्य देह ही उसे धारण कर सकती थी।

हलाहलशिव विषपानलोककल्याण
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समुद्र मंथन में देवताओं ने शिव से विष पीने का अनुरोध क्यों किया?

देवताओं ने शिव से विष पीने का अनुरोध इसलिए किया क्योंकि केवल शिव की योगशक्ति, महाकाल-स्वभाव और अनासक्ति ही उस विष को धारण करने में सक्षम थी। कोई अन्य देव इसे ग्रहण करने में असमर्थ था।

समुद्र मंथनहलाहलदेवता अनुरोध
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ब्रह्माजी का सिर काटने के बाद शिव को ब्रह्महत्या का पाप क्यों लगा?

ब्रह्मा के सिर की हत्या महापाप (ब्रह्महत्या) है इसलिए भैरव रूप में शिव को यह दोष लगा। भैरव कपाल हाथ में लेकर तीर्थाटन करते रहे। काशी पहुँचने पर कपाल गिरा और पाप-मुक्ति हुई — वह स्थान 'कपाल मोचन' कहलाया।

ब्रह्महत्याकाल भैरवकपाल मोचन
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पार्वती ने शिव का गला क्यों दबाया जब वे विष पी रहे थे?

माता पार्वती ने शिव का गला इसलिए दबाया ताकि विष उदर में न जाए — क्योंकि शिव के भीतर सम्पूर्ण सृष्टि है और विष वहाँ पहुँचता तो सृष्टि नष्ट हो जाती। माता की शक्ति ने विष को कंठ में ही स्थिर रखा।

पार्वतीशिव विषपानगला दबाया
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शिव के कपाली रूप की कथा क्या है?

कपाली रूप में शिव (भैरव) ब्रह्मा का कपाल हाथ में लेकर तीनों लोकों में भिक्षाटन करते हैं — यह ब्रह्महत्या के प्रायश्चित का प्रतीक है। काशी में कपाल गिरने से मुक्ति मिली, वहीं कपाल मोचन तीर्थ बना और भैरव काशी के कोतवाल बने।

कपालीशिव रूपभैरव
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समुद्र मंथन में शिव की भूमिका क्या थी?

समुद्र मंथन में शिव जी की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण थी। जब हलाहल निकला तो शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए स्वयं वह विष पिया और नीलकंठ कहलाए। अमृत के लिए मंथन करने वाले देवताओं के बीच शिव ने विष का वरण किया — यही उनकी अतुलनीय भूमिका थी।

समुद्र मंथनशिव भूमिकाहलाहल
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समुद्र मंथन में हलाहल विष कैसे निकला?

समुद्र मंथन में देवताओं और असुरों ने मंदराचल पर्वत और वासुकी नाग से क्षीरसागर का मंथन किया। सबसे पहले कालकूट नामक हलाहल विष निकला जो इतना भयंकर था कि उसकी ज्वाला से सम्पूर्ण सृष्टि का नाश हो सकता था।

समुद्र मंथनहलाहल विषकालकूट
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शिव ने हलाहल विष को गले में क्यों रोका, नीचे क्यों नहीं उतरने दिया?

शिव के भीतर समस्त सृष्टि समाहित है — विष उदर में जाता तो सृष्टि नष्ट हो जाती। माता पार्वती ने गला दबाकर विष को कंठ में ही रोक दिया। इससे शिव जी का कंठ नीला पड़ गया और वे 'नीलकंठ' कहलाए।

हलाहलशिव गलानीलकंठ
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शिव ने ब्रह्मा का पाँचवाँ सिर क्यों काटा था?

ब्रह्माजी ने वेदों के शिव-श्रेष्ठता उत्तर को नकार कर पाँचवें मुख से शिव को अपना पुत्र कहते हुए अपमानजनक वचन कहे। इससे क्रोधित शिव की भृकुटि से काल भैरव प्रकट हुए और उन्होंने नाखून से ब्रह्मा का वह अहंकारी पाँचवाँ सिर काट दिया।

ब्रह्मा पाँचवाँ सिरकाल भैरवअहंकार दमन
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शिव महिमा — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर शिव महिमा श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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शिव महिमा को गहराई से समझने का तरीका

शिव महिमा प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

35 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।