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देवी उपासना📜 धर्मसिन्धु, नवरात्रि पूजा विधान, पुरोहित परम्परा2 मिनट पठन

नवरात्रि में घट स्थापना के बाद कलश गिर जाए तो क्या करें

संक्षिप्त उत्तर

कलश गिरे तो: (1) उठाएँ, शुद्ध करें। (2) पुनः जल + गंगाजल + सामग्री भरकर मंत्रपूर्वक स्थापित। (3) 'ॐ नमश्चण्डिकायै' 108 बार + गायत्री 108 + क्षमा प्रार्थना। (4) टूटे तो नया कलश। (5) व्रत जारी रखें — भंग नहीं। माँ कृपालु हैं, श्रद्धा प्रधान।

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विस्तृत उत्तर

नवरात्रि में घटस्थापना के बाद कलश गिर जाना अशुभ संकेत माना जाता है। ऐसी स्थिति में घबराएँ नहीं — प्रायश्चित विधि से सुधार सम्भव है।

क्या करें

1तुरन्त कलश उठाएँ

गिरे कलश को श्रद्धापूर्वक उठाएँ। जल फैल गया हो तो स्वच्छ करें।

2पुनः स्थापना

  • कलश को शुद्ध जल से धोएँ।
  • पुनः शुद्ध जल भरें, गंगाजल, तुलसी, दूर्वा, सुपारी, सिक्का डालें।
  • आम/अशोक पत्ते और नारियल पुनः रखें।
  • मंत्रोच्चार के साथ पुनः स्थापित करें।

3प्रायश्चित

  • 'ॐ नमश्चण्डिकायै' 108 बार जप करें।
  • गायत्री मंत्र 108 बार।
  • देवी से क्षमा प्रार्थना: 'अपराधसहस्राणि...' या 'आवाहनं न जानामि...' श्लोक।
  • घी का दीपक जलाएँ।

4यदि कलश टूट जाए

  • नया कलश लाकर पूर्ण विधि से पुनः स्थापना।
  • टूटे कलश को नदी/पवित्र जल में विसर्जित।

5व्रत जारी रखें

कलश गिरने से व्रत भंग नहीं होता — प्रायश्चित कर व्रत जारी रखें।

मानसिक दृष्टि

अशुभ विचार न रखें — माँ दुर्गा कृपालु हैं, भूल का प्रायश्चित करने पर क्षमा करती हैं। श्रद्धा और भक्ति प्रधान — विधि की त्रुटि गौण।

ध्यान दें: कलश स्थिर स्थान पर रखें, बच्चों/पालतू जानवरों की पहुँच से दूर।

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शास्त्रीय स्रोत
धर्मसिन्धु, नवरात्रि पूजा विधान, पुरोहित परम्परा
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