विस्तृत उत्तर
यदि अज्ञानवश या भूल से एकादशी का व्रत भंग हो जाए, तो शास्त्रों में प्रायश्चित के कड़े नियम हैं। सबसे पहले भगवान से क्षमा मांगें। इसके बाद गंगाजल के साथ दो तुलसी के पत्ते (जो पहले से तोड़े गए हों) ग्रहण करें। भगवान विष्णु के 'द्वादशाक्षर मंत्र' की कम से कम 11 माला जाप करें और अगले 15 दिन तक रोज़ 2-4 माला अतिरिक्त पढ़ें। ब्राह्मण को पीले वस्त्र और चने की दाल दान करें। बड़ी भूल होने पर अगली 'निर्जला एकादशी' का कड़ा व्रत रखने का संकल्प लें।

