ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

प्रायश्चित प्रश्नोत्तर — 3 प्रश्न

प्रायश्चित से जुड़े 3 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 3 प्रश्न

व्रत गलती से टूट जाए तो शास्त्रों में क्या प्रायश्चित है?

गलती से व्रत टूट जाने पर भगवान विष्णु से हाथ जोड़कर माफी मांगनी चाहिए और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए।

व्रत भंगप्रायश्चितक्षमा याचना
पूरा उत्तर पढ़ें →

गलती से एकादशी का व्रत टूट जाए तो क्या करें?

व्रत टूट जाने पर घबराएं नहीं। भगवान विष्णु के 'अच्युत' नाम का ध्यान करें और 11 माला विष्णु मंत्र का जाप कर दान दें। सबसे बड़ा प्रायश्चित है कि अगली 'निर्जला एकादशी' का व्रत पूरी निष्ठा से रखें।

व्रत भंगप्रायश्चितनिर्जला एकादशी
पूरा उत्तर पढ़ें →

अगर गलती से एकादशी का व्रत टूट जाए, तो शास्त्रों के अनुसार क्या प्रायश्चित करना चाहिए?

भूल से व्रत टूटने पर गंगाजल के साथ दो तुलसी के पत्ते खाएं। भगवान विष्णु के मंत्र की 11 माला जपें। गाय को चारा खिलाएं और ब्राह्मण को पीला कपड़ा और दाल दान दें।

व्रत भंगप्रायश्चिततुलसी सेवन
पूरा उत्तर पढ़ें →

प्रायश्चित — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर प्रायश्चित श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

विषय को सही क्रम से पढ़ें

प्रायश्चित को गहराई से समझने का तरीका

प्रायश्चित प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

3 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।