विस्तृत उत्तर
नवरात्रि के नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ रूपों की अलग-अलग आरती गाई जाती है। ये आरतियाँ प्रमुखतः लोक परम्परा और भक्ति साहित्य से हैं (वैदिक नहीं)।
नवदुर्गा आरतियाँ (संक्षिप्त)
- 1शैलपुत्री: 'जय शैलपुत्री माता, जय शैलपुत्री माता। नन्दी सवारी दुर्गा, सुख सम्पत्ति दाता॥'
- 2ब्रह्मचारिणी: 'जय ब्रह्मचारिणी माता...' तप और संयम की देवी।
- 3चन्द्रघण्टा: 'जय चन्द्रघण्टा माता...' चन्द्र स्वरूपा, शौर्यदायिनी।
- 4कूष्माण्डा: 'जय कूष्माण्डा माता...' सृष्टि रचयिता, अष्टभुजा।
- 5स्कन्दमाता: 'जय स्कन्दमाता माता...' कार्तिकेय की माता।
- 6कात्यायनी: 'जय कात्यायनी माता...' महिषासुर मर्दिनी।
- 7कालरात्रि: 'जय कालरात्रि माता...' अंधकार नाशिनी।
- 8महागौरी: 'जय महागौरी माता...' श्वेत वर्णा, शान्तिदायिनी।
- 9सिद्धिदात्री: 'जय सिद्धिदात्री माता...' अष्ट सिद्धि प्रदायिनी।
सर्वव्यापी आरती
नवों दिन 'जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी...' या 'ॐ जय दुर्गे माता...' आरती भी गाई जाती है — यह सभी रूपों के लिए मान्य है।
ध्यान दें: प्रत्येक दिन की विशिष्ट आरतियाँ क्षेत्र, परम्परा और सम्प्रदाय अनुसार भिन्न हो सकती हैं। किसी एक मानकीकृत पाठ का शास्त्रीय आधार नहीं है — ये भक्ति रचनाएँ हैं।





