विस्तृत उत्तर
नवरात्रि में घटस्थापना के बाद कलश गिर जाना अशुभ संकेत माना जाता है। ऐसी स्थिति में घबराएँ नहीं — प्रायश्चित विधि से सुधार सम्भव है।
क्या करें
1तुरन्त कलश उठाएँ
गिरे कलश को श्रद्धापूर्वक उठाएँ। जल फैल गया हो तो स्वच्छ करें।
2पुनः स्थापना
- ▸कलश को शुद्ध जल से धोएँ।
- ▸पुनः शुद्ध जल भरें, गंगाजल, तुलसी, दूर्वा, सुपारी, सिक्का डालें।
- ▸आम/अशोक पत्ते और नारियल पुनः रखें।
- ▸मंत्रोच्चार के साथ पुनः स्थापित करें।
3प्रायश्चित
- ▸'ॐ नमश्चण्डिकायै' 108 बार जप करें।
- ▸गायत्री मंत्र 108 बार।
- ▸देवी से क्षमा प्रार्थना: 'अपराधसहस्राणि...' या 'आवाहनं न जानामि...' श्लोक।
- ▸घी का दीपक जलाएँ।
4यदि कलश टूट जाए
- ▸नया कलश लाकर पूर्ण विधि से पुनः स्थापना।
- ▸टूटे कलश को नदी/पवित्र जल में विसर्जित।
5व्रत जारी रखें
कलश गिरने से व्रत भंग नहीं होता — प्रायश्चित कर व्रत जारी रखें।
मानसिक दृष्टि
अशुभ विचार न रखें — माँ दुर्गा कृपालु हैं, भूल का प्रायश्चित करने पर क्षमा करती हैं। श्रद्धा और भक्ति प्रधान — विधि की त्रुटि गौण।
ध्यान दें: कलश स्थिर स्थान पर रखें, बच्चों/पालतू जानवरों की पहुँच से दूर।





